बुधवार, 13 दिसंबर 2017

खाटूश्यामजी मे होगा 25 दिसम्बर 2017 को बलाई समाज का सामूहिक विवाह सम्मेलन

नवरत्न मन्डुसिया की कलम से //बेटा अंश है तो बेटी वंश है, बेटा आन है तो बेटी शान है, का संदेश देते हुए राज्य स्तरीय सामूहिक विवाह व पुर्नविवाह सम्मेलन 25 दिसम्बर  को आयोजित किया जाएगा।बलाई समाज के पंचम सामूहिक विवाह समेलन जो कि 25 दिसम्बर को खाटु श्याम जी में होने जा रहा हे।  71 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधने जा रहे हे 71 का रजिस्ट्रेशन हो चूका हे। में आप सभी से इसे सफल बनाने की प्रार्थना करता हूँ।आप लोग ज्यादा से ज्यादा संख्या में उपस्तित होकर नव् दंपतियों को आशीर्वाद प्रदान करे व अपना अमूल्य सहयोग प्रदान करके इस विवाह समेलन को सफल बनायें। लगभग 50 हजार की संख्या में समाज व् अन्य लोगो के शिरकत करने की उमीद हे। बहुत सारी व्यवस्थाये करने ह जो आपके  सहयोग के बिना संभव नहीं है। अतः आप अपने तन मन व् धन से इसे सफल बनायें। बहुत सारे कार्यकर्ताओ की आवश्यकता है तथा बारात व कलश यात्रा निकाली जाएगी। जहां आयोजन स्थल पर बारातियों का स्वागत किया जाएगा। इस मौके पर वर-वधुओं का पणिग्रहण संस्कार कराने के साथ ही समाज की भामाशाहों, मुख्य अतिथियों व प्रतिभाओं का सम्मान किया जाएगा।  बलाई समाज सहित बड़ी संख्या में प्रतिष्ठित व गणमान्य लोग व समाजबंधु कार्यक्रम में शिकरत करेंगे 

शनिवार, 2 दिसंबर 2017

बाड़मेरी सुमन मेघवाल को डॉक्टर अम्बेडकर नेशनल मेरिट अवार्ड से नवाजा

मन्डुसिया न्यूज़ ब्लॉग // सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन कार्यरत डा.अम्बेडकर प्रतिष्ठान की ओर से प्रदान किए जाने वाले डा.अम्बेडकर नेशनल मेरिट अवार्ड के लिए बाड़मेर की सुमन परमार का चयन हुआ है।
जिला कलक्टर शिवप्रसाद मदन नकाते ने गुरूवार को सुमन को 60 हजार का चैक एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

बाड़मेर निवासी सुमन परमार पुत्री टीकमदास परमार ने सीनियर सैकंडरी परीक्षा 93.20 फीसदी अंक प्राप्त किए है। उसका  डा.अम्बेडकर नेशनल मेरिट अवार्ड के लिए चयन होने पर 60 हजार का चैक एवं प्रशस्ति पत्र बाड़मेर भिजवाया गया।
जिला कलक्टर शिवप्रसाद_मदान_नकाते ने सुमन को प्रशस्ति पत्र सौंपते हुए कहा कि वह अपने पर नकारात्मक पक्ष को हावी नहीं होने दें। उन्होंने सुमन से पूछा कि वह क्या बनना चाहती है, इस पर सूमन ने बताया कि वह डाक्टर बनना चाहती है। जिला कलक्टर ने उसको प्रोत्साहित करते हुए सफलता के लिए निरंतर प्रयास जारी करने के लिए कहा। इस अवसर पर जिला परिषद के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा.गुंजन सोनी उपस्थित रहे। यह अवार्ड अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियो को दिया जाता है जो अव्वल आते है। सुमन परमार सीनियर सैकंडरी जीव विज्ञान विषय में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान पर रही हैं। पूरे प्रदेश में यह एक मात्र बालिका है जिसको डा.अम्बेडकर नेशनल मेरिट अवार्ड से नवाजा गया है।

