शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017

पहले मे दलितों का हितेसी हूँ बाद मे पार्टी :- ऊदा राम मेघवाल


पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर जिले की शिव तहसील के देदडीयार गाँव में 54 वर्ष पहले एक अत्यंत गरीब मेघवाल परिवार में उदाराम मेघवाल जन्मे .वे अपनी चार बहनों तथा दो भाइयों में सबसे छोटे थे .जब उनकी उम्र महज छह साल थी तभी पिताजी होठीराम गुजर गये. राजकीय प्राथमिक पाठशाला बालेवा में उन्होंने पांचवी तक पढाई की ,लेकिन छठी क्लास में प्रवेश के लिए 14 रूपये की फीस नहीं जुटा पाने की वजह से उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा .घर में कोई कमाई का जरिया भी नहीं था ,इसलिये उन्हें अपना पूरा बचपन गाँव के ही सक्षम लोगों के यहाँ हाली ( बंधुआ श्रमिक ) के रूप में गुजारना पड़ा .

सन 1980 में उन्हें नेहरू युवा केंद्र की ओर से बाड़मेरी चद्दर की प्रिंटिंग सीखने का अवसर मिला . गलीचा बनाने का! हुनर तो उनमें था ही ,इस ट्रेनिंग ने उनके लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल दिये .1982 में उन्हें गुजरात के राजकोट जिले के जेतपुर तालुका में साड़ी प्रिंट का काम मिल गया ,जहाँ पर रह कर उन्होंने लगातार कईं साल काम किया और अपने परिवार की आर्थिक हालत सुधारी .पारिवारिक स्थिति ठीक हुई तो उन्हें अपनी अधूरी छूट गई पढाई की याद आई .इन्हीं दिनों में उनकी मुलाकात पटवारी उदाराम और मुकनाराम परिहार से हुई,जिन्होंने उन्हें आगे पढ़ने को प्रेरित किया तथा स्वयंपाठी छात्र के रूप में दाखिला भी करा दिया .अब वे दिन में मजदूरी और रात में पढाई करने लगे .1987 में उन्होंने दसवीं पास कर ली और 1989 में उन्होंने सीनियर सेकेंड्री का एग्जाम पास कर लिया . बाद में राजकीय महाविद्यालय बाड़मेर से रेगुलर छात्र के रूप में उन्होंने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त कर अपने पढ़ने के मिशन को कामयाब बना डाला .

कॉलेज स्टूडेंट रहते हुये उदाराम में सामाजिक कार्यों की चेतना आई तथा उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों को दिलाने और हर दिन अस्पताल जा कर लोगों की सेवा करने जैसे कार्यों को करना शुरू किया .तब तक न कोई दिशा थी और ना ही किसी का मार्गदर्शन. विचारधारा की तो कोई समझ थी ही नही .किसी तरह आगे बढ़ना था ,नाम करना था और कुछ कर दिखाना था .उनकी सक्रियता तथा सेवा भाव को देखते हुए बाड़मेर भाजपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष महानंद शर्मा ने उन्हें बीजेपी में शामिल कर लिया और भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चे का जिला महासचिव नियुक्त कर दिया .भाजपा में वे शीघ्र ही जोगेश्वर गर्ग ,टीकमचंद कान्त ,किशन सोनगरा तथा कैलाश मेघवाल जैसे भाजपाई दलित नेताओं के करीबी बन गये.सम्पर्क बढ़े तो जिले में भाजपा संगठन में भी कद ऊँचा हुआ ,इस तरह वे भाजपा के जिला उपाध्यक्ष के पद तक पंहुच पाने में कामयाब रहे .

राजस्थान में उन दिनों भाजपा का शासन ही था कि 1998 में बाखासर गाँव के लीला धर मेघवाल की हत्या हो गई ,हुआ यह कि बाखासर के नामी डाकू बलवंत सिंह के परिवार से जुड़े लोगों ने लीलाधर व एक अन्य दलित को चलती हुईगाड़ी से फेंक दिया .लीलाधर की तो मौके पर ही मौत हो गई .लीलाधर की मौत ने बाड़मेर के दलित समुदाय को झकझोर कर रख दिया .पूरा जोधपुर संभाग आक्रोश से सुलग उठा .उस वक़्त आक्रोशित दलित समाज के साथ उदाराम मेघवाल पार्टी की परवाह किये बगैर आ खड़े हुये. दलित समुदाय ने उनमें भरोसा जताया तथा उनको दलित संघर्ष समिति बाड़मेर का संयोजक बनाया .30 दिन लम्बा संघर्ष चला .पूरा पुलिस प्रशासन बदल दिया गया ,मगर दलितों की नाराजगी इस कदर थी कि उन्होंने सामूहिक रूप से भाजपा का बहिष्कार कर दिया .भाजपा के जिला उपाध्यक्ष उदाराम मेघवाल ने अपने नेतृत्व में चल रहे आन्दोलन में अपनी ही पार्टी के बहिष्कार का निर्णय ले कर सबको चौंका दिया .उदाराम मेघवाल उन दिनों को याद करते हुए बताते है कि – “ यह मेरे समाज का निर्णय था , जिसे मुझे मानना ही था ,मेरे लिए तब से अब तक पार्टी से पहले मेरा दलित समाज ही है और आगे भी रहेगा “

भाजपा से खफा उदाराम मेघवाल ने 1998 के चुनावों में भाजपा का विरोध करते हुए खुलकर कांग्रेस का प्रचार किया .प्रदेश में अशोक गहलोत सत्तासीन हुये.उन्होंने अपना वादा निभाया और सरकार बनते ही बाखासर कांड के सभी आरोपियों के खिलाफ चालान करवाया और सभी आरोपी जेल पंहुचे और उन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली .इस जीत ने उदाराम मेघवाल को बाड़मेर ही नहीं बल्कि जोधपुर संभाग में भी दलित अत्याचारों के लिए पार्टी हितों से ऊपर उठाकर संघर्ष करने वाले सामाजिक राजनितिक कार्यकर्ता के रूप में स्थापित कर दिया .

