हमारे उद्देश्य: - मेघवाल समुदाय समृद्ध सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, मानसिक और सांस्कृतिक. मृत्यु भोज, शराब दुरुपयोग, बाल विवाह, बहुविवाह, दहेज, विदेशी शोषण, अत्याचार और समाज और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर अपराधों को रोकने के लिए और समाज के कमजोर लोगों का समर्थन की तरह प्रगति में बाधा कार्यों से छुटकारा पाने की कोशिश करेंगे :- नवरत्न मन्डुसिया
रविवार, 19 नवंबर 2017
फोन या सार्वजनिक स्थान पर SC/ST के खिलाफ जातिसूचक शब्द कहना अपराध : सुप्रीम कोर्ट
शुक्रवार, 17 नवंबर 2017
सहारनपुर बवाल: जानिए क्या है भीम आर्मी और कौन हैं इसके संस्थापक
जातीय सेनाओं ने हरेक जाति को एक राष्ट्र बना दिया :- भँवर मेघवंशी
महोदय ,इस देश मे अब हर चीज़ सड़क छाप गुंडे तय करेंगे ? संविधान द्वारा दिये गए नागरिक अधिकारों का इन जाति सेनाओं ने अपहरण कर लिया है और उनके विरुद्ध किसी प्रकार की कार्यवाही नही की जाती है ,यह कैसी बेबसी है महामहिम ?
मेघवाल समाज का तीसरा सामूहिक विवाह सम्मेलन 19 नवंबर 2017 को, सगाई की रस्म आयोजित*
जयपुर के रामपुरा डाबड़ी में होगा आयोजन
भीम प्रवाह न्यूज/जयपुर। बलाई समाज सामूहिक विवाह समिती और मेघवंश जाग्रति संस्थान, नीमकाथाना (सीकर) के संयुक्त तत्वावधान में बलाई समाज का तृतीय सामूहिक विवाह सम्मेलन रविवार 19 नवंबर 2017 को कांदेला कृषि फार्म हाऊस, रामपुरा डाबड़ी, एन एच. 11(52), सीकर रोड़, तह. आमेर , जि. जयपुर पर आयोजित होगा।
सगाई की रस्म आयोजित
तृतीय सामूहिक विवाह सम्मेलन का सगाई समारोह 12 नवंबर को आयोजित किया गया । जिसके मुख्य अतिथि प्रदेशाध्यक्ष डॉ. रणजीत महरानियां थे। अध्यक्षता विवाह समिति अध्यक्ष चांदमल काला ने की। सभी जोड़ो को डॉ. रणजीत मेहरानियां की तरफ से बरी का बेस व सूट का कपड़ा भेंट किया गया ।
यह जानकारी देते हुए विवाह सम्मेलन के संयोजक सोदागर कांदेला ने बताया कि समाज के सभी लोगो के सहयोग व आशीर्वाद से बलाई समाज को खर्चीली शादियों व दहेज से मुक्ति दिलाने हेतु प्रथम प्रयास में 5 दिसंबर 2015 को 13 जोड़ो का व व्दितीय प्रयास में दि. 20 नवंबर 2016 को 21 जोड़ो का भव्य सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन कर समाज सुधार व उत्थान का एक नया आयाम स्थापित करने का प्रयास विवाह समिती व्दारा किया गया। इसी प्रकार समाजोत्थान हेतु हमारी दोनो संस्थाओ व्दारा तृतीय प्रयास के रूप में *(रविवार 19 नवंबर 2017)* को पुन: 51 जोड़ो के सामूहिक विवाह सम्मेलन का लक्ष्य रखा गया हैं। विवाह हेतु योग्य जोड़ो से 11,000/- रुपए आर्थिक सहयोग व 500/- रूपये रजिस्ट्रेशन शुल्क के तय किया गया है।
