शनिवार, 11 फ़रवरी 2017

इतिहास में दर्ज है मेघवाल समाज की शौर्य गाथा, और रहन सहन और आजादी के बाद बसाने पड़े अलग गांव

आजाद हिंदुस्तान  में दलित मुद्दा गरमा चुका है। गुजरात में गाय की चमड़ी निकालने के आरोप में दलित युवकों की बेदर्दी से सरेराह पिटाई की गईं। लोग देखते रहे, इस घटना का वीडियो के मार्केट में आने के बाद हंगामा मच गया। उसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों से दलितों के प्रति हो रहे अत्याचार की बातें सामने आने लगीं। यह दासतांन इन्दौर की बताने जा रहा हूँ  जब यह ख़बर मेने पत्रिका न्यूज़ पेपर पर पढ़ी तो मेने इस दास्तांन को मेरे ब्लॉग mandusiya.blogspot.com पर पोस्ट करने का विचार किया और इन्दौर मे जाकर मेघवाल समाज के लोगो से जानकारी प्राप्त की जिसे मेने इस ब्लॉग पर पोस्ट की है ॥ दोस्तो आजाद भारत मे सब लोगो का अलग अलग व्यवसाय है ॥ जिसे वो आसानी से कर रहे है

दलितों के दर्द की ये दास्तांन आपको परेशान कर देगी। यह दुखद स्थिति है देवास जिले के कई गावों में रहने वाले बलाई समुदाय के लोगों की। कभी अपनी शौर्यगाथा को इतिहास के पन्नों पर दर्ज करवा चुके बलाई समुदाय को मालवा-निमाड़ सहित प्रदेशभर में बसने के बाद कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
उस दौर में जब छूआछूत मानव जीवन पर हावी होने लगी, तब बलाई समुदाय के लोगों को मजबूरन अपने अलग गांव बसाने पड़े। ये गांव आज के दौर में भी पूर्ण रूप से प्रासंगिक है और यहां आज भी सवर्ण समुदाय का व्यक्ति रहना पसंद नहीं करता है।
आजादी के समय बाबा साहेब डॉ. भीमराव अबेडकर मसीहा के रूप में दलितों के अधिकारों की आवाज उठाने आगे आए, जिसके बाद उन्हें संविधान में समानता का अधिकार शामिल किया गया। लेकिन आज भी दलितों को समानता केवल शिक्षित वर्ग में ही मिल पाई। अशिक्षित और ग्रामीण इलाकों में आज भी दलितों को अपनी बस्तियां अलग ही बसानी पड़ रही है। देवास जिले के गांवों में तो स्थिति काफी दुष्कर है।

छूआछूत के कारण समुदाय के ही बसे थे गांव

करीब 40 से 50 के दशक में सामाजिक भेदभाव इतना अधिक था, कि समुदाय के लोगों को अपने गांव अलग बसाकर रहना पड़ता था। ऐसे गांव आज भी हमारे बीच हैं, जहां सिर्फ मेघवाल समुदाय के ही घर है। देवास जिले में फतेहपुर खेड़ा, कमलापुर और लक्ष्मीपुरा इसके उदाहरण है ॥
हमारे बचपन में हमने हर जगह छूआछूत सहन की है। यही कारण है कि समुदाय के लोगों को अपने अलग गांव बसाने पड़े थे, लेकिन आज मेघवाल समाज ने बदलते समय के साथ समृद्धि और सम्मान भी हासिल किया है। लक्ष्मीपुरा के रहने वाले 70 वर्षिय लालसिंह मेघवाल ने बताया कि लेकिन जैसे-जैसे समय बदला हालात सुधरते गए। शिक्षा के प्रसार से छूआछूत भी कम होती गई।
गांवों से शिक्षा और रोजगार की तलाश में शहरी क्षेत्र में पलायन किया तो वहां माहौल और बदल गया। शहरों में समुदाय के लोगों को देखने के लिए लोगों की अलग निगाह नहीं रही। हालांकि कुछ दूषित सोच रखने वाले लोग आज भी भेदभाव करने में पीछे नहीं हटते हैं। ऐसे में कई परिवार तो शहरों में ही अच्छा रोजगार पाकर वहीं बस गए। आज समुदाय के लोगों ने अच्छे-खासे समृद्ध है। जबकि आजादी के बाद वाले दौर में हमारे पास न अच्छे घर थे और न ही आजीविका के लिए अच्छे संसाधन थे।
अब समृद्धि की ओर मेघवाल समाज
शिक्षा के प्रसार के बाद मेघवाल समाज आज समृद्धि की ओर कदम बढ़ा रहा है। उस दौर में जहां समाज को हिराकत की नजर से देखा जाता था, वहीं आज समाज की नई पीढि़ उच्च शिक्षा ले रही है। यही नहीं बेटियां और बहुएं भी पढऩे में पीछे नहीं है। लक्ष्मी पुरा के 66 वर्षिय बाबूलाल मालवीय बताते हैं कि समाज के लोग अब काफी तरक्की कर रहे है। आज भूखमरी जैसी स्थिति नहीं है। समाज के लोगों के पास स्वयं के घर है, आजीविका के लिए खेत है।


