शनिवार, 20 जून 2015

मैं स्वयं बन मेघ जाता :-- हरिवंश राय बच्चन

http://www.hindisamay.com/contentDetail.aspx?id=2065&pageno=1


मेघ' जिस-जिस काल पढ़ता
मैं स्वयं बन मेघ जाता!

1

हो धरणि चाहे शरद की
चाँदनी में स्नान करती,
वायु ऋतु हेमन्त की चाहे
गगन में हो विचरती,

हो शिशिर चाहे गिराता
पीत-जर्जर पत्र तरु के,

कोकिला चाहे वनों में
हो वसन्ती राग भरती,

ग्रीष्म का मार्तण्ड चाहे
हो तपाता भूमि-तल को,
दिन प्रथम आषाढ़ का मैं
'मेघ-चर' द्वारा बुलाता।

'मेघ' जिस-जिस काल पढ़ता
मैं स्वयं बन मेघ जाता!

2

भूल जाता अस्थि-मज्जा-
माँस युक्त शरीर हूँ मैं,
भासता बस - धूम्र-संयुत
ज्योति-सलिल समीर हूँ मैं,

उठ रहा हूँ उच्च भवनों के
शिखर से और ऊपर,

देखता संसार नीचे
इन्द्र का वर वीर हूँ मैं,

मन्द गति से जा रहा हूँ
पा पवन अनुकूल अपने,
संग हैं बक-पंक्ति, चातक-
दल मधुर स्वर में गीत गाता।

'मेघ' जिस-जिस काल पढ़ता
मैं स्वयं बन मेघ जाता!

3

झोपड़ी, गृह, भवन भारी,
महल औ' प्रासाद सुन्दर,
कलश, गुम्बद, स्तम्भ, उन्नत
धरहरे, मीनार दृढ़तर,

दुर्ग देवल, पथ सुविस्तृत
और क्रीड़ोद्यान सारे

मन्त्रिता कवि-लेखनी के
स्पर्श से होते अगोचर

और सहसा रामगिरि पर्वत
उठाता शीश अपना
गोद जिसकी स्निग्ध-छाया-
वान कानन लहलहाता!

'मेघ' जिस-जिस काल पढ़ता
मैं स्वयं बन मेघ जाता!

4

देखता इस शैल के ही
अंक में बहु-पूज्य पुष्कर,
पुण्य-जल जिनको किया था
जनक-तनया ने नहा कर

संग जब श्री राम के वे
थीं यहाँ जब वास करतीं,

देखता अंकित चरण उनके
अनेक अचल-शिला पर,

जान ये पद-चिह्न वंदित
विश्व से होते रहे हैं,
देख इनको शीश मैं भी
भक्ति-श्रद्धा से नवाता।

'मेघ' जिस-जिस काल पढ़ता
मैं स्वयं बन मेघ जाता!

5

देखता गिरि की शरण में
एक सर के रम्य तट पर
एक लघु आश्रम घिरा वन
तरु लताओं में सघनतर,

इस जगह कर्तव्य से च्युत
यक्ष को पाता अकेला,

निज प्रिया के ध्यान में जो
अश्रुमय उच्छ्वास भर-भर

क्षीणतन हो, दीनमन हो
और महिमाहीन हो कर
वर्ष भर कांता-विरह के
शाप में दुर्दिन बिताता।

'मेघ' जिस-जिस काल पढ़ता
मैं स्वयं बन मेघ जाता!

6

था दिया अभिशाप अलका-
ध्यक्ष ने जिस यक्षवर को,
वर्ष भर का दण्ड सह कर
वह गया कब का स्वघर को

प्रेयसी को एक क्षण उर से
लगा सब कष्ट भूला,

किन्तु शापित यक्ष तेरा
रे महाकवि जन्म-भर को!

रामगिरि पर चिर विधुर हो
युग-युगान्तर से पड़ा है,
मिल न पाएगा प्रलय तक
हाय, उसका श्राप त्राता।

'मेघ' जिस-जिस काल पढ़ता
मैं स्वयं बन मेघ जाता!

