सोमवार, 23 दिसंबर 2013

मेघवाल समाज के गोत्र


मेघवंश जाती के प्रवर शाखा और प्रशाखा
प्राचीन क्षत्रियो में चन्द्र वंश और सूर्य वंश ये दो वंश मुख्य मने जाते हैं !फिर ऋषि वंश और अग्नि वंश ये दो वंश और मने गए हैं ,इन्ही चार वंशो से समस्त हिन्दू जाती का प्रदुभाव हुआ हैं !
चन्द्र वंश -ब्रह्माजी के दस मानसी पुत्रो में अत्रीऋषि के समुन्द्र और समुन्द्र के सोम ,इनसे चन्द्र वंश चालू हुआ !इशी वंश में महाराज ययाति हुए ,इनके पुत्र यदु हुए ,जिनके वंशज यदु वंशी हुए और इशी वंश में भगवन कृष्ण का जन्म हुआ !चन्द्र वंश ने विशेष कयती प्राप्त की !इस्सी चन्द्र वंश में आगे चलकर दस शाखाओ का निर्माण हुआ जो जो निम्न हैं !
1 यादव २ गोड३ काबा ४ चन्देल ५ बहती ६ कंवरा ७ तंवर ८ सोरठा ९ कटारिया १० सुरसेन


सुर्यवंश -ब्रह्माजी के पुत्र मरीचि ,मरीचि के कश्यप और कश्यप के विवस्वान (सूर्य)हुए ,इनसे सूर्य वंश चालू हुआ !

इसी वंश में राजा इक्ष्वाकु अधिक प्रसिद्ध हुए हैं ,इन्ही इक्ष्वाकु की ५१ वि पीढ़ी बाद राजा दशरथ हुए थे ,जिनके पुत्र रामचंद्र ,लक्ष्मण ,भरत,शत्रुघ्न हुए !इसी सूर्य वंश में भी दस शाखाये हुए !

१ गहलोत २ सिकरवाल ३ बडगुजर ४ कछवाह ५ बनाकर ६ गहरवार ७ राठोर ८ बडेल ८ बुन्देला १० निकुम्भ !

ऋषि वंश - विवशवान सूर्य के पुत्र नाम श्राद्धदेव मनु था !इनके पुत्र नभग हुए जिनके कुल में रजा अम्बरीश थे ,जिन्होंने अपने व्रत के प्रभाव से दुर्वासा मुनि का मानमर्दन किया था !अम्बरीश के प्रपोत्र रथीतर की स्त्री मदयन्ति ने अंगीरा ऋषि से नियोग करके कई संताने उत्पन्न की ,जो ऋषि वंश नाम से प्रसिद्ध हुई !ये क्षत्रियो की अपेक्षा श्रेष्ठ मणि गई है !इसी ऋषि वंश क्षत्रिय समाज में १२ वंश प्रचलित हुए !
१ सेंगर २ गोतम ३ विसेन ४ चमार गौड़ ५ ब्राहमण ६ भटगोड ७ राजगोंड ८ दीक्षित ९ दिन दीक्षित १० बिलकेत ११ बलखेरिया १२ कनपुरिया !
अग्नि वंश --त्रेता और द्वापर की संधि के समय जब परशुरामजी ने २१ बार युद्ध करके पृथ्वी को नि :क्षत्रिय कर दीया तब परशुरामजी मह्रिषी वसिष्ठ आदि ऋषियों ने अर्बुगिरी (आबू पर्वत) पर एक वृहद् यज्ञ किया !उस यज्ञ कुंड से चार पुरुष प्रकट हुए !
१ चौहान २ पडिहार (प्रतिहार) ३ सोलंकी (चालुक्य) ४ पंवार (परमार) !
यज्ञ की अग्नि से प्रकट होने के कारण ये अग्नि वंशी (हुतासणी)कहलाये !बोद्ध धर्म के अंत के आरम्भ में ही इसी वंश का निर्माण हुआ था !
दोहा - दस रवि ,दस चन्द्र से ,द्वादस ऋषि प्रमाण !

चार वंश हुतासनी (अग्निवंश),ये छतीस बखान !!

