सोमवार, 26 मार्च 2012

पूर्व गृहमंत्री मेघवाल का स्वागत

नपानिय पंचायत मुख्यालय पर पूर्व गृहमंत्री कैलाश मेघवाल का भाजपा कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। इस मौके पर सरपंच दलीचंद सालवी, पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि विजयसिंह, उपसरपंच गोपीलाल गाडरी, रामलाल मेनारिया, भंवरलाल मेनारिया, अंबालाल मेनारिया, मांगीलाल सुखवाल, गोवर्धनलाल सालवी, सत्यनारायण सोमानी समेत भाजपा कार्यकर्ता व ग्रामवासी मौजूद थे।

मेघवाल समाज की बैठक

बूंदी-!-मेघवाल समाज की बैठक रविवार को रामदेव बाबा के स्थान पर दोपहर 12 बजे आयोजित होगी। अध्यक्ष भंवरलाल ने बताया कि बैठक में विधायक कोष से स्वीकृत राशि से मंदिर परिसर में चारदीवारी निर्माण में आ रहे गतिरोध, अतिक्रमण हटाने को लेकर चर्चा की जाएगी। साथ ही छात्रावास निर्माण करने व समाज में व्याप्त कुरीतियां दूर करने को लेकर विचार—विमर्श किया जाएगा।

शनिवार, 24 मार्च 2012

हक के लिए ढंग से लड़ना होगा : मेघवाल

राजनीतिक दलों ने अपने लाभ के लिए दलितों का भरपूर उपयोग किया है। दलित समाज आज भी याचक की भूमिका में खड़ा है। आरक्षण देने मात्र से दलितों का भला नहीं हो गया। अब कमजोर तबकों को उठकर अपने हक के लिए सही ढंग से लड़ाई लड़ना होगी। दलितों को सामाजिक न्याय पूरी तरह नहीं मिला है।


यह बात पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश मेघवाल ने नीमच के दशहरा मैदान में आयोजित सर्व मेघवंश सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। बारिश में भीगने के बावजूद श्री मेघवाल बोलते रहे। लोगों ने भी उन्हें धैर्यपूर्वक सुना। उन्होंने कहा कि मेघवंशियों को अन्य समुदायों की तुलना में राजनीति में आगे आने के अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने मेघवंशियों को चेताया कि शराब और नोटों के बदले वोट देने की कुप्रथा पर लगाम लगाएँ। देशभर में मेघवंशियों का जनजागरण अभियान चलाया गया है।


मेघवंश के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल डेनवाल ने कहा कि आज भी भारत में 25 करोड़ मेघवंशी गुमनामी की जिंदगी जी रहे हैं। उन्हें अपने हक के लिए आगे लाना हमारा उद्देश्य है। मेघवंश के राष्ट्रीय महामंत्री प्यारेलाल रांगोठा ने कहा कि मेघवंश को अपना इतिहास जानना चाहिए। सर्व मेघवंश की महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमिला एस कुमार साधौ ने कहा कि समाज में बालिकाओं को शिक्षित करें, उन्हें आगे आने के अवसर दें। समाज के विकास में महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है। प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र परिहार ने मेघवंश को आरक्षण देने, मेघवंश को धर्मशाला एवं छात्रावासों के लिए जमीन आवंटित करने सहित 9 मुद्दों का ज्ञापन पढ़ा, जिसे बाद में केंद्रीय प्रतिनिधियों को सौंपा गया। राष्ट्रीय महासचिव प्रभुलाल चंदेल ने मेघवंश के उत्थान के लिए शिक्षा को बढ़ावा देने की बात कही।


इससे पूर्व सर्व मेघवंश समाज द्वारा नगर में रविवार दोपहर 12 बजे आंबेडकर चौराहे से रैली निकाली गई। मुख्य मार्गों से होती हुई रैली दशहरा मैदान पर सभा में परिवर्तित हुई। रविदास भक्त मंडल उज्जैन द्वारा मीरा के भजनों की प्रस्तुति दी गई। इससे पूर्व मेघ चालीसा का पाठ किया गया। संचालन किशोर जेवरिया ने किया।