7

देख मुझको प्राण-प्यारी
दामिनी को अंक में भर
घूमते उन्मुक्त नभ में
वायु के मृदु-मन्द रथ पर,

अट्टहास-विहास से मुख-
रित बनाते शून्य को भी

जन तुखी भी क्षुब्ध होते
भाग्य सुख मेरा सिहा कर;

प्रयणिनी भुज-पाश से जो
है रहा चिरकाल वंचित,
यक्ष मुझको देख कैसे
फिर न दुख में डूब जाता।

'मेघ' जिस-जिस काल पढ़ता
मैं स्वयं बन मेघ जाता!

8

देखता जब यक्ष मुझको
शैल-श्रृंगों पर विचरता,
एकटक हो सोचता कुछ
लोचनों में नीर भरता,

यक्षिणी को निज कुशल-
संवाद मुझसे भेजने की

कामना से वह मुझे उठ
बार-बार प्रणाम करता;

कनक विलय-विहीन कर से
फिर कुटज के फूल चुन कर
प्रीति से स्वागत-वचन कह
भेंट मेरे प्रति चढ़ाता।

'मेघ' जिस-जिस काल पढ़ता
मैं स्वयं बन मेघ जाता!

9

पुष्करावर्तक घनों के
वंश का मुझको बता कर,
कामरूप सुनाम दे, कह
मेघपति का मान्य अनुचर

कण्ठ कातर यक्ष मुझसे
प्रार्थना इस भाँति करता -

'जा प्रिया के पास ले
सन्देश मेरा, बन्धु जलधर!

वास करती वह विरहिणी
धनद की अलकापुरी में,
शम्भु शिर-शोभित कलाधर
ज्योतिमय जिसको बनाता।

'मेघ' जिस-जिस काल पढ़ता
मैं स्वयं बन मेघ जाता!

10

यक्ष पुनः प्रयाण के अनु-
कूल कहते मार्ग सुखकर,
फिर बताता किस जगह पर
किस तरह का है नगर, घर,

किस दशा, किस रूप में है
प्रियतमा उसकी सलोनी,

किस तरह सूनी बिताती
रात्रि, कैसे दीर्घ वासर,

क्या कहूँगा, क्या करूँगा,
मैं पहुँचकर पास उसके;
किन्तु उत्तर के लिए कुछ
शब्द जिह्वा पर न आता।

'मेघ' जिस-जिस काल पढ़ता
मैं स्वयं बन मेघ जाता!

11

मौन पा कर यक्ष मुझको
सोचकर यह धैर्य धरता,
सत्पुरुष की रीति है यह
मौन रहकर कार्य करता,

देख कर उद्यत मुझे
प्रस्थान के हित, कर उठा कर

वह मुझे आशीष देता-
'इष्ट देशों में विचरता,

हे जलद, श्रीवृद्धि कर तू
संग वर्षा-दामिनी के,
हो न तुझको विरह दुख जो
आज मैं विधिवश उठाता!'

'मेघ' जिस-जिस काल पढ़ता
मैं स्वयं बन मेघ जाता!


