रविवार, 13 मई 2012

मेघवाल समाज के लालचंद बुनकर ने 12वीं कॉमर्स की मेरिट में 9वां तथा जयपुर जिला मेरिट में 5वां स्थान प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है

 लालचंद ने रोशन किया नाम

12वीं कॉमर्स की राज्यस्तरीय मेरिट में हासिल किया 9 वां स्थान, जिले में पांचवीं पायदान पर

भास्कर न्यज. कालवाड़
ग्राम भंभौरी की मधुबाला मंदिर शिक्षा समिति सीनियर सैकंडरी स्कूल के छात्र लालचंद बुनकर ने 12वीं कॉमर्स की मेरिट में 9वां तथा जयपुर जिला मेरिट में 5वां स्थान प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। ग्राम महेशवास निवासी लालचंद बुनकर ने इस परीक्षा में 91.80 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। संस्था निदेशक संतोष शर्मा ने बताया कि छात्र लालचंद पुत्र केसरमल बुनकर कच्ची झोपड़ी में रहता है और उसने नियमित आठ घंटे की पढ़ाई कर सफलता हासिल की है।

लालचंद ने बताया कि वह सीएस या आईएएस बनना चाहता है। उसने सफलता का श्रेय अपने पिता केसरचंद, माता मंगली देवी, संस्था निदेशक संतोष शर्मा और ईश्वर को दिया है। मेरिट में 9वां स्थान प्राप्त करने वाला लालचंद इससे पूर्व किसी अन्य विद्यालय में अध्ययन कर रहा था, लेकिन गरीबी के कारण वह फीस नहीं जमा करा पा रहा था। इसलिए उसे वह स्कूल छोडऩी पड़ी।

बाद में मधु बाल मंदिर शिक्षा समिति सी.सै.स्कूल के निदेशक संतोष शर्मा लालचंद का सहारा बने और प्रतिभा को देखते हुए उसे अपनी स्कूल में दाखिला दिया। इसके बाद लालचंद ने भी पूरी लगन और मेहनत के साथ पढ़ाई की। इसका नतीजा न केवल गांव बल्कि स्कूल को भी गौरवांवित करने वाला रहा।

शुक्रवार, 11 मई 2012

दलित पुरस्कार (dalit Award)

1. बाबा रामदेव पुरस्कार,  2. महर्षि नवल पुरस्कार, 3. जोगा राम दलित चेतना पुरस्कार, 4.गरीब साहब दलितोत्थान पुरस्कार, 5. दशरथ मेघवाल वीरता पुरस्कार, 6. शहीद राजाराम मेघवाल पुरस्कार, 7. स्वामी ज्ञान स्वरूप शिक्षा जागृति पुरस्कार, 8. नरपत राम बरवड़ मेमोरियल पुरस्कार,9. भीखा भाई भील स्मृति पुरस्कार, 10. वीरांगना काली बाई पुरस्कार, 11.रविदास सेवा सम्मान, 12.वाल्मीकि सेवा

दशरथ मेघवाल करणी जी महाराज का परम भक्त एवं गायों का चरवाहा था (dashrath meghwal)

मां करणी जी देशनोक मंदिर के मुख्य द्वार के निकट ही दशरथ मेघवाल का स्थान है जहां नियमित रूप से पूजा होती है। ज्ञातव्य हो कि दशरथ मेघवाल करणी जी महाराज का परम भक्त एवं गायों का चरवाहा था जो गायों की रक्षार्थ वीरगति को प्राप्त हो गया था। उसके बलिदान के सम्मानार्थ श्री करणी जी महाराज ने अपने जीवनकाल में ही उसकी पूजा प्रारम्भ करवादी थी। छुआछूत के उस युग में ऐसा उदाहरण अन्यत्र मिलना अत्यन्त दुर्लभ ह

गुरुवार, 10 मई 2012

Meghwal community


Our aim: -
 Meghwal community rich in social, economic, religious, psychological and cultural.
 Death feast, alcohol abuse, child marriage, polygamy, dowry, foreign exploitation, oppression and social and social workers to prevent crimes and to support vulnerable people try to get rid of such actions hinder progress.




