नवरतन मंडुसिया ने सुरेरा में संत रविदास जयंती समारोह में भाग लिया। कार्यक्रम में मंडुसिया ने कहा कि लोग रविदास महाराज के आदर्शों एव विचारों पर चलकर अपने जीवन को धन्य बनाएं। उन्होंने मदागन के प्राकृतिक सौन्दर्य को बनाए रखते हुए उसे तीर्थ-स्थल के रूप में विकसित करने एवं उसके सौन्दर्यीकरण की योजना बनाने के निर्देश दिए।
हमारे उद्देश्य: - मेघवाल समुदाय समृद्ध सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, मानसिक और सांस्कृतिक. मृत्यु भोज, शराब दुरुपयोग, बाल विवाह, बहुविवाह, दहेज, विदेशी शोषण, अत्याचार और समाज और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर अपराधों को रोकने के लिए और समाज के कमजोर लोगों का समर्थन की तरह प्रगति में बाधा कार्यों से छुटकारा पाने की कोशिश करेंगे :- नवरत्न मन्डुसिया
रविवार, 24 फ़रवरी 2013
मंगलवार, 1 जनवरी 2013
मेघवाल संत
संत किसनदासजी
रामस्नेही संप्रदाय के संत कवि
रामस्नेही संप्रदाय के प्रवर्त्तक सन्त साहब थे। उनका प्रादुर्भाव 18 वीं शताब्दी में हुआ। रेण- रामस्नेही संप्रदाय में शुरु से ही गुरु- शिष्य की परंपरा चलती अंायी है। नागौर जिले में रामस्नेही संप्रदाय की परंपरा संत दरियावजी से आरंभ होती है। ंसंत दरियावजी के इन निष्पक्ष व्यवहार एवं लोक हितपरक उपदेशों से प्रभावित होकर इनके अनेक शिष्य बने, जिन्होंने राजस्थान के विभिन्न नगरों व कस्बों में रामस्नेही-पंथ का प्रचार व प्रसार करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। इनके शिष्यों में संत किसनदासजी अतिप्रसिद्ध हुए।
संत किसनदासजी दरियावजी साहब के चार प्रमुख शिष्यों में से एक हैं। इनका जन्म वि.सं. 1746 माघ शुक्ला 5 को हुआ। इनके पिता का नाम दासाराम तथा माता का नाम महीदेवी था। ये मेघवंशी (मेघवाल ) थे। इनकी जन्म भूमि व साधना स्थली टांकला ( नागौर ) थी। ये बहुत ही त्यागी, संतोषी तथा कोमल प्रवृत्ति के संत माने जाते थे। कुछ वर्ष तक गृहस्थ जीवन व्यतीत करने के पश्चात् इन्होंने वि.1773 वैशाख शुक्ल 11 को दरियाव साहब से दीक्षा ली।
इनके 21 शिष्य थे। खेड़ापा के संत दयालुदास ने अपनी भक्तमाल में इनके आत्मदृष्टा 13 शिष्यों का जिक्र किया है, जिसके नाम हैं -1. हेमदास, 2. खेतसी, 3.गोरधनदास, 4. हरिदास ( चाडी), 5. मेघोदास ( चाडी), 6. हरकिशन 7. बुधाराम, 8. लाडूराम, 9. भैरुदास, 10. सांवलदास, 11. टीकूदास, 12. शोभाराम, 13. दूधाराम। इन शिष्य परंपरा में अनेक साहित्यकार हुए हैं। कुछ प्रमुख संत- साहित्यकारों को इस सारणी के माध्यम से दिखलाया जा रहा है। कई पीढियों तक यह शिष्य- परंपरा चलती रही।
संत दयालुदास ने किसनदास के बारे में लिखा है कि ये संसार में रहते हुए भी जल में कमल की तरह निर्लिप्त थे तथा घट में ही अघटा ( निराकार परमात्मा ) का प्रकाश देखने वाले सिद्ध पुरुष थे -
भगत अंश परगट भए, किसनदास महाराज धिन।
पदम गुलाब स फूल, जनम जग जल सूं न्यारा।
सीपां आस आकास, समंद अप मिलै न खारा।।
प्रगट रामप्रताप, अघट घट भया प्रकासा।