इन छतीस वंशो से ही समस्त हिन्दू समाज का प्रदुभाव होता हैं !
इन छतीस वंशो से पूर्व १६ वंश ऋषियों के माने जाते हैं !

१ मरीचि २ अत्रि ३ अगस्त ४ आदरा ५ वसिष्ठ ६ अंगीरा ७ भारद्वाज ८ पाराशर ९ मातंग १० धानेश्वर ११ मह्चंद १२ जोगचंद १३ जोगपाल १४ मेघपाल १५ गरवा १६ जयपाल !

इन सोलह वंशो सहित कुल ५२ वंश होते हैं !

दोहा -आठ बीस ऋषि गोत्र हैं ,चार अग्नि प्रमाण !

दस रवि ,दस चन्द्र से ,पुरे बावन जाण!!

फिर इनकी शाखा प्रशाखाओ द्वारा समस्त हिन्दू समाज का विस्तार होता गया और बढ़ते -बढ़ते आज हजारो जातियों में विभक्त हो गया !
मेघवाल जाती के लिए लिखे गये लेख में उपरोक्त वंश - उपवंश किसी न किसी रूप में अधिकतर पाए जाते हैं !
क्षत्रियो की १८ जातीय मुख्य मणि जाती हैं !
१ गहलोत २ कचवाहा ३ राठौड़ ४ यादव ५ चौहान ६ पंवार (परमार) ७ सोलंकी ८ पडिहार (प्रतिहार) ९ चावड़ा १० तंवर ११ गौड़ १२ चन्देल १३ दहिया १४ मकवाना १५ जोहिया १६ बडगुजर १७ पड़वाडिया १८ टांक !


१ मरीचि ऋषि (सुर्यवंश)गहलोत की शाखा प्रशाखा से २२ गोत्र

१ गहलोत (गहलोत्या) २ ओस्तिवाल ३ गोदा ४ देवागान्वा ५ खिंवासरा ६ कंसड ७ करसंड ८ कलसड ९

करसिन्धु १० खारड़िया ११ ख्याली १२ खांड १३ खलेरी १४ गहलोत्रा १५ शिसोदिया १६ चूहड़ा १७ बिकुंधा १८

गोंरा १९ खांडपा २० धोधावत २१ राणवा २२ तालपा !


२ मरीचि ऋषि सूर्य वंश कछवाहां से ७ गॉत्र

१ कछवाहां २ सिंगला ३ छेडवाल ३ खोहवाल ४ कंसुबा ५ कन्हड़ ६ मीणा


३ मरीचि ऋषि सूर्य वंश राठोड से ८ गोत्र --


१ राठोड (राठोडया) २ सोनगरा ३ लोयमा ४ म्हायच ५ बांदर ६ जोधा ७ बागडा ८ अजेर्या !


४ अत्रि ऋषि चन्द्र वंश यादव में ४६ गोत्र ----

१ यादव (यादवा) २ भाटी (भाटिया) ३ कडेला ४ किलान्या५ कलिरावण ६ कलेचा ७ कालवा ८ कडवासरा ९

कालेरा १० काहनीवाल११ कोहली १२ खामिवास १३ खुडिवाल १४ जाम १५ खोबडा १६ गरडवा१७ जनागल १८

दावा १९ देवाला २० देहरावरिया २१ देपन २२ पटीर २३ पाटोधा २४ बरवड २५ बलायच २६ बरडोयिय २७

बारुपाल २८ बाजडा २९ भाल्याण ३० बेगड ३१ महरडा ३२ लालर ३३ साऊं ३४ निलड ३५ पुनड ३६ कांवल्या

३७ सिंहमार ३८ खामिवाल ३९ झाटीवाल ४० खोखर ४१ पलास्या ४२ बुडिया ४३ आयच ४४ अंणख्या

(इणखिया )४५ खुन्वारा ४६ खत्री


५ अत्री ऋषि चंदर वंश (तोमर)से १६ गोत्र --

१ तंवर २ बुडगाँवा ३ मोलोधा ४ लहकारा ५ जावाल्या ६ गोठण ७ गोठणवाल ८ सलोर्या ९ गोठिया १०

गोरावत ११ गोयल (गुहिल)१२ गोरख्या १३ ढल १४ केलवाल १५ ढाइवाल १६ गोरवा (गुरवा) !