कांग्रेस में भी जल्दी ही उनकी लडाई यथास्थिति बरक़रार रखने वाले तत्वों से शुरू हो गई.ग्राम पंचायतों के डीलिमिटेशन को लेकर विधायक आमीन खान से उनकी भिडंत हो गई.दूसरी तरफ नोहडीया के तला के चांदाराम की साजिशन हत्या के विरुद्ध छेड़े गये आन्दोलन की वजह से विधायक अब्दुल हादी भी खिलाफ हो गये.इसके बाद मकाराम मेघवाल तरासर मठ की हत्या और सवाई राम गर्ग हत्याकांड जैसे मामले उठाने की वजह से भी सत्तारूढ़ कांग्रेस से उनके रिश्ते ख़राब हो गये.एक बार फिर उदाराम राजनितिक रूप से चौराहे पर थे .अपने समर्थकों की सलाह पर उन्होंने वापस भाजपा का दामन थाम लिया ,पर ना वो पार्टी को अपना पाये और ना ही पार्टी उनको .2003 वसुंधराराजे मुख्यमंत्री बनी .भाजपा शासन में भी दलित अत्याचारों में कोई कमी नहीं आई. बाड़मेर अत्याचारों की दृष्टि से अव्वल ही बना रहा ,संघर्ष जारी रहा .अंततः उन्होंने भाजपा को अलविदा कह दिया और लोकसभा चुनाव आते आते वे पुनः कांग्रेस में चले गये.हैरत की बात इसलिए भी नहीं थी क्योंकि राजस्थान जैसे प्रदेश में जहाँ भाजपा कांग्रेस जैसी दो ही पार्टियाँ बहुमत प्राप्त करती रहती है तथा किसी मजबूत तीसरे विकल्प के नहीं होने से राजनीती की धुरी बनी हुयी है ऐसे में सदैव ही दलित राजनीतिक कार्यकर्ताओं को भ्रमित रह कर वे दोनों पार्टियों के बीच फुटबाल बने रहते है .इस विकल्पहीनता को ख़त्म करने की दिशा में काम किये जाने की सख्त जरुरत है .

खैर, सन 2005 के पंचायती राज चुनाव में उदाराम मेघवाल शिव पंचायत समिति में कर्नल सोना राम के सहयोग से प्रधान बनने में सफल रहे .सूबे में सरकार भाजपा की थी , इसलिए प्रधानी का सफ़र काफी मुश्किलों भरा रहा .लेकिन प्रधान रहते हुए भी उदाराम दलित अत्याचारों के मामले में संघर्ष करने में सदैव अग्रणी रहे .उन्होंने अपने पद की परवाह किये बगैर दलित अत्याचार निवारण समिति के बैनर तले लगातार 65 दिन तक धरने पर बैठ कर रिकॉर्ड कायम किया तथा शिवकर के दलितों की जिस जमीन पर सामंत कब्ज़ा जमा बैठे थे ,उसे ना केवल मुक्त करवा दिया बल्कि अवैध रूप से जबरन दलितों की भूमि कब्जाने वाले सभी 22 सामंतों को जेल की सलाखों के पार पंहुचा कर ही दम लिया .

फरवरी 2010 से कांग्रेस से जिला परिषद् के सदस्य भी रहे .सत्ता पुनः कांग्रेस की आ ही चुकी थी .उदाराम मेघवाल कांग्रेस से प्रधान रहने के बाद अब जिला परिषद् के सदस्य थे कि सूचना के अधिकार कार्यकर्ता मंगला राम के हाथ पांव कांग्रेस से ही जुड़े एक सरपंच ने तोड़ दिये. उदाराम मंगलाराम को न्याय दिलाने के संघर्ष में आगेवान हो गये.उन्होंने बिना डरे कांग्रेस की सत्ता से लौहा लिया .प्रदेश अध्यक्ष तथा मुख्यमंत्री तक के पुतले फूंके ,नतीजा यह निकला कि उनके खिलाफ उन्हीं की पार्टी की सरकार ने 4 मुकदमे दर्ज करवा दिए.  फंसाने तथा डराने की हर संभव कोशिस की .उदा राम न डरे और न ही फंसे .चारों मुकदमें झूठे साबित हुये.सरकार ने अपनी लाज उन्हें बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति का जिला उपाध्यक्ष बना कर बचाई.

आरटीआई एक्टिविस्ट मंगला राम की न्याय की लडाई के दौरान ही 2011 में मेरी मुलाकात उदाराम जी से हुई,तब से मैं उनको निरंतर मोर्चे पर अग्रणी देखता हूँ .अनथक लड़ते हुये. बेलोस, बेबाक, बेखौफ बोलते हुये. बाड़मेर जिले की प्रतिभाशाली छात्रा डेल्टा मेघवाल के यौन शोषण तथा उसकी रहस्यमय परिस्थितियों में हुए मौत के मामले में हुये आन्दोलन में भी उदाराम मेघवाल काफी सक्रिय रहे है .वर्ष 2016 के अगस्त में उन्होंने बाड़मेर जिले के दलित अत्याचारों के 27 प्रकरणों को लेकर दलित अत्याचार निवारण समिति के ज़रिये 22 दिन लम्बा एक ऐतिहासिक ‘दलित महापड़ाव’ आयोजित किया ,जिसमे हर दिन सैंकड़ों की तादाद में लोगों की उत्साहवर्धक मौजूदगी देखने को मिली .इस महापड़ाव में उठाये गए ज्यादातर प्रकरणों में चालान हो गया है .हालाँकि कुछ मामलों में एफआर भी लगी है . आन्दोलन की वजह से उदाराम मेघवाल तथा उनके साथियों के विरुद्ध एक केस भी दर्ज हुआ है ,पर इस तरह की बातों से वे घबराते नहीं है .लड़ना ही उनकी ज़िन्दगी का मकसद बन चुका है .आजकल वे अपने जिले के एसपी गगन दीप सिंघला से भिड़े हुये है .