अनुभव अगम उदोत, ब्रह्म परचे तत भासा।।
मारुधर पावन करी, गाँव टूंकले बास जन।
भगत अंश परगट भए, किसनदास महाराज धिन।। -- भक्तमाल/ छंद 437
किसनदास की रचना का एक उदाहरण दिया जा रहा है -
ऐसे जन दरियावजी, किसना मिलिया मोहि।।1।।
बाणी कर काहाणी कही, भगति पिछाणी नांहि।
किसना गुरु बिन ले चल्या स्वारथ नरकां मांहि।।2।।
किसना जग फूल्यों फिरै झूठा सुख की आस।
ऐसों जग में जीवणों ज्यूं पाणी मांहि पतास।।3।।
बेग बुढापो आवसी सुध- बुध जासी छूट।
किसनदास काया नगर जम ले जासी लूट।।4।।
दिवस गमायो भटकतां रात गमाई सोय।
किसनदास इस जीव को भलो कहां से होय।।5।।
कुसंग कदै न कीजिये संत कहत है टेर।
जैसे संगत काग की उड़ती मरी बटेर।।6।।
उज्जल चित उज्जल दसा, मुख का इमृत बैण।
किसनदास वे नित मिलो, रामसनेही सैण।।7।।
दया धरम संतोष सत सील सबूरी सार।
किसनदास या दास गति सहजां मोख दुवार।।8।।
निसरया किस कारणे, करता है, क्या काम।
घर का हुआ न घाट का, धोबी हंदा स्वान।।9।।
इनका बाणी साहित्य श्लोक परिमाण लगभग 4000 है। जिनमें ग्रंथ 14, चौपाई 914, साखी 664, कवित्त 14, चंद्रायण 11, कुण्डलिया 15, हरजस 22, आरती 2 हैं। विक्रम सं. 1825 आषाढ़ 7 को टांकला में इनका निधन हो गया।
रामस्नेही संप्रदाय के संत कवि
रामस्नेही संप्रदाय के प्रवर्त्तक सन्त साहब थे। उनका प्रादुर्भाव 18 वीं शताब्दी में हुआ। रेण- रामस्नेही संप्रदाय में शुरु से ही गुरु- शिष्य की परंपरा चलती अंायी है। नागौर जिले में रामस्नेही संप्रदाय की परंपरा संत दरियावजी से आरंभ होती है। ंसंत दरियावजी के इन निष्पक्ष व्यवहार एवं लोक हितपरक उपदेशों से प्रभावित होकर इनके अनेक शिष्य बने, जिन्होंने राजस्थान के विभिन्न नगरों व कस्बों में रामस्नेही-पंथ का प्रचार व प्रसार करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। इनके शिष्यों में संत किसनदासजी अतिप्रसिद्ध हुए।
संत किसनदासजी दरियावजी साहब के चार प्रमुख शिष्यों में से एक हैं। इनका जन्म वि.सं. 1746 माघ शुक्ला 5 को हुआ। इनके पिता का नाम दासाराम तथा माता का नाम महीदेवी था। ये मेघवंशी (मेघवाल ) थे। इनकी जन्म भूमि व साधना स्थली टांकला ( नागौर ) थी। ये बहुत ही त्यागी, संतोषी तथा कोमल प्रवृत्ति के संत माने जाते थे। कुछ वर्ष तक गृहस्थ जीवन व्यतीत करने के पश्चात् इन्होंने वि.1773 वैशाख शुक्ल 11 को दरियाव साहब से दीक्षा ली।
इनके 21 शिष्य थे। खेड़ापा के संत दयालुदास ने अपनी भक्तमाल में इनके आत्मदृष्टा 13 शिष्यों का जिक्र किया है, जिसके नाम हैं -1. हेमदास, 2. खेतसी, 3.गोरधनदास, 4. हरिदास ( चाडी), 5. मेघोदास ( चाडी), 6. हरकिशन 7. बुधाराम, 8. लाडूराम, 9. भैरुदास, 10. सांवलदास, 11. टीकूदास, 12. शोभाराम, 13. दूधाराम। इन शिष्य परंपरा में अनेक साहित्यकार हुए हैं। कुछ प्रमुख संत- साहित्यकारों को इस सारणी के माध्यम से दिखलाया जा रहा है। कई पीढियों तक यह शिष्य- परंपरा चलती रही।
संत दयालुदास ने किसनदास के बारे में लिखा है कि ये संसार में रहते हुए भी जल में कमल की तरह निर्लिप्त थे तथा घट में ही अघटा ( निराकार परमात्मा ) का प्रकाश देखने वाले सिद्ध पुरुष थे -
