गुरुवार, 23 मार्च 2017

पुरुषोत्तम मेघवाल ने छोड़ी दस से ज्यादा बड़ी सरकारी नौकरियाँ और 150 से ज्यादा युवाओं को बनाया आई.ए.एस & आई.पी.एस

 उच्च शिक्षित होने के बावजूद इन युवाअों ने कोई बड़ा सरकारी पद और किसी कंपनी में नौकरी कर बड़ी सैलरी पाने का सपना नहीं संजोया। गोल्ड मेडलिस्ट,एमटेक और प्रशिक्षित आईएएस होने के बाद भी सभी में कुछ अलग करने की चाहत है।
मीनल मुंशी,दिल्ली के आईआईटीएम से एमबीए(गोल्ड मेडलिस्ट)हैं। विजय पाटीदार,एमटेक हैं तो वहीं पुरुषोत्तम मेघवाल प्रशिक्षित आईएएस। ये चंद नाम बानगीभर है...राजधानी में ऐसे हजारों  से अधिक युवा हैं,जो अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए निर्धन बच्चों व अन्य विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। और खास बात तो यह है ॥ की पुरुषोत्तम मेघवाल ने अब तक बड़ी से बड़ी नौकरियों को छोड़कर अबतक 150 युवाओं को आई.ए एस और आई .पी.एस बनाया है और अभी इनका नीमच (मध्यप्रदेश ) मे मेघवाल निःशुल्क के नाम से कोचिंग सेंटर है  जिसमे हजारो युवा कोचिंग कर रहे है 
इन्होंने बीड़ा उठाया गरीब परिवारों के बच्चों को निशुल्क पढ़ाने का। इनमें से कुछ ऐसे हैं,जिन्होंने सरकारी और गैर सरकारी नौकरी कुछ ही दिन करने के बाद छोड़ दी। अब वे इसे मिशन के रूप में अपनाते हुए बच्चों को शिक्षित व संस्कारवान बनाने के काम में जुटे हैं। और हमे ऐसे युवा पर गर्व करना चाहिये की आज के ज़माने मे निःशुल्क सेवायें दे रहे है  और सबसे बड़ी बात यह भी है की यह युवा गरीबो की सेवा भी करते है यदि किसी भी गरीब की फरियाद पुलिस या अन्य दफ्तर नही सुनता है तो उस दुःखद घड़ी मे उस गरीब का साथ पुर्षोतम मेघवाल देते है ॥ दोस्तो आजाद हिन्दुस्तान मे लोग आपसी स्वार्थ निकालते है लेकिन आज के ज़माने मे पुरुषोत्तम जी मेघवाल बिना स्वार्थ युवाओं को निःशुल्क सेवायें दे रहे है ॥
इन सबका कहना है कि वे पढ़-लिख कर कोई अच्छी नौकरी कर सकते थे,पर उनके मन में यह पीड़ा है कि वे तो परिवार के आर्थिक सहयोग से पढ़-लिख गए पर उन बच्चों का क्या,जो गरीब परिवारों के होने के कारण अच्छी शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते। ये सभी,जिसे जहां जगह मिली वहीं कक्षाएं लगाकर उन्हें मुफ्त में पढ़ा रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि उनकी तरह कई अन्य शिक्षित लोग शिक्षा को व्यवसाय का जरिया न बनाकर विद्यादान करेंगे। वे चाहते हैं कि हर सक्षम व्यक्ति एक-एक गरीब बच्चे को गोद लेकर उसकी पढ़ाई का जिम्मा ले। और वो गरीब बच्चा पढ़ लिख कर अपने माता पिता की सेवा करे