टूटती परंपराओं से बिगड़ी सेहत
मेघवाल  समुदाय के लोगों ने समाज की मुख्यधारा में शामिल होने की कवायद की है, लेकिन वहीं समुदाय की प्राचीन परंपराओं से दूर जाने से सेहत में भी बदलाव आता गया। जानकार बताते हैं कि समुदाय बेवर पद्धति की खेती से मुड़कर आधुनिक खेती करने लगा, जिसके कारण पोषण आहार में वे सारे पोषक तत्व शामिल नहीं हो पाए जो बेवर खेती पद्धति से उगाए गए 56 प्रकार के अनाजों से पौषण होता था। यह कारण है कि आज बलाई समुदाय के बच्चों में भी कुपोषण देखा जा रहा है।

विपरित हालातों से संघर्ष कर पाया मुकाम
राजस्थान से आने के बाद समाज के लोगों की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय थी, जिसके कारण ही उन्हें सामाजिक भेदभाव का सामना भी करना पड़ा। मेघवाल  समाज का इतिहास रखने वाले राजेश बामनिया बताते हैं कि मप्र में आने के दौरान बलाई समाज के लोगों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी, लेकिन समाज के लोगों ने विपरित परिस्थितियों से संघर्ष किया। आज भी सवर्ण जाति के लोग उन्हें शादी-ब्याह में न्यौते पर नहीं बुलाते। कई स्कूलों में मध्यान्न भोजन के समय मासूम बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया जा रहा है। इन सभी के चलते आने वाली पीढ़ि के सामने कांटों भरा रास्ता है। दलित समुदाय के लोग आज भी समानता की उम्मीद में संविधान की ओर टकटकी लगाए देख रहे हैं। और यहाँ इन्दौर मे बलाई (मेघवाल ) समाज के लोगो ने एक अच्छा योगदान भी दिया है ॥

रविवार, 18 दिसंबर 2016

2001 से कुरुतीयो को मिटाने का संकल्प ले रहे सुरेरा के मेघवाल समाज के लोग

राजस्थान के सीकर  जिले के दाँतारामगढ़ तहसील के सुरेरा  गांव के मेघवाल समाज के मन्डुसिया परिवार और छेड़वाल परिवार के लोगों ने मृत्युभोज की परंपरा खत्म कर यह साबित कर दिया है कि अगर समाज ठान ले, तो कोई काम मुश्किल नहीं होता।
जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर सुरेरा  गांव में भी मृत्युभोज की परंपरा थी, मगर गांव के मेघवाल समाज के बुजर्गों और युवाओं ने आदर्श ग्राम की संकल्पना को देखा और उसी के आधार पर गांव में मृत्युभेाज न कराने का मन बनाया।
पिछले 16 साल से मृत्युभोज बंद है। इस प्रथा में खर्च होने वाला धन गांव की गौशाला को दान में दिया जाता है। तथा कुछ हिस्सा अपनी बहन बेटियों की पढाई पर खर्च करते है यहां के 100 फीसदी घरों में शौचालय है। इतना ही नहीं गांव में कई मुद्दों और विवादों को भी आपसी बातचीत से निपटा लिया जाता है।
सुरेरा ग्राम के मेघवाल समाज के युवा और बुजर्गों की एक ही सोच है की हम मेघवाल समाज को आगे बढ़ायेंगे सुरेरा के मेघवाल समाज के   निवासीयो ने बताया कि उनके यहां बदलाव की शुरुआत 2001में हुई। वे अपने समाज के साथियों के साथ मिलकर इस मिसाल को आगे बढ़ाया  मेरे मेघवाल समाज के बंधुओं मे नवरत्न मन्डुसिया आपके सामाने कुरुतीयो को मिटाने वाली पोस्ट शेयर कर रहा हूँ तथा  आदर्श ग्राम की संकल्पना को समझा और तय किया कि वे भी इसे अपने गांव में लागू करेंगे।
मेघवाल समाज के बुजर्गों ने  बताया की कि सूरेरा मे इसी तरह छोटे-छोटे दान से एक साधना कक्ष भी यहां बनाया गया है। और सुरेरा मे मेघवाल समाज के श्मशान घाट मे बड़ी पानी की टंकी का निर्माण भी करवाया गया तथा यहाँ बच्चों के लिए संस्कारशाला भी चलती है।
मेघवाल समाज की मीटिंग मे युवा साथी और बच्चे 



