शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

मेघवाल समाज की प्रतिभाओं का सम्मान

बहरोड़ ( Dec 10, 2012, 01:26AM IST)
मेघवाल समाज का प्रतिभा सम्मान समारोह रविवार को अलवर रोड स्थित गरीबनाथ छात्रावास पर आयोजित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि पुलिस उपाधीक्षक डॉ. लालचन्द कायल ने कहा कि समाज में प्रतिभाओं की कमी नहीं है सिर्फ उन्हें तराशने की आवश्यकता है। प्रतिभाओं के सम्मान से उन्हें आगे आने का प्रोत्साहन मिलता है। इससे पूर्व बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष दीप प्र\'जवलित कर समारोह का शुभारंभ किया। समाज अध्यक्ष बनवारी लाल मेघवाल ने लोगों को एकजुट होकर समाज का विकास करने पर बल दिया। इस अवसर पर 25 प्रतिभाओं को स्मृति चिन्ह व डिक्शनरी देकर सम्मानित किया। इस दौरान बलबीर मेघवाल, मुकेश कुमार, माड़ाराम, रामवतार मेघवाल, डा. गजराज मेघवाल, निरंजन खुड़ाना, सुनीता मेघवाल, तोताराम मेघवाल सहित समाज सदस्य मौजूद रहे। मंच का संचालन अध्यापक पूर्ण चंद मेघवाल ने किया।


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मेघवाल समाज (7 जोडे बंधे परिणय सूत्र मे )


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मेघवाल समाज का प्रथम सामूहिक विवाह सम्मेलन गुरूवार को सम्पन्न हुआ । जिसमे 7 जोडो का विवाह हुआ। इस सम्मेलन मे उदयपुर सम्भाग भर के क्षेत्रो से हजारों समाजजन जुटे । मेघवाल समाज सेवा समिति की ओर से यह विवाह सम्मेलन का आयेजन हुआ । सुबह 7 अजे फतह स्कूल से शोभायात्रा की शरूआत हुई, जो शहर के प्रमुख मार्ग सुरजपोल,बापू बाजार,देहलीगेट होते हुए नगर परिषद टाउन हाल पहुची। जहां तोरण की रस्म हुई, वरमाला,पाणिग्रहण संस्कार के बाद समारोह मे अतिथियों का सम्मान हुआ । समारोह मे मुख्य अथिति समाजसेवी नाथुलाल मेघवाल,प्रोफसर बी.आर बामनिया,अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी प्रभेलाल मेघवाल,कांग्रेस नेता पंकज शर्मा,कोषाध्यक्ष तेजराम मेघवाल और महासचिव जगदीश मेघवाल उपस्थित थे कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष गणेश लाल ने की। सभापति रंजनी डांगी और उदयपुर सांसद रघवीर सिंह मीणा ने भी शिरकत कर वर-वधूओं को आर्शिवाद दिया । शाम को वर- वधुओं की विदाई हुई । कार्यक्रम का संचालन विजयराम बावल ने किया । समाजजन को पहले इस सामूहिक विवाह सम्मेलन मे खासा उत्साह देखा गया ।

news at Thursday, 26 April 2012

शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

मेघवाल समाज की बैठक में महापंचायत पर चर्चा

पाली -!- राजस्थान मेघवाल समाज की बैठक बुधवार को मेघवाल समाज कार्यालय में मेघसेना के कार्यकारी अध्यक्ष गोपाल काटिवाल की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक के दौरान 23 दिसंबर को जयपुर में आयोजित होने वाली समाज की महापंचायत की तैयारियों पर चर्चा की गई। बैठक में जैनाराम सत्याग्राही, इमीलाल गरूवा, कुलदीप चार्लिया, जिलाध्यक्ष गणेशराम बोस, हेमराज तंवर, राम रतन आदि मौजूद रहे। बैठक के दौरान पदाधिकारियों को महापंचायत को सफल बनाने के लिए गांव गांव में समाज बंधुओं से संपर्क करने का आह्वान किया गया।

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सोमवार, 13 अगस्त 2012

जायल के पूर्व विधायक बारूपाल का निधन

बुधवार, 25 जुलाई 2012

राजस्थानी वाचिक परंपरा का लाडला गीतकार देवकरण मेघवंशी

किशोर पारीक “ किशोर”

