रविवार, 14 सितंबर 2014

निहालचंद मेघवाल चौथी बार सांसद बने

श्रीगंगानगर लोकसभा क्षेत्र से अब तक के सबसे बड़े मार्जिन से जिताकर भाजपा के निहालचंद को मतदाताओं ने आशीर्वाद तो दिया ही है, साथ ही अपनी बुद्धिमता,जागरूकता और राजनीतिक सूझबूझ का परिचय भी दिया है। विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में अंतर क्या होता है यह यहां का मतदाता बखूबी समझता है, यह उसने साबित भी कर दिया है। भारत में लोकतंत्र के फलने-फूलने का यह एक बड़ा कारण भी है। वोटिंग किस आधार पर की जानी है, किन मुद्दों पर करनी है, यह कौन सिखाता है मतदाताओं को? जैसे शेर को शिकार करना सिखाया नहीं जाता। उसी प्रकार भारतीय लोकतंत्र में मतदाताओं को भी यह सब न तो बताना पड़ता और न ही सिखाना। यह समझ नैसर्गिक होती है। श्रीगंगानगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की करारी हार और पांच महीनों में पासा पलटना और देशभर के मतदाताओं के अनुरूप खुद को बदलकर उसने अपनी बुद्धि और चातुर्य का लोहा मनवा लिया है। पूरे राजस्थान में सबसे ज्यादा वोटिंग प्रतिशत में हम पहले ही नंबर वन घोषित किये जा चुके हैं। अब राजनीतिक समझ में भी हमारी कोई सानी नहीं है। पूरे क्षेत्र के मतदाताओं की बुद्धिमता, जागरूकता प्रशंसनीय है। सही समय पर सही फैसला ही हमें प्रगति के मार्ग पर सतत अग्रसर करता है और यहां के मतदाता ऐसा करने में कभी चूकते भी नहीं हैं। अब बारी निहालचंद की है खुद को साबित करने की।

पिता की सबसे बड़ी हार थी अब बेटे के नाम सबसे बड़ी जीत

इस लोकसभा चुनाव में श्रीगंगानगर के नाम दो रिकॉर्ड दर्ज हुए। पहला रिकॉर्ड मतदान का। 17 अप्रैल को हुए मतदान में पहली बार 72.85 फीसदी लोगों ने वोट डाले। इस उपलब्धि की बदौलत श्रीगंगानगर संसदीय क्षेत्र प्रदेशभर में पहले नंबर पर रहा। दूसरा रिकॉर्ड बना मतगणना में जीत का। निहालचंद ने श्रीगंगानगर सीट पर अब तक की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। इससे पहले सर्वाधिक मतों से जीत का रिकॉर्ड 1984 में कांग्रेस के बीरबल के नाम दर्ज हुआ था। तब उन्होंने लोकदल के बेगाराम को 1 लाख 65 हजार वोटों से हराया था। बेगाराम नवनिर्वाचित सांसद निहालचंद के पिता हैं। यानी श्रींगानगर सीट पर लोकसभा चुनाव के इतिहास में सबसे बड़ी हार का रिकॉर्ड बेगाराम और सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड उनके बेटे निहालचंद के नाम दर्ज हुआ।

निहालचंद 2.91 लाख वोटों से जीते

अब तक की सबसे बड़ी जीत

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