शुक्रवार, 24 मार्च 2017

विश्व मे नाम रोशन किया मेघवाल समाज की इन छः बेटियों ने

मेघवाल समाज की बेटियों पर गर्व है जो की आज इस मुकाम पर पहुँची है 

जिस जैसलमेर जिले में लोग बेटियों के पैदा होते ही उनसे नफरत करने लगते थे आज उस जिले की बेटियां ही अपने जिले का नाम रोशन करती दिख रही हैं. जैसलमेर जिले की एक दलित परिवार की बेटी प्रेम धनदे ने जिले की पहली महिला RPS बनकर पूरे जैसलमेर जिले को गौरवान्वित किया है.
गांव में 150 साल बाद बारात आई थी 
जैसलमेर एक पर्यटन नगरी है और पूरे देश दुनिया के सैलानी यहां पर इसकी खूबसूरती को निहारने के लिए हर साल आते हैं. एक और जहां ये पूरी दुनिया में स्वर्ण नगरी के नाम से जानी जाती है वहीँ दूसरी तरफ ये जिला बेटी को पैदा होते ही मारने के रिवाज पर कुख्यात भी रहा है. यहां के एक गांव में तो 150 साल बाद कोई बारात आई थी. और लोग इस जिले को बड़ी हेय द्रष्टि से भी देखते हैं. मगर वक़्त बदला तो इंसान भी बदले. और आज कल यहां की बेटियाँ पूरे देश में अपना और अपने परिवार का नाम रोशन कर रही हैं.
गांव का नाम रोशन कर रही हैं बेटियां 
फिलहाल बेटियों के लिए अभिशाप माने जाने वाले इस जिले की शान में चार चांद लगा दिए हैं. यहां के एक दलित परिवार ने. चेलक गांव के इस दलित परिवार को धनदेव परिवार के नाम से लोग जानते हैं. कांग्रेस के लीडर और पीसीसी सचिव रूपा राम धनदेव के परिवार में 6 बेटियां है और सभी अपनी - अपनी फील्ड में अपना नाम रोशन कर रही है. जहां धनदेव की सबसे बड़ी बेटी अंजना मेघवाल जैसलमेर जिले की जिला प्रमुख हैं, वहीँ बाकी तीन बेटियां डॉक्टर हैं. एक बेटी अमेरिका में इंजीनियरिंग की पढाई कर रही है. इन्ही छह बेटियों में एक बेटी प्रेम धनदेव इन दिनों पूरे राजस्थान में अपने नाम का परचम लहरा रही है.
मां- बाप की बदौलत ही पहुंची मुकाम पर 
प्रेम जैसलमेर जिले की पहली महिला RPS है और फिलहाल अभी अंडर ट्रेनिंग हैं. दिलचस्प बात है कि हाल ही में जयपुर में हुई पुलिस परेड में उसने छ प्लाटून में से एक प्लाटून का परेड में नेतृत्व कर जिले को गौरवान्वित कर दिया. प्रेम इसके लिए अपने माँ बाप को धन्यवाद देती है और साथ ही यह भी कहती है कि आज वह जो कुछ भी है. अपने मां- बाप  की बदौलत ही है.
गांव के लिए प्रेरणा बनीं धनदेव परिवार की बेटियां 
प्रेम के पिता रूपा राम धनदेव का कहना है की बेटी होना अब अभिशाप नहीं रहा. लोग मुझे कहते थे की आपके छ बेटियाँ है और अब क्या होगा ?क्योंकि माँ बाप को बेटी होते ही उसके दहेज़ और शादी की चिंता सताती है मगर मैंने इन सबको दरकिनार करके अपनी बेटियों को पढाया लिखाया और समाज की धरा के विपरीत जाकर इनको इस काबिल बनाया है कि लोग आज इनकी मिसाल देते हैं तथा अपनी बेटियों को भी इनकी तरह बनने की प्रेरणा देते हैं.
भाई को भी है अपनी बहन पर नाज 
वहीँ छ बहनों के एक मात्र भाई हरीश का कहना है की लोगों का बेटियों के प्रति अब नजरिया बदलना चाहिए क्योंकि अब वो हर क्षत्रे में सबसे आगे निकल रही है और मुझे गर्व है की मेरी बहन जैसलमेर जिले की पहली महिला RPS है.

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