रविवार, 29 जनवरी 2012

मेघवंशियों के पास एक ही रास्ता है और वह है - एकता









जब सत्गुरु कबीर साहब का 612वाँ प्रकाशोत्सव भगत महासभा के तत्तवावधान में जम्मू में दिनाँक 25 और 26 जून 2010 को मनाया जाना तय हुआ तब तक मैं विकिपीडिया पर मेघवाल, मेघवार और मेघ समुदाय के पुराने इतिहास के परिप्रेक्ष्य में Meghwal (मेघवाल) नामक आलेख में काफी जानकारी दे चुका था. मुझे लग़ातार एक विचार आता रहा था कि राजस्थान से मेघवाल समुदाय के प्रतिनिधियों को अवश्य बुलाया जाना चाहिए. मैंने इस संबंध में प्रो. राजकुमार, राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत महासभा को सुझाव दिया था कि मेघवालों को सत्गुरु कबीर के प्रकाशोत्सव समारोह में अवश्य आमंत्रित करें. उनकी पहली प्रतिक्रिया नकारात्मक थी लेकिन मेरे बार-बार कहने पर स्थिति के राजनीतिक पक्ष को देखते हुए वे निमंत्रण देने के लिए तैयार हो गए. राजस्थान से मेघवाल उक्त आयोजन में आए. इस आयोजन में जम्मू के हज़ारों मेघों ने भाग लिया. सब से पहले महिलाएँ पहुँचीं और उनका उत्साह देखने योग्य था. भगत महासभा की जम्मू इकाई के नेतृत्व का आत्मविश्वास देखने योग्य था. कबीर साहब का साहित्य और मेघ ऋषि संबंधी आस्था के नए प्रतीक इस में दिखे. स्टालों पर लोग निरंतर आते रहे. सब से बढ़ कर जम्मू के मेघों ने मेघवाल भाइयों को जम्मू की पगड़ी पहनाई और उनका भव्य अभिनंदन किया.

ऐसे ही घटनाक्रम में राष्ट्रीय मेघवंश महासभा, दिल्ली का एक विशाल सेमिनार 26 दिसंबर 2010 को मेघगंगा सामुदायिक भवन, बनीपार्क, जयपुर में संपन्न हुआ जिसमें राजस्थान के अनेक जिलों से सैंकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता पहुँचे. गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा आदि प्रांतों से बड़ी संख्या में लोग आए. सेमिनार के मुख्य अतिथि डॉ. योगेंद्र मकवाना (पूर्व केंद्रीय मंत्री) तथा सभापति श्री कैलाश मेघवाल (पूर्व केंद्रीय मंत्री) थे. राष्ट्रीय मेघवंश महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल डेनवाल ने विजय की प्रतीक तलवार श्री कैलाश मेघवाल को भेंट की. इस अवसर पर एक नए समाचार-पत्र 'दर्द की आवाज़' का विमोचन भी किया गया.

दिनाँक 10 अप्रैल 2011 को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में राष्ट्रीय सर्व मेघवंश महासभा (इंडिया) ने एक सेमीनार का आयोजन किया जिसमें विचार-विमर्ष किया गया कि मेघवंश को एक सूत्र में कैसे पिरोया जाए. देश में इसकी संख्या 16 से 21 प्रतिशत है और यह 1671 नामों में बँटा हुआ है. MEGHnet (मेघनेट) पर लिखे मेरे कुछ आलेखों पर प्रतिक्रियाएँ आईं कि ‘आप मेघों और मेघवालों को एक कैसे मान सकते हो. यदि आपको पता नहीं है तो आप ऐसा लिखना बंद करो’. मैं अपने मित्रों पर हँस नहीं कर सकता था क्योंकि वे नाजानकार थे और उनसे कोई अन्य उम्मीद नहीं थी.

इस दौरान गुजरात कच्छ से मेघवारों ने ‘मेघधारा’ नाम के समाचार-पत्र का प्रकाशन प्रारंभ किया जो एक बहुत महत्वपूर्ण कदम है. मेघवंशियों के समाचार पत्रों पर कुछ जानकारी पहले दे चुका हूँ. वहाँ की ‘श्री अखिल कच्छ महेश्वरी विकास सेवा संघ (मुन्द्रा)’ एक बहुत सक्रिय संस्था है.