गांव की दुकानों पर तंबाकू से जुड़े उत्पाद न के बराबर ही बिकते हैं। गांव के पास चार-पांच साल पहले अवैध शराब की दुकान खुली थी, लेकिन लोगों ने उसे बंद करा दिया। लोग पर्यावरण को लेकर बहुत सजग हैं। परिवार में जन्मदिन और पूर्वजों की याद में गांव का हर व्यक्ति एक पौधा लगाता है। इससे गांव काफी हरा-भरा हो गया। और मन्डुसिया और छेड़वाल  परिवार सामाजिक नव-क्रांति का कार्य कर रहा है I
और यहाँ इस म्रत्यु भोज के अलावा बाल विवाह चुचूक प्रथा आदि बंद है ॥

बुधवार, 19 अक्टूबर 2016

भगवाना राम कादीया का नाम कर्षिमंडी अध्यक्षों मे चर्चा मे

नागौर कर्षि मंडी अध्यको मे भगवाना राम कादीया का नाम चर्चा मे आ रहा है ॥

राजस्थान मे दलित मशीहा के नाम से मशहूर भगवाना राम कादीया का नाम इस बार कर्षि मंडी अध्यक्षो मे फ़िर से चर्चा मे आ गया है ॥
दोस्तो भगवाना राम कादीया सामान्य जीवन व्यापन करने वाले एक साधारण व्यक्ति है ॥ इनको नागौर जिले की बात की जाये तो सभी लोग इनको व्यक्तिगत रुप से जानते है ॥ इसी कारण कादीया जी का नाम कर्षि मंडी अध्यक्ष के रुप मे उभरा है ॥ कादीया को जिले मे कई प्रकार की जिम्मदारिया दे रखी है ॥ और
कर्षि मंडी अध्यक्ष का चुनाव वैसे तो कई जिलों में पद एवं गरिमा का रुप ले चुका है लेकिन इस जिले में जिला कर्षि मंडीअध्यक्ष का पद हथियाने से ज्यादा नागौर  में  कई  पार्टीयो का प्रयास एक दूसरे  प्रत्याशी कादीया से दूर रखने की कवायद में लगी है। क्यों की इनके सामने जीत पाना मुश्किल है ॥  इसके लिए पार्टीनेता, कार्यकर्ता और रणनीतिकार गोटे बिछाने में जुट गए हैं। की भगवाना राम कादीया को जिताकर कर्षि मंडी अध्यक्ष बनाये और भगवाना राम कादीया को जिताने के लिये इनका ग्रूप रात दिन मेहनत कर रहे है ॥  बागी तेवर अपनाये नेता भी भगवाना राम कादीया  की टिकट पर सहमत है इस शर्त पर लेने को तैयार हैं की उन्हें जिला कर्षि मंडी के चुनाव में पार्टी प्रत्याशी बनाया जाय।चर्चा में यह भी चल रहा है कि भगवाना राम कादीया को ही चुनावी मेदान मे उतारा जाये   तथा जिला नागौर के चुनाव में मुख्य मुकाबला मुख्य रुप से भगवाना राम कादीया का ही माना जा रहा है ॥ और इनके नाम से कस्बे मे खुशियों से संयोजित हो रहे है ॥

