रविवार, 3 जुलाई 2016

————- कानून—————– अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण)अधिनियम, 1989 एवं नियम, 1995 के नियम 12 (4) के अन्तर्गत देय राहत

——————- कानून—————–
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार
निवारण)अधिनियम, 1989 एवं नियम, 1995 के नियम
12 (4) के अन्तर्गत देय राहत
राजस्थान सरकार के पत्रांक एक 11(67)/ आर एण्ड
पी/ सकवि/4377 दिनांक 11.06.03 द्वारा
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण )
नियम 1995 के प्रावधानों को यथावत लागू कर दिया गया
है ।
अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम
1989 के अंतर्गत आने वाले अत्याचारों से
पीड़ित व्यक्तियों को नियम 1995
की धारा 11 एवं धारा 12(4) के अन्तर्गत्
राहत देने का प्रावधान किया गया है। समस्त जिला
कलक्टरों को आदेशित किया गया है कि वे इन नियमों के
अन्तर्गत् आने वाले अत्याचारों के सभी
प्रकरणों में राहत राशि प्रदान किए जाने की
व्यवथा करेंगे ।
(अ) अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण)
अधिनियम 1995 की धारा 11 के अन्तर्गत
अत्याचार पीड़ित व्यक्तियों, उनके आश्रितों
एवं गवाहों को आने जाने हेतु यात्रा व्यय, पोषण
व्यय तथा आहार व्यय दिए जाने के निम्न प्रावधान
है-
1. परिवहन हेतु भाड़ा अथवा खर्चा संबंधित व्यक्तियों
के निवास से संबंधित न्यायालय/कार्यालय तक जाने के लिए
साधारण श्रेणी के रेल अथवा बस किराए के
बराबर होगा, जो संबंधित न्यायालय/कार्यालय द्वारा
उपस्थिति सत्यापन किए जाने पर देय होगा ।
2. भरण पोषण भत्ता राज्य की तत्समय लागू
न्यूनतम मजदूरी दर के बराबर प्रतिदिन के
आधार पर उपस्थिति सत्यापन हाने पर दिया जाएगा तथा
3. आहार व्यय हेतु भी उपस्थिति का
सत्यापन होने पर 25/- रूपये प्रतिदिन की
दर से भत्ता दिया जाएगा।
(ब) अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण)
अधिनियम 1995 की धारा 12 (4) के
अन्तर्गत अत्याचार पीड़ित व्यक्तियों और
उनके आश्रितों को निम्न प्रकार से राहत देय
होगी:-
क्र.सं. अपराधराहत राशि
1. अखाद्य या घृणाजनक पदार्थ पीना या
खाना (धारा 3(1) (1)/ क्षति पहुंचाना, अपमानित
करना या क्षुब्ध करना (धारा 3 (1) (2)/ अनादरसूचक
कार्य (धारा 3 (1) (3)) के तहत प्रत्येक
पीड़ित को अपराध के स्वरूप और
गंभीरता को देखते हुए 25000 रू.या
उससे अधिक और पीड़ित व्यक्ति द्वारा
अपमान, क्षति तथा मानहानि सहने के अनुपात में
भी होगा। दिया जाने वाला भुगतान
निम्नलिखित होगाः-
(1) 25 प्रतिशत जब आरोप-पत्र न्यायालय को भेजा
जाए।
(2) 75 प्रतिशत जब निचले न्यायालयों द्वारा दोष सिद्ध
ठहराया जाए।
2. सदोष भूमि अभिभोग में लेना या उस पर कृषि करना
आदि (धारा 3 (1) (4))/भूमि परिसर या जल से संबंधित
(धारा 3(1) (5)) के तहतअपराध के स्वरूव और
गंभीरता को देखते हुए कम से कम
25000 रू. या उससे अधिक भूमि/परिसर/जल
की आपूर्ति जहां आवश्यक हो,
सरकारी खर्च कर पुनः वापस
की जाएगी। जब आरोप पत्र
न्यायालय को भेजा जाए पूरा भुगतान किया जाए।
3. बेगार या बलात्श्रम या बंधुआ मजदूरी
(धारा 3 (1) (6)) के तहतप्रत्येक
पीड़ित व्यक्ति को कम से कम 25000 रू./
प्रथम सूचना रिपोर्ट की स्टेज पर 25
प्रतिशत और 75 प्रतिशत निचले न्यायालय में दोष
सिद्ध होने पर।
4. मतदान के अधिकार के संबंध में (धारा 3 (1) (7))
के तहतप्रत्येक पीड़ित व्यक्ति को
20000 रू. तक जो अपराध के स्वरूप और
गंभीरता पर निर्भर है।
5. मिथ्या, द्वेष पूर्ण या तंग करने वाली
विधिक कार्यवाही (धारा 3 (1) (8))/
मिथ्या या तुच्छ जानकारी (धारा 3 (1) (9))
के तहत25000 रू. या वास्तविक विधिक व्यय और
क्षति की प्रतिपूर्ति या अभियुक्त के
विचारण की समाप्ति के पश्चात् जो
भी कम हो।
6. अपमान, अभित्रास (धारा 3 (1) (10)) के
तहतअपराध के स्वरूप पर निर्भर करते हुए
प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति को 25000 रू.
तक 25 प्रतिशत उस समय जब आरोप पत्र न्यायालय
को भेजा जाए और शेष दोष सिद्ध होने पर।
7. किसी महिला की लज्जा
भंग करना (धारा 3 (1) (11))/ महिला का लैंगिक
