शनिवार, 3 सितंबर 2016

वंशावली बाबा मेघवंशी रामदेव जी महाराज और सायर मेघवाल


बाबा रामदेव जी महाराज  मेघवाल है और इन तथ्यों से साबित होता है ॥ बाबा रामदेव जी महाराज  सायर मेघवाल  के ही पुत्र थे ॥ और बाबा रामदेव जी महाराज और सायर जी मेघवाल की वॅशावली जो निम्न है ॥

जाँभा (जयपाल) से --चन्दहल
चन्दहल जी से = बिगहङ जी
बिगहङ जी से = भोजराज जी
भोजराज जी के दौ पुत्रो का नाम
(1) सायर जी (2) अङसी जी
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सायर जी के पुत्र रामदेव जी थे
(ठाकुर अजमाल के आदेशानुसार सायर जी ने अपनै पुत्र रामदेव
को बिरम के पालणे मे सुलाया था - जिन्हे लोग "अजमल घर
अवतारी" के रुप मे जानते है )
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अङसी जी के दौ सन्तान थी ।
(1) पुत्री "डालीबाई"
(2) पुत्र "मुन्जा जी "
नोट( डाली ओर मुँजा जी के माता पिता का देहान्त हो जाने के
कारण - डाली ओर मुँजा जी को सायर जी ने "पुत्र 'पुत्री के रुप
मे स्वीकार कर गोद लिया था - ओर सायर जी ने
ही उनका पालन पोसन किया था )-
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डालीबाई ने शायर जी के सानिध्य मे ही भक्ति साधना की थी ।
ओर रामदेव जी से पुर्व समाधि ले ली थी ।
जिसकी समाधि पर भाई मुँजाजी के परिवार वॅशज पीढीदर
पीढी सेवा करते आयै है ..जिनके टिकायत परिवार
की वॅशावली निम्नानुसार है
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सायर जी के बाद
मुन्जा जी से मोडा जी
मोडा जी से। डुँगर जी
डुँगर जी से। बीजल जी
बीजल जी से माला जी
माला जी से खीमा जी
खीमा जी से धन्ना जी
धन्ना जी से नॅगा जी
नॅगा जी से माना जी
माना जी से नाथा जी
नाथा जी से केशरा जी
केशरा जी से भूरा जी
भुरा जी से भीखा जी
भीखा जी से हरजी
हरजी से मुकना जी
मुकना जी से पुनम जी
पुनम जी से उत्तमचन्द जी
वर्तमान मे उत्तमचन्द जी का परिवार टिकायत है
स्वामी जी ने स्पष्ट कहा था
कि - बाबा रामदेव मेघवाल थे ।
इसिलिये -
(1) "बाबे रा रिखिया" केवल मेघवाल है ।- तॅवरो को क्यो नही ?
(2) बाबा का जम्मा जागरण आज भी केवल मेघवालो से
ही जगाया जाता है - ओर उन्ही को जम्मे मे प्रथम भोजन
कराया जाता है जिसे "रिखिया जीमावणा" कहा जाता है ।
तॅवरो को क्यो नही ?
(3) मारवाङ मे प्राचीन ओखाणे प्रचलित है कि -"रामदेव जी नै
मिलिया सो मेघ ही मेघ (मेघो रा देव रामदेव)
क्यो कहा गया ?
तॅवरो के विषय मे ऐसै ओखाणे क्यो नही कहै गये ?
(5) बिना माता पिता के कोई पालणे मे कैसे प्रकट हो सकता है ?
