गुरुवार, 16 जून 2011

मेघवाल समाज


Meghwal Samaj
Friday, August 27, 2010


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A Meghwal woman in Ludiya, near the border with Pakistan in Kutch District, Gujarat, India.

The people of the Meghwal tribe are originally from Marwar in Rajasthan. At the present time they are also found living in western Gujarat near the Pakistan border. In Pakistan Meghwals mostly live in the Badin, Mirpurkhas, Tharparker, and Umerkot districts of Southern Punjab. In Pakistan the word Meghwar is used at the place of Meghwal.

Meghwar(Sindhi ميگھواڙ) is one of the major social groups of South Asia. In India they are classified as a "Scheduled Caste", that is, among the castes of India that are specified in a schedule of the Indian constitution. The Meghwar people, after being humbled for many thousand years, have now improved their living standards. The word Meghwal is more often used in place of Meghwar. The word Meghwar is derived from the Sanskrit words, megh, meaning clouds and rain, and war, meaning prayers. Literally, then, the word Meghwar connotes a people who pray for rains. Meghwar people, one of the most peaceful people, believe in humanity.

Meghwar (Urdu میگھواڑ ) live principally in the Punjab and Sindh regions of Pakistan, along with the Indian states of Rajasthan, Gujarat, and some other areas of India. In Pakistan the majority of the Meghwars live in the Districts of Badin, Mirpurkhas, Tharparker, and Umerkot.

Lifestyle

Now a days Meghwal community live in big and small cities of Gujarat.Mostly in Saurashtra region of Gujarat State. Many people living in Mumbai also.Their main Profession was weaving fabrique specially KHADI.Now a days because of education Most of doing various Government jobs in cities and in villages they are doing labour work in agriculture.Most of Meghwal People living in Bhavnagar District of Gujarat.

They live mostly in small hamlets of round, mud-brick huts painted on the outside with colourful geometric designs and decorated with detailed mirror inlays. The women are famous for their embroidery work and are master wool and cotton weavers. The men are woodcarvers and leather workers. Meghwals are considered as most peaceful among all the tribes living in Gujarat, Sindh, Rajasthan, Punjab.

The Meghwal women are renowned for their exuberantly detailed costumes and jewellery. Married Meghwal women are often spotted wearing gold nose ring, earrings and neckpieces. They were given to the bride as a "bride wealth" dowry by her soon-to-be husband's mother. Nose rings and earrings are often decorated with precious stones of ruby, sapphire and emerald. meghwars are the follower of "pir pithoro" his shrine is near mirpur khas in pithoro village.

Embroideries

The Meghwal women's embroidery is avidly sought after. Their work is distinguished by their primary use of red, which comes from a local pigment produced from crushed insects. The Meghwal women artisans of Thar desert in Sindh and Balochistan, and in Gujarat are considered master of the traditional embroidery and Ralli making. Exotic hand-embroidered items form part of dowry of Meghwal woman.

Religion

The Meghwal tribe are known to be Hindu. The Meghwals claim to descend from Rishi Megh.

During the Medieval Hindu Renaissance, known as the Bhakti Era, Karta Ram Maharaj, a Meghwal from Rajasthan became the spiritual guru of Meghwals

मेघवाल समाज
शुक्रवार, 27 अगस्त, 2010,


विकिपीडिया, मुक्त विश्वकोश से
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Ludiya में एक मेघवाल कच्छ जिला, गुजरात, भारत में पाकिस्तान के साथ सीमा के निकट, औरत.

 मेघवाल anusuchit जनजाति के लोगों को राजस्थान में मारवाड़ से मूल रहे हैं. वर्तमान समय में वे भी पाकिस्तान की सीमा के पास पश्चिमी गुजरात में रह पाए जाते हैं. पाकिस्तान Meghwals में ज्यादातर Badin में रहते हैं, Mirpurkhas, Tharparker, और दक्षिणी पंजाब के Umerkot जिलों. पाकिस्तान में शब्द Meghwar मेघवाल के स्थान पर प्रयोग किया जाता है.