दलित अत्याचार निवारण समिति बाड़मेर के जिला संयोजक उदाराम मेघवाल के मुताबिक –“ जिले में दलित अत्याचार के मामले बढ़ते ही जा रहे है .जातिगत अपमान ,मारपीट,जमीने छीनना ,सामूहिक हमला करना , हत्या कर देना तथा दलित महिलाओं के साथ बलात्कार जैसे गंभीर मामले हर रोज दर्ज हो रहे है ,मगर पुलिस संवेदनशील नहीं है .दलित अत्याचार निवारण कानून में संशोधन होने के बाद अब तक 247 मामले दर्ज हुए है ,जिनमे से 74 में चालान पेश हुआ है .87 को झूठा बता दिया गया है .86 में तफ्तीश जारी होना बताया जाता है ,जो कि अनुसन्धान के लिए प्रदत्त 60 दिनों की अवधि से भी ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद अनुसन्धान जारी ही है .हद तो यह है कि अजा जजा अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 संशोधित हो चुका है , 26 जनवरी 2016 से नया कानून लागू हो गया है.14 अप्रैल 2016 से अजा जजा अत्याचार निवारण संशोधन अधिनियम के नियम भी लागू किये जा चुके है ,मगर इसके बावजूद भी बाड़मेर जिले में लगभग 40 दलित अत्याचार के मामले पुराने कानून की विभिन्न धाराओं में दर्ज किये गए ,उसी में उनका अनुसन्धान किया गया तथा न्यायालय में चालान तक पुराने कानून की धाराओं में ही कर दिया गया है .ऐसी अंधेरगर्दी मचा रखी है पुलिस ने ,जिसके खिलाफ हम संघर्षरत है .एसपी हम लोगों को किसी न किसी मामले में फंसा देना चाहता है ,ताकि दलितों की आवाज दब जाये .मगर हम चुप होने वालों में से नहीं है “ उदाराम मेघवाल इस मामले को हाईकोर्ट ले जा रहे है ताकि ठीक से सुनवाई हो सके .

बार बार राजनीतिक प्रतिबद्धताओं में परिवर्तन होने तथा एक ऐसे राजनीतिक दल के सदस्य होने जिसे अम्बेडकरवादी समूह सही नहीं मानते है ,सम्बन्धी सवालों पर उदाराम मेघवाल का कहना है कि –“ मैं कांग्रेस का सदस्य जरुर हूँ ,पर विचारधारा से बाबा साहब के मिशन के करीब हूँ ,मेरे लिए मेरा दलित बहुजन समाज ही प्रथम है .अगर मेरी पार्टी और मेरे समाज के मध्य हितों का टकराव होता है तो मैं अव्वल और आखिरी समाज के ही साथ खड़ा होऊंगा ,मेरे लिए बाबा साहब की विचारधारा ही प्राथमिकता में है “

निश्चित रूप से उदाराम मेघवाल जैसे राजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ता जय भीम की सेना के वे वफादार सिपाही है ,जो अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा तो रखते है ,मगर वे उसे पाने के लिए मुंह सिल कर नहीं बैठते .मुखर हो कर बोलते है .सड़कों पर उतरते है ,मुट्ठियाँ बांधते है और आकाश में नारे भी उछालते है . अपने ही नेताओं के पुतलों को आग के हवाले भी करते है तथा अपने लोगों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करते है क्योंकि उन्हें पूना पैक्ट की खरपतवार कहलाना पसंद नहीं है . विभिन्न राजनीतिक दलों में गुलाम की भांति हाथ जोड़े ,मुंह सिले ,जबड़े भींचे बैठे पदलोलुप दलित बहुजन लीडरों को उदाराम मेघवाल जैसे राजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ता से सीखना चाहिये कि अपने लोगों के लिए लड़ते हुए भी अपनी शर्तों पर राजनीती में कैसे रहा जा सकता है .

गुरुवार, 20 अप्रैल 2017

मेघवाल समाज के लाडले भजन गायक कलाकार चुन्नी लाल बिकूनिया के भजनों को अफ्रीका फिलिपीन्स मालावाई फ्रांस मे सराया

एक बार फिर से चमक रहे सी.एल.बी.ग्रूप के डायरेक्टर सिंगर चुन्नी लाल बिकूनिया

दोस्तो मेने अफ्रीका मे मालावाई क्षेत्र मे चुन्नी लाल बिकूनिया के गाने को शेयर किया था तो उन्होने  चुन्नी लाल जी के गाने को खूब सराया और उन्होने अफ्रीका फिलिपीन्स नाईजीरीया फ्रांस आदि देशों के लोगो ने बधाई संदेश भेजे दोस्तो यदि यह मेघवाल समाज का युवा अपनी गायकी के क्षेत्र को बढ़ायेंगे तो इनका मार्गदर्शन अन्य देशों मे.शुरू हो जायेगा और अफ्रीका मे बहूत जल्द ही बिकूनिया को गायकी के क्षेत्र मे सम्मानित किया जायेगा और अफ्रीका जाने की आने जाने की व्यवस्था बहूत जल्द ही तेयार होगी इनकी गायकी इतनी मीठी है की कोई भी चुनी लाल जी बिकूनिया के गानों को सुनने का मन करता है

राजस्थान मे अब चुन्नी लाल बिकूनिया को अब दलित वर्ग और अन्य क्षेत्र मे भीम गायकी के नाम से जाने जाने वाले भारत में अब अपनी आवाज के जादू से गायकी में धाक जमाने वाले कलाकार अपनी गायकी के जरिये इस नागौर जिले का नाम पुरे भारत एवं देश विदेश में नाम रोशन करते जा रहे है। इन्ही सुरीली आवाजों में से एक कलाकार जो की जिले के एक छोटे से गाँव के रहने वाले चुन्नी लाल बिकूनिया ने एलबमौ तक अपनी सुरीली आवाज का जादू बिखेर रहे  है।

परबतसर के चुन्नी लाल बिकूनिया की गायकी का हर कोई कायल हो गया। चुन्नी लाल बिकूनिया ने विभिन्न प्रोग्राम में हिंदी, राजस्थानी एवं फोल्क गानो पर अपनी प्रस्तुति दी है।तथा अनेक भजन गाये
हम इनके उज्जवल भविष्य की कामनाये करते है की चुन्नी लाल बिकूनिया अपनी गायकी को बढ़ाते रहे

मंगलवार, 18 अप्रैल 2017

राजस्थान के यो यो सी.एल.बी ग्रूप के सिंगर चुन्नी लाल बिकूनिया ने गाया जय भीम जय भीम सॉन्ग ने पूरे विश्व मे धूम मचाई

मन्डुसिया लेखन // राजस्थान प्रांत के नागौर जिले के परबतसर  का एक और युवा इन दिनों गायकी के क्षेत्र में नाम कमा रहा है। मेघवाल समाज के युवा गायक चुन्नी लाल बिकूनिया  की  म्यूजिक एलबम जय भीम जय भीम  इन दिनों सोशल मीडिया पर धूम मचा रही है। यू-ट्यूब पर यौ यौ सी.एल.बी के नाम से महसूर हो गये है दोस्तो चुन्नी लाल बिकूनिया केवल 22 साल का युवा है चुन्नी लाल बिकूनिया ने जब जय भीम जय भीम गाना गाया  गया तो पूरे देश विदेशो मे छा गये  इस मेघवाल समाज के युवा ने हजारो भजन गजलें गाकर पूरे दोस्तो को अपने काबू मे कर लिया है और अब देश विदेशो से गायकी के ऑफर आ रहे है चुन्नी लाल जी बिकूनिया  के जय भीम जय भीम सांग ये लाखो लोग सुनकर सी एल बी की मधुर आवाज को सराह चुके हैं।


