शुक्रवार, 16 जून 2017

मेघवाल समाज मे जन्मे बाड़मेर के राजू धनदेव का राजनेतिक क्षेत्र के साथ साथ भाईचारे को माना प्रथम रहन सहन

नवरत्न मन्डुसिया की कलम से //आजकल एक तरफ़ दलित अत्याचारों के शिकार हो रहे है वही दूसरी तरफ़ दलितों की आवाज़ बन रहे राजू धनदेव बताते है चाहे समाज कोई भी हमे सामूहिक रुप से भाईचारे की भाँति रहना चाहिये इसी मे ही हमारे आजाद हिंदुस्तान की भलाई है नही तो जिस तरह हम देश आजादी के पहले किस तरह रहते थे उसी तरह हमे आज आजाद भारत मे रहना पड़ेगा राजू  बाड़मेरी के विचार भला आपको सामान्य लगते हो लेकिन उनके हरेक लब्ज मे बहूत सारी सकारात्मक बाते हमे दर्शाती है ऐसे युवाओं को आगे बढ़ना चाहिये और हमे इनका साथ देना चाहिये मे नवरत्न मन्डुसिया राजू धनदेव को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ की आप ऐसे ही मेघवाल समाज की सेवायें करते रहे और आप हमेशा सकारात्मक सोच रखते रहे किसी ज़माने मे कहा जाता था की बाड़मेर के मेघवाल समाज के लोग बहूत पीछडे हुवे है लेकिन अब वो ज़माने गया और बाड़मेर को शिक्षा के क्षेत्र मे भी बहूत आगे बढ़ा रहे है यह युवा बहूत परिश्रमी रूपी काम करते है राजू धनदेव देदङीयार गाँव के रहने वाले है इनकी रुचि समाज सेवा मे शुरू से ही थी राजू धनदेव अब राजनेतिक क्षेत्र के साथ साथ सोशियल मीडिया पर भी लगभग सक्रिय रहते है इस कारण हम राजू धनदेव देदङीयार को सोशियल साइट के गुरु के नाम से भी सम्भोदित कर सकते है यह युवा बाड़मेर जिले मे बहूत सक्रिय है और गरीबो की सेवा करने मे बहूत तत्पर रहते है समाज सेवा को इन्होने समाज-सेवा या दूसरों के उपकार के लिये यह कोई आवश्यक बात नहीं कि मनुष्य धन द्वारा ही दूसरों की सहायता करे। धन तो बाहरी साधन है और उसका उपयोग समयानुसार बदला करता है। इन तथ्यों पर विश्वास रखते राजू धनदेव इस कारण  ऐसे भी अवसर आते हैं जब कि करोड़ों रुपया पास में रखा रहने पर भी मनुष्य एक रोटी अथवा एक गिलास पानी के लिये तरसता रह जाता है। इसलिए सच्ची सेवा और सहायता के उपकरण तो तन और मन ही को मानना चाहिये। ये ही वास्तव में हमारी सम्पत्ति हैं और इनके द्वारा सेवा करने से किसी को कोई कभी नहीं रोक सकता। इसके लिये अगर आवश्यक है तो यही कि हमारे हृदय में दूसरों की सहायता-सेवा करने की सच्ची भावना हो। राजू धनदेव आज तक जितने बड़े-बड़े महापुरुष हुये हैं जिनका नाम इतिहास में लिखा गया है और अब भी समय समय पर हम गौरव के साथ जिनका स्मरण करते रहते हैं, जिनकी जयन्तियाँ मनाते रहते हैं, इनमें शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने धन द्वारा प्रतिष्ठा अथवा श्रद्धा प्राप्त की हो। महापुरुषों का आम लक्षण यही है कि वे दूसरों के उपकारार्थ के लिए अपने तन मन और प्राणों तक को उत्सर्ग कर देते हैं। अनेक महान पुरुष तो ऐसे भी हो गये हैं जो जनता के सामने भी बहुत कम आये, पर जिन्होंने गुप्त रूप से ही समाज और देश की सेवा में निस्वार्थ भाव से प्राण अर्पण कर दिये। क्या ऐसे महान त्यागियों की सेवा और महानता को हम कभी भुला सकते हैं? दोस्तो मुझे रो बहूत खुशी होती जब मे मेघवाल समाज के नाम को बाड़मेर के अलावा अन्य जिलों मे राज्यों मे सुनता हूँ क्यों की हमारे मेघवाल समाज के खोये हुवे गौरवो को प्राप्त करना है समाज सेवा के साथ साथ मेघवाल समाज की और गरीबो की सेवा करनी चाहिये राजू धनदेव वे बचपन से ही मेधावी छात्र रहे थे। वे योग्य,कुशल ,अनुभवी समाज सेवक  और राजनेता रहे। बाड़मेर  के क्षेत्र का प्रतिनिधत्व किया और एक कुशल सामाजिक एवम राजनीतिक कार्यकर्ता एवम नेता के रुप मे अपनी पहचान बनाई। वे कई सामाजिक एवम राजनीतिक संगठन से जुड़े रहे।:- नवरत्न मन्डुसिया की कलम से

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नवरत्न मन्डुसिया

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