शुक्रवार, 19 जून 2015

तेज हुई डांगावास हत्याकांड के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग

जोधपुर। पड़ोसी जिले नागौर में मेड़ता के पास डांगावास गांव में हुई दलितों की हत्या से उपजा आक्रोश शांत नहीं हो रहा है। जोधपुर में दलित शोषण मुक्ति मंच ने मंगलवार को जिला कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन किया और ज्ञापन देकर सभी आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की।

दलित शोषण मुक्ति मंच के बैनर तले बड़ी संख्या में दलित समाज के लोग कलेक्ट्रेट पर एकत्र हुए और प्रदर्शन करने लगे। वे डांगावास हत्याकांड को लेकर नारे लगा रहे थे और सभी आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। इसके बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर अपनी मांग बताई।http://hindi.eenaduindia.com/State/Rajasthan/2015/06/16200105/demanded-the-arrest-of-those-accused-of-murder.vpf

Published 16-Jun-2015 20:00 IST

गुरुवार, 18 जून 2015

बाबा रामदेव की मूर्ति स्थापना में झलकी श्रद्धा सुरेरा में मेघवाल समाज की

सुरेरा  में मेघवाल समाज की ओर से नवनिर्मित मंदिर में हवन के साथ बाबा रामदेवजी महाराज की मूर्ति सेवक हरजी भाटी, बाबा की बहन डाली बाई, सुगना बाई की मूर्तियों की स्थापना की गई। साथ ही मंदिर पर कलश स्थापित किया गया। इस कार्यक्रम में समाज महिला, पुरुष, युवक, युवतियों ने उत्साह से भाग लिया। प्रतिमाओं की स्थापना से पहले शोभायात्रा  निकाली गई। इसमें समाजबंधुओं की श्रद्धा उत्साह देखते ही बन रहा था। शोभायात्रा में डीजे पर बज रहे भजनों पर समाज के युवक-युवतियां नाचते, बाबा रामदेव के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। शोभायात्रा में एक रथ पर बाबा रामदेवजी महाराज सहित अन्य प्रतिमाएं, कलश विराजमान थे। समाजबंधु इन्हें चंवर ढुला रहे थे। इनके पीछे धूपड़ा, झालर लेकर समाज के युवा चल रहे थे। शोभायात्रा रामदेवजी मंदिर से रवाना हुई, जो गांव के प्रमुख मार्गों से होती हुई मंदिर पहंुची, जहां  मंत्रोच्चार के साथ 21 हवन कुंडों में आहुतियां दिलवाई और बाबा रामदेवजी महाराज सहित अन्य मूर्तियों की स्थापना करवाई। मूर्ति स्थापना के बाद मंदिर के शिखर पर कलशारोहण करवाया तथा महाप्रसादी का वितरण हुआ।

बुधवार, 17 जून 2015

पिपराली प्रधान संतोष मेघवाल

पिपराली प्रधान संतोष का कहना है कि राजनीति में जनसेवा से बढ़कर कोई दूसरा धर्म नहीं होता है। इसलिए शादी के बारे में अभी तक सोचा भी नहीं है। 22 वर्षीय प्रधान लगातार क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में जाकर लोगों की समस्या सुनती हैं। राजनीति के साथ वे फिलहाल एमए की पढ़ाई कर रही हैं।
प्रधान का मानना इस वक्त शादी से निश्चित तौर पर प्रधानी में फर्क पड़ेगा। शादी के बाद घर-परिवार की जिम्मेदारी आ जाती है, इसलिए एक बार सिर्फ जनता की जिम्मेदारी निभाएंगे।

सोमवार, 15 जून 2015

कैलाश चन्द्र मेघवाल

कैलाश चन्द्र मेघवाल एक भारतीय राजनेता हैं। वर्तमान मेँ वे राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष हैं। वे पूर्व मेँ केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रह चुके हैं। और वे भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मेँ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुके है। वर्तमान मेँ भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं। पूर्व मेँ वे टोंक-सवाई माधोपुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद थे। वे राजस्थान सरकार में अनेक बार मंत्री पद पर रह चुके हैं।।
1977-1985 - सदस्य, राजस्थान विधान सभा।
1989 - जालौर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से 9 वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित।