●: राजेन्द्र लहुआ बाड़मेर :●

मंगलवार, 21 नवंबर 2017

इस नुस्ख़े से आप भी निजात पा सकते हैं दांत के दर्द से

नवरत्न मन्डुसिया की कलम से //अगर आपके भी दांतों में दर्द की शिकायत रहती है तो आप इस नुस्खे को अपनाकर अपने दांत के दर्द से निजात पा सकते हैं। एक कटोरे में नीबूं का रस निकालें और उसमे थोड़ा सा फिटकरी मिला दें। इन दोनों चीज़ों को मिलकर मिश्रण बना लें और जिस दांत पर दर्द हो रहा हों उसके ऊपर मॉल दें। थोड़ी देर के बाद मुँह को खुला छोड़ दें और लार टपकने दें। लार के साथ- साथ सारे कीटाणु भी दांत के बाहर निकला जाते हैं और दांत दर्द से निजात मिलता है। इस प्रक्रिया के लिए आपको सिर्फ निम्बू और फिटकरी चाहिए होता है। इस प्रक्रिया को नियमित रूप कुछ दिनों तक करने से दांत के दर्द से छुटकारा मिलता है। नवरत्न मन्डुसिया की कलम से

शादी हो या पार्टी कहीं जानें से पहले अपने चेहरे को गोरा बनाने के लिए करें ये जबरदस्‍त उपाय, मिनटों में ही दिख जाएगा असर

खास रिपोर्ट नवरत्न मन्डुसिया की और से //आज के समय में हर कोई चाहता है कि वो सुंदर और स्‍मार्ट दिखें क्‍योंकि उसका लूक भी उसके प्रोफाइल पर काफी असर डालता है वैसे इसके लिए लोग हजारों रूपए खर्च कर देते हैं लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है कि इतने पैसे खर्च करने के बाद भी आपको मनचाहा गोरापन व निखार मिल जाए और हो सकता है आगे चलकर इन केमिकल के इस्‍तेमाल से आपको बहुत ज्यादा परेशानियां भी झेलनी पड़ सकती है। आज मैं कुछ देशी उपाय बता रही हूं जिसे अपनाकर आप गोरा बन सकते हैं। बेसन और हल्दी का लेप सबसे शानदार नुस्‍खा अगर आपको गोरा दिखना है तो ये देशी नुस्‍खा बहुत जबरदस्‍त होता है इसके लिए आपको एक चम्मच बेसन लेना है और आधा चम्मच हल्दी, इसका एक पेस्ट बनाना है। पेस्ट बनाने के लिए इसके अंदर आपको दो चम्मच दूध डालना होगा। एक ऐसा पेस्ट बना लेना जो आसानी से घुल जाए। इस पेस्ट को बनाने के बाद इसमें आपको गुलाब जल मिलाना है ताकि इससे आपके चेहरे की झुरियां कम हो जाए गुलाब जल ठंडा होता है इसलिए आप अपने चेहरे को बेदाग बनाना चाहते हैं तो उस पेस्‍ट में गुलाब जल मिलाकर आप उसे दो मिनट के लिए छोड़ दें उसके बाद ये पूर तरह से उसमें मिल जाएगा। इस पेस्‍ट के तैयार हो जाने के बाद आप इसे अपने चेहरे पर लगाएं और आराम से पूरी त्वचा को इस पेस्ट के अंदर समाहित करना है। उसके बाद करीब 15 मिनट त‍क के लिए इस पेस्‍ट को अपने चेहरे पर रहने दें ताकि ये सूख जाए और करीब 15 मिनट हो जाए तब आपको इस लेप को उतार देना है।जब लेप पूरी तरह से सूख जाए तो आप इसे हटाकर अपने ठंडे पानी से धो लें। ठंडे पानी से मुहं धोने से हमारे चेहरे की झुरियाँ कम हो जाती है और हमारे चेहरे पर एक अलग सा ग्लो आ जाता है। अगर आपको कहीं शादी या पार्टी में जाना हो तो ये आपके लिए बेहद ही शानदार नुस्‍खा है।