Meghwar (सिन्धी ميگھواڙ) एक दक्षिण एशिया की प्रमुख सामाजिक समूहों में से एक है. भारत में वे एक "अनुसूचित जाति", कि भारत की जातियों कि भारतीय संविधान की अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं बीच में है, के रूप में वर्गीकृत कर रहे हैं. Meghwar लोग, जा रहा है कई हजार वर्षों के लिए दीन के बाद, अब उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है. शब्द मेघवाल अधिक बार Meghwar के स्थान पर प्रयोग किया जाता है. शब्द Meghwar संस्कृत शब्द, मेघ, जिसका अर्थ है बादलों और बारिश, और युद्ध से ली गई है, प्रार्थना अर्थ. सचमुच, तब, शब्द Meghwar एक लोग हैं, जो बारिश के लिए प्रार्थना connotes. Meghwar लोग, एक सबसे शांतिपूर्ण लोगों का, मानवता में विश्वास करते हैं.

Meghwar (उर्दू میگھواڑ) पाकिस्तान के पंजाब और सिंध क्षेत्रों में मुख्यतः जीना, राजस्थान, गुजरात और भारत के कुछ अन्य क्षेत्रों में भारतीय राज्यों के साथ. पाकिस्तान में Meghwars के बहुमत Badin, Mirpurkhas, Tharparker, और Umerkot के जिले में रहते हैं.

लाइफस्टाइल

अब एक दिन मेघवाल समुदाय गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में बड़े और छोटे Gujarat.Mostly के नगरों में रहते हैं. कई लोग मुंबई also.Their मुख्य पेशा में रहने वाले लोगों fabrique बुनाई था विशेष रूप से शिक्षा की वजह से एक दिन KHADI.Now शहरों में विभिन्न सरकारी नौकरी कर रही है और गांवों में वे मेघवाल भावनगर जिले में रहने वाले लोगों की agriculture.Most में श्रमिक काम कर रहे हैं के अधिकांश गुजरात.

वे गोल, मिट्टी की ईंट रंगीन ज्यामितीय डिजाइनों के साथ बाहर पर पेंट और विस्तृत दर्पण inlays के साथ सजाया झोपड़ियां की छोटी बस्तियों में ज्यादातर रहते हैं. महिलाओं को अपने कढ़ाई के काम के लिए प्रसिद्ध हैं और मास्टर ऊन और कपास बुनकर हैं. पुरुषों woodcarvers और चमड़े के कार्यकर्ता हैं. Meghwals सबसे सभी गुजरात, सिंध, राजस्थान, पंजाब में रहने वाले जनजातियों के बीच शांतिपूर्ण रूप में माना जाता है.

मेघवाल महिलाएं अपने exuberantly विस्तृत वेशभूषा और आभूषण के लिए प्रसिद्ध हैं. विवाहित मेघवाल महिलाओं को अक्सर सोने की नाक की अंगूठी, कान की बाली और neckpieces पहने हुए देखा जाता है. वे एक "दुल्हन धन" दहेज के रूप में उसके द्वारा दुल्हन के लिए दिए गए थे जल्द ही होने वाली है पति की माँ. नाक के छल्ले और झुमके अक्सर माणिक, नीलम और पन्ना के कीमती पत्थरों से सजाया जाता है. meghwars के 'पीर pithoro "अनुयायी उसके मंदिर pithoro गांव में मीरपुर खास के निकट है.

चिकनकारी

मेघवाल महिलाओं कढ़ाई avidly बाद की मांग की है. उनका काम उनके लाल है, जो एक स्थानीय कुचल कीड़ों से उत्पादित रंगद्रव्य से आता का प्राथमिक उपयोग के द्वारा प्रतिष्ठित है. सिंध और बलूचिस्तान में और गुजरात में थार रेगिस्तान की मेघवाल महिलाओं कारीगरों पारंपरिक कढ़ाई और Ralli बनाने का मास्टर माना जाता है. विदेशी हाथ से कढ़ाई आइटम मेघवाल महिला की दहेज के हिस्से के रूप में.