1990 -सदस्य, राजस्थान विधान सभा।
1993-1998 -सदस्य, राजस्थान विधान सभा।
22 सितंबर 2001 -(उपचुनाव) 13 वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित।
2004 -14 वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित।
2013 -सदस्य, राजस्थान विधान सभा।


1962 -संयुक्त सचिव, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी. राजस्थान।
1969-1975 -संयुक्त सचिव, भारतीय जनसंघ, राजस्थान।
1977 -खान एवं भूविज्ञान मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार, पंचायती राज, भेड़ और ऊन, राजस्थान सरकार के राज्य मंत्री।

1978 -कैबिनेट मंत्री, सहकारिता, खान एवं भूविज्ञान, राजस्थान सरकार।
1980-1982 -सचिव, भारतीय जनता पार्टी, राजस्थान।

1981-1984 -सदस्य, लोक लेखा समिति, राजस्थान विधान सभा।
1982-1985 -महासचिव, भारतीय जनता पार्टी, राजस्थान।
1987 के बाद उपाध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी, राजस्थान।
1991-1992 -कैबिनेट मंत्री, सिंचाई और राहत, राजस्थान सरकार।

1994-1998 -कैबिनेट मंत्री, गृह, खान और मुद्रण के मंत्रालय, राजस्थान सरकार।
2003-2004 -राज्य मंत्री, सामाजिक न्याय और अधिकारिता,भारत सरकार।
20.12.2013-21.01.2014 -कैबिनेट मंत्री, खान एवं भूविज्ञान, राजस्थान सरकार।
22.1.2014 -राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष।

हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक बाबा रामदेव ने अपने अल्प जीवन के तेंतीस वर्षों में वह कार्य कर दिखाया जो सैकडो वर्षों में भी होना सम्भव नही था

रामदेव जी राजस्थान के एक लोक देवता हैं। 15वी. शताब्दी के आरम्भ में भारत में लूट खसोट, छुआछूत, हिंदू-मुस्लिम झगडों आदि के कारण स्थितियाँ बड़ी अराजक बनी हुई थीं। ऐसे विकट समय में पश्चिम राजस्थान के पोकरण नामक प्रसिद्ध नगर के पास रुणिचा नामक स्थान में तोमर वंशीय राजपूत और रुणिचा के शासक अजमाल जी के घर भादो शुक्ल पक्ष दूज के दिन वि•स• 1409 को बाबा रामदेव पीर अवतरित हुए (द्वारकानाथ ने राजा अजमल जी के घर अवतार लिया, जिन्होंने लोक में व्याप्त अत्याचार, वैर-द्वेष, छुआछूत का विरोध कर अछूतोद्धार का सफल आन्दोलन चलाया।

एक बार बालक रामदेव ने खिलोने वाले घोड़े की जिद करने पर राजा अजमल उसे खिलोने वाले के पास् लेकर गये एवं खिलोने बनाने को कहा। राजा अजमल ने चन्दन और मखमली कपडे का घोड़ा बनाने को कहा। यह सब देखकर खिलोने वाला लालच में आ ग़या और उसने बहुत सारा कपडा अपनी पत्नी के लिये रख लिया और उस में से कुछ ही कपडा काम में लिया। जब बालक रामदेव घोड़े पर बैठे तो घोड़ा उन्हें लेकर आकाश में चला ग़या। राजा खिलोने वाले पर गुस्सा हुए तथा उसे जेल में डालने के आदेश दे दिये। कुछ समय पश्चात, बालक रामदेव वापस घोड़े के साथ आये। खिलोने वाले ने अपनी गलती स्वीकारी तथा बचने के लिये रामदेव से गुहार की। बाबा रामदेव ने दया दिखाते हुए उसे माफ़ किया। अभी भी, कपडे वाला घोड़ा बाबा रामदेव की खास चढ़ावा माना जाता है।

बाबा रामदेव ने अपनी सगी छोटी बहन डाली बाई के साथ समाज सेवा के लिए एक अभियान चलाया था।