रविवार, 19 नवंबर 2017

फोन या सार्वजनिक स्थान पर SC/ST के खिलाफ जातिसूचक शब्द कहना अपराध : सुप्रीम कोर्ट


RAJKUMAR PAL
Publish: Nov, 19 2017 02:54:40 (IST)
MISCELLENOUS INDIA
सार्वजनिक स्थानों या फोन पर अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी करना अपराध

नई दिल्ली: एससी और एसटी संबंधित एक मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। सार्वजनिक स्थानों या फोन पर अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी करना अपराध माना जाएगा। इसके लिए अधिकतम पांच जेल की सजा हो सकती है।
दरअसल जस्टिस जे चेलामेश्वर और एस अब्दुल नजीर की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 17 अगस्त के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। क्योंकि हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के रहने वाले व्यक्ति की याचिका खारिज कर दी थी। जिसने अपने खिलाफ एक महिला द्वारा दर्ज करायी गई प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की थी। व्यक्ति पर आरोप है कि उसने फोन पर अजा/अजजा श्रेणी की एक महिला के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
वकील ने कोर्ट में दिया ये दलील
वहीं दो जजों के बेंच ने कहते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी कि आरोपी व्यक्ति को सुनवाई के दौरान यह साबित करना होगा कि उसने महिला से सार्वजनिक स्थल से बात नहीं की थी। वहीं इस मामले में आरोपी पक्ष के वकील विवेश विश्नोई ने कहा कि पहली बात की यह एक प्राइवेट बातचीत थी। महिला और उनके मुवक्किल ने जब बात की तब दोनों अलग-अलग शहरों में थे। साथ ही उन्होंने कहा कि इस कारण यह नहीं कहा जा सकता है कि आरोपी तब सार्वजनिक स्थान पर खड़ा या मौजूद था।
2008 में सार्वजनिक स्थल पर आ चुका है फैसला
वकील विवेश विश्नोई ने आगे कहा कि इस केस में जब दोनों व्यक्ति अलग-अलग शहरों में थे और सारी बातचीत जब फोन पर हो रही है। साथ ही किसी ने नहीं देखा कि मेरे मुवक्किल सार्वजनिक स्थल पर खड़े हैं। उसके साथ ही एक निजी बातचीत थी। उन्होंने कहा कि वैसे भी 2008 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने पहले से ही तय कर रखा है कि 'सार्वजनिक स्थल या दृष्टिकोण' का मतलब क्या है।https://m.patrika.com/miscellenous-india/supreme-court-rules-out-abusing-scst-over-phone-in-public-place-2013856/


शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

सहारनपुर बवाल: जानिए क्या है भीम आर्मी और कौन हैं इसके संस्थापक


   

सहारनपुर। शब्बीरपुर में हुए जातीय संघर्ष के बाद गांव रामनगर में हुए दलित बनाम पुलिस बवाल को लेकर एक खास नाम सामने आया है। जिसका नाम है भीम आर्मी। भीम आर्मी का पूरा नाम भारत एकता मिशन भीम आर्मी है। छह साल पहले दलितों के दमन की वारदातों को ध्यान में रखते हुए भीम आर्मी के गठन का निर्णय लिया गया था। आज यह संगठन दलित युवकों का पसंदीदा संगठन बन गया है। फेसबुक पर इस संगठन को पसंद करने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। खास बात यह है कि इस संगठन में दलित युवकों के साथ साथ पंजाब और हरियाणा के सिख युवा भी जुड़े हैं। एक दो गुर्जर युवक भी इस संगठन के सदस्य हैं।