शिक्षा से सेवा का मन
पुरुषोत्तम मेघवाल शाजापुर में नायब तहसीलदार,कस्टम एंड सेंट्रल एक्साइज में असिस्टेंट कमिश्नर व नीमच के सरकारी काॅलेज में प्रोफेसर रह चुके हैं। पर उन्होंने ये सभी नौकरियां छोड़ दीं। वजह बताते हैं कि मुझे कुछ अलग करना था। आय के कुछ साधन बना रखे हैं। उनसे काम चल जाता है।
 एक साल अधिक समय से एमपी नगर स्थित गायत्री शक्तिपीठ मंदिर के एक बड़े हाल में हर गुरुवार व शुक्रवार शाम साढ़े छह से साढ़े आठ बजे तक कक्षा लगाकर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे करीब हजारों  बच्चों को निशुल्क कोचिंग दे रहे है ॥। गायत्री परिवार के साथ जुड़ने पर मुझे यह विचार आया। मंदिर ट्रस्ट ने मुझे यह जगह निशुल्क प्रदान की है।

मेघवंशी सायर जयपाल के पुत्र बाबा रामदेव जी महाराज थे

 सायर जयपाल एक दलित समुदाय के मेघवाल जाति व्यक्ति तथा पोखरन के जागीरदार राजा अजमल सिँह तंवर के घोड़ो को चराते थे| अवतारी बाबा रामदेव पीर का अवतरण उनके घर हुआ था। जिसे अवतार बताया गया जो एक रहस्य है। लेकिन ज्यादा तर लोगो को यह पता नही है ॥ की बाबा रामदेव जयपाल सायर मेघवाल के घर जन्मे थे और इस बात का राजस्थान उच्च न्यायालय ने मेघवाल समाज के पक्ष मे दिया गया की बाबा रामदेव जी महाराज मेघवाल समाज के जयपाल गौत्र मे जन्मे थे 
रहस्य:- बाबा रामदेव के जन्म के इतिहास में इस महान रहस्य को छिपाया गया है। जिसमें बाबा रामदेव पीर का अवतार राजा अजमल तथा माता मेणादे बताया गया है। बिना मां की कोख से किसी बच्चे का जन्म हो सकता है। बाबा रामदेव का अवतार नहीँ जन्म हुआ था। वो भी मेघवाल समुदाय मे जो प्रसिद्ध इतिहासकार रामचन्द्र कड़ेला ने 'अवतारवाद के शिकार लोक क्रान्तिकारी महामानव-बाबा रामसापीर' नामक अपनी कृति मे लिखा है। "सायर सुत मंगनी रा जाया, ज्यारी महिमा भारी भेंट कियो सुत अजमलजी ने, सायर ने बलिहारी। मेघरिखा संग तंवर वंश रा, भाग जागिया भारी दुनिया जाणे रामदेवजी ने अजमल घर अवतारी." इस रहस्य से सबसे पहले पर्दा जोधपुर के उत्तम आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी रामप्रकाशाचार्य जी ने अपनी किताब "रामदेव गप्प पुराण" तथा "ढोल में पोल" में किया। जिसमें बाबा रामदेव का जन्म सायर मेघवंशी के घर माता मंगनी की कोख से हुआ बताया गया। प्रसिद्ध दलित लेखिका कुसुम जी मेघवाल ने अपनी पुस्तक 'मेघवाल बाबा रामदेव' वर्ष 2006 में एक शोध ग्रन्थ - 'रामदेव पीर' एक पुनर्विचार में प्रकाशित हुआ जिसमें एक बात समान थी। सायर जयपाल मेघवाल तथा माता मगनी देवी थे। तथा बाड़मेर जिले के उण्डू काश्मीर गांव के रहने वाले थे। उण्डू काश्मीर में बाबा रामदेव का सायर मेघवाल के घर जन्म है। डाली बाई बाबा रामदेव की सगी बहन है।
बाबा रामदेव पीर के जन्म सम्बंधित मामला राजस्थान उच्च न्यायालय में गया जहा से फैसला मेघवाल समुदाय के पक्ष में हुआ। बाबा रामदेव मेघवाल है और वे सायर मेघवाल के पुत्र है।
सन्दर्भ