धर्म

मेघवाल जनजाति को हिन्दू माने जाते हैं. Meghwals को ऋषि मेघ से उतरना दावा.

मध्यकालीन हिंदू पुनर्जागरण, भक्ति काल के रूप में जाना के दौरान, कर्ता राम महाराज, राजस्थान से एक मेघवाल Meghwals के आध्यात्मिक गुरु बन गए

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रविवार, 12 जून 2011

धारू मेघ समाधि स्थल को लेकर रैली 4 को (meghwal society)

समाचार स्रोत-दैनिक भास्कर
प्रकाशन तिथि-01:02(29/12/10)

बालोतरा

धारू मेघ समाधि स्थल एवं स्वामी लूंबनाथ का धूणा विकास संस्थान की ओर से बैठक का अयोजन हुआ । बैठक में संतों ने संकल्प लेकर 4 जनवरी को उपखंड कार्यालय मुख्यालय पर शांतिपूर्ण ढंग से रैली निकालने का निर्णय लिया।

मेघवाल समाज संस्थान के प्रवक्ता हरीराम जसोल ने बताया कि देर शाम तक चली बैठक में सिणधरी प्राग मठ नेमनाथ महाराज ने कहा कि हमेशा संतों की सेवा समाज करता आया है पर अब संतों को चाहिए कि वे रैली में समाज के ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाएं। महंत गोरधननाथ, महंत लहरनाथ ने भी रैली में बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए समाज के लोगों से अपील की। विकास संस्थान के अध्यक्ष अमराराम राठौड़ ने स्वागत भाषण दिए जाने के साथ ही रैली आयोजन को लेकर वस्तुस्थिति से संतों को अवगत करवाया। इस अवसर पर कानाराम बूला, डायाराम सोढ़ा, बंशीलाल सोलंकी, खीमाराम परमार, ईशराराम व देवीलाल सहित समाज के कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

आस्था एवं श्रद्धा के साथ अणसी बाई का मेला संपन्न


देसूरी,7 दिसम्बर। पाली जिले में देसूरी उपखंड के नाड़ोल कस्बें में स्थित मेघवाल समाज की आराध्य बाल तपस्विनी अणसी बाई के समाधि स्थल पर दो दिवसीय मेला मंगलवार को आस्था एवं श्रद्धा के साथ संपन्न हो गया। इससे पहले सोमवार रात्रि को मेले का शुभारंभ भजन संध्या के साथ हुआ।

भजन संध्या कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सूचना एवं जनसंपर्क राज्यमंत्री अशोक बैरवा ने कहा कि किसी भी समाज के उत्थान के लिए शिक्षा का अपना महत्व हैं। उन्होंने कि आज का दिन अणसी बाई के समाधि दिवस के साथ साथ डॉ.अम्बेड़कर का निर्वाण दिवस होने से ओर भी महत्वपूर्ण हो गया हैं। इन दोनों महापुरूषों ने समाज के हित के लिए जीवनपर्यंत कार्य किया।

कार्यक्रम में विषिष्ठ अतिथि के रूप में जिला प्रमुख खुशवीरसिंह,सोजत विधायक श्रीमती संजना आगरी,जिला परिषद सदस्य प्रमोदपाल सिंह मेघवाल,अम्बेडकर प्रगतिशील संस्थान के प्रदेशाध्यक्ष हरिनारायण बैरवा,पाली प्रधान श्रीमती शोभा सोलंकी,बाली प्रधान श्रीमती गुलाब राजपुरोहित,कांग्रेस नेता जयसिंह राजपुरोहित,पूर्व विधायक आत्माराम मेघवाल,गोपाराम मेघवाल,उप निदेशक माध्यमिक शिक्षा नरींगराम मेघवाल,जिला शिक्षा अधिकारी पुखराज सोलंकी,समाजसेवी कालूराम सोनल,जोराराम मेहरड़ा,विकास अधिकारी घीसाराम बामनियां,सरपंच मनीषा मेघवाल सहित कई जन प्रतिनिधि एवं समाजसेवी मौजूद थे। जिनका पुजारी हरजीराम एवं आयोजक बाल तपस्विनी श्री अणसीबाई संस्थान के अध्यक्ष रूपाराम धणदै,कार्यक्रम संयोजक कन्हैयालाल परिहार,महासचिव डॉ.पी.सी.दीपन,कोषाध्यक्ष धनाराम परिहार,सचिव बस्तीमल सोनल,सदस्य बुद्धाराम परिहार,कपूराराम बाफना,तुलसीराम घेनड़ी,नारायणलाल हटेला इत्यादि ने माला,साफा एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया।

