रविवार, 18 दिसंबर 2016

2001 से कुरुतीयो को मिटाने का संकल्प ले रहे सुरेरा के मेघवाल समाज के लोग

राजस्थान के सीकर  जिले के दाँतारामगढ़ तहसील के सुरेरा  गांव के मेघवाल समाज के मन्डुसिया परिवार और छेड़वाल परिवार के लोगों ने मृत्युभोज की परंपरा खत्म कर यह साबित कर दिया है कि अगर समाज ठान ले, तो कोई काम मुश्किल नहीं होता।
जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर सुरेरा  गांव में भी मृत्युभोज की परंपरा थी, मगर गांव के मेघवाल समाज के बुजर्गों और युवाओं ने आदर्श ग्राम की संकल्पना को देखा और उसी के आधार पर गांव में मृत्युभेाज न कराने का मन बनाया।
पिछले 16 साल से मृत्युभोज बंद है। इस प्रथा में खर्च होने वाला धन गांव की गौशाला को दान में दिया जाता है। तथा कुछ हिस्सा अपनी बहन बेटियों की पढाई पर खर्च करते है यहां के 100 फीसदी घरों में शौचालय है। इतना ही नहीं गांव में कई मुद्दों और विवादों को भी आपसी बातचीत से निपटा लिया जाता है।
सुरेरा ग्राम के मेघवाल समाज के युवा और बुजर्गों की एक ही सोच है की हम मेघवाल समाज को आगे बढ़ायेंगे सुरेरा के मेघवाल समाज के   निवासीयो ने बताया कि उनके यहां बदलाव की शुरुआत 2001में हुई। वे अपने समाज के साथियों के साथ मिलकर इस मिसाल को आगे बढ़ाया  मेरे मेघवाल समाज के बंधुओं मे नवरत्न मन्डुसिया आपके सामाने कुरुतीयो को मिटाने वाली पोस्ट शेयर कर रहा हूँ तथा  आदर्श ग्राम की संकल्पना को समझा और तय किया कि वे भी इसे अपने गांव में लागू करेंगे।
मेघवाल समाज के बुजर्गों ने  बताया की कि सूरेरा मे इसी तरह छोटे-छोटे दान से एक साधना कक्ष भी यहां बनाया गया है। और सुरेरा मे मेघवाल समाज के श्मशान घाट मे बड़ी पानी की टंकी का निर्माण भी करवाया गया तथा यहाँ बच्चों के लिए संस्कारशाला भी चलती है।
मेघवाल समाज की मीटिंग मे युवा साथी और बच्चे 



गांव की दुकानों पर तंबाकू से जुड़े उत्पाद न के बराबर ही बिकते हैं। गांव के पास चार-पांच साल पहले अवैध शराब की दुकान खुली थी, लेकिन लोगों ने उसे बंद करा दिया। लोग पर्यावरण को लेकर बहुत सजग हैं। परिवार में जन्मदिन और पूर्वजों की याद में गांव का हर व्यक्ति एक पौधा लगाता है। इससे गांव काफी हरा-भरा हो गया। और मन्डुसिया और छेड़वाल  परिवार सामाजिक नव-क्रांति का कार्य कर रहा है I
और यहाँ इस म्रत्यु भोज के अलावा बाल विवाह चुचूक प्रथा आदि बंद है ॥

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नवरत्न मन्डुसिया

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