-बाबा को जिस कृष्ण व राम का अवतार बताकर "अजमल घर
अवतारी" बताया जाता है - वो राम ओर कृष्ण भी जन्म लेकर
आये थे - प्रकट नही हो पाये - तो रामदेव जी कैसे प्रकट
हो गये ?
(6) जो पालणा रामदेवरा मे लोगो को बताकर कहा जाता है
कि इसमे रामदेव जी प्रकट हुऐ थे - उस पालणे की वैज्ञानिक
तकनिक (कार्बन विधि) .से जाच करवानी चाहिये । कि वह 600
साल पुराना है या नही !
जिस पर विरोधिगण चुप थे ।
(7) अगर रामदेव जी तुवर राजपुत थे तो तुवरो की बही मे रामदेव
जी का नाम क्यो नही ? - इस पर तुवरो ने एक बही पेश की कोर्ट
मे - मगर कोर्ट ने वह बही पुरानी ओर प्रमाणिक नही मानी -
क्यो कि वह 600 साल पुरानी नही थी ।
(8) पुँगलगढ के पङियार रामदेव जी से नफरत क्यो करते थे ?
(10) बाबा रामदेव के समकालीन किसी भी चारण भाट कवि ने
उनकी महिमा वर्णन क्यो नही की ?
(11) रामदेव जी पर लिखै गये सभी इतिहास मे उनकी अवतार
तिथि ओर स्थान आदी समुचे इतिहास मे इतना मतभेद क्यो ?
(12) रामदेव जी की तुरनुमा समाधि पर उर्दू मे आयत लिखी हुई
है - ओर उनकी समाधि पर पहले दरगाह थी - जिस पर विक्म
सवत 14वी शताब्दी से 19वी शताब्दी तक किसी राव राजा ने
कोई मन्दिर निर्माण क्यो नही करवाया ?
(13) बाबा रामदेव ने मात्र 33 वर्ष की अल्पायु मे
ही समाधि क्यो ली ?- ओर समाधि को हरबुजी को परचा बताकर
क्यो तोङा गया ?
(14) बाबा की समाधि के आसपास कंई तुरनुमा (कब्र)
समाधिया पुजवाई जा रही है - वो समाधिया किसकी है - अगर वह
तुवर राजपूतो की समाधिया (शमसाण) है तो फिर वै
सभी मुसलमानों के कब्रिस्तान की तरह क्यो है ?
(15) विक्रम सॅवत 14वी से करीब 17वी शताब्दी तक 300
साल के अन्तराल मे कोई भी उची जाति वर्ण का स्वर्ण भक्त
कवि की अवतारवादी कथा वाणी वारता क्यो नही ?
ऐसै कॅई सैकङो विचारणिय
प्रशनो की झङी लगा दी थी स्वामी रामप्रकाशाचार्य
जी महाराज ने - जिनके उत्तर विपक्षीगण नही दे पाये ।
तब कोर्ट ने तुवरो को नोटीस पेश किया कि इन सवालो का जवाब
दे --
तब विरोधि गणो ने अपना केस वापस ले लिया - क्यो कि उन्है
पता था , कि अगर हमने पुख्ता प्रमाण सहित जवाब पेस
नही किये तो - कोर्ट का फैसला मेघवालो के पक्ष मे होगा ।
तब स्वामी जी की लिखी पुस्तको को मेले मे जबरन बिक्री से
रोका गया - तब स्वामी जी ने अपनी तरफ से कोर्ट मे अपील
की थी - कि विरोधिगण हमारै सवालो का जवाब दे -
अन्यथा हमारी पुस्तकों को बिकने से ना रोका जाये ।
तब विरोधिगण स्वामी जी को कंई गुमनाम धमकिया पेश करने लगै
-
तभी देवस्थान विभाग ने बाबा रामदेव जी महाराज को मेघवंशी बताया