इधर,भजन संध्या भोर होने तक अविरल चलती रही। गायक प्रेमाराम जाट ने अणसीबाई की कथा एवं भजन से मौजूद दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। भीलवाडा से आए राधेश्याम भाट व साथी कलाकारों ने रात भर एक से बढ़ कर एक मनमोहक प्रस्तुतियां दी।

दूसरे दिन मंगलवार को मंदिर के ध्वजारोहण के साथ मुख्य मेले का शुभारंभ हुआ। मेले में बड़ी संख्या में हाथ ठेले,हाट बाजार व झूले सजे हुए थे। मेलार्थियों की तादाद से सड़क मार्ग पर लगे इस मेले से यातायात भी अवरूद्ध रहा। वाहनों को गुजराने के लिए पुलिस को बार-बार मशक्कत करनी पड़ी। रात्रि व सवेरे शीत लहर से ठिठूरे लोग जगह-जगह अलाव तापते रहे। नाड़ोल कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लोग देर अलसवेरे पहूंचने लगे। लोग आते ही समाधि स्थल पर पहॅूंचते और वहां प्रतिमा के दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर मेले में शामिल हो जाते। समाधि स्थल पर अणसीबाई के पुजारी एवं भतीजे हरजीराम व उनके सहयोगी श्रद्धालुओं का चढ़ावा चढ़ाने में मदद करते रहें। मेले में लोग साल भर बाद मिल कर एकदूसरे के हालचाल जानने में मशगुल देखे गए। मेला सांय तक चलता रहा।

meghwal samaj ka naam roshan karne wali bai h to  vo  bai  अणसीबाई ansi bai  hi hai

कुरीतियां छोड़ो, समाज तरक्की करेगा : मेघवाल

साभार-दैनिक भास्कर
प्रकाशन तिथि-01:29(07/02/11)

झुंझुनूं
मेघवंशीय समाज चेतना संस्थान के संस्थापक स्व. बीएल चिराणियां के 56वें जन्मदिवस पर रविवार को आम्बेडकर भवन में मेघवाल महासम्मेलन का आयोजन किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि शिक्षा मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल थे। उन्होंने कहा कि अगर हम समाज की तरक्की चाहते हैं तो समाज में फैली कुरीतियों को छोडऩा होगा। उन्होंने विश्वास दिलाया कि मेघवाल समाज के हितों को सुरक्षित रखा जाएगा। शिक्षा मंत्री ने समाज के लोगों से एकजुट होकर आगे बढऩे का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त आईपीएस पीआर जेवरिया ने की। डीडी नोपाराम, सीआर प्रेमी, गुरुदयाल, डीईओ दीपचंद पंवार, कानाराम घुघरवाल, सुमन चिराणियां, रामेश्वरलाल कल्याण, प्रांतीय महासचिव मदनलाल दुदवाल बतौर विशिष्ट अतिथि मंचस्थ थे। समारोह में प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम के तहत 57 विद्यार्थियों, रक्तदान के लिए 21 युवकों तथा विभिन्न क्षेत्रों विशिष्ट सेवाओं के लिए कवियों, लेखकों आदि का सम्मान किया गया। रामेश्वरलाल कल्याण, मदनलाल दुदवाल, रामनिवास भूरिया, भागीरथ नेमीवाल, सुरेश चितौसा, जोरावरसिंह, भाताराम, नोरंगलाल, राजेश हरिपुरा, रामेश्वरलाल सेवार्थी, बनेश्वरी आर्य, सहीराम तुंदवाल, प्यारेलाल, दयाराम आदि ने भी विचार व्यक्त किए। मेघवाल समाज के शिक्षकों ने चांदी का मुकुट व तलवार भेंटकर शिक्षामंत्री का स्वागत किया। महासम्मेलन में दूर-दराज से आए समाज के लोगों ने संकल्प लिया कि औरत के पार्थिव शरीर पर केवल एक ही चुनरी ओढ़ाएंगे। मुकाण में जाने वाली औरतें न तो कपड़ा लाएंगी और ना ही देंगी। टीका, समठुणी, छुछक में दी जाने वाली रकम का कोई दिखावा नहीं किया जाएगा और ना ही इसकी कोई घोषणा की जाएगी।