आजाद हिंदुस्तान मे एक नयी सोच बाड़मेर जिले के गाँव का सकारात्मक नशा मुक्ति क़दम

मे नवरत्न मन्डुसिया एक सकारात्मक जानकारी अपने ब्लॉग के माध्यम से उपलब्ध करवा रहा हूँ अक्सर होली के त्यौहार पर हर आदमी नशा करता है। लेकिन बाड़मेर के सीमावर्ती आसाड़ी गांव में रहने वाले मेघवाल समाज के  लोगो ने इस होली के दिन एक साथ जाजम पर बैठ कर एक ऐसा फैसला लिया की इस फ़ेसले से आने वाले दिनो मे युवाओं को सकरात्मक प्रभाव पड़ेगा जिसके कारण  यह बाड़मेर का आसाडि गाँव देश विदेश और राजस्थान मे  प्रशंसा हो रही है। दरअसल जानकारी के मुताबिक आसाड़ी गांव में मेघवाल समाज ने किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में किसी भी नशा नहीं करने का निर्णय लिया है। और इस निर्णय से समाज के लोग बहूत खुश नज़र आ रहे है दोस्तो आजाद हिंदुस्तान मे आपको ऐसे सकारात्मक तथ्य बहूत कम ही मिलेंगे और खासतोर से मेघवाल समाज लेकिन आसाडी गाँव के मेघवाल समाज के लोगो ने यह साबित कर दिया है की अब हम नशा नही करेंगे तो नही...ही करेंगे मेघवाल समाज की ओर से नशा मुक्ति पर आयोजित संगोष्ठी में विद्यार्थियों ने नशा नहीं करने और परिवार को भी नशा नहीं करने देने की शपथ ली
वो भी एक होली के शुभ अवसर पर यह शपथ ली  आयोजित कार्यक्रम में कहा कि नशा एक ऐसी बुराई है जो न सिर्फ व्यक्ति बल्कि उसके परिवार को भी तबाह कर देती है। समाज में पनप रहे अधिकांश अपराधों का कारण भी नशा है। कहा कि केवल व्यसन मुक्त व्यक्ति ही अच्छे समाज का निर्माण कर सकता है। और  नशा व्यक्ति के भविष्य को बर्बाद कर देता है। व्यक्ति से उसके जीवन के अमूल्य क्षण छीन लेता है। और वो अमूल्य क्षण वापिस नही आता है ॥
उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों से नियमानुसार 100 मीटर के अंदर सिगरेट, तंबाकू व अन्य नशीले पदार्थो की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। मेघवाल समाज के युवा साथियों ने मेघवाल समाज को इस दिशा में कार्रवाई के निर्देश दिए। संगोष्ठी का संचालन मुख्य रुप से मेघवाल समाज के लोगो ने  किया। मौके पर समाज के युवा और बुजुर्ग लोग शामिल थे और इस अवसर पर राजू मेघवाल और नरेश मेघवाल का भी योगदान रहा
इसके साथ ही अगर इस गांव में मेघवाल समाज का कोई भी व्यक्ति नशा करता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ जुर्माने का भी प्रावधान रखा है। आसाड़ी गांव निवासी नारणाराम मेघवाल ने जानकारी देते हुए बताया की होली के दिन गांव युवा वर्ग सहित बुजुर्गो ने नशे और बाल विवाह जैसी कई सामाजिक कुरतियां पर प्रतिबंध लगाने के बारे में विस्तार से चर्चा की और सभी ने इस पर सहमति दी उसके बाद ही इस तरह का निर्णय लिया गया है। इस दौरान अर्जुनराम,मखनाराम,मेहराराम,खीमाराम,किसनाराम,जेठाराम,कोजाराम,गोरखाराम,मानाराम,नेमाराम,अलाराम,रमेश,आत्माराम सहित कई लोग उपस्थित थे।
*नवरत्न मन्डुसिया की कलम से*