मेघवाल समाज की बेटी निर्मला मेघवाल बनी बेस्ट राष्ट्रीय शिक्षक


राजकीय जमुना देवी पांडेय बालिका सीसै स्कूल पाटन नीमकाथाना  की प्रधानाचार्य निर्मला देवी मेघवाल को शिक्षक दिवस पर दिल्ली में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार दिया जाएगा। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी निर्मला देवी को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान के रूप में प्रशस्ति पत्र, 50 हजार नकद सिल्वर मैडल देंगे। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा 3 से 5 सितंबर तक दिल्ली में होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए निर्मला देवी को आमंत्रित किया गया है। उनको यह पुरस्कार श्रेष्ठ बोर्ड परीक्षा परिणाम, गाइडिंग के क्षेत्र में राज्यस्तरीय, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष योगदान, पुरस्कारों समाजसेवा के लिए दिया जा रहा है श्रीमती निर्मला जी मेघवाल नीमकाथाना
अनुसुचित जाति राजस्थान की पहली महिला है जिनका चयन
नैशनल टीचर आवार्ड
के लिए हुआ है
जो हमारे समाज और राजस्थान के अनुसुचित जाति/जनजाति वर्ग के लिए बहुत खुशी की बात है  निर्मला मेघवाल
राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान लेकर लौटने पर स्वागत  किया गया। और  टैक्सी स्टैंड से उन्हें जुलूस के रूप में लाया गया। व्यापारिक सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने उनका जगह-जगह स्वागत किया। गाड़ी में निर्मला देवी के साथ उनके पति प्रधानाचार्य बनवारीलाल वर्मा परिवार के लोग थे। निर्मला देवी को शिक्षक दिवस पर दिल्ली में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने शिक्षक सम्मान से नवाजा। उनका डॉ. अंबेडकर मानव कल्याण संस्थान, डॉ. अंबेडकर रक्तदान सेवा समिति, हनुमान सेवा समिति के पदाधिकारियों सदस्यों के अलावा कई संगठनों ने स्वागत किया। जुलूस स्वागत कार्यक्रम में पूर्व विधायक फूलचंद गुर्जर, पूर्व कॉलेज शिक्षा आयुक्त प्रो. केआर सिलोलिया, कांग्रेस नेता सुरेश मोदी, भाजपा नेता प्रमोदसिंह बाजौर, सतीश शर्मा, जेपी लोढ़ा, बीडी वर्मा, संस्थान अध्यक्ष शंकरलाल बलाई, एनएसयूआई प्रदेश महासचिव रोशन मुंडोतिया, चांदमल मेघवंशी, पूर्व अभिभाषक संघ अध्यक्ष देवेंद्र चौधरी आदि थे तथा