राजस्थानी भाषा साहित्य को सुदूर दूर दूर तक लोकप्रिय बनाने में राजस्थानी कविता मंच और मंच के कवियों का अभूतपूर्व योगदान रहा है ! मेघराज मुकुल की “सेनाणी”, गजानन वर्मा (रतनगढ), की “बाजरे की रोटी”, विश्वनाथ विमलेश(झुंझुनू), की “बीनणी बोट देबा चाली” रघुराज सिंह हाडा (झालावाड), की “ आज चांदणी पील्यां” कल्याण सिंह राजावत (जयपुर) की “लीरा लीरा जिंदगी और बेलड़ी” कन्हैया लाला सेठिया (पिलानी), की “धरती धोरां री और अरे घास री रोटी” धन्ना लाल सुमन की “म्हारे देस रो किसान” कान दान “कल्पित” (नागोर) की “ डब-डब भरिया बाईसारा नैण” मोहम्मद सद्दीक(बीकानेर) की “ थे मज़ा करो महाराज थांकी पांचू घी में है “ बिहारी शरण पारीक(जयपुर) की “बफर का खाणा और रंगोली” बुधिप्रकाश पारीक(जयपुर) की “ईं मंदर सू कोई म्हाकी ज्यूत्यां लेगो चोर” दुर्गादान सिंह गौड (कोटा) की “गोरी गोरी गजबन बणी-ठणी, मुजरो मुजरो खमा घणी” मुकुट मणिराज (सुल्तानपुर-कोटा) की “काळजो कुतारगी रे, छोरी तीखा नैणा वाली” जैसी रचनाओं के माद्यम से राजस्थानी का प्रचार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है ! ऐसे ही युवा रचनाकार-काव्यधर्मी हैं केकडी के राजस्थानी भाषा के मीठे गीतकार देवकरण मेघवंशी !

1 जुलाई 1973 को अत्यंत निर्धन कृषक परिवार में जन्मे तीन वर्ष की उम्र में पिता का साया उठने पर माँ की मेहनत से पढ़े, उच्च शिक्षा के लिये स्वंय ने मजदूरी की ! बी.ए, बी.एड अंगरेजी तक अध्ययन करने के साथ-साथ उन्होंने एक गीतकार के रूप में उभरना शुरु किया और आज एक सद्य राजस्थानी हास्य गीतकार है, देवकरण मेघवंशी ! हिंदी और राजस्थानी कविता की वाचिक परंपरा का ये लाडला रचनाकार घंटों मंच से लोगों को बांधे रखने में दक्ष है।

देवकरण मेघवंशी के गीतों में जीवन के बेहद आम लगने वाले राजस्थान की भाव भूमि से उठाये विविध विषय, सम्मिलित होते हैं ! रोज़मर्रा की समस्याओं को हास्य से प्रवाहित कर उनकी बेबाक़ी और गीत अदायगी उन्हें अपनी पीढ़ी के रचनाकारों में विशिष्ट बनाती है।

इन्हें काव्य संगम, अजमेर से युवा राजस्थानी गीतकार सम्मान, साहित्य सर्जन कला मंडल, शाहपुरा से राजस्थानी कवि सम्मान, जिला कलक्टर अजमेर पुष्कर मेला प्रशस्ति पत्र, भारत विकास परिषद सम्मान, विजयनगर क्लब द्वारा सम्मान, अखिल भारतीय स्टार पर मेघवंशी शिरोमणि सम्मान, भारती मंच, लाडनू द्वारा युवा रचनाकार पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है !

मेघवंशी की कविताओं का आकाशवाणी, दूरदर्शन, धमाल एवं दबंग चैनल पर भी टीवी प्रसारण हो चुका है । मंच के बेहद कुशल संचालक मेघवंशी ने राजस्थानी में हास्य एवं गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को राजस्थानी भाषा की मधुरता का आभास कराया।

इनकी लोकप्रिय रचनाएँ है !

कुरजां गीत में श्रेष्ठ अनुप्रास और अलंकार का अनूठा प्रयोग किया गया है !

“ पगल्या पूजूं पंगा पडूं पंचरंग पोम्चो फेरा स्यूं,

कूण्डा में पानी भरके म्हू थारे खातिर लटका स्यूं,”

मोतीडा री जाजम पर जीमण करास्यूं

कुरजां म्हारी ये कुरजां प्यारी ये !

एक गीत में यमक और अनुप्रास का सुन्दर प्रयोग देखें ! विरहण का पत्र पति नाम से ली गयी

“पल पल पलकां परदेशी स्यूं प्रीत पाळ पछताय,

पुरवा पवन प्रीत में, पागल पलट पंछाटा खाय !

हिरदा री हरियाली हारी, हार्यो हर हकदार

हियो हारकर हिरदा वालो, हुयो हिया को हार

इनकी एक श्रंगारिक रचना के माध्यम से श्रोताओं को गुदगुदाती है।

“बण ठण चाली म्हारी काळजा री कोर,

म्हारो काळज्यो ही छोड़ग्यो ठोर,

गजबण गजब करे”

इनके एक पहचान हास्य गीत की पंक्तिया !

तेल समझ कर गरम दूध में बणा रियो नमकीन

हलवाई की हालत बिगड़ी बण्यो गज़ब को सीन

प्रवासी राजस्थानियों के लिए लिखी गई अनुपम रचना धरती राजस्थान की !