जय भीम जय भीम  इस गीत को अब तक सोशल मीडिया पर करीब लाखो. (करीबन 3 लाख ) लोग सुन चुके हैं  बाद से यह गाना युवाओं की जुबां पर है।
खास बात यह है कि इस गीत में चुन्नी लाल बिकूनिया की सुरीली आवाज के साथ अब राष्ट्रीय देशों मे जगह बना रहे है इस  बेहतरीन वीडियोग्राफी और म्यूजिक के चलते यह गीत कम समय में ही बहुत हिट हो चुका है। नागौर के परबतसर कस्बा निवासी बिकूनिया  ने वर्षों तक संगीत की तालीम लेने के बाद कड़ा रियाज करके अपने सपने को पंख लगाए हैं।
चुन्नी लाल बिकूनिया  कहते हैं कि बचपन से ही मेरा सपना एक अच्छा  गायक कलाकार बनने का है। स्कूली शिक्षा हासिल करने के बाद मैंने गायन का प्रशिक्षण लेना आरंभ कर दिया। इस दौरान कई बेहतरीन संगीतकारों और गायकों ने हौसला बढ़ाया। यहीं से मेरा मनोबल बढ़ा व कई सालों की
कड़ी मेहनत के बाद अपनी जय भीम जय भीम  एलबम लांच करने में सफल रहा हूं। बिकूनिया  प्रदेश के कई प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रमों, महोत्सवों में स्टेज पर अपनी गायकी का जादू दिखा चुके हैं। वहीं, चुन्नी लाल बिकूनिया गीत लिखने और संगीतबद्ध करने में भी पारंगत हैं। बिकूनिया का सपना अब गायन के क्षेत्र में अंतराष्ट्रीय फलक पर नाम कमाने का है। और अब देश विदेश से भी ऑफर आने लग गये है जब मेने बिकूनिया साब को गाना फिलिपीन्स के मेरे फेसबुक मित्र जीसेल कूइजोन को जय भीम जय भीम गाना भेजा तो उनको बहूत पसंद भी आया और मुझे चुन्नी लाल जी बिकूनिया साब के लिये बधाई संदेश भेजा और फ़िर मेने अफ्रीका के मालावाई देश के अब्रेन ऐअन और फ्रांस के च्यूम चेन उरिय्र को जय भीम जय भीम गाना भेजा तो इन्होने यह भारतीय गाने को  भिव राव अम्बेडकर जी की 126 वी जयंती पर बजाया गया और बधाई संदेश दिया गया
नवरत्न मन्डुसिया की कलम से 

शनिवार, 15 अप्रैल 2017

पति पत्नी के पवित्र रिश्ते पर एक दूसरे पर विश्वास करना चाहिये जिसमे रिश्ते मे मज़बूती बढ़ाएगी