सांसद अर्जुनराम मेघवाल का सम्मान समारोह 12 को

sshree arjun meghwal
बीकानेर & पंचायती स्वामी रांकावतान की ओर से १२ मई को सांसद अर्जुनराम मेघवाल का सम्मान समारोह रांकावत भवन में आयोजित किया जाएगा। अध्यक्ष हनुमानदास स्वामी ने बताया कि सांसद भंडार गृह का उद्घाटन तथा भवन में आर्थिक सहयोगकर्ताओं का अभिनंदन करेंगे। समारोह के अध्यक्ष बजरंग लाल कचुरिया, विशिष्ट अतिथि सुभाष स्वामी होंगे।

बयानों की बाढ़, तारीफों के पुल

 master bhanwar meghwal   surera gram me meghwal samaj ki samuhik bhetak me master bhanwar lal meghwal ban ne ka sanklap liya h  or kha  h  ki  hme  samaj ko aage  bhada  kar  samaj ka  naam  roshan karna  hoga



सीकर. अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहने वाले शिक्षामंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल शनिवार को सीकर के सेंट पॉल्स सीनियर सैकंडरी स्कूल में हुए सम्मान समारोह में ऐसे छाए कि संगठनों से लेकर अफसर तक उनके सुर में सुर मिलाते नजर आए।

उनकी तारीफ के ऐसे कसीदे पढ़े कि बातों-बातों में कई निशाने साध दिए। बतौर वक्ता डीईईओ जगदीश चंद खंडेलवाल ने शुरुआत में ही शेर सुना डाला कि ‘है किसकी जुर्रत जो भंवरलाल की परवाज को रोक सके’। पिपराली के ब्लॉक सीएमओ एम सागर ने कहा कि मुख्यमंत्री शिक्षामंत्री को हटाना चाहते हैं। भंवरलाल जो कर सकते हैं, वह दूसरा कोई मंत्री नहीं कर सकता। मंत्री ने सरकार के आधे कार्यकाल में ही कई बड़े फैसले किए हैं। अखिल राजस्थान अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़ी जाति अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त महासंघ और राजस्थान शिक्षक संघ अंबेडकर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत में ही राज्य मंत्रिमंडल के प्रस्तावित फेरबदल की चर्चा निकल पड़ी।

यहीं से शिक्षा मंत्री की तारीफों के पुल बांधने शुरू हुए। एक के बाद एक शिक्षा महकमे के अधिकारी कहते रहे कि उन्होंने आज तक ऐसा शिक्षा मंत्री नहीं देखा। जयपुर संभाग के शिक्षा उपनिदेशक ज्ञानचंद मौर्य ने उन्हें कर्मशील बताया तो चूरू के उपनिदेशक नोपाराम वर्मा ने कहा कि कोई और शिक्षा मंत्री होता तो माला पहनाने के लिए भी नजदीक नहीं आने देता। कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष रामस्वरूप मीणा बोले, विभाग के लोग मंत्री की तारीफ कम कर दें तो मास्टर मेघवाल जल्द गृह मंत्री नजर आएं। उन्होंने कहा, कांग्रेस सरकार एससी-एसटी के वोटों से बनी है।

