मंगलवार, 9 मई 2017

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना और आमजन को फायदा

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना (Mukhyamantri Kanya Vivah Yojana) एक सामाजिक कल्याण कार्यक्रम है जिसे मध्य प्रदेश राज्य सरकार द्वारा लागू किया गया है | इसके अंतर्गत निराश्रित, निर्धन कन्या/विधवा/परित्यक्ता के सामूहिक विवाह हेतु परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है | मुखयमंत्री कन्‍या विवाह योजना को वर्ष 2006 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रारम्भ किया गया था  | इस योजना को सामाजिक न्याय विभाग (Social Justice Department) द्वारा सारे राज्य में संचालित किया जाता है |

पात्र महिला आवेदक जिनकी उम्र शादी के लिए तय उम्र से ऊपर या उतनी ही है और आर्थिक रूप से गरीब हैं इस योजना के द्वारा लाभान्वित होंगी | लाभार्थियों को वित्तीय सहायता (financial assistance) नकदी (cash) के रूप में प्रदान नहीं की जायेगी | इस योजना के तहत नव विवाहित जोड़ों (newly-wedded couples) को वित्तीय सहायता (financial assistance) उपयोगिता उपहार आइटम () के रूप में प्रदान की जाती हैं |

इस योजना का उद्देश्य गरीब, जरूरतमंद, बेसहारा परिवारों को अपनी बेटियों / विधवाओं / तलाकशुदाओं को  शादी करने के लिए वित्तीय सहायता (financial assistance) प्रदान करना है | यह सहायता सामूहिक विवाह में दी जाती है और इसके लिए एकमात्र शर्त यह है कि लड़की की उम्र शादी के लिए तय उम्र के बराबर या उससे ज्यादा होनी चाहिए |

एक गरीब परिवार जिनके पास अपने दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है उनके लिए लड़की की शादी एक बड़ी चिंता का विषय है | गरीब परिवार के लिए बेटी की शादी का खर्च अकेले उठाना बहुत कठिन है | वे आम तौर पर शादी के खर्च को पूरा करने के लिए एकमुश्त धन जुटाने के लिए साहूकारों से ऋण लेते है और उनके शिकार बन जाते हैं | साहूकार उनकी इस स्थिति का फायदा उठा कर उन्हें ज्यादा ब्याज दर पर ऋण देते हैं | यह योजना गरीब परिवारों की मदद के लिए इस चिंता से छुटकारा दिलाने के लिए मुख्यमंत्री की विशेष पहल पर शुरू की गई है |

इस योजना के तहत सामूहिक विवाह कराये जाते हैं जिससे न केवल सामाजिक सद्भाव में बृद्धि हुई है बल्कि शादियों पर होने वाले अनावश्यक व्यय पर भी अंकुश लगा है | इस योजना की एक और खास विशेषता यह है कि समाज के सभी वर्ग इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं |  इस योजना से न ही सिर्फ हिंदू जोड़ों का बल्कि इस योजना के द्वारा और मुस्लिम जोड़ों के भी विवाह सम्पन्न किया जा रहे हैं |

Mukhyamantri Kanya Vivah Yojana के लिए पात्रता :-
लाभार्थी के पास मध्य प्रदेश का अधिवास (domicile) होना चाहिए |
कन्या के अभिभावक मध्यप्रदेश के मूल निवासी होने चाहिए |
लड़की की उम्र 18 वर्ष से अधिक और लड़के की उम्र  21 वर्ष से होनी चाहिए |
लड़कियों / विधवा / तलाकशुदा महिलाओं को गरीब, जरूरतमंद, श्रम वर्ग के परिवारों से होना चाहिए |
लाभार्थी को SSSM पोर्टल (समग्र पोर्टल) पर पंजीकृत होना चाहिए |
कन्या के अभिभावक गरीबी रेखा के नीचे जीवन निर्वाह करते हों/या जरुरतमंद हों |
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के लाभ :-
इस योजना के तहत कन्याओं को उनकी गृहस्थी की स्थापना हेतु 16,000/-रूपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है ताकि दाम्पत्य जीवन शुरू कर सके |  नव विवाहित जोड़ों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए सरकार द्वारा 5 वर्ष के लिये 6,000/- रूपये की सावधी जमा कराई जाती है | इसके साथ ही सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित करने वाले निकाय यथा नगरीय निकाय,ग्रामीण निकाय को विवाह आयोजन की प्रतिपूर्ति के लिये कुल 3,000/- रूपये दिए जाते हैं | इस तरह इस योजना के तहत कन्या के परिवार को 25,000/- रूपये दिये जाने का प्रावधान किया गया है |