शनिवार, 11 फ़रवरी 2017

इतिहास में दर्ज है मेघवाल समाज की शौर्य गाथा, और रहन सहन और आजादी के बाद बसाने पड़े अलग गांव

आजाद हिंदुस्तान  में दलित मुद्दा गरमा चुका है। गुजरात में गाय की चमड़ी निकालने के आरोप में दलित युवकों की बेदर्दी से सरेराह पिटाई की गईं। लोग देखते रहे, इस घटना का वीडियो के मार्केट में आने के बाद हंगामा मच गया। उसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों से दलितों के प्रति हो रहे अत्याचार की बातें सामने आने लगीं। यह दासतांन इन्दौर की बताने जा रहा हूँ  जब यह ख़बर मेने पत्रिका न्यूज़ पेपर पर पढ़ी तो मेने इस दास्तांन को मेरे ब्लॉग mandusiya.blogspot.com पर पोस्ट करने का विचार किया और इन्दौर मे जाकर मेघवाल समाज के लोगो से जानकारी प्राप्त की जिसे मेने इस ब्लॉग पर पोस्ट की है ॥ दोस्तो आजाद भारत मे सब लोगो का अलग अलग व्यवसाय है ॥ जिसे वो आसानी से कर रहे है

दलितों के दर्द की ये दास्तांन आपको परेशान कर देगी। यह दुखद स्थिति है देवास जिले के कई गावों में रहने वाले बलाई समुदाय के लोगों की। कभी अपनी शौर्यगाथा को इतिहास के पन्नों पर दर्ज करवा चुके बलाई समुदाय को मालवा-निमाड़ सहित प्रदेशभर में बसने के बाद कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
उस दौर में जब छूआछूत मानव जीवन पर हावी होने लगी, तब बलाई समुदाय के लोगों को मजबूरन अपने अलग गांव बसाने पड़े। ये गांव आज के दौर में भी पूर्ण रूप से प्रासंगिक है और यहां आज भी सवर्ण समुदाय का व्यक्ति रहना पसंद नहीं करता है।
आजादी के समय बाबा साहेब डॉ. भीमराव अबेडकर मसीहा के रूप में दलितों के अधिकारों की आवाज उठाने आगे आए, जिसके बाद उन्हें संविधान में समानता का अधिकार शामिल किया गया। लेकिन आज भी दलितों को समानता केवल शिक्षित वर्ग में ही मिल पाई। अशिक्षित और ग्रामीण इलाकों में आज भी दलितों को अपनी बस्तियां अलग ही बसानी पड़ रही है। देवास जिले के गांवों में तो स्थिति काफी दुष्कर है।