नवरत्न मंदुसिया की कलम से  ✅✅✅www.mandusiya.blogspot.com

सोमवार, 12 सितंबर 2016

अपने अधिकार

 IPC में धाराओ का मतलब
दोस्तो आजाद भारत मे सभी लोग आजादी चाहते है ॥ और भारत रत्न डॉक्टर भीव राव अम्बेडकर पर हमे गर्व करना चाहिए जिसने आजाद हिन्दुस्थान मे सभी लोगो को जीना सिखाया और अपने अधिकारों की महत्वकांक्षा सिखाई  आइये विस्तार से जाने अपने अधिकार दोस्तो मे अपने ब्लॉग www.mandusiya.blogspot.com पर अपने अधिकारों की अपडेट देता रहूंगा
धारा 307 = हत्या की कोशिश धारा 302 =हत्या का दंड धारा 376 = बलात्कार धारा 395 = डकैती धारा 377= अप्राकृतिक कृत्य धारा 396= डकैती के दौरान हत्याधारा 120= षडयंत्र रचना धारा 365= अपहरण धारा 201= सबूत मिटाना धारा 34= सामान आशय धारा 412= छीनाझपटी धारा 378= चोरी धारा 141=विधिविरुद्ध जमाव धारा 191= मिथ्यासाक्ष्य देना धारा 300= हत्या करना धारा 309= आत्महत्या की कोशिश धारा 310= ठगी करना धारा 312= गर्भपात करना धारा 351= हमला करना धारा 354= स्त्री लज्जाभंग धारा 362= अपहरण धारा 415= छल करना धारा 445= गृहभेदंन धारा 494= पति/पत्नी के जीवनकाल में पुनःविवाह0 धारा 499= मानहानि धारा 511= आजीवन कारावास से दंडनीय अपराधों को करने के प्रयत्न के लिए दंड।
 हमारेे देश में कानूनन कुछ ऐसी हकीक़तें है, जिसकी जानकारी हमारे पास नहीं होने के कारण  हम अपने अधिकार से मेहरूम रह जाते है।

तो चलिए ऐसे ही कुछ  *5 रोचक फैक्ट्स* की जानकारी आपको देते है, जो जीवन में कभी भी उपयोगी हो सकती है.
 *1.  शाम के वक्त महिलाओं की गिरफ्तारी नहीं हो सकती*-
कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर, सेक्शन 46 के तहत शाम 6 बजे के बाद और सुबह 6 के पहले भारतीय पुलिस किसी भी महिला को गिरफ्तार नहीं कर सकती, फिर चाहे गुनाह कितना भी संगीन क्यों ना हो. अगर पुलिस ऐसा करते हुए पाई जाती है तो गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत (मामला) दर्ज की जा सकती है. इससे उस पुलिस अधिकारी की नौकरी खतरे में आ सकती है.
2. सिलेंडर फटने से जान-माल के नुकसान पर 40 लाख रूपये तक का बीमा कवर क्लेम कर सकते है*-
पब्लिक लायबिलिटी पॉलिसी के तहत अगर किसी कारण आपके घर में सिलेंडर फट जाता है और आपको जान-माल का नुकसान झेलना पड़ता है तो आप तुरंत गैस कंपनी से बीमा कवर क्लेम कर सकते है. आपको बता दे कि गैस कंपनी से 40 लाख रूपये तक का बीमा क्लेम कराया जा सकता है. अगर कंपनी आपका क्लेम देने से मना करती है या टालती है तो इसकी शिकायत की जा सकती है. दोषी पाये जाने पर गैस कंपनी का लायसेंस रद्द हो सकता है.
3. कोई भी हॉटेल चाहे वो 5 स्टार ही क्यों ना हो…
आप फ्री में पानी पी सकते है और वाश रूम इस्तमाल कर सकते है*-
इंडियन सीरीज एक्ट, 1887 के अनुसार आप देश के किसी भी हॉटेल में जाकर पानी मांगकर पी सकते है और उस हॉटल का वाश रूम भी इस्तमाल कर सकते है. हॉटेल छोटा हो या 5 स्टार, वो आपको रोक नही सकते. अगर हॉटेल का मालिक या कोई कर्मचारी आपको पानी पिलाने से या वाश रूम इस्तमाल करने से रोकता है तो आप उन पर कारवाई  कर सकते है. आपकी शिकायत से उस हॉटेल का लायसेंस रद्द हो सकता है.
4. गर्भवती महिलाओं को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता*-
मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट 1961 के मुताबिक़ गर्भवती महिलाओं को अचानक नौकरी से नहीं निकाला जा सकता. मालिक को पहले तीन महीने की नोटिस देनी होगी और प्रेगनेंसी के दौरान लगने वाले खर्चे का कुछ हिस्सा देना होगा. अगर वो ऐसा नहीं करता है तो  उसके खिलाफ सरकारी रोज़गार संघटना में शिकायत कराई जा सकती है. इस शिकायत से कंपनी बंद हो सकती है या कंपनी को जुर्माना भरना पड़ सकता है.
5. पुलिस अफसर आपकी शिकायत लिखने से मना नहीं कर सकता*-
आईपीसी के सेक्शन 166ए के अनुसार कोई भी पुलिस अधिकारी आपकी कोई भी शिकायत दर्ज करने से इंकार नही कर सकता. अगर वो ऐसा करता है तो उसके खिलाफ वरिष्ठ पुलिस दफ्तर में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. अगर वो पुलिस अफसर दोषी पाया जाता है तो उसे कम से कम 6 महीने से लेकर 1  साल तक की जेल हो सकती है या फिर उसे अपनी नौकरी गवानी पड़ सकती है.
इन रोचक फैक्ट्स को हमने आपके लिए ढूंढ निकाला है.
ये वो रोचक फैक्ट्स है, जो हमारे देश के कानून के अंतर्गत आते तो है पर हम इनसे अंजान है. हमारी कोशिश होगी कि हम आगे भी ऐसी बहोत सी रोचक बाते आपके समक्ष रखे, जो आपके जीवन में उपयोगी हो।