६ ,विश्वामित्र ,ऋषि वशिषठ आदि अग्नि वंश चौहान से ३३ गोत्र --


१ चौहान (चुहान्या ,चुंडा)२ इडिवाल ३ गोठवाल ४ मोमत्या ५ कंकेडिया ६ नारनोल्या ७ भटान्या ८ जेवर्या ९

सोगण १० काला ११ पटीर १२ खती १३ जिलोया १४ जिणवाल १५ निमडया १६ बरोला १७ नरवाण १८

सोलेरा १९ निजरान्या २० निरवाल २१ निरवाणि २२ खिची २३ खारडधा २४ नाल्या २५ चाहिल २६ भालोत

२७ सांचोर्या २८ सामर्या २९ भदोर्या ३० नाडोल्या ३१ चाहिल्या ३२ शिंदर्या ३३ पटीर !

७ अग्नि वंश पंवार से २४ गोत्र ----

१ पंवार २ मोरोड्या ३ दायपन्नु ४ जाटावत ५ बडला ६ लोजडीवाल ७ सुवटवाल ८ लाडणा ९ महरान्या १०

टिकावत ११ बोच्या १२ सिला १३ भंवरेटा (भुरटिया) १४ कथ्नोरिया १५ सांखला १६ चणिया १७ सोडा १८

सरावता १९ गुणपाल २० सेजु २१ खान्भ २२ जाटीवाल २३ सियाल २४ सुवाल



8 अग्नि वंश पंवार से २४ गोत्र ----

१ पंवार २ मोरोड्या ३ दायपन्नु ४ जाटावत ५ बडला ६ लोजडीवाल ७ सुवटवाल ८ लाडणा ९ महरान्या १०

टिकावत ११ बोच्या १२ सिला १३ भंवरेटा (भुरटिया) १४ कथ्नोरिया १५ सांखला १६ चणिया १७ सोडा १८

सरावता १९ गुणपाल २० सेजु २१ खान्भ २२ जाटीवाल २३ सियाल २४ सुवाल


८ अग्नि वंश सोलंकी से ४ गोत्र ----

१ असोलंकी २ स्यालवा ३ सुंवालिया ४ बावल्या !


९ अग्नि वंश पडिहार से १५ गोत्र --


१ पड़ीहार २ कदणोच्या ३ कलशी ४ कडवासरा ५ कावडया ६ किराड़ ७ करडीवाल ८ किकरालिया ९ कडेचा

१० कडेलिया ११ कुलरिया १२ गुराहिया १३ गुजरान्या १४ जेठान्या १५ नाथड़ीवाल !


१० गौड़ राजपूतो से ५ गोत्र ---

१ गौड़ २ गंडेर ३ गंडे ४ गँवा ५ गंढीर !

११ पराशर ऋषि चंदेल राजपूतो से ४ गोत्र ---

१ चांदेल २ पावटवाल ३ चंदेला ४ चंडेला !

१२ मकवाना राजपूतो से २ गोत्र ---

१ मकवाना २ मकाना !

१३ दधिची ऋषि सुर्यवंश राठौड़ खांप दहिया से ३ गोत्र ----

१ दहिया (दीया) २ अडान्या ३ भुन्गरिया !

१४ अग्नि वंश चौहान खांप जोहिया से २ गोत्र --

१ जोहिया २ घरट !

१५ सुर्यवंश बडगुजर से १ गोत्र ---

१ बडगुजर

१६ पड़वाड़ीया १ गोत

१७ नाग वंशी टांक से २ गोत्र ----

१ नागवा २ टांक

साभार ----मेघवंश इतिहास (ऋषि पुराण)

लेखक -

स्वामी गोकुलदासजी महाराज

अलख स्थान ड़ूमाँडा
जिला अजमेर

प्रकाशक -सेवादास ऋषि

अलख स्थान ड़ूमाँडा

जिला अजमेर

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