At your service.
 Meghwal community you any information, messages, marital, social, family or individual - this blog can get published free.

 It is not in your city in any corner of the world has ever seen.



address: --- nav mandusiya surera
 meghwal basti ward no.4 surera
 block: - dantaramgarh (sikar) rajasthan
 contect us:-   +91 9929394143
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सुरेरा नवनिर्माण सेना (नवरतन मंडुसिया सुरेरा)

सोमवार, 30 अप्रैल 2012

संत आचार्य गरीब साहेब (पर्माण) garib saheb

१.गरीब दास जी की वानी मे(गरीब दास जी को कबीर साहेब ने सत लोक भी दिखाया था और यम राज को भी डान्ट लगाई थी. )

"गरीब, काल डरे कर्तार से, जय जय जय जग्दीश!!
जोरा जोरी झाड्ती, पग रज डारे शीश!!"
यह काल, कबीर भग्वान से डर्ता है और यह मोत कबीर के जूते झाड्ती है(नौकर के समान है).
फिर उस धूल को अप्ने सर पर लगाती है कि जिस्को मार ने का आदेश दोगे उस के पास जाओन्गी, नही तो मै नही जाउन्गी.

२.गरीब, "काल जो पिसे पिस्ना, जोरा है पनेहार!
ये दो असल मज़्दूर है, मेरे साहेब के दर बार"
यह काल, कबीर भग्वान का नौकर है और मोअत विशेश नौकरानी है.

३.कबीर साहेब ने रानी इन्द्र्मती की उम्र ८० साल कर दी थी, जब की रानी इन्द्र्मती को काल साप रूप मे मार ने के लिये ४० साल के उम्र के वक्त आया था, तब कबीर साहेब ने रानी इन्द्र्मती को बचाया था.

वेदो मे भेद:-->
१.कबीर देव अप्ने भक्त के सान्स भी बढा देता है.(वो निर्धन को माया/बान्झ को पुत्र/शरीर को ठीक/अन्धे को आन्ख दे सक ता है)

२.कबीर"सत गुरु जो चाहे सो कर हे, १४ कोटी दूत जम डर हे,
उत-भूत जम त्रास निवारे, चित्र्गुप्त के कगज फारे"
यहा चित्र्गुप्त के कागज फाड्ने का मत लब उम्र बधाना ही है.

३.कबीर"मासा घटे ना तिल बढे, विध्नी लिखे जो लेख,
साच सत्गुरु मत के उपर लिख्दे लेख"
ईस मे फिर से उम्र बधाने की बात की गयी है.

४.दादु जी-->"आदम की आयु घटे, तब यम घेरे आये, सुमिरन किया कबीर का दादु लिया बचाय"
दादु जी-->"सुन-२ साखी कबीर की काल नवाये माथ, धन्ये-२ हो ३ लोक मे, दादु जोडे हाथ"

पर्माण:-->कबीर साहेब और धर्म राज के बीच वार्ता, जब कबीर साहेब ने गरीब दास जी को सत्लोक दिखाया और बाद मे धर्म राज का लोक भी)
१.गरीब दास जी कह्ते है की कबीर साहेब अप्नी समर्थता दिखाने के लिये मुझे धर्म रज क लोक मे ले गये. धर्म राज के दर बार मे जब कबीर साहेब गये तो धर्म राज अप्नी कुर्सी त्याग कर खडा
हो गया और कह ने लगा की "व्राजो भग्वान!"
फिर कबीर साहेब ने धर्म राज को डान्ट लगात हुवे कहा कि
"धर्म राज दर्बार मे, दई कबीर तलाक!
मेरे भूले चूके हन्स को, तु पक्डो मत कज़ाक!!
(जीस ने मेरे भेजे सन्त से नाम ले रखा हो उस को तु मत पकड्ना! उस का लेखा-झोखा भी मत लेना!
अगर मेरे हन्स को तूने पकड लिया तो मेरे से बुरा तेरे लिये कोइ नही होगा!)