शनिवार, 3 सितंबर 2016

वंशावली बाबा मेघवंशी रामदेव जी महाराज और सायर मेघवाल


बाबा रामदेव जी महाराज  मेघवाल है और इन तथ्यों से साबित होता है ॥ बाबा रामदेव जी महाराज  सायर मेघवाल  के ही पुत्र थे ॥ और बाबा रामदेव जी महाराज और सायर जी मेघवाल की वॅशावली जो निम्न है ॥

जाँभा (जयपाल) से --चन्दहल
चन्दहल जी से = बिगहङ जी
बिगहङ जी से = भोजराज जी
भोजराज जी के दौ पुत्रो का नाम
(1) सायर जी (2) अङसी जी
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सायर जी के पुत्र रामदेव जी थे
(ठाकुर अजमाल के आदेशानुसार सायर जी ने अपनै पुत्र रामदेव
को बिरम के पालणे मे सुलाया था - जिन्हे लोग "अजमल घर
अवतारी" के रुप मे जानते है )
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अङसी जी के दौ सन्तान थी ।
(1) पुत्री "डालीबाई"
(2) पुत्र "मुन्जा जी "
नोट( डाली ओर मुँजा जी के माता पिता का देहान्त हो जाने के
कारण - डाली ओर मुँजा जी को सायर जी ने "पुत्र 'पुत्री के रुप
मे स्वीकार कर गोद लिया था - ओर सायर जी ने
ही उनका पालन पोसन किया था )-
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डालीबाई ने शायर जी के सानिध्य मे ही भक्ति साधना की थी ।
ओर रामदेव जी से पुर्व समाधि ले ली थी ।
जिसकी समाधि पर भाई मुँजाजी के परिवार वॅशज पीढीदर
पीढी सेवा करते आयै है ..जिनके टिकायत परिवार
की वॅशावली निम्नानुसार है
-------------------------
सायर जी के बाद
मुन्जा जी से मोडा जी
मोडा जी से। डुँगर जी
डुँगर जी से। बीजल जी
बीजल जी से माला जी
माला जी से खीमा जी
खीमा जी से धन्ना जी
धन्ना जी से नॅगा जी
नॅगा जी से माना जी
माना जी से नाथा जी
नाथा जी से केशरा जी
केशरा जी से भूरा जी
भुरा जी से भीखा जी
भीखा जी से हरजी
हरजी से मुकना जी
मुकना जी से पुनम जी
पुनम जी से उत्तमचन्द जी
वर्तमान मे उत्तमचन्द जी का परिवार टिकायत है
स्वामी जी ने स्पष्ट कहा था
कि - बाबा रामदेव मेघवाल थे ।
इसिलिये -
(1) "बाबे रा रिखिया" केवल मेघवाल है ।- तॅवरो को क्यो नही ?
(2) बाबा का जम्मा जागरण आज भी केवल मेघवालो से
ही जगाया जाता है - ओर उन्ही को जम्मे मे प्रथम भोजन
कराया जाता है जिसे "रिखिया जीमावणा" कहा जाता है ।
तॅवरो को क्यो नही ?
(3) मारवाङ मे प्राचीन ओखाणे प्रचलित है कि -"रामदेव जी नै
मिलिया सो मेघ ही मेघ (मेघो रा देव रामदेव)
क्यो कहा गया ?
तॅवरो के विषय मे ऐसै ओखाणे क्यो नही कहै गये ?
(5) बिना माता पिता के कोई पालणे मे कैसे प्रकट हो सकता है ?