छूआछूत के कारण समुदाय के ही बसे थे गांव

करीब 40 से 50 के दशक में सामाजिक भेदभाव इतना अधिक था, कि समुदाय के लोगों को अपने गांव अलग बसाकर रहना पड़ता था। ऐसे गांव आज भी हमारे बीच हैं, जहां सिर्फ मेघवाल समुदाय के ही घर है। देवास जिले में फतेहपुर खेड़ा, कमलापुर और लक्ष्मीपुरा इसके उदाहरण है ॥
हमारे बचपन में हमने हर जगह छूआछूत सहन की है। यही कारण है कि समुदाय के लोगों को अपने अलग गांव बसाने पड़े थे, लेकिन आज मेघवाल समाज ने बदलते समय के साथ समृद्धि और सम्मान भी हासिल किया है। लक्ष्मीपुरा के रहने वाले 70 वर्षिय लालसिंह मेघवाल ने बताया कि लेकिन जैसे-जैसे समय बदला हालात सुधरते गए। शिक्षा के प्रसार से छूआछूत भी कम होती गई।
गांवों से शिक्षा और रोजगार की तलाश में शहरी क्षेत्र में पलायन किया तो वहां माहौल और बदल गया। शहरों में समुदाय के लोगों को देखने के लिए लोगों की अलग निगाह नहीं रही। हालांकि कुछ दूषित सोच रखने वाले लोग आज भी भेदभाव करने में पीछे नहीं हटते हैं। ऐसे में कई परिवार तो शहरों में ही अच्छा रोजगार पाकर वहीं बस गए। आज समुदाय के लोगों ने अच्छे-खासे समृद्ध है। जबकि आजादी के बाद वाले दौर में हमारे पास न अच्छे घर थे और न ही आजीविका के लिए अच्छे संसाधन थे।
अब समृद्धि की ओर मेघवाल समाज
शिक्षा के प्रसार के बाद मेघवाल समाज आज समृद्धि की ओर कदम बढ़ा रहा है। उस दौर में जहां समाज को हिराकत की नजर से देखा जाता था, वहीं आज समाज की नई पीढि़ उच्च शिक्षा ले रही है। यही नहीं बेटियां और बहुएं भी पढऩे में पीछे नहीं है। लक्ष्मी पुरा के 66 वर्षिय बाबूलाल मालवीय बताते हैं कि समाज के लोग अब काफी तरक्की कर रहे है। आज भूखमरी जैसी स्थिति नहीं है। समाज के लोगों के पास स्वयं के घर है, आजीविका के लिए खेत है।


टूटती परंपराओं से बिगड़ी सेहत
मेघवाल  समुदाय के लोगों ने समाज की मुख्यधारा में शामिल होने की कवायद की है, लेकिन वहीं समुदाय की प्राचीन परंपराओं से दूर जाने से सेहत में भी बदलाव आता गया। जानकार बताते हैं कि समुदाय बेवर पद्धति की खेती से मुड़कर आधुनिक खेती करने लगा, जिसके कारण पोषण आहार में वे सारे पोषक तत्व शामिल नहीं हो पाए जो बेवर खेती पद्धति से उगाए गए 56 प्रकार के अनाजों से पौषण होता था। यह कारण है कि आज बलाई समुदाय के बच्चों में भी कुपोषण देखा जा रहा है।

विपरित हालातों से संघर्ष कर पाया मुकाम
राजस्थान से आने के बाद समाज के लोगों की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय थी, जिसके कारण ही उन्हें सामाजिक भेदभाव का सामना भी करना पड़ा। मेघवाल  समाज का इतिहास रखने वाले राजेश बामनिया बताते हैं कि मप्र में आने के दौरान बलाई समाज के लोगों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी, लेकिन समाज के लोगों ने विपरित परिस्थितियों से संघर्ष किया। आज भी सवर्ण जाति के लोग उन्हें शादी-ब्याह में न्यौते पर नहीं बुलाते। कई स्कूलों में मध्यान्न भोजन के समय मासूम बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया जा रहा है। इन सभी के चलते आने वाली पीढ़ि के सामने कांटों भरा रास्ता है। दलित समुदाय के लोग आज भी समानता की उम्मीद में संविधान की ओर टकटकी लगाए देख रहे हैं। और यहाँ इन्दौर मे बलाई (मेघवाल ) समाज के लोगो ने एक अच्छा योगदान भी दिया है ॥