husband wife romance
पवित्र अगि्न को साक्षी मानकर लिए गए सात फेरे जिंदगी का अहम हिस्सा होते हैं जिसमें प्यार, संयम, समझदारी के साथ जिंदगी भर साथ निभाने का वादा होता है। इसलिए अगर आप भी विवाह के पवित्र बंधन में बंधने जा रहे हैं तो इन वचनों का खास ध्यान रखें ताकि रिश्तों में नयापन, प्यार और विश्वास ताउम्र बना रहे। हमेशा से ही सात नंबर को आध्यात्मिकता से परिपूर्ण और चिरायु प्रदान करने वाली संख्या माना जाता रहा है, क्यों कि सात नंबर अपने अंदर ब़डे गूढ़, आध्यात्मिक दर्शन और पारलौकिक अर्थ छिपाए हुए हैं। इस पुण्य संख्या के साथ ही जुडी है सप्तपदी यानि दो आत्माओं के मिलन के लिए मांगी गई ईश्वरीय स्वीकृ ति। इस रीति के बिना विवाह संपन्न नहीं हो सकता क्यों कि जब तक वर-वधू ये सात कदम नहीं चलते, विवाह अधूरा ही रहता है। सप्तपदी ही एक ऎसी रस्म है जहां साथ रखे हर कदम के साथ वर-वधू एक-दूसरे से सात जन्म तक का साथ साथ निभाने का वादा करते हैं, पर आज के बदलते परिवेश में ये सात वचन कब टूट जाते हैं पता ही नही चलता, इसलिए अगर आप चाहते हैं कि सात जन्मों का साथ वाकई सात जन्मों तक बना रहे तो सात फेरों के साथ जरूरी है इन बातों का ख्याल रखना ताकि आपके रिश्तों में प्यार की मिठास और खुशियां बनी रहे-
1- दाम्पत्य की अटूट कडी है " विश्वास " और विश्वास पर ही पति-पत्नी का रिश्ता टिका होता है, इसलिए इसमें शक न लाएं क्योंकि अगर यह एक बार आ जाता है तो पूरी जिंदगी लग जाती है टूटी कडी जोडने में, इसलिए जरूरी है कि विश्वास की नींव हिलने न दें बल्कि इतनी मजबूत बनाएं कि प्रचंड आंधी भी इसे हिला न सके।
2-विवाह के बाद अपनी गृहस्थी, बचत व निवेश की योजनाएं बनाएं और इसके साथ फैमिली प्लानिंग भी करके चलें ताकि अनचाहे गर्भ से बचा जा सके और अपनी सुविधानुसार फैमिली बढाई जा सके। 3-कोई इंसान परफेक्ट नही होता है, इसलिए एक-दूसरे में गलतियां न निकालें बल्कि गलतियों को सुधारने का मौका दें। अपने प्यार में इतनी ताकत लाएं कि सामने वाला अपनी कमियों को आपके कहे बिना ही सुधार लें।
4-उनकी पसंद के अनुरूप कार्य करें, मतलब ये नियम अपनाएं "जो तुमको हो पसंद वही बात कहेगें" फिर चाहे वह टीवी देखने का हो या फिर घूमने का, उनकी पसंद को अपनी पसंद बनाएं।
5-अगर पार्टनर खर्चीली प्रवृत्ति वाला है तो कोशिश करें कि खर्चे की सफाई ना मांगे, क्यों कि उनके अपने भी खर्चे होते हैं जिन्हें पूछना व बताना, झग़डे को बढ़ावा देने जैसा होता है, क्यों कि खर्चे करने का हक दोनों का होता है।
6-एक-दूसरे को सरप्राइज जरूर दें। पर झटके वाले ना हों, मतलब जिससे आपका बजट ना बिगडे और पार्टनर भी सरप्राइज देखकर खुश हो जाए।
7-आप चाहें कितने भी व्यस्त क्यों ना हों, पर एक-दूसरे को समय जरूर दें क्यों कि कई बार समय की कमीं के कारण रिश्ते बिखरने लगते हैं, इसलिए अपने पार्टनर के लिए समय जरूर निकालें।
8-रिश्ते में एक-दूसरे के घर की कमियां जरूर गिनाई जाती हैं, इसलिए ऎसे समय पर बुराई तो करें पर बुराई को झगडे का रूप ना दें।
9-गलती होने पर माफी जरूर मांगे, क्यों कि सॉरी कहना बुरी बात नहीं है और ना ही माफ करना मुश्किल काम है,साथ ही माफी मांगने से झगडा आगे नही बढता, इसलिए माफी मांगने में कंजूसी ना करें।
10-कहते हैं रिश्ते में स्पेस जरूरी होता है क्यों कि दूरी से प्यार झलकता है। इसलिए अपने रिश्ते में थोडी दूरी बनाए रखें ताकि आपको उनकी कमी का एहसास हो।
11-सेक्स दाम्पत्य की धुरी है इसलिए एसे अनदेखा ना करें और हर रोज इसमें कुछ नया करने की कोशिश करें। पर जो भी क्रिया करें उसमें पार्टनर की सहमति जरूर होनी चाहिए।
12-अपने पार्टनर के लिए हमेशा ईमानदार रहें और कोई भी ऎसी बात ना छुपाएं जो बाद में पता चलने पर दिल को ठेस पहुंचाए।
13-घर का फैसला हो या फिर अपने लिए कोई भी फैसला अकेले ना लें, बल्कि एक,दूसरे के सलाह-मशविरा लेकर ही फैसला करें।
14- कहते हैं कि खुशियां हमारे आस-पास ही होती हैं,बस उन्हें ढूंढने की जरूरत होती है इसलिए जीवन के हर पल में खुशियां ढूंढे।
15-पति-पत्नि का रिश्ता एक दूसरे के लिए समर्पित होता है,इसलिए अगर आपको लगता है कि आपके पार्टनर व घर के लोगों की जिसमें खुशी है वो आपसे ही पूरी हो सकती है तो उसके लिए कुर्बानी देने में जरा भी संकोच ना करें।
16-अपने साथी की खूबियों की तारीफ करें और इस तारीफ को हो सके तो घर वालों के सामने भी कहें। इससे आत्मविश्वास बढता है।
17-थैंक्यू शब्द जादू का काम करता है, इसलिए अगर आपके पार्टनर ने आपके घर व आपके लिए कुछ किया है तो थैंक्यू जरूर कहें। आपके द्वारा कहा गया थैंक्यू उनको कितनी खुशी देगा उसका अंदाजा आप नहीं लगा सकते।
18- कभी-कभी हार मान लेना गलत नहीं होता है, इसलिए अगर आपकी गलती नहीे है तो भी हार मान लें। आपका ये व्यवहार देखकर वो आपके आभारी हो जाएंगे।
19-अगर किसी बात को लेकर बहस हो रही है तो उस बात का बतंग़ड ना बनाएं बल्कि तुरन्त खत्म करने की काशिश करें।
20-माना आपकी शादी हो गई है और आप चाहते हैं कि आपका साथी हमेशा आपके साथ रहे तो इस जिद को छोडे और उन्हें दोस्तों के साथ घूमने का मौका भी दें।
 21-अगर आपका किसी बात पर झगडा हो गया है तो बिस्तर पर जाने से पहले झगडे को खत्म कर लें ताकि बिस्तर पर बातें हों तो सिर्फ प्यार की।
22-शादी के बाद अगर आपके साथी का कोई शौक पूरा नहीं हो पाया हैे तो उसे पूरा करने का मौका व सहयोग दें और उसके शौक व रूचियों को बरकरार रखें। शौक को पूरा करने में मददगार बनें न कि दीवार।
23-अगर आपकी कोई फरमाइश है तो उसे साथी को बताएं ना कि फरमाइशों को चाय के प्याले के साथ परोसें।
24-शादी के बाद डेटिंग जैसी चीजों को खत्म ना करें बल्कि मौका मिलते ही डेटिंग पर जाएं ताकि पुरानी यादें ताजा हो सकें।
25-"आई लव यू" ये तीन शब्द सारे गुस्से और झगडे को खत्म कर देता है इसलिए इसे कहने से ना चूकें।
26-अगर आपके पार्टनर ने कुछ नया किया है तो उसे कॉम्पलीमेंट जरूर दें,उससे उसका हौसला बढता है।
27-माना ईगो इंसानी व्यक्तित्व का गुण है,जो समाज में आपकी पहचान के साथ अपने आप विकसित होने लगता है, पर इसका मतलब ये नहीं कि रिश्ते में ईगो लाएं।
28-आपसी तालमेल के दौरान हमेशा अदब व शिष्टाचार रखें। कभी भी अपशब्द का इस्तेमाल ना करें। तर्क-वितर्क करते समय आपा ना खोएं।
29-बार-बार अपने पार्टनर को छोड देने की धमकी ना दें,इससे रिश्ते की डोर कमजोर होती है। 30-आमतौर पर ये माना जाता है कि शादी के बाद प्रेम और परिपक्व हो जाता है,इसलिए प्रेम को और बढाएं ना कि कम होने दें।
31-एक -दूसरे को सम्मान दें, क्यों कि आपके द्वारा दिया गया सम्मान तीसरे की नजर में भी आता है, इसलिए गरिमा बनाए रखें।
32-विवाहित जीवन का भविष्य बनाने के लिए जरूरी है कि दोनों एक-दूसरे के प्रशंसनीय पक्ष पर ध्यान दें।

हिन्दू समाज मे सात फेरे और सात वचन


वैदिक संस्कृति के अनुसार सोलह संस्कारों को जीवन के सबसे महत्त्वपूर्ण संस्कार माने जाते हैं। विवाह संस्कार उन्हीं में से एक है जिसके बिना मानव जीवन पूर्ण नहीं हो सकता। हिंदू धर्म में विवाह संस्कार को सोलह संस्कारों में से एक संस्कार माना गया है।

