सोमवार, 30 अप्रैल 2012

संत आचार्य गरीब साहेब (पर्माण) garib saheb

१.गरीब दास जी की वानी मे(गरीब दास जी को कबीर साहेब ने सत लोक भी दिखाया था और यम राज को भी डान्ट लगाई थी. )

"गरीब, काल डरे कर्तार से, जय जय जय जग्दीश!!
जोरा जोरी झाड्ती, पग रज डारे शीश!!"
यह काल, कबीर भग्वान से डर्ता है और यह मोत कबीर के जूते झाड्ती है(नौकर के समान है).
फिर उस धूल को अप्ने सर पर लगाती है कि जिस्को मार ने का आदेश दोगे उस के पास जाओन्गी, नही तो मै नही जाउन्गी.

२.गरीब, "काल जो पिसे पिस्ना, जोरा है पनेहार!
ये दो असल मज़्दूर है, मेरे साहेब के दर बार"
यह काल, कबीर भग्वान का नौकर है और मोअत विशेश नौकरानी है.

३.कबीर साहेब ने रानी इन्द्र्मती की उम्र ८० साल कर दी थी, जब की रानी इन्द्र्मती को काल साप रूप मे मार ने के लिये ४० साल के उम्र के वक्त आया था, तब कबीर साहेब ने रानी इन्द्र्मती को बचाया था.

वेदो मे भेद:-->
१.कबीर देव अप्ने भक्त के सान्स भी बढा देता है.(वो निर्धन को माया/बान्झ को पुत्र/शरीर को ठीक/अन्धे को आन्ख दे सक ता है)

२.कबीर"सत गुरु जो चाहे सो कर हे, १४ कोटी दूत जम डर हे,
उत-भूत जम त्रास निवारे, चित्र्गुप्त के कगज फारे"
यहा चित्र्गुप्त के कागज फाड्ने का मत लब उम्र बधाना ही है.

३.कबीर"मासा घटे ना तिल बढे, विध्नी लिखे जो लेख,
साच सत्गुरु मत के उपर लिख्दे लेख"
ईस मे फिर से उम्र बधाने की बात की गयी है.

४.दादु जी-->"आदम की आयु घटे, तब यम घेरे आये, सुमिरन किया कबीर का दादु लिया बचाय"
दादु जी-->"सुन-२ साखी कबीर की काल नवाये माथ, धन्ये-२ हो ३ लोक मे, दादु जोडे हाथ"

पर्माण:-->कबीर साहेब और धर्म राज के बीच वार्ता, जब कबीर साहेब ने गरीब दास जी को सत्लोक दिखाया और बाद मे धर्म राज का लोक भी)
१.गरीब दास जी कह्ते है की कबीर साहेब अप्नी समर्थता दिखाने के लिये मुझे धर्म रज क लोक मे ले गये. धर्म राज के दर बार मे जब कबीर साहेब गये तो धर्म राज अप्नी कुर्सी त्याग कर खडा
हो गया और कह ने लगा की "व्राजो भग्वान!"
फिर कबीर साहेब ने धर्म राज को डान्ट लगात हुवे कहा कि
"धर्म राज दर्बार मे, दई कबीर तलाक!
मेरे भूले चूके हन्स को, तु पक्डो मत कज़ाक!!
(जीस ने मेरे भेजे सन्त से नाम ले रखा हो उस को तु मत पकड्ना! उस का लेखा-झोखा भी मत लेना!
अगर मेरे हन्स को तूने पकड लिया तो मेरे से बुरा तेरे लिये कोइ नही होगा!)

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तब धर्म राज हाथ जोड कर बोला"बोले पुरुष कबीर से, धर्म राज कर जोड!
तुम्हारे हन्स को चम्पु नही, दोहि लाख करोड"
हे मालिक कबीर साहेब तेरे हन्स को मै नही पक्डुन्गा, दोनो हाथ जोड्ता हू, लेकिन एक वीन्ति है, आप के सन्त से नाम लैने से पह ले के पाप कर्म मेरी बाही मे चढे हुवे है और मेरे को ईस्लीये उन्को दन्द देना पडेगा! ये मेरी मज्बूरी है
"कर्मो सैति रत थे, अब मूख से कहे कबीर!
उन्को निश्चये पक्डुन्गा, जड दू तोक ज़न्ज़ीर"



गरीब"कर्म भर्म ब्रह्मन्द के पल मे कर दून नेश!
जिन हम री दोही देइ, करो हमारे पेश!!"
कबीर साहेब ने कह की मै कर्म-भर्म सब खतम कर दुन्गा!
जीस्ने हमारे नाम की दुहाइ दी हो उस को हमारे साम ने लाना. तु कुछ मत कह ना उस को!

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