इस अवसर पर सूरेरा ग्राम मे भी निर्मला मेघवाल को नेशनल अवार्ड मिलने पर गाजे बाजे के साथ खुशियाँ मनाई और इस अवसर पर नागौर के जिला परिषद सदस्य पूरन मल मेघवाल समाज सेवी सुरेश मेघवाल घरवाणी और अगला कदम एन. जी. ओ के संस्थापक. नाथू लाल जी वर्मा देवली और विधुतकार भँवर लाल मन्डुसिया सुरेरा और दांतारामगढ़ के युवा नेता जितेंद्र राम चंद्र मेघवाल आदि ने टिव्टर के माध्यम से शुभकामनाएँ दी ॥

शुक्रवार, 26 अगस्त 2016

गुजरात मे पैदा हुए समाज के वीर मेधमाया ने अछुतो के अधिकारो के लिए अपने जान का बलिदान दिया था,


वीर मेघमाया : एक विर महापुरुष*
एक विर महापुरुष के बारे में बताना चाहता हूँ। महापुरुष का नाम है- विर मेघमाया। भारत के मूलनिवासी लोगों को यह महापुरुष के बारे में जानकारी नही होगी, क्योंकि इसका सही इतिहास छिपाया गया है। हमारे महापुरुष का इतिहास ज्यादातर लोग जानते ही नहीं है और हमारे लोग जानने की कोशिश भी नही करते है। मैं जितना जानता हूँ, इतना जरूर बता रहा हूँ। विर मेघमाया गुजरात राज्य के धोलका तहेसील के रनोडा गाँव में 12 मी सदी में जन्मा हुआ था, तब गुजरात का पाटनगर पाटन था।12 मी सदी में पाटन राज्य का राजा सिध्धराज सोलंकी था। उस समय पर अछूतों उपर भयानक, दर्दनाक, अत्याचार राजा सिध्धराज सोलंकी की तरह से किया जा रहा था। तब विर मेघमाया ने ठान लिया था कि, अछूतों पर हो रही भयंकर गुलामी में से आझाद करके रहूंगा, चाहे मेरा प्राण क्यूँ चला न जाय। मेघमाया ने उनका मिशन चालू किया। एक-एक अछूत का समजाने का, जागृत करने का अभियान चालू किया। उस समय अछूतों को आगे कूलडी और पीछे झाडू रखना पडता था और सिर्फ रात के समय में ही बहार निकलना था। दिन में अगर अछूत की पडछाइ भी पड गयी तो मृत्युदंड की सजा की जाती थी। ऐसे समय में विर मेघमाया ने अछूतों के साथ हो रहे भयंकर अन्याय के खिलाफ अछूतों को जागृत करता रहा। यह बात राजा के ब्राह्मण सेनापति के कान में आई। ब्राह्मण सेनापति ने विर मेघमाया का पूरा इतिहास जान लिया और राजा सिध्धराज सोलंकी को अछूत विर मेघमाया के बारे में पूरा माहितगार किया। तब राजा ने कहा क्या किया जाय अछूत को, ब्राह्मण सेनापति बडा होशियार था। उस समय पाटन राज्य में लगातार तिन साल से बारिश नही हो रही थी। पूरा पाटन पानी सेे तरस रहा था। तब ब्राह्मण सेनापति ने विर मेघमाया को जान से मारने का प्लान बनाया और राजा सिध्धराज को बताया कि, हमारी प्रजा पानी की तरस से मर रही हैं। हम विर मेघमाया को पाटन की वाव (एक तरह का कूआ) मे बलि चढा दे और प्रजा को बताया जाय कि वाव में बतीस लक्षणों वाला पुरुष का भोग किया जाय तो जरूर चमत्कार से पानी प्रगट होगा। तब प्लान बना के राजा ने ऐलान कर दिया कि बत्रीस लक्षणों का पुरूष की तलाश की जाय, तब ब्राह्मण सेनापति ने विर मेघमाया का नाम बताया और सिध्धराज ने स्वीकार भी कर लिया। यह पूरी जानकारी विर मेघमाया को बताइ गइ। विर मेघमाया पूरा प्लान समज गया था। पर वो भी राजा के हूकम के आगे लाचार थे। विर मेघमाया ने भी नक्की कर लिया कि, मरते-मरते मेरी समाज का भी भला करता जाऊं। विर मेघमाया की बलि का दिन नक्की हो गया। विर मेघमाया को पानी की वाव उतारा गया, तब विर मेघमाया ने राजा को मरने से पहले कूछ वचन मागा गया। एक मेरी समाज के लोगों को आगे कूलडी और पिछे झाडू को नाबूद किया जाय। दूसरा सवणॅ लोग मकान बनाते तब मकान के मोभ अछूत के द्वारा रखा जाए। राजा ने सारी बात मान्य रखी और सेनापति को हूकम दिया। सेनापति ने धारदार तलवार उठाइ और जोर से एक ही झटके में विर मेघमाया का धड गरदन से अलग कर दिया। मेरे प्यारे दोस्तों जरा सोचिए विर मेघमाया का प्राण कैसे गया होगा। गुजरात राज्य में पहला अछूत विर मेघमाया शहीद हो गया। फिर भी हमारे पढे लिखे लोगों को विर मेघमाया की शहादत याद नहीं आ रही है और जो लोग अछूतों को कायम अछूत ही रहे ऐसे प्रयास करने में जो लोग मर गये उनको अपना शहीद मानकर शहादत को याद करके बडे जोर से शोक मनाते हैं।
दोस्तो, मैं बडे दुखसे कहता हूँ कि अगर हमारी समाज में विर मेघमाया, ज्योतिबा फूले, डाॅ.बाबासाहब आंबेडकर जैसे महापुरुषों की देन की ही वजह से ही हम लोग सूख चेन से जि रहे हैं। अगर हमारी समाज मे महापुरुष पैदा नही होते तो न जाने कैसा हाल होता समाज का।