शाब्दिक अर्थ

विवाह = वि + वाह, अत: इसका शाब्दिक अर्थ है - विशेष रूप से (उत्तरदायित्व का) वहन करना। पाणिग्रहण संस्कार को सामान्य रूप से हिंदू विवाह के नाम से जाना जाता है। अन्य धर्मों में विवाह पति और पत्नी के बीच एक प्रकार का करार होता है जिसे कि विशेष परिस्थितियों में तोड़ा भी जा सकता है, परंतु हिंदू विवाह पति और पत्नी के बीच जन्म-जन्मांतरों का सम्बंध होता है जिसे किसी भी परिस्थिति में नहीं तोड़ा जा सकता। अग्नि के सात फेरे लेकर और ध्रुव तारा को साक्षी मान कर दो तन, मन तथा आत्मा एक पवित्र बंधन में बंध जाते हैं। हिंदू विवाह में पति और पत्नी के बीच शारीरिक संम्बंध से अधिक आत्मिक संम्बंध होता है और इस संम्बंध को अत्यंत पवित्र माना गया है।

सात फेरे और सात वचन

विवाह एक ऐसा मौक़ा होता है जब दो इंसानो के साथ-साथ दो परिवारों का जीवन भी पूरी तरह बदल जाता है। भारतीय विवाह में विवाह की परंपराओं में सात फेरों का भी एक चलन है। जो सबसे मुख्य रस्म होती है। हिन्दू धर्म के अनुसार सात फेरों के बाद ही शादी की रस्म पूर्ण होती है। सात फेरों में दूल्हा व दुल्हन दोनों से सात वचन लिए जाते हैं। यह सात फेरे ही पति-पत्नी के रिश्ते को सात जन्मों तक बांधते हैं। हिंदू विवाह संस्कार के अंतर्गत वर-वधू अग्नि को साक्षी मानकर इसके चारों ओर घूमकर पति-पत्नी के रूप में एक साथ सुख से जीवन बिताने के लिए प्रण करते हैं और इसी प्रक्रिया में दोनों सात फेरे लेते हैं, जिसे सप्तपदी भी कहा जाता है। और यह सातों फेरे या पद सात वचन के साथ लिए जाते हैं। हर फेरे का एक वचन होता है, जिसे पति-पत्नी जीवनभर साथ निभाने का वादा करते हैं। यह सात फेरे ही हिन्दू विवाह की स्थिरता का मुख्य स्तंभ होते हैं।

सात फेरों के सात वचन

विवाह के बाद कन्या वर के वाम अंग में बैठने से पूर्व उससे सात वचन लेती है। कन्या द्वारा वर से लिए जाने वाले सात वचन इस प्रकार है।

प्रथम वचन

तीर्थव्रतोद्यापन यज्ञकर्म मया सहैव प्रियवयं कुर्या:,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति वाक्यं प्रथमं कुमारी !!
(यहाँ कन्या वर से कहती है कि यदि आप कभी तीर्थयात्रा को जाओ तो मुझे भी अपने संग लेकर जाना। कोई व्रत-उपवासअथवा अन्य धर्म कार्य आप करें तो आज की भांति ही मुझे अपने वाम भाग में अवश्य स्थान दें। यदि आप इसे स्वीकार करते हैं तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।)
किसी भी प्रकार के धार्मिक कृ्त्यों की पूर्णता हेतु पति के साथ पत्नि का होना अनिवार्य माना गया है। जिस धर्मानुष्ठान को पति-पत्नि मिल कर करते हैं, वही सुखद फलदायक होता है। पत्नि द्वारा इस वचन के माध्यम से धार्मिक कार्यों में पत्नि की सहभागिता, उसके महत्व को स्पष्ट किया गया है।

द्वितीय वचन

पुज्यौ यथा स्वौ पितरौ ममापि तथेशभक्तो निजकर्म कुर्या:,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं द्वितीयम !!
(कन्या वर से दूसरा वचन मांगती है कि जिस प्रकार आप अपने माता-पिता का सम्मान करते हैं, उसी प्रकार मेरे माता-पिता का भी सम्मान करें तथा कुटुम्ब की मर्यादा के अनुसार धर्मानुष्ठान करते हुए ईश्वर भक्त बने रहें तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।)
यहाँ इस वचन के द्वारा कन्या की दूरदृष्टि का आभास होता है। आज समय और लोगों की सोच कुछ इस प्रकार की हो चुकी है कि अमूमन देखने को मिलता है--गृहस्थ में किसी भी प्रकार के आपसी वाद-विवाद की स्थिति उत्पन होने पर पति अपनी पत्नि के परिवार से या तो सम्बंध कम कर देता है अथवा समाप्त कर देता है। उपरोक्त वचन को ध्यान में रखते हुए वर को अपने ससुराल पक्ष के साथ सदव्यवहार के लिए अवश्य विचार करना चाहिए।

तृतीय वचन

जीवनम अवस्थात्रये मम पालनां कुर्यात,
वामांगंयामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं तृ्तीयं !!
(तीसरे वचन में कन्या कहती है कि आप मुझे ये वचन दें कि आप जीवन की तीनों अवस्थाओं (युवावस्था, प्रौढावस्था, वृद्धावस्था) में मेरा पालन करते रहेंगे, तो ही मैं आपके वामांग में आने को तैयार हूँ।)

चतुर्थ वचन

कुटुम्बसंपालनसर्वकार्य कर्तु प्रतिज्ञां यदि कातं कुर्या:,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं चतुर्थं !!
(कन्या चौथा वचन ये माँगती है कि अब तक आप घर-परिवार की चिन्ता से पूर्णत: मुक्त थे। अब जबकि आप विवाह बंधन में बँधने जा रहे हैं तो भविष्य में परिवार की समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति का दायित्व आपके कंधों पर है। यदि आप इस भार को वहन करने की प्रतीज्ञा करें तो ही मैं आपके वामांग में आ सकती हूँ।)
इस वचन में कन्या वर को भविष्य में उसके उतरदायित्वों के प्रति ध्यान आकृ्ष्ट करती है। विवाह पश्चात कुटुम्ब पौषण हेतु पर्याप्त धन की आवश्यकता होती है। अब यदि पति पूरी तरह से धन के विषय में पिता पर ही आश्रित रहे तो ऐसी स्थिति में गृहस्थी भला कैसे चल पाएगी। इसलिए कन्या चाहती है कि पति पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर होकर आर्थिक रूप से परिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सक्षम हो सके। इस वचन द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि पुत्र का विवाह तभी करना चाहिए जब वो अपने पैरों पर खडा हो, पर्याप्त मात्रा में धनार्जन करने लगे।