-बाबा को जिस कृष्ण व राम का अवतार बताकर "अजमल घर
अवतारी" बताया जाता है - वो राम ओर कृष्ण भी जन्म लेकर
आये थे - प्रकट नही हो पाये - तो रामदेव जी कैसे प्रकट
हो गये ?
(6) जो पालणा रामदेवरा मे लोगो को बताकर कहा जाता है
कि इसमे रामदेव जी प्रकट हुऐ थे - उस पालणे की वैज्ञानिक
तकनिक (कार्बन विधि) .से जाच करवानी चाहिये । कि वह 600
साल पुराना है या नही !
जिस पर विरोधिगण चुप थे ।
(7) अगर रामदेव जी तुवर राजपुत थे तो तुवरो की बही मे रामदेव
जी का नाम क्यो नही ? - इस पर तुवरो ने एक बही पेश की कोर्ट
मे - मगर कोर्ट ने वह बही पुरानी ओर प्रमाणिक नही मानी -
क्यो कि वह 600 साल पुरानी नही थी ।
(8) पुँगलगढ के पङियार रामदेव जी से नफरत क्यो करते थे ?
(10) बाबा रामदेव के समकालीन किसी भी चारण भाट कवि ने
उनकी महिमा वर्णन क्यो नही की ?
(11) रामदेव जी पर लिखै गये सभी इतिहास मे उनकी अवतार
तिथि ओर स्थान आदी समुचे इतिहास मे इतना मतभेद क्यो ?
(12) रामदेव जी की तुरनुमा समाधि पर उर्दू मे आयत लिखी हुई
है - ओर उनकी समाधि पर पहले दरगाह थी - जिस पर विक्म
सवत 14वी शताब्दी से 19वी शताब्दी तक किसी राव राजा ने
कोई मन्दिर निर्माण क्यो नही करवाया ?
(13) बाबा रामदेव ने मात्र 33 वर्ष की अल्पायु मे
ही समाधि क्यो ली ?- ओर समाधि को हरबुजी को परचा बताकर
क्यो तोङा गया ?
(14) बाबा की समाधि के आसपास कंई तुरनुमा (कब्र)
समाधिया पुजवाई जा रही है - वो समाधिया किसकी है - अगर वह
तुवर राजपूतो की समाधिया (शमसाण) है तो फिर वै
सभी मुसलमानों के कब्रिस्तान की तरह क्यो है ?
(15) विक्रम सॅवत 14वी से करीब 17वी शताब्दी तक 300
साल के अन्तराल मे कोई भी उची जाति वर्ण का स्वर्ण भक्त
कवि की अवतारवादी कथा वाणी वारता क्यो नही ?
ऐसै कॅई सैकङो विचारणिय
प्रशनो की झङी लगा दी थी स्वामी रामप्रकाशाचार्य
जी महाराज ने - जिनके उत्तर विपक्षीगण नही दे पाये ।
तब कोर्ट ने तुवरो को नोटीस पेश किया कि इन सवालो का जवाब
दे --
तब विरोधि गणो ने अपना केस वापस ले लिया - क्यो कि उन्है
पता था , कि अगर हमने पुख्ता प्रमाण सहित जवाब पेस
नही किये तो - कोर्ट का फैसला मेघवालो के पक्ष मे होगा ।
तब स्वामी जी की लिखी पुस्तको को मेले मे जबरन बिक्री से
रोका गया - तब स्वामी जी ने अपनी तरफ से कोर्ट मे अपील
की थी - कि विरोधिगण हमारै सवालो का जवाब दे -
अन्यथा हमारी पुस्तकों को बिकने से ना रोका जाये ।
तब विरोधिगण स्वामी जी को कंई गुमनाम धमकिया पेश करने लगै
-
तभी देवस्थान विभाग ने बाबा रामदेव जी महाराज को मेघवंशी बताया