मेघवाल समाज का सम्मेलन

मेघवाल समाज द्वारा 6 फरवरी को ग्राम रेहगून में जनजागृति महासम्मेलन रखा गया है। इसमें मुख्य अतिथि बीकानेर (राजस्थान) के सांसद अर्जुनराम मेघवाल, मप्र शासन के मंत्री इंद्रेश भजभिये, बड़वानी सांसद मकनसिंह सोलंकी और विशेष अतिथि जिपं अध्यक्ष बलवंत पटेल एवं जिला भाजपा अध्यक्ष एस. वीरास्वामी होंगे। बाबूलाल सोलंकी (रेहगून) एवं कालूराम मेराना (बालकुआँ) ने बताया कि सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य समाज में जनजागृति लाना है। -निप्र

शुक्रवार, 9 मार्च 2012

श्रीमती मंजू मेघवाल

पुष्कर (अजमेर) में 20 अप्रैल,1977 को जन्मी श्रीमती मंजू मेघवाल एम.ए. (लोक प्रशासन) तक शिक्षित हैं। इनका विवाह श्री ओमप्रकाश मेघवाल के साथ हुआ तथा आपके दो पुत्र हैं। पेशे से व्यवसायी श्रीमती मेघवाल तेरहवीं राजस्थान विधानसभा के लिए जायल (नागौर) विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुई।
    
     श्रीमती मेघवाल ने बिना राजनितिक पृष्ठ भूमि के उत्तरोतर सफलता हासिल की हैं। वर्ष 2000 में जायल पंचायत समिति में निर्विरोध पंचायत समिति सदस्य चुनी गई। इसी के साथ वे निर्विरोध प्रधान निर्वाचित हुई। प्रधान का कार्यकाल पूर्ण होते ही इन्होंने विधानसभा चुनाव में अपनी दावेदारी जताई। लेकिन तब इन्हें टिकिट नहीं दिया गया। इसके बावजूद   ये कांग्रेस संगठन के प्रति जुड़ाव रखते हुए महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष के रूप में पार्टी को अपनी सेवाएं देती रही। पिछले विधानसभा चुनाव में इन्हें टिकिट दिया गया। वे विधायक के रूप में निर्विचित हुई। ये राजस्थान विधानसभा की महिला एवं बाल कल्याण समिति तथा अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति की सदस्य रही हैं। दो माह पूर्व ही इन्हें कांग्रेस जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
   

       राज्यपाल श्री शिवराज पाटील ने 16 नवम्बर, 2011 को श्रीमती मेघवाल को राज्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई । इन्हें महिला एवं बाल विकास विभाग दिया गया हैं।

सोमवार, 6 फ़रवरी 2012





फरवरी 10, 2012 को गुजरात में मेघवार एक त्योहार मनाते हैं जो धणी मातंग देव जी के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. ‘मातंग’ शब्द का अर्थ मेघ है. इस अवसर पर वे 28 मेघों की पूजा करते हैं. यह जानकारी मुझे श्री नवीन भोइया से मिली जो अपने संगठन श्री अखिल कच्छ महेश्वरी विकास सेवा संघ के माध्यम से यह त्योहार इस बार बड़े स्तर पर मनाने की योजना बना रहे हैं.

उत्तर भारत में मेघों के पास मेघ ऋषि के जन्म दिवस की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है. चूँकि धणी मातंग देव एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व हैं जिनके बारे में साहित्य और लोक कथाओं में तारीखें उपलब्ध हैं अतः बहुत संभावना है कि उनके जन्मदिन का मेघ ऋषि के जन्मदिन से कोई परोक्ष संबंध हो. ऐसे में यदि विक्रमी संवत् की पहली तारीख को मेघऋषि का जन्मदिन मना लिया जाए तो असंगत नहीं होगा. मेघवंशी समुदाय इस पर विचार कर सकते हैं.

एक बड़ी खबर नवीन जी ने बताई है कि वे मार्च 2012 में एक संगोष्ठी आयोजित करेंगे जिसमें ऐसे विद्वान आमंत्रित होंगे जिन्होंने मेघवारों के धर्म बारमती पंथ (जिसकी शिक्षा को ‘जिनान’ (Ginan) कहा जाता है) पर शोध किया है. 4 विद्वान पीएचडी (डॉक्टरेट) डिग्री वाले हैं. एक फ्रेंच महिला (Francoise Mallison) शोधकर्ता को भी इस अवसर बुलाया गया है और उसने आने के लिए अपनी सहमति दे दी है. उम्मीद है कि इस आयोजन के दौरान मेघवंशियों के मूल धर्म पर प्रकाश डाला जाएगा जिसे मेघवारों ने सुरक्षित रखा है. क्योंकि मेघवंशी सिंधुघाटी सभ्यता से संबंधित हैं अतः धर्म के मूल में बौधधर्म के सिद्धांत मौजूद रहेंगे ही साथ ही प्रस्तुत किए जाने वाले शोध पत्रों से वे तथ्य सामने आने की संभावना है कि बारमती पंथ तक आते-आते उनमें किस प्रकार का विकासात्मक परिवर्तन हुआ है.