रविवार, 18 दिसंबर 2016

2001 से कुरुतीयो को मिटाने का संकल्प ले रहे सुरेरा के मेघवाल समाज के लोग

राजस्थान के सीकर  जिले के दाँतारामगढ़ तहसील के सुरेरा  गांव के मेघवाल समाज के मन्डुसिया परिवार और छेड़वाल परिवार के लोगों ने मृत्युभोज की परंपरा खत्म कर यह साबित कर दिया है कि अगर समाज ठान ले, तो कोई काम मुश्किल नहीं होता।
जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर सुरेरा  गांव में भी मृत्युभोज की परंपरा थी, मगर गांव के मेघवाल समाज के बुजर्गों और युवाओं ने आदर्श ग्राम की संकल्पना को देखा और उसी के आधार पर गांव में मृत्युभेाज न कराने का मन बनाया।
पिछले 16 साल से मृत्युभोज बंद है। इस प्रथा में खर्च होने वाला धन गांव की गौशाला को दान में दिया जाता है। तथा कुछ हिस्सा अपनी बहन बेटियों की पढाई पर खर्च करते है यहां के 100 फीसदी घरों में शौचालय है। इतना ही नहीं गांव में कई मुद्दों और विवादों को भी आपसी बातचीत से निपटा लिया जाता है।
सुरेरा ग्राम के मेघवाल समाज के युवा और बुजर्गों की एक ही सोच है की हम मेघवाल समाज को आगे बढ़ायेंगे सुरेरा के मेघवाल समाज के   निवासीयो ने बताया कि उनके यहां बदलाव की शुरुआत 2001में हुई। वे अपने समाज के साथियों के साथ मिलकर इस मिसाल को आगे बढ़ाया  मेरे मेघवाल समाज के बंधुओं मे नवरत्न मन्डुसिया आपके सामाने कुरुतीयो को मिटाने वाली पोस्ट शेयर कर रहा हूँ तथा  आदर्श ग्राम की संकल्पना को समझा और तय किया कि वे भी इसे अपने गांव में लागू करेंगे।
मेघवाल समाज के बुजर्गों ने  बताया की कि सूरेरा मे इसी तरह छोटे-छोटे दान से एक साधना कक्ष भी यहां बनाया गया है। और सुरेरा मे मेघवाल समाज के श्मशान घाट मे बड़ी पानी की टंकी का निर्माण भी करवाया गया तथा यहाँ बच्चों के लिए संस्कारशाला भी चलती है।
मेघवाल समाज की मीटिंग मे युवा साथी और बच्चे 



गांव की दुकानों पर तंबाकू से जुड़े उत्पाद न के बराबर ही बिकते हैं। गांव के पास चार-पांच साल पहले अवैध शराब की दुकान खुली थी, लेकिन लोगों ने उसे बंद करा दिया। लोग पर्यावरण को लेकर बहुत सजग हैं। परिवार में जन्मदिन और पूर्वजों की याद में गांव का हर व्यक्ति एक पौधा लगाता है। इससे गांव काफी हरा-भरा हो गया। और मन्डुसिया और छेड़वाल  परिवार सामाजिक नव-क्रांति का कार्य कर रहा है I
और यहाँ इस म्रत्यु भोज के अलावा बाल विवाह चुचूक प्रथा आदि बंद है ॥

