शनिवार, 7 दिसंबर 2013

अपने युग के महान संत थे ( स्वामी लादूदासजी महाराज, खींवादासजी महाराज, श्री श्री 108श्री बंशीदासजी महाराज Sangliya Dhuni)

अखिल भारतीय सांगलिया धूणी सीकर जिले से 35 किलोमीटर दूर सीकर-डीडवाना रोड़ पर सांगलिया गांव की पावन धरा पर इस धूणी की स्थापना करीब सैंकड़ों वर्षों पूर्व बाबा लक्कड़दास जी द्वारा की जाने के कारण इसे लक्कड़दास बाबा का आश्रम भी कहा जाता है। बाबा के समय से अब तक इस धूणी पर बाबाजी के शिष्य एवं अन्य महान संतों द्वारा इस सांगलिया धूणी की मर्यादा को आगे बढाते हुए समाज सुधार व शिक्षा जैसे जनहित कार्यों के रूप में प्रसिद्ध दिलाई। लम्बे समय से यहाँ से पीठाधीश्वर विकास की ओर अग्रसर रहे। महान संत श्री श्री 1008श्री बाबा खींवादास महाराज के परम शिष्य श्री श्री 108श्री बाबा बंशीदासजी महराज गुरू की महिमा का बखान भक्तों को वाणी, प्रवचन तथा जागरण के रूप में प्रसाद स्वरूप भेंट कर रहे हैं।
वर्तमान पीठाधीश्वर श्री श्री 108श्री बंशीदासजी महाराज गुरू महिमा में कुछ शब्द बताने से पहले कहते हैं कि 'गुरू की मैं कहा तक करूं बड़ाई, महिमा मुख से वर्णन न जायी।Ó अखिल भारतीय सांगलिया धूणी के द्वारा जनहित में किए गए कार्यो से प्रभावित होकर भारत सरकार भूतपूर्व पीठाधीश्वर श्री श्री 1008श्री बाबा खींवादास महाराज को डॉ. भीमराव अम्बेडकर पुरस्कार भेंट कर अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर चुकी है। बाबा खींवादासजी महाराज द्वारा शिक्षा को बढावा देने के लिए राज्य के विभिन्न हिस्सों में स्कूल-कॉलेजों का निर्माण करवाकर गरीब, अनाथ व छात्राओं को नि:शुल्क शिक्षा की व्यवस्था की। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बाबा का योगदान कम नहीं रहा। पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में सांगलिया धूणी द्वारा धर्मशालाएं बनवाई गई एवं पानी के लिए प्याऊ का निर्माण करवाया। पानी की प्याऊओं, कुओं का निर्माण करवाया। पानी सभी को एक रंग, एक रूप, एक ही स्वाद का संदेश देता है, इस प्रकार बाबा खींवादास जी ने इन्सान को अपने अन्दर देखने का पाठ पढ़ाते हुए सभी समाजों को एक छत के नीचे उठाते हुए ऊंच-नीच, जाति-पांति आदि के भेद-भाव से दूर होकर जन-कल्याण के कार्यो को सर्वोपरी बताया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए महाविद्यालय की स्थापना क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए महाविद्यालय की स्थापना कर क्षेत्र के युवाओं का ध्यान धर्म कल्याण हेतु आकर्षित किया। वर्तमान समय में इस कॉलेज का नाम बाबा खींवादास स्नातकोत्तर महाविद्यालय है। जिसे क्रमोनत
करवाने एवं विभिन्न विषयों को खुलवाने का श्रेय वर्तमान पीठाधीश्वर श्री श्री 108 बाबा श्री बंशीदासजी महाराज को जाता है।
वर्ष 2001 रविवार जन्माष्ठमी को लाखों को भक्तों रोते-बिलखते छोड़कर श्री श्री 1008श्री बाबा खींवादास महाराज अपनी पार्थिव देह को माँ भारती की गोद में छोड़कर पंचतत्व में विलीन हो गए। इसके बाद उन्हीं के शिष्य बाबा भक्तदास जी महाराज को पीठाधीश्वर नियुक्त किया गया। जो अपनी भौतिक देह 4 फरवरी 2004 को त्याग कर भक्तों से विदा ले गए। तब इन्हीं के गुरू भाई एवं बाबा खींवादास के परम शिष्य गुणों की खान बाबा बंशीदासजी महान इस पीठ के पीठाधीश्वर बने।

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