सोमवार, 11 जुलाई 2016

21वर्षीय जिला प्रमुख अर्पणा रोलन (मेघवाल ) का जीवन परिचय और कॉलेज लाइफ और चुनौतियां

मेघवाल समाज की बेटियाँ दिन प्रतिदिन हमारे समाज का नाम रोशन करने के लिये काफी प्रयासरत है और पूरे प्रांत मे सबसे कम उम्र की फायन आर्ट्स की छात्रा अब सीकर जिले की जिला प्रमुख है ही  और आगे जाकर जिला प्रमुख से मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री भी बनेगी  जिले ने महज 21 वर्ष की अपर्णा
रोलन पर भरोसा जताया है। रोलन को जिला प्रमुख चुना गया है।
भाजपा की रोलन को उम्र के लिहाज से प्रदेश
की सबसे कम उम्र का जिला प्रमुख बनने का गौरव
प्राप्त हुआ है।
फिलहाल राजस्थान विश्वविद्यालय में मास्टर ऑफ फाइन आर्ट
की पढ़ाई कर रहीं अपर्णा ने कहा कि
उन्होंने कभी सोचा भी था कि
छोटी उम्र में बड़ी जिम्मेदारी
मिलेगी।
जिला प्रमुख पद के लिए शनिवार को हुए मतदान में रोलन को 23
तथा कांग्रेस के भंवरलाल वर्मा को 11 मत मिले हैं। माकपा के चार
सदस्यों व एक निर्दलीय ने मतदान में भाग
नहीं लिया।
मैं जन्म से ही भाग्यशाली: अपर्णा
सीकर। राजस्थान विवि के मास्टर ऑफ फाइन ऑर्ट में
पेंटिंग को कॅरियर बनाने की इच्छा रखने वाली
छात्रा अपर्णा ने एक माह पहले तक यह नहीं सोचा
था कि उसे राजनीति के पायदान पर इतने ऊंचे मुकाम पर
पहुंचने का मौका मिलेगा।
जिले की पहली नागरिक का अधिकार लेने
वाली जिला प्रमुख अपर्णा रोलण ने पत्रिका से विशेष
बातचीत में बताया कि वह जन्म से ही
भाग्यशाली रही है। गांव में
बेटी पैदा होने पर प्राय: कुआं पूजन व अन्य
कार्यक्रम नहीं किया जाता है, लेकिन परिवार के लोगों ने
बेटे-बेटी में भेद नहीं कर बड़ा आयोजन
किया।
पेंटिंग के साथ फोटोग्राफी में कॅरियर बनाने
की चाहत रखने वाली अपर्णा ने बताया कि
वर्ष 2012 में राजस्थान स्तर पर वाइल्ड लाइफ पर हुई
फोटोग्राफी प्रतियोगिता में तीसरा स्थान मिला
था। अपर्णा ने बातचीत में बताया कि
राजनीति में आने की कभी
नहीं सोची थी।
जिला परिषद के चुनाव की टिकट मिलने पर
भी महज सदस्य बनने तक की बात
थी, बाद में अचानक एेसा हुआ कि जिला प्रमुख के लिए
नाम चल पड़ा और मुकाम हासिल हो गया। जिला प्रमुख को लेकर
अपनी आगे की कोई बड़ी
कार्ययोजना की वे बात नहीं
करती है।
बल्कि एक गंभीर छात्रा की तरह पढ़ाई को
पूरा करने को प्राथमिकता देती हैं। हालांकि पढ़ाई के साथ
वे जिला प्रमुख की जिम्मेदारी निभाकर लोगों
के सामने बड़ा उदाहरण पेश करने की चाहत
रखती हैं। अपर्णा का मानना है कि युवाओं को मौका
मिलेगा तभी देश में बदलाव आएगा।
बचपन बीता गांव में
अपर्णा देश में भ्रष्टाचार को सबसे बड़ी समस्या
मानती हैं। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार से लडऩे के
लिए हर एक को आगे आना होगा। उनका कहना है कि बचपन में
गांव की गलियों में जो देखा वह अब शहर
की चकाचौंध में मिटता जा रहा है। एेसे में हर व्यक्ति
को गांव के जीवन का अनुभव जरूर करना चाहिए।
जिला प्रमुख की राह में यह चुनौतियां
सीकर। गांवों की सरकार की
प्रमुख के सामने चुनौतियों की कतार है। गांवों से लेकर
दिल्ली तक भाजपा की कड़ी से
कड़ी जुडऩे के कारण लोगों को उम्मीद
भी बहुत भी है। जिला प्रमुख
की पहली चुनौती दो
महीने बाद गर्मियों के मौसम में गांव-ढाणियों के लोगों तक
पूरी पेयजल सप्लाई पहुंचाने की
रहेगी।
इसके अलावा सफाई, रोशनी, वित्तीय
प्रबंधन सहित अन्य समस्याएं भी कम
नहीं है। गांवों की सरकार की
चुनौतियों से रूबरू कराती पत्रिका की खास
रिपोर्ट।
पेयजल
जिले में पेयजल बड़ी समस्या है। हर वर्ष गर्मियों के
सीजन में 300 से अधिक टैंकर सप्लाई कराने पड़ते
है। कन्टेजेन्सी प्लान भी तैयार किया जाता
है। लेकिन इसकी हकीकत
किसी से छिपी हुई नहीं है।
अब भाजपा की जिला प्रमुख की
पहली चुनौती पेयजल ही है।
अभी से तैयारी शुरू करने पर
ही दो माह बाद बढऩे वाली पेयजल
की खपत को पूरा किया जा सकता है।
सफाई व रोशनी
ग्राम पंचायतों के पास सफाई कार्य के लिए ज्यादा बजट
नहीं है। एक्सपर्ट का कहना है कि ग्राम पंचायत
निजी आय बढ़ाकर सफाई व्यवस्था में सुधार ला
सकती है। इसके अलावा पिछले कार्यकाल में गलत
तरीके से लगी सौलर लाइटों पर सवाल खड़े
हुए थे। एेसे में आमराय से रोशनी के इंतजाम करना
चुनौती है।
वित्तीय प्रबंधन
वित्तीय प्रबंधन: कांग्रेस के कार्यकाल में जिला
परिषद में वित्तिय प्रबंधन औसत दर्ज का रहा। अब भाजपा को
इसमें और सुधार करने की आवश्यकता है। कई
योजनाओं में हर वर्ष बजट लैप्स हो जाता है।
इसके लिए जिला परिषद सदस्य व पंचायत समितियों के प्रधानों से
जिला प्रमुख को तालमेल भी बनाने की
आवश्यकता है, ताकि जहां आवश्यकता हो बजट दिया जा सके।
सड़क
ज्यादातर ग्राम पंचायत सड़कों से जुड़ गई हैं। लेकिन अब
बड़ी समस्या इनकी मरम्मत
की है। नीमकाथाना व पाटन सहित अन्य
इलाकों की सड़क काफी खराब हालात में है।
सार्वजनिक निर्माण विभाग सड़कों की हालत
ठीक नहीं करा पा रहा है। एेसे में जिला
परिषद को रोटेशन से सड़कों की मरम्मत के लिए प्लान
तैयार करना होगा।