शनिवार, 11 नवंबर 2017
मेघवंश समाज के पर्यायवाची नामों की राज्यवार तालिका
अरुणाचल प्रदेश – ऋषि, मुची, महार
असम – मुचि, ऋषि, महार, बरुवा, पान
बिहार – घासी, घसीया, तांती, तन्तुवा, दुसाध, मुची
चंडीगढ़ – रामदासी, कबीरपंथी, जुलाहा, कोरी, कोली, मेघ
दादर नगर हवेली – मैघ्यावंशी, महार
दिल्ली – बलाई, रामदासिया, कबीरपंथी, कोली, मेघवाल
गुजरात – मेघवाल, मेघवार, मैह्यवंशी, भांबी, बंभी, रोहिदास, रोहित, बणकर, मारू
गोवा दमन दीव – मेघ्यावंशी, महार
हरियाणा – मेघ, मेघवाल, कोरी, कोली, महाशय, कबीरपंथी, जुलाहा, रामदासिया, बलाही, जाटव, जाटवा, भांबी
हिमाचल – मेघ, कोरी, कोली, महाशय, कबीरपंथी, जुलाहा, बलाही, जाटव, जाटवा, भांबी
जम्मू-कश्मीर – मेघ, कोरी, कबीरपंथी, जुलाहा, रामदासिया
कर्नाटक – मादिगा, सूर्यवंशी, पदमशाली, भांबी, भांभी, मदार, रोहिदास
केरल – वेल्लुवन, मुची
मध्यप्रदेश – मेघवाल, मेहरा, मेहर, महार, बलाई, भांबी, रामनामी, सतनामी, घासी, धानिया, कोरी, कोली
महाराष्ट्र – मेघ, मेघवाल, मेघवार, बलाई, भांबी, बंभी, सतनामी, सूर्यवंशी, घासी, घसिया, कोरी, मेहरा, मुची, मादिगा, मदार, महार, मेगु, मैह्यवंशी, कोरी
मणीपुर – मेघायल, ऋषि, मपची, रविदास
मिज़ोरम – ऋषि, मुची, कबीरपंथी, जुलाहा, महार
मेघालय – मुची, ऋषि, महार
ओड़िशा – सतनामी, मारू, घरसी, घसिया, कोरी, भापिग, मुची, मादिगा, महार, मेहरा
पांडिचेरी – मादिग, वेल्लुवन
पंजाब – मेघ, कोरी, कबीरपंथी, जुलाहा, रामदासी
राजस्थान – मेघ, मेघवाल, मेघवार, मेघवंश, मेघवंशी, मैह्यवंशी, बलाई, राजबलाई, भांबी, लाटवा, मारू, बणकर, बुनकर, कोरी, साल्वी, सूत्रकार, ऋषि, रिखिया, छड़ीदार, चोबदार, बैरवा, जाटव
तमिलनाडु – कोलियान, मादिगा, वेल्लुवन, मुची
त्रिपुरा – बागड़ी, घासी, घसिया, कोल, कोरी, कोरा, कोट, मुची
उत्तर प्रदेश – बलाई, बलाही, घसिया, कोल, कोरी, कोरवा, कोट, शिल्पकार, तंतुवाय, धूसिया, जूसिया, जाटव
पश्चिम बंगाल – मुची, ऋषि, घासी, म्हार
गुरुवार, 19 अक्टूबर 2017
जानिये चेक बाउंस (अनादर) मामले मे सजा क्या होती है




सोमवार, 16 अक्टूबर 2017
भँवर मेघवंशी ने किया अपना देहदान
मैं जो भी हूँ ,आप सबके प्यार ,स्नेह और मार्गदर्शन की वजह से हूँ। इसलिए आप सबका खूब खूब धन्यवाद ,साधुवाद,आभार ।
आज(25 फरवरी 2017) को 42 साल पूरे हुए ,43 वा प्रारम्भ हुआ। हालाँकि यह दिन भी और दिनों जैसा ही है। अलग कुछ भी नहीं । लेकिन कई वर्षों की एक इच्छा को आज पूरा होते देख रहा हूँ । एक जरुरी फैसला जो कि कुछ वर्षों से लंबित था ,वह ले पाने का सुकून महसूस रहा हूँ ।