अपनी इंटरनेट यात्रा के दौरान मैंने जाना है कि मेघवार सिंधुघाटी से बिहार की ओर पलायन कर चुके मेघवंशी हैं जो बाद में क्षत्रिय जाति के रूप में गुजरात की ओर लौटे और बहुत बड़े क्षेत्र पर उन्होंने शासन किया. मातंग देव के जन्म दिवस पर वे जिन 28 मेघों की पूजा करते हैं संभव है कि वे मेघ सम्राट रहे हों या धार्मिक प्रमुख रहे हों या उनका राजा के रूप में ऐतिहासिक महत्व रहा हो जिसे आक्रमणकारी आर्य कबीलों ने इतिहास से हटा दिया लेकिन जिन्हें लोक परंपराओं के माध्यम से जनमानस ने याद रखा है.

आज मेरे समुदाय के लोग इस बात पर विश्वास नहीं कर पाते कि मेघ, मेघवाल और मेघवार वास्तव में मेघ ऋषि की ही संतानें हैं जिनका मूल एक है और जिनका गौरवशाली इतिहास रहा है. यद्यपि इतिहास नष्टप्रायः है तथापि उसकी कड़ियाँ जोड़ने का कार्य शोधार्थी कर रहे हैं भारत में भी और अमेरिका में भी. सिंधुघाटी सभ्यता की लिपि को अमेरिका में कंप्यूटर डिकोट करने में लगे हैं जो सिद्ध करेगा कि हम ऐसी सुशिक्षित सभ्यता से निकली जातियाँ हैं जिन्हें आक्रमणकारियों ने जबरन शिक्षा से दूर किया और आधुनिक इतिहास तक आते-आते उन्हें अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जन जातियों और अन्य पिछड़ी जातियों के रूप में एक योजना के तहत बाँट दिया ताकि हम आपस में एकता न कर सकें. परंतु समय आ रहा है कि इस ग़ुलामी की मानसिकता से निकल कर मेघवंशी आपस में राजनीतिक संपर्क बढ़ाएँगे.

नवीन भोइया जी ने आशा जताई है कि इस अवसर पर प्रस्तुत शोधग्रंथों को वे एक स्मारिका/पुस्तक रूप में छापेंगे. इससे मेघवंशियों के इतिहास में और पन्ने जुड़ेंगे.
कच्छ ज़िले के गाँधीधाम और अंजार ताल्लुका के अतििक्त भुज, मुंद्रा और मांडवी ताल्लुका और गाँवों में भी यह उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है जिसमें हज़ारों की संख्या में लोग भाग लेते हैं.

मेघवंश महासभा ने मुख्यमंत्री चौहान को लिखा पत्र

सुप्रीम कोर्ट ने चमार शब्द को अपमानसूचक और असंवैधानिक बताया है। प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट की भावना का सम्मान करें। मेघवंश महासभा ने मुुख्यमंत्री शिवराजङ्क्षसह चौहान और मुख्य सचिव को इस बारे में पत्र लिखा है। राष्ट्रीय महासचिव प्रभुलाल चंदेल, अध्यक्ष देवेंद्र परिहार ने मांग की कि प्रत्येक जिलों के कलेक्टरों को इस संबंध में निर्देश जारी किए जाएं। इस असंवैधानिक शब्द को विलोपित किया जाए।

Last Updated 01:01(07/01/12)

नवरत्न मन्डुसिया

खोरी गांव के मेघवाल समाज की शानदार पहल

  सीकर खोरी गांव में मेघवाल समाज की सामूहिक बैठक सीकर - (नवरत्न मंडूसिया) ग्राम खोरी डूंगर में आज मेघवाल परिषद सीकर के जिला अध्यक्ष रामचन्द्...