भगत अंश परगट भए, किसनदास महाराज धिन।
पदम गुलाब स फूल, जनम जग जल सूं न्यारा।
सीपां आस आकास, समंद अप मिलै न खारा।।
प्रगट रामप्रताप, अघट घट भया प्रकासा।
अनुभव अगम उदोत, ब्रह्म परचे तत भासा।।
मारुधर पावन करी, गाँव टूंकले बास जन।
भगत अंश परगट भए, किसनदास महाराज धिन।। -- भक्तमाल/ छंद 437
किसनदास की रचना का एक उदाहरण दिया जा रहा है -
ऐसे जन दरियावजी, किसना मिलिया मोहि।।1।।
बाणी कर काहाणी कही, भगति पिछाणी नांहि।
किसना गुरु बिन ले चल्या स्वारथ नरकां मांहि।।2।।
किसना जग फूल्यों फिरै झूठा सुख की आस।
ऐसों जग में जीवणों ज्यूं पाणी मांहि पतास।।3।।
बेग बुढापो आवसी सुध- बुध जासी छूट।
किसनदास काया नगर जम ले जासी लूट।।4।।
दिवस गमायो भटकतां रात गमाई सोय।
किसनदास इस जीव को भलो कहां से होय।।5।।
कुसंग कदै न कीजिये संत कहत है टेर।
जैसे संगत काग की उड़ती मरी बटेर।।6।।
उज्जल चित उज्जल दसा, मुख का इमृत बैण।
किसनदास वे नित मिलो, रामसनेही सैण।।7।।
दया धरम संतोष सत सील सबूरी सार।
किसनदास या दास गति सहजां मोख दुवार।।8।।
निसरया किस कारणे, करता है, क्या काम।
घर का हुआ न घाट का, धोबी हंदा स्वान।।9।।
इनका बाणी साहित्य श्लोक परिमाण लगभग 4000 है। जिनमें ग्रंथ 14, चौपाई 914, साखी 664, कवित्त 14, चंद्रायण 11, कुण्डलिया 15, हरजस 22, आरती 2 हैं। विक्रम सं. 1825 आषाढ़ 7 को टांकला में इनका निधन हो गया।
शनिवार, 15 दिसंबर 2012
24 दिसम्बर 2012 को पत्रकार मेघवंशी कोटा में होंगे सम्मानित
भीलवाड़ा - भारतीय दलित साहित्य अकादमी की ओर से भीलवाड़ा के पत्रकार भंवर मेघवंशी एवं कवि राजकुमार बादल को 24 दिसम्बर 2012 को ‘‘डॅा. अम्बेडकर सेवा’’ पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
भारतीय दलित साहित्य अकादमी की ओर से कोटा के दशहरा मैदान स्थित विजयश्री रंगमंच पर 24 दिसम्बर 2012 को दलितों की ‘‘दशा एवं दिशा’’ पर राष्ट्रीय अधिवेशन, सेमीनार एवं प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस सेमीनार के साथ दलित वर्ग की कई प्रतिभाओं को भी सम्मानित किया जाएगा। जिनमें दलित पत्रकार, लेखक, साहित्यकार तथा कवियों को सम्मानित किया जाएगा।
अधिवेशन के प्रांतीय संयोजक नन्दलाल केसरी ने बताया कि भीलवाड़ा के पत्रकार भंवर मेघवंशी सहित 6 पत्रकारों, भीलवाड़ा के कवि राजकुमार बादल सहित राज्य भर के 39 कवियों तथा राज्य के 12 दलित लेखकों व साहित्यकारों को विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा।
केसरी ने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं को षहीद राजाराम मेघवाल, बून्दा मीणा, कोटिया भील, महर्शि नवल, विरांगना काली बाई, झलकारी बाई एवं डॅा.. अम्बेडकर सेवा सम्मान से नवाजा जाएगा। इस दलित महाकुंभ में 33 जिलों से करीब 15,000 दलित बंधुओं के शिरकत करने की संभावना है।