पंचम वचन

स्वसद्यकार्ये व्यवहारकर्मण्ये व्यये मामापि मन्त्रयेथा,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: पंचमत्र कन्या !!
(इस वचन में कन्या जो कहती है वो आज के परिपेक्ष में अत्यंत महत्व रखता है। वो कहती है कि अपने घर के कार्यों में, विवाहादि, लेन-देन अथवा अन्य किसी हेतु खर्च करते समय यदि आप मेरी भी मन्त्रणा लिया करें तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।)
यह वचन पूरी तरह से पत्नि के अधिकारों को रेखांकित करता है। बहुत से व्यक्ति किसी भी प्रकार के कार्य में पत्नी से सलाह करना आवश्यक नहीं समझते। अब यदि किसी भी कार्य को करने से पूर्व पत्नी से मंत्रणा कर ली जाए तो इससे पत्नी का सम्मान तो बढता ही है, साथ साथ अपने अधिकारों के प्रति संतुष्टि का भी आभास होता है।

षष्ठम वचनः

न मेपमानमं सविधे सखीनां द्यूतं न वा दुर्व्यसनं भंजश्चेत,
वामाम्गमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं च षष्ठम !!
(कन्या कहती है कि यदि मैं अपनी सखियों अथवा अन्य स्त्रियों के बीच बैठी हूँ तब आप वहाँ सबके सम्मुख किसी भी कारण से मेरा अपमान नहीं करेंगे। यदि आप जुआ अथवा अन्य किसी भी प्रकार के दुर्व्यसन से अपने आप को दूर रखें तो ही मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।)
वर्तमान परिपेक्ष्य में इस वचन में गम्भीर अर्थ समाहित हैं। विवाह पश्चात कुछ पुरुषों का व्यवहार बदलने लगता है। वे जरा जरा सी बात पर सबके सामने पत्नी को डाँट-डपट देते हैं। ऐसे व्यवहार से पत्नी का मन कितना आहत होता होगा। यहाँ पत्नी चाहती है कि बेशक एकांत में पति उसे जैसा चाहे डांटे किन्तु सबके सामने उसके सम्मान की रक्षा की जाए, साथ ही वो किन्हीं दुर्व्यसनों में फँसकर अपने गृ्हस्थ जीवन को नष्ट न कर ले।

सप्तम वचनः

परस्त्रियं मातृसमां समीक्ष्य स्नेहं सदा चेन्मयि कान्त कुर्या,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: सप्तममत्र कन्या !!
(अन्तिम वचन के रूप में कन्या ये वर मांगती है कि आप पराई स्त्रियों को माता के समान समझेंगें और पति-पत्नि के आपसी प्रेम के मध्य अन्य किसी को भागीदार न बनाएंगें। यदि आप यह वचन मुझे दें तो ही मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।)
विवाह पश्चात यदि व्यक्ति किसी बाह्य स्त्री के आकर्षण में बँध पगभ्रष्ट हो जाए तो उसकी परिणिति क्या होती है। इसलिए इस वचन के माध्यम से कन्या अपने भविष्य को सुरक्षित रखने का प्रयास करती है।

बहुजन संघर्ष दल के प्रदेशाध्यक्ष कपिल मेघवाल की खास बात

राजस्थान में इन दिनों संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीम राव अंबेडकर के नाम पर भीम मेले लग रहे हैं और इन मेलों में उमड़ रही दलित युवाओं की भीड़, समाज में दलित जागृति की नई शुरूआत मानी जा रही है। ऐसे ही भीम मेले इन दिनों राजस्थान के मारवाड़ अंचल में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
जोधपुर। जिले में बहुजन संघर्ष दल के नेतृत्व में लग रहे भीम मेलों में बड़ी संख्या में दलित युवाओं की भीड़ उमड़ रही है। इन भीम मेलों की खास बात ये है कि यहां आने वाले दलित युवाओं को दलित आंदोलनों की ऐतिहासिक जानकारी दी जाती है साथ ही देश के संविधान से लेकर कानून और प्रशासन की जानकारी भी इन युवाओं को दी जा रही है। राजस्थान में पहला भीम मेला जोधपुर जिले के ओसियां में पंडित जी की ढाणी में आयोजित किया गया था। उसके बाद जुलाई में नागौर जिले में खींवसर के आकला गांव में भीम मेला मेला लगाया गया जिसमें हजारों की संख्या में लोग पहुचे। मेले में बहुजन संघर्ष दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष फूलसिंह बरैया के साथ ही संत नानकदास कबीरपंथी भी मौजूद रहे ।
IMG-20160723-WA0014
बहुजन संघर्ष दल के प्रदेशाध्यक्ष कपिल मेघवाल बताते हैं कि ऐसे भीम मेले राजस्थान में पहली बार आयोजित किए जा रहे हैं। जिनमें बढ रही दलित युवाओं की भागीदारी हम सब का मनोबल बढ़ाती है। ऐसे ही भीम मेले महाराष्ट्र में पहले भी लगते रहे हैं। जिनमें दलितों में नई चेतना की जागृति और बाबा साहेब के संदेशों को आमजन तक पहुंचाने काम किया जाता रहा है। सदियों से दलित समाज हर तरह से शोषण का शिकार रहा है और ग्रामीण इलाकों में लोगों के शिक्षित नहीं होने की वजह से जागृति की कमी होती है । इसी कमी को दूर करने के लिए हमने भीम मेले लगाने का निर्णय किया । कपिल मेघवाल कहते हैं कि देशभर के साथ राजस्थान में दलित उत्पीड़न में बढोतरी हुई है। इसकी एक वजह ये भी है कि लोगों को उनके हकों की जानकारी नहीं होना है । हम भीम मेलों में दलितों को कानूनों की जानकारी भी देते हैं। साथ ही उनके हक और अधिकारों को लेकर भी चर्चा करते हैं । खास बात ये भी है कि दलित स्वास्थ कैसे रहे इस बात की जानकारी भी इन मेलों में दी जा रही है। आत्मरक्षा के लिए जुडो-कराटे, व्यायाम और योग की बारिकियां भी दलित युवा इन भीम मेलों के सीख रहे हैं।
IMG-20160723-WA0015
भीम मेले में क्या है खास –
इन भीम मेलों में दलित उत्पीड़न को लेकर बनाए गए कानून, देश के संविधान की जानकारी, प्रशासनिक ढांचे के साथ ही अधिकारियों के बारे में जानकारी और साथ ही बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर के किए गए कार्यों की जानकारी भी दलित युवाओं को दी जा रही है। वहीं किसी के भी साथ अत्याचार होने की स्थिति में कैसे एफआईआर दर्ज करवाएं और थाने में मामला दर्ज नहीं होने पर क्या करें इन सब कानूनी पहलुओं को लेकर जानकारी दी जाती है और सरकारी योजनाओं के बारे में भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। राजनैतिक और सामाजिक रूप से पिछड़े दलितों के लिए ये जानकारी काफी फायेदेमंद साबित हो रही है। इतना ही नहीं भीम मेले में दलित युवाओं को आत्मरक्षा के गुर भी सिखाए जा रहे हैं । जिससे युवा सामाजिक उत्पीड़न का प्रतिकार कर सकें ।