राज्य सरकार ने 1 नवंबर 2016 से इस योजना में कुछ परिवर्तन किये हैं | नए परिवर्तन के अनुसार, लड़कियों को जिनकी शादी मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना (Mukhyamantri Kanya Vivah Yojana) के तहत होगी उन्हें अब 1 नवंबर, 2016 से 17000/- रुपये मिलेंगे | इस योजना के तहत सामूहिक विवाह कार्यक्रम में महिला को 10000 /- रुपए का एक account payee cheque प्रदान किया जाएगा | आवश्यक घरेलू वस्तुओं की खरीद करने के लिए 7000 /- रुपए शादी के दूसरे दिन लड़की के बचत बैंक खाते में स्थानांतरित किये जाएंगे |

इसके अलावा, 5000/- रुपये विवाह अनुष्ठान के लिए आवश्यक वस्तुओं के लिए दिया जाएगा | और 3,000/- रूपये सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित करने वाले निकाय यथा नगरीय निकाय,ग्रामीण निकाय को विवाह आयोजन की प्रतिपूर्ति के लिये दिए जाएंगे |

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की प्रक्रिया :-

आवेदक सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन फार्म निम्नलिखित कार्यालय में जमा कराए :-

ग्रामीण क्षेत्र के लिए ग्राम पंचायत / जनपद पंचायत में
शहरी क्षेत्र के लिए नगर निगम / नगर पंचायत / नगर परिषद  में
दस्तावेजों की स्वीकृति हेतु अधिकारी :-

ग्रामीण क्षेत्र के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत
शहरी क्षेत्र के लिए आयुक्त, नगर निगम मुख्य नगर पालिका अधिकारी