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तब धर्म राज हाथ जोड कर बोला"बोले पुरुष कबीर से, धर्म राज कर जोड!
तुम्हारे हन्स को चम्पु नही, दोहि लाख करोड"
हे मालिक कबीर साहेब तेरे हन्स को मै नही पक्डुन्गा, दोनो हाथ जोड्ता हू, लेकिन एक वीन्ति है, आप के सन्त से नाम लैने से पह ले के पाप कर्म मेरी बाही मे चढे हुवे है और मेरे को ईस्लीये उन्को दन्द देना पडेगा! ये मेरी मज्बूरी है
"कर्मो सैति रत थे, अब मूख से कहे कबीर!
उन्को निश्चये पक्डुन्गा, जड दू तोक ज़न्ज़ीर"



गरीब"कर्म भर्म ब्रह्मन्द के पल मे कर दून नेश!
जिन हम री दोही देइ, करो हमारे पेश!!"
कबीर साहेब ने कह की मै कर्म-भर्म सब खतम कर दुन्गा!
जीस्ने हमारे नाम की दुहाइ दी हो उस को हमारे साम ने लाना. तु कुछ मत कह ना उस को!

(गरीब साहेब) राजस्थान की माटी के प्रज्ञा पुintroduction to garib saheb ji maharajरुष

सद्गुरु श्री गरीब साहेब का जन्म ९ मार्च, १९७१३ को भोजपुरा ( जयपुर) में हुआ. इनकी प्रतिभा बचपन में ही मुखर होने लगी थी. अदम्य साहस और तीव्र बुद्धि के कारण सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध एक चेतना जागृत में अपना जीवन अर्पित किया. साहेब का दर्शन कबीर से प्रभावित रहा. इन्होने "बीजक" का गहन अध्ययन कर उसे आत्मसात किया. इन्होने कई कृतियाँ लिखी, इनकी मुख्य कृति "ज़िन्दबोध प्रकाश" है, जो जन मानस में ज्ञान और प्रेरणा का स्त्रोत है.

" है ताको जाने नहीं, तासो विमुख होय !
नाहीं को जाना चाहे,नास्तिक कहिये होय !!".........गरीब साहेब

सोमवार, 23 अप्रैल 2012

राजस्थान के जोधपुर और जैसलमेर क्षेत्र के मेघवाल समुदाय स्थानीय ऊन को संकीर्ण पट्टी में बिन कर उन से विभिन् प्रकार के उत्पाद जैसे बर्डी ओड़नी, पट्टू कशीदा – कमखाब ओड़नी, दुपट्टा , कुशन कवर , टेबल रुन्नेर , कुर्ता - अंगरखा, सलवार - ढीली पतलून और बैग, आदि सील के बनाये जाते हैं. के आधार कपड़ा या तो सादा है या टवील और रूपांकनों एक क्षेत्र में अतिरिक्त बाने के प्रयोग के अकेले आकृति तक ही सीमित के माध्यम से बनाई गई हैं. अतिरिक्त कपड़ा आधार कपड़ा के विपरीत रंग के आम तौर पर होता है और हर दो चुनता के बाद डाला जाता है, इस तरह पतले कढ़ाई कपड़े की एक धारणा का निर्माण किया.

Jodhpur and Jaisalmer area of ​​Rajasthan Meghwal community, local wool narrow strip of the different types of products such as those in the bin Odni Birdy, plaids needlework - Kmkhab Odni, scarf, cushion covers, Table Runner, shirt - tunic, salwar - loose trousers and bags, etc. are made of seal. The basis of either plain or twill fabric motifs in an area containing only limited to the use of extra weft are made through. Additional fabric base cloth is usually of the opposite color, and after every two picks are inserted, thus producing an impression of finely embroidered clothes....

http://themecrafts.in/ProductType/Hand_Crafted_Stoles-hi-IN-294.aspx

नवरत्न मन्डुसिया

खोरी गांव के मेघवाल समाज की शानदार पहल

  सीकर खोरी गांव में मेघवाल समाज की सामूहिक बैठक सीकर - (नवरत्न मंडूसिया) ग्राम खोरी डूंगर में आज मेघवाल परिषद सीकर के जिला अध्यक्ष रामचन्द्...