कई बरसों से देह दान की इच्छा रही ,वह अब जा कर साथी कमल टाँक एवं ललित दार्शनिक के सहयोग से पूरी हुई। मैं हृदय से आभारी हूँ कमल जी और ललित जी का कि उनकी मदद से यह महत्वपूर्ण कार्य हो सका। आभारी हूँ अपने परिजनों का भी कि उन्होंने सहमति दी।
कई सालों से मेरा यह सोच रहा है कि आखिरी सांस तक जमकर देश और समाज के लिए काम किया जाये और जब मौत आ जाये तो उसके बाद इस देह का उपयोग मेडिकल छात्रों के शोध व अध्ययन के लिए हो ।
मैं इस मौके पर कहना चाहता हूँ कि मेरी स्वाभाविक मौत हो या अस्वाभाविक ,घर पर हो या सड़क पर अथवा आंदोलन या अभियान में । मौत के तुरंत बाद बिना कोई रीति रिवाज किये शांतिपूर्ण ढंग से देह को एस एम एस मेडिकल कॉलेज ,जयपुर को दे दिया जाये।
अपनी देह को जलाने या दफनाने के काम के बजाय मैं यही पसंद करूँगा कि वह मेडिकल विज्ञान के लिए काम आये ।अगर कुछ अंग जरूरतमंदों के लिए उपयोगी हो तो उन्हें भी काम में ले लिया जाये।
मैं किसी प्रकार का अंतिम संस्कार नहीं चाहता । कोई तीसरा या उठावना नहीं चाहता और ना ही 12 दिन तक बैठ कर शोक मनाने के निठल्ले काम से मेरी सहमति है। किसी तरह की शोक सभा नहीं की जानी चाहिए :, मृत्युभोज और गंगा जल ,पिंडदान तथा तर्पण और नदी नाले में ले जा कर अस्थियों के विसर्जन जैसी अवैज्ञानिक चीजे तो कतई नहीं की जाये,क्योकि इनमें मेरा कोई यकीन नहीं है।
आत्मा की शांति ,परमात्मा की प्राप्ति ,स्वर्ग- नरक तथा पुनर्जन्म जैसे खोखले शब्दों से मैं स्वयं को दूर करता हूँ।मैं नहीं चाहता कि मेरे विदा होने के बाद किसी तरह की स्मृति बाकी रहे ,किसी समाधि ,किसी मूर्ति या किसी चित्र की कोई आवश्यकता नहीं है।
अगर आप मुझसे प्यार करते है तो मेरे मरने के बाद नहीं ,मेरे जीते जी साथ जुड़े ,सहयोग करें और वंचितों ,पीड़ितों ,दलितों ,दमितों के लिए न्याय और समानता पर आधारित समाज रचना के अभियान में साथ चलें ।
सब कुछ इस लोक में कीजिये ,परलोक में मेरा विश्वास नहीं है ।सब कुछ जीते जी ,अभी और यहीं ,बाद मरने के कुछ भी मान्य नहीं होगा।
भँवर मेघवंशी जी लब्ज
नवरत्न मन्डुसिया
खोरी गांव के मेघवाल समाज की शानदार पहल
सीकर खोरी गांव में मेघवाल समाज की सामूहिक बैठक सीकर - (नवरत्न मंडूसिया) ग्राम खोरी डूंगर में आज मेघवाल परिषद सीकर के जिला अध्यक्ष रामचन्द्...
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बाबा रामदेव जी महाराज मेघवाल है और इन तथ्यों से साबित होता है ॥ बाबा रामदेव जी महाराज सायर मेघवाल के ही पुत्र थे ॥ और बाबा रामदेव जी मह...
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मेघवंश जाती के प्रवर शाखा और प्रशाखा प्राचीन क्षत्रियो में चन्द्र वंश और सूर्य वंश ये दो वंश मुख्य मने जाते हैं !फ...