मेघवाल समाज की बेटी निर्मला मेघवाल बनी बेस्ट राष्ट्रीय शिक्षक


राजकीय जमुना देवी पांडेय बालिका सीसै स्कूल पाटन नीमकाथाना  की प्रधानाचार्य निर्मला देवी मेघवाल को शिक्षक दिवस पर दिल्ली में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार दिया जाएगा। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी निर्मला देवी को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान के रूप में प्रशस्ति पत्र, 50 हजार नकद सिल्वर मैडल देंगे। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा 3 से 5 सितंबर तक दिल्ली में होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए निर्मला देवी को आमंत्रित किया गया है। उनको यह पुरस्कार श्रेष्ठ बोर्ड परीक्षा परिणाम, गाइडिंग के क्षेत्र में राज्यस्तरीय, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष योगदान, पुरस्कारों समाजसेवा के लिए दिया जा रहा है श्रीमती निर्मला जी मेघवाल नीमकाथाना
अनुसुचित जाति राजस्थान की पहली महिला है जिनका चयन
नैशनल टीचर आवार्ड
के लिए हुआ है
जो हमारे समाज और राजस्थान के अनुसुचित जाति/जनजाति वर्ग के लिए बहुत खुशी की बात है  निर्मला मेघवाल
राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान लेकर लौटने पर स्वागत  किया गया। और  टैक्सी स्टैंड से उन्हें जुलूस के रूप में लाया गया। व्यापारिक सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने उनका जगह-जगह स्वागत किया। गाड़ी में निर्मला देवी के साथ उनके पति प्रधानाचार्य बनवारीलाल वर्मा परिवार के लोग थे। निर्मला देवी को शिक्षक दिवस पर दिल्ली में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने शिक्षक सम्मान से नवाजा। उनका डॉ. अंबेडकर मानव कल्याण संस्थान, डॉ. अंबेडकर रक्तदान सेवा समिति, हनुमान सेवा समिति के पदाधिकारियों सदस्यों के अलावा कई संगठनों ने स्वागत किया। जुलूस स्वागत कार्यक्रम में पूर्व विधायक फूलचंद गुर्जर, पूर्व कॉलेज शिक्षा आयुक्त प्रो. केआर सिलोलिया, कांग्रेस नेता सुरेश मोदी, भाजपा नेता प्रमोदसिंह बाजौर, सतीश शर्मा, जेपी लोढ़ा, बीडी वर्मा, संस्थान अध्यक्ष शंकरलाल बलाई, एनएसयूआई प्रदेश महासचिव रोशन मुंडोतिया, चांदमल मेघवंशी, पूर्व अभिभाषक संघ अध्यक्ष देवेंद्र चौधरी आदि थे तथा

इस अवसर पर सूरेरा ग्राम मे भी निर्मला मेघवाल को नेशनल अवार्ड मिलने पर गाजे बाजे के साथ खुशियाँ मनाई और इस अवसर पर नागौर के जिला परिषद सदस्य पूरन मल मेघवाल समाज सेवी सुरेश मेघवाल घरवाणी और अगला कदम एन. जी. ओ के संस्थापक. नाथू लाल जी वर्मा देवली और विधुतकार भँवर लाल मन्डुसिया सुरेरा और दांतारामगढ़ के युवा नेता जितेंद्र राम चंद्र मेघवाल आदि ने टिव्टर के माध्यम से शुभकामनाएँ दी ॥

शुक्रवार, 26 अगस्त 2016

गुजरात मे पैदा हुए समाज के वीर मेधमाया ने अछुतो के अधिकारो के लिए अपने जान का बलिदान दिया था,