सहारनपुर में यह संगठन अपनी खास पहचान बनाए हुए है। इस संगठन के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष, अधिवक्ता चंद्रशेखर आजाद हैं। करीब छह साल पहले जब चंद्रशेखर के पिता अस्पताल में भर्ती थे तो चंद्रशेखर ने अपने अस्पताल में लोगों से दलित समाज के दमन की बातों को सुना। उस वक्त वह अमेरिका जाकर उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते थे, लेकिन दलितों के दमन की बात सुनकर चंद्रशेखर ने अमेरिका जाने का विचार त्याग दिया और 2011 में गांव के कुछ युवाओं के साथ मिलकर भारत एकता मिशन भीम आर्मी का गठन किया।

तीस वर्षीय चंद्रशेखर पेशे से अधिवक्ता हैं, संगठन के साथ-साथ वह वकालत भी करते हैं। जिस वक्त भीम आर्मी का गठन किया गया था, उस समय इसका उद्देश्य दलित समाज की सेवा करना और इस समाज की गरीब कन्याओं के लिए धन जुटाकर विवाह संपन्न कराना था। लेकिन तीन दिन पूर्व गांव रामनगर में हुए बवाल ने इस संगठन के नाम पर कालिख पोत दी। बकौल चंद्रशेखर, जिस दिन यह बवाल हुआ उस दिन वह अपने परिवार के सदस्यों के साथ अपने गांव छुटमलपुर स्थित घर पर थे।

चंद्रशेखर ने बताया कि ने कहा, राजनीतिक दलों को सभी समुदायों के वोटों की ज़रूरत होती है लेकिन कोई भी वास्तव में दलितों की परवाह नहीं करता है। हमारे लोगों पर हर दिन अत्याचार किया जाता है और उनके पास आवाज नहीं है वे पुलिस में नहीं जा सकते क्योंकि वे हमारी बात नहीं सुनते हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि उना (पिछले साल गुजरात में दलितों के हमलों पर गठबंधन पर हमला) या (हैदराबाद छात्र) रोहिथ वेमुला की आत्महत्या आदि ऐसे मामले हैं, जहां पर दलितों की कोई सुनवाई नहीं हुई। चंद्रशेखर के अनुसार, भीम सेना एक मंच है जहां हम अपने युवा दलित समाज हित में कार्य करने के निर्देश देते हैं और उन्हें जागरूक करते हैं।

चंद्रशेखर ने बताया कि दस मई को मल्हीपुर रोड पर हुई वारदात में सभी लोग भीम आर्मी के सदस्य नहीं थे। उन्होंने कहा कि मल्हीपुर रोड पर बवाल होने के बाद अधिकारियों ने उसे विरोधियों को शांत करने के लिए बुलाया था। वह भगवान बुद्ध की शिक्षाओं के साथ साथ डा. अंबेडकर के अहिंसावादी रास्तों का पालन करते हैं। उन्होंने कहा कि मैं सभी को बताता हूं कि इन दिनों सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दमन से लड़ने के लिए दलित शिक्षित हो। जब हम उनकी (ऊपरी जाति) नौकरियां प्राप्त करें, तभी कुछ समानता हो जाएगी। हमारे पास एक ही खून है, इसलिए अंतर क्यों? दो साल पहले चंद्रशेखर के पिता का देहांत हो गया था। अब परिवार में दो बहनें हैं, जिनमें से एक की शादी हो चुकी है और दो भाई है, जिनमें एक चंद्रशेखर की भी शादी नहीं हुई है। दूसरा भाई पढ़ाई के साथ साथ एक मेडिकल स्टोर पर नौकरी करता है। एक चचेरा भाई है, जो इंजीनियर है। वही परिवार को समय समय पर आर्थिक सहायता प्रदान करता है।

आपको बता दें फेसबुक पर भीम आर्मी का एक पेज बना है, जिसके फालोअर्स की संख्या में दिन प्रतिदिन बढ़ोत्तरी हो रही है। इस पेज से ज्यादातर दलित जुड़े हैं, लेकिन पंजाबी और सिख युवा भी इसके सदस्य हैं। स्थानीय स्तर पर यह संगठन इतना मजबूत है कि हर गांव में इस संगठन से जुड़े दलित युवक हैं। सहारनपुर के अलावा शामली और मुजफ्फरनगर जनपदों में भी कार्य कर रहा है। हरियाणा के अंबाला और यमुनानगर के अलावा राजस्थान  उत्तराखंड के मैदानी जनपद देहरादून व हरिद्वार में भी इस संगठन के कार्यकर्ता हैं।