धूळा मायं धूळ हो रिया महळ माळल्या प्यारा रे

आँगणियाँ अटक्यो धूळा स्यूं कोनी खाया वाळा रे

घर में ही घर घाल पखेरू बाट जो हे मेहमान की

आजा मनरा मीत चितारे धरती राजस्थान की

हास्य कविताओं के लिए जाने जाने वाले इस कवि के पास अनेको मार्मिक कविताएँ भी है ! मेघवंशी के गीत जाड़ों की उस कच्ची, गुनगुनी धूप का आभास देते हैं, जिसे आँख खोल कर जाँचने-परखने में नहीं अपितु हल्की तन्द्रा में जिसके स्पर्श को अन्तरतम तक अनुभूत करने में जो सुख है, वह शब्दातीत है। देवकरण मेघवंशी के गीतों कविताओं का आनन्द श्रोताओं ने सुनकर ही लिया हैं निकट भविष्य में ये अपनी रचनाओं का एक संग्रह भी प्रकाशीत करवाने की और अग्रसर है, जिससे पाठक भी इन रस सिक्त कविताओं का आनंद उठा सकेंगे

मेघवंशी को सक्रिय राजनीति में जाने की अनुमति


खबरकोश न्यूज






भीलवाड़ा, 25 जुलाई 2012। दलित आदिवासी एवं घुमन्तु अधिकार अभियान राजस्थान तथा संयुक्त दलित संगठन की केंद्रीय कमेटी ने सामाजिक कार्यकर्ता
भंवर मेघवंशी को सक्रिय राजनीति में हिस्सा लेने की अनुमति प्रदान कर दी है।

डगर के प्रदेश संयोजक परशराम बंजारा तथ जिला संयोजक महादेव रेगर एवं संयुक्त दलित संगठन के प्रवक्ता आर.पी. बैरवा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में उपरोक्त जानकारी देते हुये बताया गया कि मेघवंशी ने राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम करने की इच्छा जाहिर करते हुए अनुमति मांगी थी। व्यापक विचार विमर्श के पश्चात संगठन ने मेघवंशी को अनुमति देने का फैसला सर्वसम्मति से किया है।

डगर के प्रदेश संयोजक बंजारा ने कहा है कि प्रदेश भर के दलित, आदिवासी एवं घुमन्तु समुदाय के जनसंगठन समाजसेवी मेघवंशी के राजनीति में सक्रिय होने के फैसले से उत्साहित है तथा वे चाहते है कि मेघवंशी शीघ्र ही किसी राजनीतिक दल की सदस्यता ले और बड़ी भूमिका निभावें।
डगर के प्रदेश सचिव लखन सालवी ने जानकारी दी कि हाल ही में माण्डल क्षेत्र के शिवपुर गांव में हुई विशाल आध्यात्मिक सभा को संबोधित करते हुए मेघवंशी ने भी राजनीतिक सक्रियता का संकेत दिया था, तब से ही दलित, आदिवासी, घुमन्तु एवं अल्पसंख्यक व अन्य वंचित समुदायों में उत्साह बना हुआ है तथा उम्मीद की जा रही थी कि डगर की ओरस से कोई बड़ा निर्णय लिया जायेगा और अन्ततः डगर ही नही बल्कि शेष दलित संगठनों ने भी मेघवंशी के राजनीति में सक्रिय होने के फैसले पर मुहर लगा दी है।

उल्लेखनीय है कि सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी को ग्रामीण मजदूर किसानों, दलितों व आदिवासियों के हित में किये गए कार्यों की बदौलत राष्ट्रीय स्तर पर कई अवार्ड मिल चुके है। उन्हें प्रतिष्ठित सरोजनी नायडु अवार्ड, भौरूका पुरस्कार, मानव गरिमा पुरस्कार, सामाजिक न्याय अवार्ड, अम्बेडकर अवार्ड, सिटीजन फॉर पीस अवार्ड सहित दर्जनों अवार्ड मिले है। वर्ष 2007 में उन्हें ‘हीरो ऑफ दी होप’ घोषित किया गया था, वहीं उन्हें ‘शांतिदूत और उम्मीद का नया चेहरा’ भी घोषित किया गया। मेघवंशी मूलतः लेखक है, उन्होंने सैकड़ों आलेख और विभिन्न विषयों पर 18 किताबें लिखी है तथा देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों में अध्यापन व दस्तावेजीकरण का काम किया है। उन्होंने 3 डॅाक्यूमेंन्ट्री फिल्में भी बनाई है तथा दलित आदिवासी समुदाय को न्याय दिलाने के लिये कई जन आंदोलनों में भी नेतृत्वकारी भूमिका निभाई।

मेघवंशी महानरेगा, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक अंकेक्षण एवं सूचना का अधिकार जैसे मुद्दों पर भी निरन्तर सक्रिय रहे है, वे आजकल अपने गांव में स्थित ‘अम्बेडकर भवन’ के जरिये जन सरोकार के मुद्दों पर संघर्षरत है तथा एक लोकप्रिय न्यूज वेबसाइट ‘खबरकोश डोट कॉम’ का भी सम्पादन करते है तथा अब शीघ्र ही किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़कर सक्रिय राजनीति में भागीदारी निभायेंगे।


नवरत्न मन्डुसिया

खोरी गांव के मेघवाल समाज की शानदार पहल

  सीकर खोरी गांव में मेघवाल समाज की सामूहिक बैठक सीकर - (नवरत्न मंडूसिया) ग्राम खोरी डूंगर में आज मेघवाल परिषद सीकर के जिला अध्यक्ष रामचन्द्...