समय के साथ मेघवंशी अपनी गतिविधियाँ अनवरत चला रहे हैं. मेघवालों ने 27 नवंबर 2011 को जयपुर में ‘मेघ महाकुंभ’ का आयोजन किया जिसमें हज़ारों की संख्या में मेघवंशियों ने भाग लिया. सुना है कि इस अवसर पर मेघसेना का बहुत भव्य और प्रभावशाली फ़्लैगमार्च हुआ जो शहर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों से निकला और उस पर जगह-जगह पुष्पवर्षा की गई. मीडिया कवरेज की रिपोर्टें और लिंक नीचे दिए गए हैं. उक्त आयोजन की तस्वीरें यहाँ दी गई हैं. श्री गोपाल डेनवाल और श्री आर.पी. सिंह को बहुत-बहुत बधाई.
राजस्थान पत्रिकाः-
आरक्षण से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं
Monday, 28 Nov 2011 12:54:50 hrs IST

जयपुर। राष्ट्रीय सर्व मेघवंश महासभा (इण्डिया) की ओर से अमरूदों का बाग में रविवार को आयोजित मेघ महाकुंभ में राजनीतिक दलों पर निशाना साधने के साथ कांग्रेस को आगामी चुनाव में सबक सिखाने के दावे किए गए। भंवरलाल मेघवाल को शिक्षा मंत्री पद हटाने का मामला भी इस दौरान छाया रहा। साथ ही सरकार को चेतावनी दी गई अनुसूचित जाति के आरक्षण के साथ छेड़छाड़ नहीं की जाए अन्यथा समाज को सड़कों पर उतरना पडेगा।
सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि आज सभी राजनीतिक पार्टिया मेघवंश समाज का इस्तेमाल करने की नीति पर चल रही हैं। समाज इसे सहन नहीं करेगा। सम्मेलन में पूर्व मंत्री कैलाश मेघवाल ने एकजुट होकर समाज को मजबूत बनाने पर जोर दिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री योगेन्द्र मकवाना ने कहा कि लोगों की संख्या अधिक होने के बावजूद समाज गुमनामी के अंधेरे में हैं। पुस्तैनी काम (कपड़ा बनाने) को पूंजीपतियों ने हथिया लिया। पूर्व केन्द्रीय मंत्री चौधरी चांदराम ने समाज को मजबूत बनाने की बात कही। इस मौके पर गोपाल डेनवाल को सर्वसहमति से महासभा का पुन: राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। इससे पूर्व मेघसेना ने छोटी चौपड़ ने जुलूस निकाल एकता का प्रदर्शन किया।
इन मुद्दों पर चर्चा
सम्मेलन में सरकार से मेघवंश कल्याण बोर्ड बनाने, अनुसूचित जाति वर्ग का आरक्षण बढ़ाने, बुनकर वित्त व सहकारी निगम बनाकर अनुसूचित जाति का अध्यक्ष बनाए जाने सहित 11 सूत्री मांगों पर भी चर्चा हुई।
(http://www.rajasthanpatrika.com/news/Jaipur/11282011/jaipur-news/252882)

दैनिक भास्कर :-
मेघ महाकुंभ में किया मेघवंशियों से एकजुट होने का आह्वान
छोटी चौपड़ से निकला मेघसेना का फ्लैग मार्च।

जयपुर। राष्ट्रीय सर्व मेघवंश महासभा (इंडिया) के तत्वावधान में रविवार को अमरूदों का बाग में मेघ महाकुंभ का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में मेघवंश समाज के लोगों ने भाग लिया।

महाकुंभ के मौके पर सुबह छोटी चौपड़ से मेघसेना की ओर से फ्लैग मार्च निकला। इस दौरान पूरा वातावरण मेघवंश के जयघोष से गूंज उठा। बड़ी संख्या में समाज के लोग जो मेघवंश की बात करेगा, वही देश में राज करेगा...जैसे नारे लगाते हुए रवाना हुए।
वहीं पोस्टर-बैनर लिए समाजबंधु संजय सर्किल, संसार चंद्र रोड, भगवानदास रोड, बाईस गोदाम होकर अमरूदों का बाग पहुंचे। इस बीच जगह-जगह पुष्पवर्षा कर जोरदार स्वागत किया गया।

फिर महाकुंभ शुरू हुआ। इसमें मेघवंश समाज के बिखरे हुए विभिन्न वर्गों से एकजुट होने का आह्वान किया गया। इसके साथ ही सरकार से मेघवंश कल्याण बोर्ड बनाने, अनुसूचित जाति व के आरक्षण में 16 से 17 प्रतिशत बढ़ाने, बुनकर वित्त व सहकारी निगम बनाकर अनुसूचित जाति का अध्यक्ष बनाए जाने सहित 11 सूत्री मांगे रखी गई।

यहां पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ.योगेंद्र मकवाना ने महाकुंभ का उद्घाटन किया। अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश मेघवाल ने की। इस अवसर राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल डेनवाल सहित कई पदाधिकारी मौजूद थे।
(http://www4.bhaskar.com/article/c-10-1354299-2596900.html)

1 टिप्पणी:

नवरत्न मन्डुसिया

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