डाली बाई मेघवंशी Dali Bai Meghwanshi

बाबा ने समाधी के वक्त अपने सभी ग्रामीणों को यह समाचार दिए कि अब मेरे जाने का वक्त आ गया हैं, आप सभी को मेरा राम राम । बाबा ने जाते-जाते अपने ग्रामीणों को कहा कि इस युग में न तो कोई ऊँचा हैं, और न ही कोई नीचा, सभी जन एक समान हैं, और सभी को सहर्ष स्वीकार करते हुए कहा कि- "हे जन ईश्वर के प्रतीक हैं अतः उन्हें एक समान ही समझना और उनमे किसी भी प्रकार का भेद न करना । बाबा को रोकने के सभी प्रयास विफल होने पर सभी ग्रामीणों ने डाली बाई को इस दुःखद समाचार के बारे में जाकर बताया कि वे ही कुछ करे । डाली बाई समाचार सुनकर शीघ्र ही नंगे पाँव रामसरोवर की तरफ चली आई । डाली बाई ने आते ही रामदेव जी से कहा कि "हे प्रभु ! आप गलत समाधी को अपना बता रहे हो । ये समाधी तो मेरी हैं ।" रामदेव जी ने पूछा "बहिन, तुम कैसे कह सकती हो कि यह समाधी तुम्हारी हैं?" इस पर डाली बाई ने कहा कि अगर इस जगह को खोदने पर "आटी, डोरा एवं कांग्सी" निकलेगी तो यह समाधी मेरी होगी । ग्रामीणों द्वारा समाधी को खोदने पर वे ही वस्तुएं जो कि डाली बाई ने बताई थी उस समाधी से प्राप्त हुई तो रामदेव जी को ज्ञात हुआ कि सत्य ही यह समाधी तो डाली बाई की हैं । डाली बाई ने अपनी सत्यता दर्शाकर प्रभु से कहा कि "हे प्रभु ! अभी तो आपको इस सृष्टि में कई कार्य करने हैं, और आप हमसे विदा ले रहे हो?" रामदेव जी ने अपनी मुंहबोली बहिन डालीबाई को अपने इस सृष्टि में आने का कारण बताते हुए कहा कि "मेरा अब इस सृष्टि में कोई कार्य बाकी नहीं रहा हैं, में भले ही दैहिक रूप से इस सृष्टि को छोड़कर जा रहा हूँ, परन्तु मेरे भक्त के एक बुलावे पर में उसकी सहायता के लिए हर वक्त हाजिर रहूँगा ।" रामदेव जी और कहने लगे कि "हे डाली ! मैं तुम्हारी प्रभु भक्ति से बहुत प्रसन्न हुआ हूँ और आज के बाद तुम्हारी जाति के सभी जन मेरे भजन गायेंगे और 'रिखिया' कहलायेंगे." इतना कहकररामदेव जी ने डालीबाई को विष्णुरूप के दर्शन दिए, जिसे देख डाली बाई धन्य हो गयी, और रामदेव जी से पहले ही समाधी में लीन हो गयी ।

डांगावास में निषेद्याज्ञा लगा दी होती तो यह नौबत नहीं आती- गहलोत

जयपुर,19 मई (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि डांगावास गांव में अब धारा 144 लगाने के क्या मायने हैं जबकि पूरी प्रशासनिक मशीनरी अब वहां मौके पर मौजूद है। उन्होंने कहा कि घटना के पहले जब तनाव था, एक दूसरे को चुनौती दी जा रही थी, जिला प्रशासन को शिकायत कर दी गई थी तभी धारा 144, 145 या 151 की कार्यवाही कर दी जाती तो आज यह नौबत नहीं आती।

गहलोत ने एक बयान में मंगलवार को कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति चौपट हो चुकी है और हत्या, लूट, चोरी एवं बलात्कार जैसे जघन्य अपराध लगातार हो रहे हैं। पुलिस अधिकारियों की पदोन्नति हुए छह माह होने को हैं मगर रहस्यमय कारणों से इनको पदस्थापित नहीं किया गया है, इसलिए भी पुलिस प्रशासन लुंज-पुंज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पदोन्नत पुलिस अधिकारियों को मालूम है कि उनका तबादला होना है, इसलिए उस रूप में वो भी अपनी ड्यूटी को अंजाम नहीं दे पा रहे हैं। उन्होंने सलाह दी है कि मुख्यमंत्री को शीघ्र ही पदस्थापन का कार्य निबटाना चाहिए।
http://www.jansamachar.com/डांगावास-में-निषेद्याज्ञ/

रामदेव जी महाराज ने मेघवंशी जाति के लिए समाज में बदलाव लाने के लिए धार्मिक अनिवार्यता के रूप में मेघवंशियों को दो वचन दे गए

समाधि से पूर्व भोली-भाली व निष्ठावान मेघवंशी जाति के लिए समाज में बदलाव लाने के लिए धार्मिक अनिवार्यता के रूप में मेघवंशियों को दो वचन दे गए। पहला मेरी समाधि में पांव रखने से पहले डाली बाई के मंदिर के दर्शन व फेरी लगाने पर ही मेरी पूजा होगी। दूसरा भगवान के जम्मा जागरण में आत्मिक रूप से उन्नत मेघवंशी सदस्य की प्रधानता को अनिवार्यता प्रदान करना अन्यथा वह जागरण संपूर्ण नहीं माना जाएगा।। पहला मेरी समाधि में पांव रखने से पहले डाली बाई के मंदिर के दर्शन व फेरी लगाने पर ही मेरी पूजा होगी। दूसरा भगवान के जम्मा जागरण में आत्मिक रूप से उन्नत मेघवंशी सदस्य की प्रधानता को अनिवार्यता प्रदान करना अन्यथा वह जागरण संपूर्ण नहीं माना जाएगा।

