बुधवार, 21 जून 2017

मेघवाल समाज के भीम पुत्र नौरत राम लोरोली ने विपरीत परिस्थितियौ से हार नही मानी थी

नवरत्न मन्डुसिया की कलम से // आइये जाने नौरत राम लोरोली की जीवन की विपरीत परिस्थियों के बारे मे

जो लोग बाबा साहेब के विचारो पर चलेगा तो वो दुनिया मे कही पर भी मात नही खायेगा :- नौरत राम लोरोली

Dr. Ambedkar Student Front of India (DASFI) एक अम्बेडकरवादी छात्र संगठन है. जो बहुजन मूवमेंट को आगे बढाते हुए छात्र और युवा हित में कार्य करता है. DASFI संगठन बहुजन महापुरुषों की विचारधारा को समाज के युवाओ तक पहुचाने तथा एक समतामूलक समाज के निर्माण के लिए प्रयासरत है. संगठन राष्ट्रिय स्तर पर अनेक राज्यों में कार्यरत है, संगठन युवाओ का युवाओ के लिए युवाओ द्वारा संचालित एक साँझा प्रयास है.अब मे आपको बताने जा रहा हूँ की नौरत राम लोरोली ने किस विपरीत परिस्थियों का सामना करके आज यहाँ तक पहुँचा है तो केवल बाबा साहेब की देन ही पहुँचा है राजस्थान मे कॉलेजों के चुनावों का है जिसमें डॉक्टर भिवा राव अम्बेडकर के नाम से चल रहे डी.ए.एस.एफ़ आई के नाम से संघठन के युवा कार्यकर्ताओं और अन्य संघठनो  ने शानदार प्रदर्शन DASFI ने किया और कई कॉलेजों मे महाविद्यालय मे चुनाव भी जीते यह पूरा मिशन राजस्थान प्रांत के युवा छात्र नेता समाज सेवी नौरत राम के हातौ मे कमान थी अब आगे आते है तो नौरत राम को कूछ समझ मे नही आ रहा था  की पूरे राजस्थान की बागडोर किस तरह सम्भाले लेकिन.फ़िर भी दलित युवा चेहरे ने ना हार मानी और ना ही अपने अम्बेडकारी मिशन.से पीछे हटे  इन्हीं चुनावों में कई.छात्रों को स्टूडेंट्स यूनियन यानी DASFI  के कई प्रमुख छात्र नेताओं ने हाथ आजमाया, लेकिन ये सभी चुनाव जीतने में नाकाम रहे। इनमें सेकई छात्र नेता तो अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों को सीधी टक्कर तक नहीं दे पाए.थे फ़िर भी कई जगहो से उन्होने चुनाव जीते और पूरे मिशन को भारत के हर हिस्से तक फेलाकर अपने संघठन को बहूत बड़ी मिशाल कायम की जिनके कारण पूरे भारत मे DAFSI का नाम गूँजने लग गया और इस क्रांतिकारी बाबा साहेब के नाम के संघठन को पूरे राजस्थान मे फेलाने बहूत बड़ा योगदान हमारे युवा साथी नौरत राम लोरोली का महत्वपूर्ण स्थान रहा भारत जैसे युवा देश में छात्र राजनीति का मतलब जोश, जज्बे और जन सरोकारों से गहरे जुड़ाव वाली राजनीति से लगाया जाता रहा है। पिछले तीन-चार दशकों में छात्रसंघ चुनावों से सक्रिय राजनीति में उतरे और सफल हुए राजनेताओं के और छात्र नेताओ के अनेक उदाहरणों से यह साबित भी हुआ कि आम जनता के दुख-दर्द की जितनी समझ कभी छात्र नेता रहे राजनेताओं में है, उतनी किसी अन्य में नहीं। आज देश की युवा आबादी पर नजर दौड़ाएं- जहां आधी से ज्यादा आबादी की औसत उम्र 18 से 35 के बीच है इसमे नौरत राम का नाम भी बहूत उलेखनीय है और इस आयु वर्ग का वोट प्रतिशत 20 तक है, तो यह लगता है कि अगर कोई छात्र नेता चुनावी मैदान में उतरता है तो उसकी जीत तय होगी। आगामी आम चुनावों के मद्देनजर भी लगता है कि यदि छात्रसंघों में सक्रिय रहे युवा नेता सामने आएंगे तो उनकी खास अपील होगी, लेकिन इधर ऐसे युवा नेताओं की नाकामी के जो प्रमाण मिले हैं उससे छात्र राजनीति के बेदखल होने के संकेत मिल रहे हैं। खास तौर से डॉक्टर भिव राव अम्बेडकर स्टूडेंट्स फेडरेशन  की लोकप्रियता के आगे छात्र नेताओं की चमक बहूत जबरदस्त रहेगी  जिसमे देश की राजनीति के लिए शुभ संकेत कहा जा सकता है ॥असल में, आम चुनावों की देहरी पर डेढ़-दो महीने पहले देश के अनेक राज्यों में जो छात्र  चुनाव संपन्न हुए, उनमें किसी छात्र नेता के सक्रिय राजनीति में छा जाने के कारण उल्लेखनीय नाम बहूत जोरों शोरो से है जो युवा पिछले कुछ वर्षों में छात्र राजनीति के उदीयमान नक्षत्र माने गए थे, वास्तविक राजनीति के धरातल पर उनकी चमक देश के साथ साथ राजस्थान मे बहूत योगदान रखेंगे हमारे युवा सितारे नोरत राम लोरोली । एक स्पष्ट उदाहरण राजस्थान  विधानसभा चुनावों का है और इसके अलावा छात्र संघठनो से है जिसमें डी.ए.एस.एफ़ आई के युवा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने शानदार प्रदर्शन किया इस कारण नौरत राम लोरोली ने बहूत अच्छा प्रदशन किया इस लिये सभी अम्बेडकर वादी छात्रों से युवाओं से निवेदन है की आप सभी भाई नौरत राम लोरोली को सहयोग करके इनका साथ दे
और मे बहूत ही जल्द राजस्थान के लगभग युवा साथियों को मेघवाल समाज के ब्लोग www.mandusiya.blogspot.com पर पोस्ट करके जन जन तक पहुँचाने का क़दम शेयर करूँगा दोस्तो जेसे नौरत राम जी जान से समाज की खातिर अपने कदमो को अपनी.आवाज़ को पहुँचा रहे है उसी हिसाब से आप सब लोगो को मेघवाल समाज की सेवा के साथ साथ अन्य समाज को साथ लेकर पहल शुरू करे ताकि अन्य समाज को पता चले की मेघवाल समाज के युवा साथी सभी समाजों को साथ मे लेकर चलने वाले है :- नवरत्न मन्डुसिया की कलम से

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नवरत्न मन्डुसिया

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