गुरुवार, 23 मार्च 2017

आजाद हिंदुस्तान मे एक नयी सोच बाड़मेर जिले के गाँव का सकारात्मक नशा मुक्ति क़दम

मे नवरत्न मन्डुसिया एक सकारात्मक जानकारी अपने ब्लॉग के माध्यम से उपलब्ध करवा रहा हूँ अक्सर होली के त्यौहार पर हर आदमी नशा करता है। लेकिन बाड़मेर के सीमावर्ती आसाड़ी गांव में रहने वाले मेघवाल समाज के  लोगो ने इस होली के दिन एक साथ जाजम पर बैठ कर एक ऐसा फैसला लिया की इस फ़ेसले से आने वाले दिनो मे युवाओं को सकरात्मक प्रभाव पड़ेगा जिसके कारण  यह बाड़मेर का आसाडि गाँव देश विदेश और राजस्थान मे  प्रशंसा हो रही है। दरअसल जानकारी के मुताबिक आसाड़ी गांव में मेघवाल समाज ने किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में किसी भी नशा नहीं करने का निर्णय लिया है। और इस निर्णय से समाज के लोग बहूत खुश नज़र आ रहे है दोस्तो आजाद हिंदुस्तान मे आपको ऐसे सकारात्मक तथ्य बहूत कम ही मिलेंगे और खासतोर से मेघवाल समाज लेकिन आसाडी गाँव के मेघवाल समाज के लोगो ने यह साबित कर दिया है की अब हम नशा नही करेंगे तो नही...ही करेंगे मेघवाल समाज की ओर से नशा मुक्ति पर आयोजित संगोष्ठी में विद्यार्थियों ने नशा नहीं करने और परिवार को भी नशा नहीं करने देने की शपथ ली
वो भी एक होली के शुभ अवसर पर यह शपथ ली  आयोजित कार्यक्रम में कहा कि नशा एक ऐसी बुराई है जो न सिर्फ व्यक्ति बल्कि उसके परिवार को भी तबाह कर देती है। समाज में पनप रहे अधिकांश अपराधों का कारण भी नशा है। कहा कि केवल व्यसन मुक्त व्यक्ति ही अच्छे समाज का निर्माण कर सकता है। और  नशा व्यक्ति के भविष्य को बर्बाद कर देता है। व्यक्ति से उसके जीवन के अमूल्य क्षण छीन लेता है। और वो अमूल्य क्षण वापिस नही आता है ॥
उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों से नियमानुसार 100 मीटर के अंदर सिगरेट, तंबाकू व अन्य नशीले पदार्थो की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। मेघवाल समाज के युवा साथियों ने मेघवाल समाज को इस दिशा में कार्रवाई के निर्देश दिए। संगोष्ठी का संचालन मुख्य रुप से मेघवाल समाज के लोगो ने  किया। मौके पर समाज के युवा और बुजुर्ग लोग शामिल थे और इस अवसर पर राजू मेघवाल और नरेश मेघवाल का भी योगदान रहा
इसके साथ ही अगर इस गांव में मेघवाल समाज का कोई भी व्यक्ति नशा करता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ जुर्माने का भी प्रावधान रखा है। आसाड़ी गांव निवासी नारणाराम मेघवाल ने जानकारी देते हुए बताया की होली के दिन गांव युवा वर्ग सहित बुजुर्गो ने नशे और बाल विवाह जैसी कई सामाजिक कुरतियां पर प्रतिबंध लगाने के बारे में विस्तार से चर्चा की और सभी ने इस पर सहमति दी उसके बाद ही इस तरह का निर्णय लिया गया है। इस दौरान अर्जुनराम,मखनाराम,मेहराराम,खीमाराम,किसनाराम,जेठाराम,कोजाराम,गोरखाराम,मानाराम,नेमाराम,अलाराम,रमेश,आत्माराम सहित कई लोग उपस्थित थे।
*नवरत्न मन्डुसिया की कलम से*

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नवरत्न मन्डुसिया

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