रविवार, 10 जुलाई 2016

अड़कसर गाँव का युवा बना राजस्थान का दलित मसीहा आइये विस्तार से जाने भगवानाराम कादिया मेघवाल नन्दनी रुप रेखा

दोस्तो भगवाना राम कादिया मेघवाल एक 30 साल का मेघवाल समाज का युवा
चेहरा है ! इसका जन्म अड़कसर  नागौर मे हुवा है इन्होने
ग्रेजुtएशन  करने के बाद इन्होने
अपना जीवन समाज मे सम्पर्प्रीत कर
दिया है ! और समाज एकता पर अपना खूब योगदान दिया है इस युवा
ने आजतक कभी हार नही
मानी है और हमेशा अन्याय का सामना किया है यह
युवा नागौर जिले मे जिला अनुसूचित जाति के महामंत्री भी रह चुके है !  और नावा
तहसील मे दलित संघठन का अध्यक्ष
भी है ! और इस युवा ने  डान्गावास दलित हत्याकांड मे
एम.एल.ए से लेकर राष्ट्पति तक को ज्ञापन दिया था दोस्तो भगवाना राम  मेघवाल एक शांत व्यवहार वाला युवा है ऐसे युवा यदि इस
धरती पर रहेंगे तो समाज का कोई भी कुछ
नही बिगाड़ सकेगा और  भगवाना राम  मेघवाल का सामाजिक क्रियाओं  के रूप में प्रसिद्ध  हैं. वे सरपंच में चुनाव जीतकर नागौर ही नही बल्कि पूरे राजस्थान मे भी दलितों के मशीहा बने है वे राजस्थान मे अनेक संघठनों के रुप मेंजुड़े हैं.उनका मुक़ाबला आजाद हिंदुस्तान मे जो लोग अन्याय करते ह उसके विरुद्ध है और मेघवाल का मुक़ाबला कड़ा है.लेकिन एक बात मेघवाल के पक्ष में जाती है और वो है लोगो का उनसे लगाव. नागौर और राजस्थान के लोग उन्हें व्यक्तिगत रुप से पसंद करते हैं और अर्थव्यवस्था संभालने के उनके तौर तरीक़ों को लेकर उन्हें आज भी पूरे मे से पूरे अंक देते हैं.यदि वो अपने समर्थकों को एक बारफिर अपने साथ जुटा पाते हैं, और उन -लोगो कोअपनी ओर खींच पाते हैं क्यों की मेघवाल जब एक बार किसी से मिल जाते ह तॊ वो बन्दा  मेघवाल का हो जाता हदोस्तो जब तक आजाद हिंदुस्तान मे भगवाना राम  मेघवाल जेसे पूत इसधरती पर रहेंगे तॊ किसी की अन्याय करने की हिम्मत नही होगी दोस्तो जब मे भगवाना राम जी मेघवाल से मिला तॊ मुझे लगा की भगवाना राम  मेघवाल समाज की खातिर ही नही बल्की पूरे देश की खातिर समाज हेतु संघर्ष कर रहे है मेघवाल कॉलेज करने के बाद राजनीति के बारे मे सोचा तॊ वो राजनीति मे प्रवेश कर लिया दोस्तो इस युवा का राजनीति के साथ साथ समाजिक संघटनों से भी ह नयी सोच नयी बुलंदी के मसीहा के रुप मे जाने जाते है ! भगवाना राम मेघवाल:   दोस्तो मे आपको एक छोटे से कस्बे के रहने वाले भगवाना राम मेघवाल के जीवन के बारे मे बताने जा रहा हूँ मेरे समाज बंधुओं आपको एक साधारण परिवार मे जन्मे श्री भगवाना राम मेघवाल एक साधारण जीवन व्यापन करने वाले मेघवाल समाज के सपूत ने नयी सोच नयी बुलंदियों के सहारे समाज हित मे काम कर  रहे है ! भगवान जी मेघवाल सरपंच भी रह चुके है यह राजस्थान प्रांत के नागौर जिले के एक छोटे से कस्बे अड़कसर  मे जन्मे ह और शिक्षा बी.ए है ! और तीस साल के भगवाना राम जी कभी भी विपरीत परिस्तिथियों मे कभी भी हार नही मानी है मेघवाल वर्तमान समय मे जिला महामंत्री भाजपा युवा मोर्चा अनुसूचित जाति के है ! और इन्होने समाज मे होने वाले दलितों के पर अत्याचार को को भी रोका है दोस्तो  मेघवाल का जब मेने मेघवाल समाज के  ब्लॉग पर प्रकाशित किया  तॊ उसका भी बड़ा योगदान  समाज मे मिला ! क्यों की इसी कारण भगवाना राम  मेघवाल समाज को लेकर आगे बढ़ता है दोस्तो मेने मेघवाल समाज के www.mandusiya.blogspot.com पर भगवाना राम  मेघवाल की जीवनी समाजिक कार्यों के बारे मे तथ्यों को शेयर किया ह