मुख्यमंत्री अपने नव रत्नों में से पहले रत्न की जरूर सोचेंगे। उन्होंने शिक्षा मंत्री की ओर इशारा कर कहा कि यदि आपको कल गृह विभाग मिल गया तो पुलिस से भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा, क्योंकि एससी-एसटी के लोग ईमानदार होते हैं। अब बारी शिक्षा मंत्री के बोलने की थी। एक घंटा, 13 मिनट तक दिए भाषण में उन्होंने कहा, मैंने शिक्षामंत्री रहते जो काम किए, उन्हें मुख्यमंत्री भी जानते हैं। इसीलिए उन्होंने अजमेर में मुझे जांबाज शिक्षा मंत्री कहा था। मंने ढाई साल में शिक्षा विभाग में कई सुधारात्मक कार्य किए हैं। फिर बोले, शिक्षा मंत्री रहूं न रहूं महकमे में ऐसी लकीर बनाकर जाऊंगा कि कोई मिटा ही नहीं सकेगा।

भाजपा के पूर्व विधायक ने भी की तारीफ: लक्ष्मणगढ़ से भाजपा के विधायक रहे केडी बाबर ने भी भाषण में शिक्षामंत्री मेघवाल के कार्यो की तारीफ की। शिक्षामंत्री ने अपने भाषण में कहा कि बीजेपी-कांग्रेस क्या होती है, मैंने अच्छा काम किया है, बड़ाई होनी चाहिए।

शनिवार, 11 जून 2011

मेघवाल समाज का युवक-युवती परिचय सम्मेलन 26 जून 2011 को

भास्कर न्यूज & बिलाड़ा
राजस्थान मेघवाल समाज जिला शाखा की बैठक जोधपुर के नेहरू पार्क में पूर्व विधायक पोकरलाल परिहार की अध्यक्षता मे हुई। इसमें समाज का विवाह योग्य युवक-युवति परिचय सम्मेलन 26 जून को आयोजित करने का निर्णय हुआ। इसमेें किसी भी गांव, शहर, राज्य से मेघवाल समाज के युवक-युवतियों को शामिल किया जाएगा। जिलाध्यक्ष नथमल खींची ने बताया कि 19 जून को मेघसेना की ओर रैली जालौरी गेट चौराहे से रवाना होकर सोजती गेट, पावटा ज्योति बा फूले पार्क होते हुए अंबेडकर सर्किल नागौरी गेट पर बाबा साहब को माल्यार्पण कर समाप्त की जायेगी। जिसमें मेघवाल समाज के सांसद विधायक, अधिकारी, कर्मचारी, समाजसेवी सभी भाग लेंगे।
bhaskar News & Bilada
Meghwal Rajasthan Society, Jodhpur district branch meeting chaired by Nehru Park in the former legislator was Pokaralal avoidance. The society marriageable young man - introduce Yuvti was decided to hold conference on June 26. Ismeean any village, city, state Meghwal community youth - young women will be involved. Jiladhyksha Nethamal drawn Mehssena said on June 19 rally to proceeded to cross through the gate Jalurie Sojti Gate, Jyoti Ba Phule Park Peaota being Babasaheb Ambedkar Circle Nagori a wreath at the gate will be finished. Meghwal society in which the MP MLA, officer, employee, social worker all will participate.


नवरत्न मन्डुसिया

शादियों में फिजूलखर्ची रोककर शिक्षा पर धन खर्च करने का आह्वान, विवाह के नियम हुये आसान, सामूहिक विवाह के लिए उमड़े सैकड़ों लोग

 मेघवाल समाज का ऐतिहासिक फैसला, नानी का गोत्र छोड़ने की कुप्रथा बंद, अब शादियों के लिए मिलेंगे ज्यादा विकल्प कस्बे के टापरी रोड़ स्थित मेघवाल ...