शनिवार, 10 जून 2017

रिश्ते के साथ साथ समान जानिये एक दूसरे की विचार धारायें


नवरत्न मन्डुसिया की कलम से // क्या  है रिश्तों में सम्मान का अर्थ मे आपको मेरे व्यक्तिगत विचार से आपको रिश्ते के साथ साथ हमे एक दूसरे के सामने किस तरह पेश आना चाहिये ये बाते मे आपको बताने जा रहा हूँ 

किसी भी रिश्ते के गहरे होने की पहली शर्त होती है सम्मान। सिर्फ पति-पत्नी ही नहीं, तमाम रिश्तों से लेकर यारी-दोस्ती तक में एक-दूसरे के प्रति सम्मान बेहद अहम् है। हंसी-मजाक के दौरान भी यदि हम हद से आगे बढ जाते हैं, तो सामनेवाले को ठेस पहुंचती है। ऎसे में यह बात समझना जरूरी है कि हर चीज की हद होती है। अपने दायरों को लांघते ही जैसे ही हम हदों को पार

किसी की भी राय को महत्व ना देकर मनमानी करना। कर जाते हैं, तो वहां सम्मान खत्म हो जाता है और रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव पडता है। हम रिश्तों को सम्मान दे रहे हैं या नहीं, इसे इन कसौटी पर परखें- अगर हम किसी बात पर असहमत हैं, पर हम अपनी ही बात और राय को महत्व देकर सामनेवाले को सुनना ही ना चाहे और उससे भी यह उम्मीद रखें कि वो हमारी ही सुने, तो यह उसके सम्मान को आहत करेगा।हर समय सिर्फ अपनी जरूरतों के बारे में ही सोचना। दोस्तो यह भी हद होती है की हमे किस तरह की मजाक करनी चाहिये मे नवरत्न मन्डुसिया आपको यह कहना चाहता हूँ की हम लोगो को एक सच्चे प्यार की भावनाएँ समझनी चाहिये और हमे एक दूसरे का समान करना चाहिये दोस्तो आपका अपना दोस्त आपका भाई नवरत्न मन्डुसिया हमेशा आपके साथ एक सच्चे अम्बेडकर वादी विचार धारा रखने वाला है मेरा तो यह ही सोचना है कहना है की हमे रिश्ते की गहराई को देखकर हमे अच्छा रिश्ता निभाना चाहिये हमे महिलाओ की इज्जत करनी चाहिये बड़े लोगो का और छोटे लोगो का सभी लोगो का समान करना चाहिये ताकि हमे समाज मे एक सकरात्मक पहल देखने को मिले और हमे मजाक करना आदि परिस्थियों को देखकर करना चाहिये 

सबसे मजाक करना, लेकिन जब कोई आपसे मजाक करे, तो बुरा मान जाना। सामनेवाले की स्थिति को समझे बगैर या समझने की कोशिश किए बिना ही बात-बात पर नाराज हो जाना।
विचार अलग होने पर दूसरों के विचारों को गलत व महत्वहीन समझना। सामनेवाले की भावनाओं के प्रति असंवेदनशील होकर उन्हें महत्व ना देना। अपने रिश्तेदारों या पार्टनर को सामाजिक समारोहों में या अन्य लोगों के सामने डांटते हैं या उनका मजाक उडाते हैं।
सबसे यह उम्मीद रखना कि वो सिर्फ आपका ही ख्याल रखे और आपकी हर बात पर हां में हां मिलाए।
अपनी सुविधानुसार नियम बदलना और दूसरों से भी अपनी सुविधानुसार ही व्यहार करने की उम्मीद करना।
किसी की भी राय को महत्व ना देकर मनमानी करना।ये सभी चीजे हमे व्यवहार और हमारे महत्वपूर्ण  समान को दर्शाती है  इसलिए हमे किसी से जो भी रिश्ता निभाये वो सच्चे दिल और प्रेम से निभाना चाहिये 

नवरत्न मन्डुसिया की कलम से 

सामाजिक जनसेवक

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नवरत्न मन्डुसिया

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