दलित आदिवासी एवं घुमन्तु अधिकार अभियान राजस्थान के प्रदेश संयोजक परशराम बंजारा, महासचिव दौलतराज नागौड़ा, सचिव लखन सालवी, सहसचिव रतन नाथ कालबेलिया, जिला महासचिव देवी लाल मेघवंशी, जिला सचिव लादू लाल मेघवंशी एवं समस्त कार्यकर्ताओं ने भंवर मेघवंशी एवं राजकुमार बादल को शुभकामनाएं दी है।
yah khabar aap sabdkosh.com par bhi dekh sakte hai
http://www.khabarkosh.com/?p=2973
भारतीय दलित साहित्य अकादमी की ओर से कोटा के दशहरा मैदान स्थित विजयश्री रंगमंच पर 24 दिसम्बर 2012 को दलितों की ‘‘दशा एवं दिशा’’ पर राष्ट्रीय अधिवेशन, सेमीनार एवं प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस सेमीनार के साथ दलित वर्ग की कई प्रतिभाओं को भी सम्मानित किया जाएगा। जिनमें दलित पत्रकार, लेखक, साहित्यकार तथा कवियों को सम्मानित किया जाएगा।
अधिवेशन के प्रांतीय संयोजक नन्दलाल केसरी ने बताया कि भीलवाड़ा के पत्रकार भंवर मेघवंशी सहित 6 पत्रकारों, भीलवाड़ा के कवि राजकुमार बादल सहित राज्य भर के 39 कवियों तथा राज्य के 12 दलित लेखकों व साहित्यकारों को विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा।
केसरी ने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं को षहीद राजाराम मेघवाल, बून्दा मीणा, कोटिया भील, महर्शि नवल, विरांगना काली बाई, झलकारी बाई एवं डॅा.. अम्बेडकर सेवा सम्मान से नवाजा जाएगा। इस दलित महाकुंभ में 33 जिलों से करीब 15,000 दलित बंधुओं के शिरकत करने की संभावना है।
दलित आदिवासी एवं घुमन्तु अधिकार अभियान राजस्थान के प्रदेश संयोजक परशराम बंजारा, महासचिव दौलतराज नागौड़ा, सचिव लखन सालवी, सहसचिव रतन नाथ कालबेलिया, जिला महासचिव देवी लाल मेघवंशी, जिला सचिव लादू लाल मेघवंशी एवं समस्त कार्यकर्ताओं ने भंवर मेघवंशी एवं राजकुमार बादल को शुभकामनाएं दी है।
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शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012
मेघवाल समाज की प्रतिभाओं का सम्मान
बहरोड़ ( Dec 10, 2012, 01:26AM IST)
मेघवाल समाज का प्रतिभा सम्मान समारोह रविवार को अलवर रोड स्थित गरीबनाथ छात्रावास पर आयोजित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि पुलिस उपाधीक्षक डॉ. लालचन्द कायल ने कहा कि समाज में प्रतिभाओं की कमी नहीं है सिर्फ उन्हें तराशने की आवश्यकता है। प्रतिभाओं के सम्मान से उन्हें आगे आने का प्रोत्साहन मिलता है। इससे पूर्व बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष दीप प्र\'जवलित कर समारोह का शुभारंभ किया। समाज अध्यक्ष बनवारी लाल मेघवाल ने लोगों को एकजुट होकर समाज का विकास करने पर बल दिया। इस अवसर पर 25 प्रतिभाओं को स्मृति चिन्ह व डिक्शनरी देकर सम्मानित किया। इस दौरान बलबीर मेघवाल, मुकेश कुमार, माड़ाराम, रामवतार मेघवाल, डा. गजराज मेघवाल, निरंजन खुड़ाना, सुनीता मेघवाल, तोताराम मेघवाल सहित समाज सदस्य मौजूद रहे। मंच का संचालन अध्यापक पूर्ण चंद मेघवाल ने किया।
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http://www.bhaskar.com/article/RAJ-OTH-c-192-74313-NOR.html