बाबा साहेब की 18 बाते

14 अप्रैल को पूरे विश्व मे बाबा साहेब की जयन्ती बड़े धूम धाम से मनाई जाती  है, और यह भारत के इतिहास का वह ऐतिहासिक दिन है जब सन् 1891 में भीमराव अंबेडकर का जन्म मऊ, मध्य प्रदेश में हुआ था. “बाबा साहेब” के नाम से बाद में प्रचलित हुए इस शख़्स के बारे में आज कुछ भी कहना और लिखना सूरज को दीपक दिखाने जैसा है. मगर सब कुछ हमेशा से ऐसा ही नहीं था. बाबा साहेब को पूरा देश जिस एक चीज़ के लिए जानता है वो यह है कि वे भारत राष्ट्र के संविधान निर्माता थे और इसी परिप्रेक्ष्य में उनकी दूरदृष्टि और व्यापकता को नज़रअंदाज किया जाता है. बाबा साहेब का जन्म हिन्दू धर्म की महार जाति में हुआ था, जिसे तब के समाज में अछूत का दर्जा दिया गया था. मगर आज आज़ादी के कई वर्षों के बाद भी स्थितियाँ बिलकुल से बदल गई हों ऐसा कतई नहीं है. आज भी हमारे समाज में धार्मिक और जातिगत गैरबराबरी बदस्तूर जारी है. और इसी गैरबराबरी को हटाने के लिए बाबा साहेब अपनी अंतिम सांस तक अनवरत लड़ते रहे और उनका ये संदेश आज़ादी के दौरान जितना प्रासंगिक लगता था, आज उससे कहीं ज्यादा प्रासंगिक प्रतीत होता है.

शिक्षित बनो! संगठित रहो! संघर्ष करो!

1. मैं ऐसे धर्म को मानता हूँ जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता है.2. जीवन लम्बा होने के बजाय महान होना चाहिए .3. एक महान व्यक्ति एक प्रतिष्ठित व्यक्ति से अलग है क्योंकि वह समाज का सेवक बनने के लिए तैयार रहता है. 4. दिमाग का विकास मानव अस्तित्व का परम लक्ष्य होना चाहिए. 5. हम सबसे पहले और अंत में भारतीय हैं.
6. हिंदू धर्म में विवेक, कारण और स्वतंत्र सोच के विकास के लिए कोई गुंजाइश नहीं है 7. मनुष्य नश्वर है. ऐसे विचार होते हैं. एक विचार को प्रचार-प्रसार की ज़रूरत है जैसे एक पौधे में पानी की ज़रूरत होती है. अन्यथा दोनों मुरझा जायेंगे और मर जायेंगे.

8. मैं एक समुदाय की प्रगति का माप महिलाओं द्वारा हासिल प्रगति की डिग्री द्वारा करता हूँ. 9. इतिहास बताता है कि जहाँ नैतिकता और अर्थशास्त्र में संघर्ष होता है वहां जीत हमेशा अर्थशास्त्र की होती है. निहित स्वार्थों को स्वेच्छा से कभी नहीं छोड़ा गया है जब तक कि पर्याप्त बल लगा कर मजबूर न किया गया हो. 10. हर व्यक्ति जो “MILL” का सिद्धांत जानता है, कि एक देश दूसरे देश पर राज करने में फिट नहीं है, उसे ये भी स्वीकार करना चाहिये कि एक वर्ग दूसरे वर्ग पर राज करने में फिट नहीं है. 11. लोग और उनके धर्म सामाजिक नैतिकता के आधार पर सामाजिक मानकों द्वारा परखे जाने चाहिए. अगर धर्म को लोगों के भले के लिये आवश्यक वस्तु मान लिया जायेगा तो और किसी मानक का मतलब नहीं होगा.
12. एक सफल क्रांति के लिए सिर्फ़ असंतोष का होना काफ़ी नहीं है. आवश्यकता है राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों के महत्व, ज़रुरत व न्याय का पूर्णतया गहराई से दोषरहित होना  13. यदि हम एक संयुक्त एकीकृत आधुनिक भारत चाहते हैं तो सभी धर्मों के धर्मग्रंथों की संप्रभुता का अंत होना चाहिए. 14. यदि मुझे लगा कि संविधान का दुरुपयोग किया जा रहा है, तो मैं इसे सबसे पहले जलाऊंगा.
15. जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता नहीं हासिल कर लेते,कानून आपको जो भी स्वतंत्रता देता है वो आपके लिये बेमानी है. 16. समानता एक कल्पना हो सकती है, लेकिन फिर भी इसे एक गवर्निंग सिद्धांत रूप में स्वीकार करना होगा. 17. राजनीतिक अत्याचार सामाजिक अत्याचार की तुलना में कुछ भी नहीं हैं और एक सुधारक जो समाज को खारिज कर देता है वो सरकार को खारिज कर देने वाले राजनीतिज्ञ से ज्यादा साहसी है. 18. अपने भाग्य के बजाय अपनी मजबूती पर विश्वास करो.

नवरत्न मन्डुसिया

खोरी गांव के मेघवाल समाज की शानदार पहल

  सीकर खोरी गांव में मेघवाल समाज की सामूहिक बैठक सीकर - (नवरत्न मंडूसिया) ग्राम खोरी डूंगर में आज मेघवाल परिषद सीकर के जिला अध्यक्ष रामचन्द्...