बुधवार, 6 जुलाई 2016

अर्जुन मेघवाल सोशियल किंग इंडिया

*कभी थे टेलीफोन ऑपरेटर, अब मोदी ने शामिल किया कैबिनेट में-अर्जुन मेघवाल को और मेघवाल को अब तक बेस्ट सांसद रत्न से दो बार नवाजा जा चुका है  अर्जुन मेघवाल चुरू जिले के जिला कलेक्टर भी रहे चुके है ! आयीये अर्जुन मेघवाल के जीवन से लेके साईकल तक का सफर के बारे मे विस्तार से देखे

_नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में मंगलवार को हुए विस्तार में 19 नए मंत्रियों को शामिल किया गया है। राजस्थान के बीकानेर से सांसद अर्जुन राम मेघवाल को भी मोदी कैबिनेट में जगह मिली है। सांसद मेघवाल कभी टेलीफोन ऑपरेटर हुआ करते थे। अपनी कड़ी मेहनत और दूरदर्शिता के कारण मेघवाल आज केंद्रीय मंत्री बन गए हैं। सांसद बनने से पहले मेघवाल की पहचान एक बेहतरीन प्रशासनिक अधिकारी के रूप में थी। मेघवाल दो बार सांसद और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी रह चुके हैं। प्रशासनिक सेवा में सिलेक्ट होने से पहले मेघवाल बीएसएनएल में टेलिफोन ऑपरेटर के तौर पर काम करते थे जो बाद में कड़ी मेहनत से 1982 में आरएएस और फिर आईएएस बने।_

_राजस्थान में बड़े दलित नेता माने जाते हैं मेघवालसांसद अर्जुन मेघवाल राजस्थान में बड़े दलित नेता माने जाते हैं। पिछले वर्ष दूसरे बजट सत्र के पहले दिन से उन्होंने अपने आवास विंडसर रोड से संसद भवन तक का सफर साइकिल से शुरू किया था। तब से वे साइकिल से ही संसद आने-जाने को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। मेघवाल 2002 में पहली बार बीकानेर के सांसद बने थे। राजस्थान में मेघवाल के साथ ही दलित समाज का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गुड बुक में तो शामिल हैं ही साथ ही पर्यावरण को बचाने के लिए अपनी मुहिम को लेकर भी खासे चर्चित हैं।_

_मिल चुका है सांसद महारत्न पुरस्कारमेघवाल संसद में अपने बेहतरीन काम के लिए जाने जाते हैं। मेघवाल समय-समय पर राजस्थान के मुद्दों के केंद्र सरकार और संसद में उठाते रहे हैं। इन मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने और उन पर काम करने में माहिर मेघवाल इसीलिए देशभर के सांसदों के बीच खासे चर्चा में रहते हैं। बेहतरीन कार्यों के लिए उन्हें हाल ही चेन्नई के आईआईटी सभागार में सांसद महारत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया।_

_मोदी की नसीहत पर अपनाई साइकिलउल्लेखनीय है कि पहली बार साइकिल से संसद पहुंचने पर मेघवाल ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण कांफ्रेंस में सभी सांसदों को सप्ताह में एक दिन साइकिल से संसद आने का आह्वान किया है। प्रधानमंत्री के आह्वान पर वे अब रोजाना ही सत्र के दौरान साइकिल से आएंगे। इसके अलावा अपने संसदीय क्षेत्र बीकानेर में भी वे साइकिल का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करेंगे।,_