शोषण (धारा 3 (1) (12)) के तहतअपराध के
प्रत्येक पीड़ित को 100000 रू. । चिकित्सा
जांच के पश्चात् 50 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जाये
तथा शेष 50 प्रतिशत विचारण की समाप्ति
पर किया जाए ।
8. पानी गन्दा करना (धारा 3 (1) (13)) के
तहत100000 रू. तक जब पानी को
गन्दा कर दिया जाए तो उसे साफ करने सहित या
सामान्य सुविधा को पुनः बहाल करने की
पूरी लागत। उस स्तर पर जिस पर जिला
प्रशासन द्वारा ठीक समझा जाए भुगतान
किया जाए।
9. मार्ग के रूढ़िजन्य अधिकार से वंचित करना (धारा 3
(1) (14)) के तहत100000 रू. तक या मार्ग के
अधिकार को पुनः बहाल करने की
पूरी लागत और जो नुकसान हुआ है,
यदि कोई हो, उसका पूरा प्रतिकार। 50 प्रतिशत जब
आरोप पत्र न्यायालय को भेजा जाए और 50 प्रतिशत
निचले न्यायालय में दोष सिद्ध होने पर।
10. किसी को निवास स्थान छोड़ने पर
मजबूर करना (धारा 3 (1) (15)) के तहतस्थल
बहाल करना। ठहराने का अधिकार और प्रत्येक
पीड़ित व्यक्ति को 25000 रू. का प्रतिकार
तथा सरकार के खर्च पर मकान का पुनर्निर्माण यदि
नष्ट किया गया हो। पूरी लागत का भुगतान
जब निचले न्यायालय में आरोप पत्र भेजा जाए।
11. मिथ्या साक्ष्य देना (धारा 3 (2) (1) और (2) )
के तहतकम से कम 100000 रू. या उठाए गए
नुकसान या हानि का पूरा प्रतिकार 50 प्रतिशत का
भुगतान जब आरोप पत्र न्यायालय में भेजा जाए और
50 प्रतिशत निचले न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होने
पर।
12. भारतीय दंड संहिता के
अधीन 10 वर्ष या उससे अधिक
की अवधि के कारावास से
दंडनीय अपराध करना (धारा 3 (2)) के
तहतअपराध के स्वरूप और गम्भीरता
को देखते हुए प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति
को या उसके आश्रित को कम से कम 50000 रू. यदि
अनुसूची में विशिष्ट। अन्यथा प्रावधान किया
हुआ हो तो इस राशि में अन्तर होगा।
13. किसी लोकसेवक के हाथों
उत्पीड़न (धारा 3 (2) (7)) के
तहतउठाई गई हानि या नुकसान का पूरा प्रतिकार,
50 प्रतिशत का भुगतान जब आरोप पत्र न्यायालय में
भेजा जाए और 50 प्रतिशत का भुगतान जब निचले
न्यायालय में दोष सिद्ध हो जाए,
किया जाएगा ।
14. निर्योग्यता । सामाजिक न्याय और अधिकारिता
मंत्रालय भारत सरकार की समय-समय पर
यथा संशोधित अधिसूचना सं. 4.2.83, एच.डब्ल्यू- 3
तारीख 6.8.1986 में शारीरिक
और मानसिक निर्योग्यताओं का उल्लेख किया गया है।
अधिसूचना की एक प्रति अनुबन्ध-2 पर
है।
(क) 100 प्रतिशत असमर्थतता (1) परिवार का न
कमाने वाला सदस्य को
(2) परिवार का कमाने वाला सदस्य को
(ख) जहां असमर्थता
100 प्रतिशत से कम है।अपराध के प्रत्येक
पीड़ित को कम से कम 100000 रू., 50
प्रतिशत प्रथम सूचना रिपोर्ट पर और 25 प्रतिशत
आरोप पत्र पर और 25 प्रतिशत निचले न्यायालय
द्वारा दोष सिद्ध होने पर। अपराध के प्रत्येक
पीड़ित को कम से कम 200000 रू., 50
प्रतिशत प्रथम सूचना रिपोर्ट/चिकित्सा जांच पर भुगतान
किया जाए और 25 प्रतिशत जब आरोप पत्र न्यायालय
को भेजा जाए तथा 25 प्रतिशत निचले न्यायालय में दोष
सिद्ध होने पर।
उपर्युक्त क (1) और (2) में निर्धारित दरों को
उसी अनुपात में कम किया जाएगा, भुगतान
के चरण भी वही रहेंगे।
तथापि न कमाने वाले सदस्य को 15000 रू. से कम
नहीं और परिवार के कमाने वाले सदस्य
को 30000 रू. से कम नहीं होगा।
हत्या/ मृत्यु
(क) परिवार का न कमाने वाला सदस्य होने पर
(ख) परिवार का कमाने वाला सदस्य होने पर-
प्रत्येक मामले में कम से कम 100000 रू., 75
प्रतिशत पोस्टमार्टम के पश्चात् और 25 प्रतिशत
निचले न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होने पर। प्रत्येक
मामले में कम से कम 200000 रू., 75 प्रतिशत का
भुगतान पोस्टमार्टम के पश्चात् और 25 प्रतिशत
निचले न्यायालय में दोष सिद्ध होने पर।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नवरत्न मन्डुसिया

सरकारी सेवा के बाद भी सेवा समाप्त नही होती :- मन्डुसिया

दिल्ली : जिला अस्पताल में तैनात चीफ फार्मासिस्ट आलोक यादव  के सेवानिवृत्त होने पर आयोजित विदाई समारोह में उन्हें विदाई दी गई। इस मौके स्मृति...