वीर मेघमाया : एक विर महापुरुष*
एक विर महापुरुष के बारे में बताना चाहता हूँ। महापुरुष का नाम है- विर मेघमाया। भारत के मूलनिवासी लोगों को यह महापुरुष के बारे में जानकारी नही होगी, क्योंकि इसका सही इतिहास छिपाया गया है। हमारे महापुरुष का इतिहास ज्यादातर लोग जानते ही नहीं है और हमारे लोग जानने की कोशिश भी नही करते है। मैं जितना जानता हूँ, इतना जरूर बता रहा हूँ। विर मेघमाया गुजरात राज्य के धोलका तहेसील के रनोडा गाँव में 12 मी सदी में जन्मा हुआ था, तब गुजरात का पाटनगर पाटन था।12 मी सदी में पाटन राज्य का राजा सिध्धराज सोलंकी था। उस समय पर अछूतों उपर भयानक, दर्दनाक, अत्याचार राजा सिध्धराज सोलंकी की तरह से किया जा रहा था। तब विर मेघमाया ने ठान लिया था कि, अछूतों पर हो रही भयंकर गुलामी में से आझाद करके रहूंगा, चाहे मेरा प्राण क्यूँ चला न जाय। मेघमाया ने उनका मिशन चालू किया। एक-एक अछूत का समजाने का, जागृत करने का अभियान चालू किया। उस समय अछूतों को आगे कूलडी और पीछे झाडू रखना पडता था और सिर्फ रात के समय में ही बहार निकलना था। दिन में अगर अछूत की पडछाइ भी पड गयी तो मृत्युदंड की सजा की जाती थी। ऐसे समय में विर मेघमाया ने अछूतों के साथ हो रहे भयंकर अन्याय के खिलाफ अछूतों को जागृत करता रहा। यह बात राजा के ब्राह्मण सेनापति के कान में आई। ब्राह्मण सेनापति ने विर मेघमाया का पूरा इतिहास जान लिया और राजा सिध्धराज सोलंकी को अछूत विर मेघमाया के बारे में पूरा माहितगार किया। तब राजा ने कहा क्या किया जाय अछूत को, ब्राह्मण सेनापति बडा होशियार था। उस समय पाटन राज्य में लगातार तिन साल से बारिश नही हो रही थी। पूरा पाटन पानी सेे तरस रहा था। तब ब्राह्मण सेनापति ने विर मेघमाया को जान से मारने का प्लान बनाया और राजा सिध्धराज को बताया कि, हमारी प्रजा पानी की तरस से मर रही हैं। हम विर मेघमाया को पाटन की वाव (एक तरह का कूआ) मे बलि चढा दे और प्रजा को बताया जाय कि वाव में बतीस लक्षणों वाला पुरुष का भोग किया जाय तो जरूर चमत्कार से पानी प्रगट होगा। तब प्लान बना के राजा ने ऐलान कर दिया कि बत्रीस लक्षणों का पुरूष की तलाश की जाय, तब ब्राह्मण सेनापति ने विर मेघमाया का नाम बताया और सिध्धराज ने स्वीकार भी कर लिया। यह पूरी जानकारी विर मेघमाया को बताइ गइ। विर मेघमाया पूरा प्लान समज गया था। पर वो भी राजा के हूकम के आगे लाचार थे। विर मेघमाया ने भी नक्की कर लिया कि, मरते-मरते मेरी समाज का भी भला करता जाऊं। विर मेघमाया की बलि का दिन नक्की हो गया। विर मेघमाया को पानी की वाव उतारा गया, तब विर मेघमाया ने राजा को मरने से पहले कूछ वचन मागा गया। एक मेरी समाज के लोगों को आगे कूलडी और पिछे झाडू को नाबूद किया जाय। दूसरा सवणॅ लोग मकान बनाते तब मकान के मोभ अछूत के द्वारा रखा जाए। राजा ने सारी बात मान्य रखी और सेनापति को हूकम दिया। सेनापति ने धारदार तलवार उठाइ और जोर से एक ही झटके में विर मेघमाया का धड गरदन से अलग कर दिया। मेरे प्यारे दोस्तों जरा सोचिए विर मेघमाया का प्राण कैसे गया होगा। गुजरात राज्य में पहला अछूत विर मेघमाया शहीद हो गया। फिर भी हमारे पढे लिखे लोगों को विर मेघमाया की शहादत याद नहीं आ रही है और जो लोग अछूतों को कायम अछूत ही रहे ऐसे प्रयास करने में जो लोग मर गये उनको अपना शहीद मानकर शहादत को याद करके बडे जोर से शोक मनाते हैं।
दोस्तो, मैं बडे दुखसे कहता हूँ कि अगर हमारी समाज में विर मेघमाया, ज्योतिबा फूले, डाॅ.बाबासाहब आंबेडकर जैसे महापुरुषों की देन की ही वजह से ही हम लोग सूख चेन से जि रहे हैं। अगर हमारी समाज मे महापुरुष पैदा नही होते तो न जाने कैसा हाल होता समाज का।

नवरत्न मन्डुसिया

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