शुक्रवार, 19 जून 2015

तेज हुई डांगावास हत्याकांड के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग

जोधपुर। पड़ोसी जिले नागौर में मेड़ता के पास डांगावास गांव में हुई दलितों की हत्या से उपजा आक्रोश शांत नहीं हो रहा है। जोधपुर में दलित शोषण मुक्ति मंच ने मंगलवार को जिला कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन किया और ज्ञापन देकर सभी आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की।

दलित शोषण मुक्ति मंच के बैनर तले बड़ी संख्या में दलित समाज के लोग कलेक्ट्रेट पर एकत्र हुए और प्रदर्शन करने लगे। वे डांगावास हत्याकांड को लेकर नारे लगा रहे थे और सभी आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। इसके बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर अपनी मांग बताई।http://hindi.eenaduindia.com/State/Rajasthan/2015/06/16200105/demanded-the-arrest-of-those-accused-of-murder.vpf

Published 16-Jun-2015 20:00 IST

गुरुवार, 18 जून 2015

बाबा रामदेव की मूर्ति स्थापना में झलकी श्रद्धा सुरेरा में मेघवाल समाज की

सुरेरा  में मेघवाल समाज की ओर से नवनिर्मित मंदिर में हवन के साथ बाबा रामदेवजी महाराज की मूर्ति सेवक हरजी भाटी, बाबा की बहन डाली बाई, सुगना बाई की मूर्तियों की स्थापना की गई। साथ ही मंदिर पर कलश स्थापित किया गया। इस कार्यक्रम में समाज महिला, पुरुष, युवक, युवतियों ने उत्साह से भाग लिया। प्रतिमाओं की स्थापना से पहले शोभायात्रा  निकाली गई। इसमें समाजबंधुओं की श्रद्धा उत्साह देखते ही बन रहा था। शोभायात्रा में डीजे पर बज रहे भजनों पर समाज के युवक-युवतियां नाचते, बाबा रामदेव के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। शोभायात्रा में एक रथ पर बाबा रामदेवजी महाराज सहित अन्य प्रतिमाएं, कलश विराजमान थे। समाजबंधु इन्हें चंवर ढुला रहे थे। इनके पीछे धूपड़ा, झालर लेकर समाज के युवा चल रहे थे। शोभायात्रा रामदेवजी मंदिर से रवाना हुई, जो गांव के प्रमुख मार्गों से होती हुई मंदिर पहंुची, जहां  मंत्रोच्चार के साथ 21 हवन कुंडों में आहुतियां दिलवाई और बाबा रामदेवजी महाराज सहित अन्य मूर्तियों की स्थापना करवाई। मूर्ति स्थापना के बाद मंदिर के शिखर पर कलशारोहण करवाया तथा महाप्रसादी का वितरण हुआ।

बुधवार, 17 जून 2015

पिपराली प्रधान संतोष मेघवाल

पिपराली प्रधान संतोष का कहना है कि राजनीति में जनसेवा से बढ़कर कोई दूसरा धर्म नहीं होता है। इसलिए शादी के बारे में अभी तक सोचा भी नहीं है। 22 वर्षीय प्रधान लगातार क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में जाकर लोगों की समस्या सुनती हैं। राजनीति के साथ वे फिलहाल एमए की पढ़ाई कर रही हैं।
प्रधान का मानना इस वक्त शादी से निश्चित तौर पर प्रधानी में फर्क पड़ेगा। शादी के बाद घर-परिवार की जिम्मेदारी आ जाती है, इसलिए एक बार सिर्फ जनता की जिम्मेदारी निभाएंगे।

नवरत्न मन्डुसिया

खोरी गांव के मेघवाल समाज की शानदार पहल

  सीकर खोरी गांव में मेघवाल समाज की सामूहिक बैठक सीकर - (नवरत्न मंडूसिया) ग्राम खोरी डूंगर में आज मेघवाल परिषद सीकर के जिला अध्यक्ष रामचन्द्...