मेघवाल समाज का प्रतिभा सम्मान समारोह रविवार को अलवर रोड स्थित गरीबनाथ छात्रावास पर आयोजित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि पुलिस उपाधीक्षक डॉ. लालचन्द कायल ने कहा कि समाज में प्रतिभाओं की कमी नहीं है सिर्फ उन्हें तराशने की आवश्यकता है। प्रतिभाओं के सम्मान से उन्हें आगे आने का प्रोत्साहन मिलता है। इससे पूर्व बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष दीप प्र\'जवलित कर समारोह का शुभारंभ किया। समाज अध्यक्ष बनवारी लाल मेघवाल ने लोगों को एकजुट होकर समाज का विकास करने पर बल दिया। इस अवसर पर 25 प्रतिभाओं को स्मृति चिन्ह व डिक्शनरी देकर सम्मानित किया। इस दौरान बलबीर मेघवाल, मुकेश कुमार, माड़ाराम, रामवतार मेघवाल, डा. गजराज मेघवाल, निरंजन खुड़ाना, सुनीता मेघवाल, तोताराम मेघवाल सहित समाज सदस्य मौजूद रहे। मंच का संचालन अध्यापक पूर्ण चंद मेघवाल ने किया।
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मेघवाल समाज (7 जोडे बंधे परिणय सूत्र मे )
मेघवाल समाज का प्रथम सामूहिक विवाह सम्मेलन गुरूवार को सम्पन्न हुआ । जिसमे 7 जोडो का विवाह हुआ। इस सम्मेलन मे उदयपुर सम्भाग भर के क्षेत्रो से हजारों समाजजन जुटे । मेघवाल समाज सेवा समिति की ओर से यह विवाह सम्मेलन का आयेजन हुआ । सुबह 7 अजे फतह स्कूल से शोभायात्रा की शरूआत हुई, जो शहर के प्रमुख मार्ग सुरजपोल,बापू बाजार,देहलीगेट होते हुए नगर परिषद टाउन हाल पहुची। जहां तोरण की रस्म हुई, वरमाला,पाणिग्रहण संस्कार के बाद समारोह मे अतिथियों का सम्मान हुआ । समारोह मे मुख्य अथिति समाजसेवी नाथुलाल मेघवाल,प्रोफसर बी.आर बामनिया,अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी प्रभेलाल मेघवाल,कांग्रेस नेता पंकज शर्मा,कोषाध्यक्ष तेजराम मेघवाल और महासचिव जगदीश मेघवाल उपस्थित थे कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष गणेश लाल ने की। सभापति रंजनी डांगी और उदयपुर सांसद रघवीर सिंह मीणा ने भी शिरकत कर वर-वधूओं को आर्शिवाद दिया । शाम को वर- वधुओं की विदाई हुई । कार्यक्रम का संचालन विजयराम बावल ने किया । समाजजन को पहले इस सामूहिक विवाह सम्मेलन मे खासा उत्साह देखा गया ।
news at Thursday, 26 April 2012
शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012
मेघवाल समाज की बैठक में महापंचायत पर चर्चा
पाली -!- राजस्थान मेघवाल समाज की बैठक बुधवार को मेघवाल समाज कार्यालय में मेघसेना के कार्यकारी अध्यक्ष गोपाल काटिवाल की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक के दौरान 23 दिसंबर को जयपुर में आयोजित होने वाली समाज की महापंचायत की तैयारियों पर चर्चा की गई। बैठक में जैनाराम सत्याग्राही, इमीलाल गरूवा, कुलदीप चार्लिया, जिलाध्यक्ष गणेशराम बोस, हेमराज तंवर, राम रतन आदि मौजूद रहे। बैठक के दौरान पदाधिकारियों को महापंचायत को सफल बनाने के लिए गांव गांव में समाज बंधुओं से संपर्क करने का आह्वान किया गया।
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