बुधवार, 26 जुलाई 2017

मेघवाल समाज की युवा सरपंच ममता वर्मा की युवा सोच और गाँव को किया चमन



नवरत्न मन्डुसिया की कलम से//राजस्थान की राजधानी जयपुर  जिले के एक छोटे से कस्बे रेनवाल के पास मुंडली गाँव की है और यह किस्सा बहूत ही जबरदस्त है आइये जानते है युवा  25 साल की ममता वर्मा  के  सरपंच बनने की कहानी के बारे मे दोस्तो यह कहानी ही नही बल्कि एक हक्कीकत है तथा  बड़ी जबरदस्त कहानी है ममता मेघवाल की शिक्षा 12 कक्षा है और अब वर्तमान मे प्रथम वर्ष की छात्रा है ममता मेघवाल के पति सुभाष मेघवाल भी ममता मेघवाल के कामकाज मे पूरा सपोर्ट करते है  जब ममता देवी मेघवाल को आम चुनावों के बारे मे कहा गया की ममता आपको इस मुंडलि गाँव की मुखिया बनाया जा रहा है तो एक बार तो ममता मेघवाल डर सी गयी थी लेकिन ममता अपने पति की बातो को बड़े दिल और दिमाग से सुना तो तो सरपंच के चुनाव के लिये हाँ भर दी गयी  और सरपंच के चुनाव के लिये तेयारीया करना शुरू कर दिया गया दोस्तो इनकी सरपंचाई की दास्तांन बहूत ही अलग थलग है  ममता मेघवाल के सामने तीन लोग और चुनावी मेदान मे थे

आम चुनावों मे जब ममता मेघवाल 434 वोटो से जीत दर्ज की तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नही था अपनी जीत का श्रेय अपने पति सुभाष मेघवाल और ससुर तथा ग्रामवासियों को मानती है जब ममता मेघवाल सर्वप्रथम गांव के सरकारी स्कूल में तिरंगा फहराने के लिए गांव के विद्यालय मे गयी तो बहूत ही गर्व महसूस कर रही थी ममता मेघवाल  ने जब चीफ गेस्ट बनकर स्कूल में ध्वजारोहण किया तभी से उन्होंने गांव की भलाई करने की ठान ली। उनकी जीत का अंतर अन्य तीन उम्मीदवारों से तीन गुना तक रहा।उन्होंने सरपंची का चुनाव लड़ने की ठानी। परिवारवाले  भी  चाहते थे की ममता गाँव की सरपंच बने आखिर 934 वोट लेकर सरपंच बन ही गयी  कि वह  इसके बावजूद उन्होंने चुनाव में जीत दर्ज कर जिले में सबसे युवा सरपंच बनने की उपलब्धि हासिल की। सरपंच बनने के बाद उन्होंने अब  ग्रेजुएशन की पढ़ाई भी कर रही है गांव के विकास को लेकर ममता मेघवाल  के सामने कई परेशानियां आईं। सबसे बड़ी समस्या  पानी लाने को लेकर थी, लेकिन ममता पानी लाने की पूरी कोशिश कर रही है और नहरों को जोड़ने वाली सुविधा की भी बहूत प्रयास कर रही है ममता का उद्देश्य गरीबो की सेवा करना लोगो को अधिक.से से.सुविधायें दिलवाना आदि उद्देश्य है ममता ने अपने कार्यकाल मे पेंशन सुविधाएँ भामाशाह योजनाएँ राशन योजनायें आदि लाकर गाँव की सेवा करना ही अपना धर्म मानती है ममता मेघवाल का कहना है की ज
"जब मैं चुनाव जीतकर पहली बार सरपंच भवन गई तो देखा कि लोगों के पेंशन और प्रमाण पत्र के कागज उनके दफ्तर मे पड़े मिले थे तथा कई लोगो  के साईन किए हुए रखे पड़े हैं। उन्हें किसी ने जमा ही नही कराए और लोग ने ये मानकर संतोष कर लिया कि वो इन योजनाओं के पात्र नहीं थे इसलिए कुछ हुआ ही नही"
पांच साल के लिए सरपंच बनी प्रतिभा ये सबकुछ बदलना चाहती है.ममता पहली.बार  सरपंच बनी है और अब तो मानो ममता को इतना नॉलेज हो गया है की अब वह विपरीत परिस्तिथियों का सामना करके भी आगे बढ़ने की सोच रही है ममता के एक पुत्र और एक पुत्री है दोनो ही पढ़ाई करते है   गाँव  में पीने की पानी बड़ी समस्या थी. पंचायत के पास फंड थे नही. गांववालों को उम्मीदें काफी थी लिहाजा जयपुर का चक्कर काटना शुरु किया और गाँव की ज्यादातर असुविधाओं को सुविधाऑ मे बदला गया गांव की सरपंच साहिबा बताती है की
"पहले घर से निकला मुश्किल होता था. बरसात में गांव ही कीचड़ बन जाता था लेकिन अब पक्की सड़क बनने के बाद ऐसा नही है"और ज्यादा तर जगहो पर सड़क निर्माण करवाया जा रहा है ॥
ममता मेघवाल  के पंचायत के अंदर पांच सात  बड़े गांव आते हैं जहां से पंचायत भवन बहुत दूर था और यह गाँव किसी ज़माने मे नगरपालिका के नाम से जाना पहचाना जाता था लेकिन गांववालो की एकता के कारण इस मुंडलि गाँव को ग्राम पंचायत घोषित करना पड़ा  इसलिए इन्होंने ग्राम पंचायत मे ईमित्र ई-कियोस्क शुरु करवाया ताकि हर कोई यहां आकर कंप्यूटर में अपना कागज और आवेदन डलवा दे और फिर ममता मेघवाल  उनका काम ऑनलाईन देख सकें और उनके काम का प्रोग्रेस देख सकें।और जल्द से जल्द उनका काम कर सके और  लोग देख भी सकें उनके आवेदन या काम कहां तक पहुंचा. इस योजना की सफलता ने गांव की आधी समस्या दूर कर दी. सबसे ज्यादा समस्या वृद्धाअवस्था पेंशन और विधवा पेंशन की होती थी लेकिन ई-मित्र कियोस्क के जरिए ये सारा काम गांव में होता है. यही नहीं अब खाता से पैसे लाने शहर भी नही जाना पड़ता है.तथा ममता मेघवाल  खाली समय में किताबें पढ़ना पसंद करती हैं, साथ ही आगे पढ़ने की भी ख्वाहिश है. लिहाजा अपने लिए भी वक्त निकालकर कर पढ़ाई करती रहती हैं.ममता मेघवाल  की पढ़ाई की लगन का असर गांव के युवाओं पर भी पड़ा है और गांव में पढ़ाई का ऐसा माहौल बना है की सभी गाँव के लोग पढ़ने मे भी बहूत सक्रिय हो रहे है :-नवरत्न मन्डुसिया की कलम से 

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