बुधवार, 19 अक्टूबर 2016

भगवाना राम कादीया का नाम कर्षिमंडी अध्यक्षों मे चर्चा मे

नागौर कर्षि मंडी अध्यको मे भगवाना राम कादीया का नाम चर्चा मे आ रहा है ॥

राजस्थान मे दलित मशीहा के नाम से मशहूर भगवाना राम कादीया का नाम इस बार कर्षि मंडी अध्यक्षो मे फ़िर से चर्चा मे आ गया है ॥
दोस्तो भगवाना राम कादीया सामान्य जीवन व्यापन करने वाले एक साधारण व्यक्ति है ॥ इनको नागौर जिले की बात की जाये तो सभी लोग इनको व्यक्तिगत रुप से जानते है ॥ इसी कारण कादीया जी का नाम कर्षि मंडी अध्यक्ष के रुप मे उभरा है ॥ कादीया को जिले मे कई प्रकार की जिम्मदारिया दे रखी है ॥ और
कर्षि मंडी अध्यक्ष का चुनाव वैसे तो कई जिलों में पद एवं गरिमा का रुप ले चुका है लेकिन इस जिले में जिला कर्षि मंडीअध्यक्ष का पद हथियाने से ज्यादा नागौर  में  कई  पार्टीयो का प्रयास एक दूसरे  प्रत्याशी कादीया से दूर रखने की कवायद में लगी है। क्यों की इनके सामने जीत पाना मुश्किल है ॥  इसके लिए पार्टीनेता, कार्यकर्ता और रणनीतिकार गोटे बिछाने में जुट गए हैं। की भगवाना राम कादीया को जिताकर कर्षि मंडी अध्यक्ष बनाये और भगवाना राम कादीया को जिताने के लिये इनका ग्रूप रात दिन मेहनत कर रहे है ॥  बागी तेवर अपनाये नेता भी भगवाना राम कादीया  की टिकट पर सहमत है इस शर्त पर लेने को तैयार हैं की उन्हें जिला कर्षि मंडी के चुनाव में पार्टी प्रत्याशी बनाया जाय।चर्चा में यह भी चल रहा है कि भगवाना राम कादीया को ही चुनावी मेदान मे उतारा जाये   तथा जिला नागौर के चुनाव में मुख्य मुकाबला मुख्य रुप से भगवाना राम कादीया का ही माना जा रहा है ॥ और इनके नाम से कस्बे मे खुशियों से संयोजित हो रहे है ॥

नवरत्न मंदुसिया की कलम से  ✅✅✅www.mandusiya.blogspot.com

सोमवार, 12 सितंबर 2016

अपने अधिकार

 IPC में धाराओ का मतलब
दोस्तो आजाद भारत मे सभी लोग आजादी चाहते है ॥ और भारत रत्न डॉक्टर भीव राव अम्बेडकर पर हमे गर्व करना चाहिए जिसने आजाद हिन्दुस्थान मे सभी लोगो को जीना सिखाया और अपने अधिकारों की महत्वकांक्षा सिखाई  आइये विस्तार से जाने अपने अधिकार दोस्तो मे अपने ब्लॉग www.mandusiya.blogspot.com पर अपने अधिकारों की अपडेट देता रहूंगा
धारा 307 = हत्या की कोशिश धारा 302 =हत्या का दंड धारा 376 = बलात्कार धारा 395 = डकैती धारा 377= अप्राकृतिक कृत्य धारा 396= डकैती के दौरान हत्याधारा 120= षडयंत्र रचना धारा 365= अपहरण धारा 201= सबूत मिटाना धारा 34= सामान आशय धारा 412= छीनाझपटी धारा 378= चोरी धारा 141=विधिविरुद्ध जमाव धारा 191= मिथ्यासाक्ष्य देना धारा 300= हत्या करना धारा 309= आत्महत्या की कोशिश धारा 310= ठगी करना धारा 312= गर्भपात करना धारा 351= हमला करना धारा 354= स्त्री लज्जाभंग धारा 362= अपहरण धारा 415= छल करना धारा 445= गृहभेदंन धारा 494= पति/पत्नी के जीवनकाल में पुनःविवाह0 धारा 499= मानहानि धारा 511= आजीवन कारावास से दंडनीय अपराधों को करने के प्रयत्न के लिए दंड।
 हमारेे देश में कानूनन कुछ ऐसी हकीक़तें है, जिसकी जानकारी हमारे पास नहीं होने के कारण  हम अपने अधिकार से मेहरूम रह जाते है।