लोककथा के अनुसार बाबा रामदेव ने अपनी सगी छोटी बहन डाली बाई के साथ समाज सेवा के लिए एक अभियान चलाया था। गांव-गांव जाकर छुआछूत के विरूद्ध अपनी आवाज तेज करने लगे तथा धार्मिक जागृति फैलाने लगे व मेघवंशी घरों में जम्मा (जागरण) करने लगे। एक बार भक्त शिरोमणि धारू मेघवंशी के घर जोधपुर के राव मालदेव की राणी रूपादे जो कि रावजी के मना करने के पश्चात् भी इसी जागरण में शामिल हुई जिसका रावजी को पता चलने पर क्रोधित हो कर सबूत के तौर पर नाई औरत के साथ रूपादे की जूती मंगवाई। नाई औरत चमत्कार के कारण जूती नहीं ले जा सकी तो रावजी खुद महल के दरवाजे पर खड़े होकर राणी रूपादे का इंतजार करने लगे और पूजा की थाली के बारे में पूछने लगे इसमें क्या है राणी ने घबराते हुए झूठ ही कह दिया कि वह तो बाग में फूल लाने गई, रावजी को फूलों के साथ पूरा बाग नजर आया और राणी के कदमों में झुक गए व राणी को गुरू की तरह ही खुद के लिए एक समर्थ गुरू का हाथ अपने सिर पर रखवाने का अनुनय-विनय करने लगे जिसेराणी ने मेघवंशियों के घरों में धार्मिक व ऊंच-नीच के लिए चलाए आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने लगे। मेघवंशियों को समाज में बराबर का स्थान दिलाने के लिए सवर्णों से उनको उपेक्षा मिली तथा कई समस्याएं पैदा हुई। कई जगह अपमानित तथा लड़ाई-झगड़ा भी करना पड़ा। फिर भी मेघवंशियों के लिए संघर्ष जारी रखते हुए मंदिरों में प्रवेश करवाया, तालाब, बावडि़यों तथा कुओं से पानी भरने से हाने वाली छुआछूत के विरूद्ध जगह- जगह एक अभियान के रूप में समानता दिलाने का प्रयास किया। बाबा रामदेवजी को 33 वर्ष की अल्प आयु में ही समाधि हेतु विवश होना पड़ा।
समाधि से पूर्व भोली-भाली व निष्ठावान मेघवंशी जाति के लिए समाज में बदलाव लाने के लिए धार्मिक अनिवार्यता के रूप में मेघवंशियों को दो वचन दे गए। पहला मेरी समाधि में पांव रखने से पहले डाली बाई के मंदिर के दर्शन व फेरी लगाने पर ही मेरी पूजा होगी। दूसरा भगवान के जम्मा जागरण में आत्मिक रूप से उन्नत मेघवंशी सदस्य की प्रधानता को अनिवार्यता प्रदान करना अन्यथा वह जागरण संपूर्ण नहीं माना जाएगा।



समाधि से पूर्व भोली-भाली व निष्ठावान मेघवंशी जाति के लिए समाज में बदलाव लाने के लिए धार्मिक अनिवार्यता के रूप में मेघवंशियों को दो वचन दे गए। पहला मेरी समाधि में पांव रखने से पहले डाली बाई के मंदिर के दर्शन व फेरी लगाने पर ही मेरी पूजा होगी। दूसरा भगवान के जम्मा जागरण में आत्मिक रूप से उन्नत मेघवंशी सदस्य की प्रधानता को अनिवार्यता प्रदान करना अन्यथा वह जागरण संपूर्ण नहीं माना जाएगा।

सायर मेघवंशी (जयपाल गौत्र) sayar meghwal

 सायर मेघवंशी (जयपाल गौत्र) एवं श्रीमती मगनीदेवी जो ऊण्डू कश्मीर गांव (बाड़मेर) के निवासी थे। जिनके घर (वि. स. 1406 सेे 1468) के बीच में देवता, महामानव, शक्तिवान, सिद्धसंत, युगपुरूष बाबा रामदेव का अवतरण हुआ।

नवरत्न मन्डुसिया

खोरी गांव के मेघवाल समाज की शानदार पहल

  सीकर खोरी गांव में मेघवाल समाज की सामूहिक बैठक सीकर - (नवरत्न मंडूसिया) ग्राम खोरी डूंगर में आज मेघवाल परिषद सीकर के जिला अध्यक्ष रामचन्द्...