जातीय सेनाओं ने हरेक जाति को एक राष्ट्र बना दिया :- भँवर मेघवंशी


युवा लेखक शून्यकाल के सम्पादक की खास रिपोर्ट 
जातीय सेनाओं पर प्रतिबंध के लिए राजस्थान के सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी ने राष्ट्रपति से की अपील, प्रतिबंध की गिनवाई विस्तार में वजहें
1- भारतीय संविधान के अनुसार वैधानिक रूप से तीन सेनाओं - थलसेना, वायुसेना और जलसेना का अस्तित्व है, जिन्हें शस्त्र धारण कर देश की अखंडता, एकता और संप्रभुता का संरक्षण करने का दायित्व सौपा गया है , ये तीनों सेनाएं भारत के राष्ट्रपति के अधीन है और संविधान के दायरे में पूर्णतः कानूनी रूप से काम करने हेतु बाध्य है।
2- भारत का संविधान देश के नागरिकों को शांतिपूर्ण एवम अहिंसक रूप से संगठित होने, संघ बनाने का मौलिक अधिकार देता है, जिसके तहत कई संस्था, संगठन, अभियान और जन आंदोलन, ट्रेड यूनियन एवम राजनीतिक दल गठित हो कर संविधान के दायरे में काम करते है ।
3- जिन तत्वों की लोकतंत्र में आस्था नहीं है, ऐसे सामंती और जातिवादी तत्व संविधान के दायरे से ऊपर उठकर निजी गिरोह बना लेते है, जिन्हें किसी प्रसिद्ध इतिहास पुरूष अथवा धार्मिक व्यक्ति के नाम या धर्म, सम्प्रदाय अथवा जाति का नाम देकर सेना बना लेते है जो कि पूर्णतः असंवैधानिक होती है और गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त रहती है।
4-आजकल ऐसी जातीय, धार्मिक और साम्प्रदायिक निजी सेनाएं देश भर में सक्रिय हो चुकी है जो भारत राष्ट्र की कानून और व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती के रूप में उभर रही है, ये निजी सेनाएं असामाजिक तत्वों के गिरोह है, जो अपनी जाति या सम्प्रदाय को ही राष्ट्र समझते है ।
5-जाति सेनाओं के अत्यधिक उभार से यह बात साबित होती है कि जातीयां अब इस देश मे सम्पूर्ण प्रभुता सम्पन्न स्वतन्त्र गणराज्यों का स्वरूप ले रही है ,जिनकी अपनी सेनाएं है और अपनी खांप नामक न्याय पंचायतें जो कि अदालतों के समानांतर वैधानिक कार्यवाहियों को अंजाम देती है ,कई बार तो लोगों की चरित्र परीक्षा और जान तक लेने के आदेश दिए जाते है ,जो कि एक राष्ट्र के रूप में भारत के लिए अत्यंत शर्मनाक बात है ।
6-आजकल हर जाति की सेना मौजूद है, इन्हें बाकायदा आर्मी, सेना या रेजिमेंट कहा जाता है ,इनकी ड्रेस होती है, झंडे होते है, इनके पास हथियार होते है और वे अक्सर सशस्त्र बलों की भांति हथियारों के साथ सड़कों पर मार्चपास्ट करते है, आम जन में दशहत का माहौल बनाते है और अपनी जाति के लिए मांगे मनवाने के लिए सड़कें जाम कर देते है, रेल की पटरियां उखाड़ लेते है, थाने जला देते है और पुलिस एवम अर्धसैनिक बलों पर गोलीबारी करते है ,ये अपनी जाति समुदाय के लिए राष्ट्र की हज़ारों करोड़ की संपत्ति को नुकसान पँहुचाने से भी गुरेज नही करते है, इनके लिए राष्ट्र से पहले अपनी जाति,धर्म,समुदाय है ।
7- इन जातीय सेनाओं ने हरेक जाति को एक राष्ट्र बना दिया है, इनकी अपनी न्याय व्यवस्था है ,इनकी अपनी सेनाएं है, इनका अपना निज़ाम, इनके डंडे, इनके झंडे है ,इनको देश और देश के अन्य नागरिकों से कोई मतलब नही है, इन जातीय सेनाओं ने भारत का लोकतंत्रीकरण करने के बजाय कबीलाईकरण कर दिया है, हम 21 वीं सदी के बजाय 12 वी सदी में पँहुच गये है, निजी जातीय सेनाओं का अस्तित्व में आना और जीवित बने रहना हमारे राष्ट्र राज्य की विफलता है ।
8-जाति सेनाएं अब संविधान से ऊपर हो गयी हैं, वे संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की आज़ादी को छीन रही हैं ,वे नागरिकों पर संविधानेतर सेंसरशिप लाद रही हैं, अब तो ये सेना नामधारी जातिवादी गिरोह तय कर रहे हैं कि इस देश का इतिहास क्या होगा ? चित्र क्या बनेंगे ? गीत कविताएं क्या गाई जाएगी? साहित्य क्या लिखा जाएगा ? किताबें कौनसी छपेगी ? फिल्में क्या बनेगी ? उनमें क्या फिल्माया और दिखाया जाएगा...