तो चलिए ऐसे ही कुछ  *5 रोचक फैक्ट्स* की जानकारी आपको देते है, जो जीवन में कभी भी उपयोगी हो सकती है.
 *1.  शाम के वक्त महिलाओं की गिरफ्तारी नहीं हो सकती*-
कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर, सेक्शन 46 के तहत शाम 6 बजे के बाद और सुबह 6 के पहले भारतीय पुलिस किसी भी महिला को गिरफ्तार नहीं कर सकती, फिर चाहे गुनाह कितना भी संगीन क्यों ना हो. अगर पुलिस ऐसा करते हुए पाई जाती है तो गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत (मामला) दर्ज की जा सकती है. इससे उस पुलिस अधिकारी की नौकरी खतरे में आ सकती है.
2. सिलेंडर फटने से जान-माल के नुकसान पर 40 लाख रूपये तक का बीमा कवर क्लेम कर सकते है*-
पब्लिक लायबिलिटी पॉलिसी के तहत अगर किसी कारण आपके घर में सिलेंडर फट जाता है और आपको जान-माल का नुकसान झेलना पड़ता है तो आप तुरंत गैस कंपनी से बीमा कवर क्लेम कर सकते है. आपको बता दे कि गैस कंपनी से 40 लाख रूपये तक का बीमा क्लेम कराया जा सकता है. अगर कंपनी आपका क्लेम देने से मना करती है या टालती है तो इसकी शिकायत की जा सकती है. दोषी पाये जाने पर गैस कंपनी का लायसेंस रद्द हो सकता है.
3. कोई भी हॉटेल चाहे वो 5 स्टार ही क्यों ना हो…
आप फ्री में पानी पी सकते है और वाश रूम इस्तमाल कर सकते है*-
इंडियन सीरीज एक्ट, 1887 के अनुसार आप देश के किसी भी हॉटेल में जाकर पानी मांगकर पी सकते है और उस हॉटल का वाश रूम भी इस्तमाल कर सकते है. हॉटेल छोटा हो या 5 स्टार, वो आपको रोक नही सकते. अगर हॉटेल का मालिक या कोई कर्मचारी आपको पानी पिलाने से या वाश रूम इस्तमाल करने से रोकता है तो आप उन पर कारवाई  कर सकते है. आपकी शिकायत से उस हॉटेल का लायसेंस रद्द हो सकता है.
4. गर्भवती महिलाओं को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता*-
मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट 1961 के मुताबिक़ गर्भवती महिलाओं को अचानक नौकरी से नहीं निकाला जा सकता. मालिक को पहले तीन महीने की नोटिस देनी होगी और प्रेगनेंसी के दौरान लगने वाले खर्चे का कुछ हिस्सा देना होगा. अगर वो ऐसा नहीं करता है तो  उसके खिलाफ सरकारी रोज़गार संघटना में शिकायत कराई जा सकती है. इस शिकायत से कंपनी बंद हो सकती है या कंपनी को जुर्माना भरना पड़ सकता है.
5. पुलिस अफसर आपकी शिकायत लिखने से मना नहीं कर सकता*-
आईपीसी के सेक्शन 166ए के अनुसार कोई भी पुलिस अधिकारी आपकी कोई भी शिकायत दर्ज करने से इंकार नही कर सकता. अगर वो ऐसा करता है तो उसके खिलाफ वरिष्ठ पुलिस दफ्तर में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. अगर वो पुलिस अफसर दोषी पाया जाता है तो उसे कम से कम 6 महीने से लेकर 1  साल तक की जेल हो सकती है या फिर उसे अपनी नौकरी गवानी पड़ सकती है.
इन रोचक फैक्ट्स को हमने आपके लिए ढूंढ निकाला है.
ये वो रोचक फैक्ट्स है, जो हमारे देश के कानून के अंतर्गत आते तो है पर हम इनसे अंजान है. हमारी कोशिश होगी कि हम आगे भी ऐसी बहोत सी रोचक बाते आपके समक्ष रखे, जो आपके जीवन में उपयोगी हो।

नवरत्न मन्डुसिया

खोरी गांव के मेघवाल समाज की शानदार पहल

  सीकर खोरी गांव में मेघवाल समाज की सामूहिक बैठक सीकर - (नवरत्न मंडूसिया) ग्राम खोरी डूंगर में आज मेघवाल परिषद सीकर के जिला अध्यक्ष रामचन्द्...