श्री माया मेघवाल की कथा

श्री माया मेघऋषि जी कथा यह कथा मे आपको संयोजित कर रहा हूँ मेघवाल समाज के बंधुओं हमारे समाज मे आज भी बहूत ऐसी कथायें है जो समाज मे संयोजित है ! मे नवरत्न मन्डुसिया आपको माता माया की कथा को संयोजित करके आपके सामने पेश कर रहा हूँ
मायाजी मेघऋषि जी मेघवाल समाज के महान संत हुए है| वे पाटन मेँ एक कुटिया मेँ रहते तथा भगवान का सिमरन करते थे| उस समय पाटन का राजा सिद्धराज सोलंकी था| एक बार राजा ने जनहितार्थ तालाब खुदवाना प्रारंभ किया| जसमा नाम की एक स्त्री वहाँ काम पर आती थी| वह बहुत ही सुंदर थी इसलिए राजा उस पर मोहित हो गया तथा उसको अपनी पटराणी बनाने का ख्वाब देखने लगा| एक दिन राजा ने जसमा का पीछा कर उसे रोका| राजा जसमा से बोला कि मैँ तुमको अपनी पटराणी बनाना चाहता हूँ| जसमा तो एक सती तथा धार्मिक स्त्री थी इसलिए वह राजा की अभद्र बात सहन नही कर सकी|उसने राजा को शाप देते हुए कहा कि आपने जो जनहितार्थ तालाब खुदवाया है उसमे कभी बुँद भी पानी नही ठहरेगा तथा खारा ही होगा| और देखते ही देखते जसमा अपने प्राण देने लगी | यह देखकर राजा बहुत ही घबराया तथा उसके चरणोँ मेँ गिर पडा| राजा क्षमा याचना करते हुए बोला आप मेरी माता समान हो मुझसे अनजाने मेँ यह पाप हो गया| आप मुझ पापी को क्षमा कर शाप वापस ले लिजिए| जसमा ने कहा कि तीर कमान से तथा शब्द जुबान से निकले हुए वापस नही होता| राजा फिर बोला आप कुछ न कुछ उपाय बताइए अन्यथा यह तालाब किसी अर्थ का नही रहेगा| जसमा ने अंतिम साँसे लेते हुए कहा कि यदि कोई बत्तीस लक्षणोँ वाला व्यक्ति इस तालाब मेँ काया होमेगा तो ही इस शाप से मुक्ति मिल सकती है| और जसमा प्राणमुक्त हो गई| राजा को अब चिँता होने लगी कि आखिर बत्तीस लक्षणोँ वाले व्यक्ति को कहाँ ढुँढने जाएँ| उसने काशी से विद्वान बुलवाया और कहा कि आप शास्त्रोँ का अध्ययन कर ऐसे व्यक्ति का नाम बताओ| विद्वान बोले राजन आप के राज्य मेँ केवल दो ही ऐसे व्यक्ति है| राजा ने पुछा कौन कौन| विद्वान बोले कि एक तो आप स्वयं तथा दूसरे मायाजी मेघवाल जिनकी नगर से बाहर कुटिया मेँ हरि का सिमरन करते है| राजा ने अपने सैनिको को बुलाया और कहा कि जाओ और मायाजी को दरबार मेँ हाजिर करो| सैनिक मायाजी को प्रणाम कर बोले महाराज आप हमारे साथ दरबार मेँ चलेँ राजाजी ने बुलाया| मायाजी दरबार मेँ पहुँचे तथा राजा के सामने हाथ जोडकर खडे हो गए| राजा ने भी मायाजी को प्रणाम किया और उनको दरबार मेँ प्रयोजन बताया| राजा ने कहा केवल हम दोनो पर बात अटकी है| राजा ने कहा कि या तो आप काया होमे तो आप का बडा उपकार होगा अन्यथा मुझे ही यह काम करना पडेगा|मायाजी बोले मै काया होमने को तैयार हूँ| दूसरे दिन नगरवासी गांजो बाजो के साथ पालकी मेँ बिठाकर मायाजी को तालाब पर ले गए| मायाजी ने सभी नगरवासियोँ को अंतिम प्रणाम किया| फिर मायाजी ने अग्नि देवता का आहवान किया| कुछ ही क्षणोँ मेँ स्वतं ही अग्निकुँण्ड बना तथा अग्नि प्रज्वलित होने लगी| मायाजी ने सिमरन कर कुँण्ड मेँ पाँव धरे और देखते ही देखते पूर्ण रुप से अग्निकुँण्ड मेँ समा गए| कुछ देर बाद तालाब मीठे पानी से लबालब भर गया| राजा व नगरवासी मेँ खुशी की लहर दौड गई| इस प्रकार मायाजी ने जनहितार्थ अपने प्राणोँ की आहुति देकर तालाब का जल मीठा किया| मेघवँश सदैव मायाजी का ऋणी रहेगा जिनके बलिदान से समाज को पारंपरिक रीति रिवाजोँ से मुक्ति दिलाई| श्री माया मेघऋषि जी के चरणोँ मेँ शत शत नमन अभिवंदन

नवरत्न मन्डुसिया

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