महोदय ,इस देश मे अब हर चीज़ सड़क छाप गुंडे तय करेंगे ? संविधान द्वारा दिये गए नागरिक अधिकारों का इन जाति सेनाओं ने अपहरण कर लिया है और उनके विरुद्ध किसी प्रकार की कार्यवाही नही की जाती है ,यह कैसी बेबसी है महामहिम ?
अगर हमें अपनी महान लोकशाही को बचाना है, तो संवैधानिक सेनाओं के अलावा की सभी सेनाओं ,आर्मियों और रेजिमेंटों पर तुरन्त प्रभाव से रोक लगानी होगी और जाति, सम्प्रदाय ,धर्म ,मजहब आधारित तमाम सेनाओं को असंवैधानिक घोषित कर उनपर पूर्णतया प्रतिबंध लगाना होगा ,अन्यथा ये राष्ट्रद्रोही जातिवादी गिरोह भारत नामक राष्ट्र राज्य का अस्तित्व ही मिटा देंगे और हम फिर से अलग अलग कबीलों में बंट कर धूल धूसरित हो कर मिट जाएंगे ।
अतः भारत राष्ट्र के राष्ट्रपति होने के नाते और तीनों संवैधानिक सेनाओं के मुखिया होने के नाते आपसे यह पुरजोर अनुरोध है कि अविलम्ब जाति ,धर्म ,मजहब आधारित समस्त सेनाओं पर रोक के आदेश जारी करें ,इस तरह के गैरकानूनी गिरोहों के गठन तथा परिचालन को अवैध करार दे कर कानूनी अपराध घोषित किया जाए और बरसों से इस प्रकार के सैन्य गिरोह संचालित कर देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त जाति सेनाओं के मुखियाओं की संपत्तियों एवं गतिविधियों की सघन जांच की जाएं ।
उम्मीद है कि आप राष्ट्र के लिए खतरा बन चुकी इन जातीय सेनाओं के खिलाफ तुरन्त कार्यवाही के दिशा निर्देश प्रदान करेंगे और इन असंवैधानिक सैनिक गिरोहों को पूर्णतः तुरन्त प्रतिबंधित करने के आदेश भारत सरकार को देंगे ।

नवरत्न मन्डुसिया

खोरी गांव के मेघवाल समाज की शानदार पहल

  सीकर खोरी गांव में मेघवाल समाज की सामूहिक बैठक सीकर - (नवरत्न मंडूसिया) ग्राम खोरी डूंगर में आज मेघवाल परिषद सीकर के जिला अध्यक्ष रामचन्द्...