सामूहिक विवाह और गरीब

सामूहिक  विवाह  :- गरीबों की शादी कराना महान कार्य है। समाज में अपनी बहन बेटियों की शादी करना तो हम सबका पारिवारिक दायित्व है परंतु किसी और की बेटी और खासकर गरीब की बेटी के हाथ पीले कर एक साथ ज्यादा से ज्यादा घरों को बसाना एक महान यज्ञ के समान है । इस प्रकार के सामाजिक कार्यों के लिए हम सबको खुले हृदय से आगे आना चाहिये ।
सामूहिक विवाह सम्मेलन वर्तमान की आवश्यकता -- क्या समाज के संरक्षक स्वयं आगे आएंगे।
सम्मेलन की ही तरह सामूहिक विवाहों के आयोजन किए जाना समाज के लिए अच्छा कदम हें। इस कार्यक्रम के माध्यम से जो धन, झूठे सामर्थ्य प्रदर्शन व्यय होता हे वह, नई दम्पत्ति के लिए उन्नति का सहारा हो सकता हे। कुछ लोग कह सकते हें की हम इस विवाह व्यय का बोझ उठाने में समर्थ हें। वे यह क्या यह भूल जाते हें की इससे असमर्थ व्यक्तियों पर मानसिक दवाव बनता हे। वे भी अपनी पुत्र या पुत्री के लिए सक्षम परिवार में रिश्ता करना चाहते हें, इस लिए सामुहिक विवाह को नहीं अपना कर, अन्य पक्ष की इच्छा या मानसिकता के आधार पर सामर्थ्य से अधिक व्यय कर आर्थिक बोझ के नीचे दव जाते हें। ओर यह भी हे की कोई भी स्वयं को असमर्थ या कमजोर ,गरीब साबित नहीं होने देना चाहता, चाहे इसके लिए कुछ भी क्यों न करना पड़े, कितना भी कर्ज क्यों न लेना पड़े।
नव जवान युवक ओर युवतियों से आज यह आशा की जा सकती हे, की इन बातों को वे समझ कर अपने परिवार को सामूहिक विवाह के लिए तेयार कर सकते हें, ओर अपने पालको को इस धन की बरबादी से बचा कर कर्ज के खड्डे में, गिरने से बचा सकते हें। यही बात दूसरी ओर भी लागू होती हे की क्या कोई जमाई यह चाहेगा की उसके ससुराल पक्ष को एसी कठिन परिस्थिति का सामना करना पड़े। यदि कोई जमाई एसा चाहे तो वह जमाई बनाने लायक हो ही नहीं सकता, लालची जमाई ओर परिवार में कोई बेटी सुखी हो ही नहीं सकती।
सामूहिक विवाह जेसी सामाजिक गतिविधि को आगे बड़ाने, ओर उसके लिए किसी को भी तैयार करने की कोशिश करने वाले महानुभवों को अक्सर यह ताना मिलता हे की स्वयं ने तो सामूहिक विवाह नहीं अपनाया पर हमको शिक्षा दे रहें हें। पर भाई यदि उनसे भूल हो गई हे, ओर वे इसी बात को समझ कर आपसे अनुरोध कर रहे हें, तो क्या आप बात को समझ कर भी सबक नहीं लेंगे? क्या जब तक आप स्वयं की हानी न हो जाए अनुभव से सबक नहीं लेंगे ?
अनुभव में आया हे, की सामर्थवानों के द्वारा अपनाए किसी भी कार्यक्रम को अन्य सभी शीघ्र स्वीकार कर लेते हें, क्या अब वक्त नहीं हे की सभी सक्षम भी अपने पुत्र- पुत्रियों के सामूहिक विवाह में उनका विवाह कर समाज का नेत्रत्व करें। वे सम्पन्न होने के साथ साथ हर तरह से सक्षम भी हें। "महाजनौ येन गता सुपन्था" अर्थात बड़े व्यक्ति जिस राह पर चलते हें वही सच्चा मार्ग हे, के इस शास्त्र वचन को सार्थक कर हम ब्राह्मण अर्थात सर्व श्रेष्ठ होने की बात सार्थक करें।
सामूहिक विवाह के आयोजन से केवल स्वयं का धन ही नहीं बचता, देश की संपदा, के साथ व्यर्थ श्रम ओर बहुत सारी परेशानियों से भी छुटकारा मिल जाता हे। यह सब श्रम पूरा समाज मिलकर कर लेता हे।
कुछ विशेषकर नवजवानों का यह सोच होता हे की हम परिवार सहित विवाह में बहुत मजा [सेलिब्रेट] करेंगे, पर मित्रो क्या एसा हो पाता हे, परिवार के सारे सदस्य तो व्यवस्था स्वागत सत्कार में जुटें होते हें, ओर थक कर चूर हो जाते हें, आने वाले अपना स्वागत करवाने/ ओपचारिक उपस्थिती/आशीर्वाद दे कर ओर अच्छा केवल भोजन कर जाने की इच्छा रखते हें। इनमें से किसी भी प्रकार की कमी उनकी असंतुष्टि बनकर "कटाक्ष" जो सबको कष्टकारी होती हे का कारण बन वैमनस्य का बीजारोपण भी करती हें।
हमारे प्राचीन शास्त्रो में भी सोलह संस्कारों में से कुछ संस्कार जिनमें यज्ञोपवीत जो शिक्षा का प्रारम्भ, विवाह जो ग्रहस्थ जीवन का प्रारम्भ, से लेकर अंतिम संस्कार तक के सभी संस्कारों को पूरे समाज के कार्यों से जोड़ा गया हे। इन्हे सारे समाज को मिलकर करना होता हे। विवाह के अवसर पर सारे समाज द्वारा दी जाने वाली भेंट का मूल उद्देश्य भी यही हे। ओर सामर्थ्य अनुसार पित्र संपत्ति से पुत्री को मिलने वाला स्त्रीधन जिसे कालांतर में विक़ृत 'दहेज' के नाम से जाना जाने लगा, इसी व्यर्थ प्रदर्शन ओर अमर्यादित अहम के झूठे प्रदर्शन से उत्पन्न हुआ हे, ने ही विवाह रूपी पुनीत कार्य जिस पर संतानों का भविष्य टिका होता हे को दूषित कर दिया हे। क्या यह समाज के सभी सक्षम जिम्मेदार बड़े कहाने वाले अग्रणी महानुभवों का कर्तव्य नहीं की वे समाज का सच्चा नेत्रत्व करें, ओर नई चेतना उत्पन्न करें। उन्हे आगे आकर आज अपने पुत्र ओर पुत्रियों का विवाह सामूहिक विवाह सम्मेलन में करना ही होगा, अन्यथा करनी कथनी का फर्क समाज को नष्ट कर देगा

राजस्थान सरकार द्वारा सामूहिक विवाहों हेतु अनुदान

नवरत्न मन्डुसिया :- समाज में विवाहों पर अनावश्यकक व्येय की प्रवृति बढती जा रही है। सामूहिक विवाहों के आयोजन से इस पर नियंत्रण प्राप्ता करने का प्रयास किया जा रहा है। राज्यह सरकार द्वारा इनका महत्वय स्वीसकार करते हुए ऐसे कार्यक्रमों के प्रोत्सािहन हेतु वर्ष 1996 में सामूहिक विवाह अनुदान नियम बनाये गये। इन नियमों को और प्रभावी बनाये जाने हेतु राजस्थाजन सामूहिक विवाह नियमन एवं अनुदान नियम, 2009 दिनांक 20.01.10 से लागू किये गये है। इन नवीन नियम के मुख्यव बिन्दुम निम्ना नुसार है –
इन नियमों के अन्त0र्गत संस्थाे को सामूहिक विवाह आयोजन के लिए जिला कलेक्टमर/सक्षम अधिकारी की अनुमति प्राप्त0 करनी आवश्येक होगी।
इन नियमों के अन्त0र्गत राशि रूपये 6000/- प्रति जोडा अनुदान देय है जिसकी अधिकतम सीमा 10 लाख रूपये रखी गई है।
अनुदान प्राप्ति के लिए सामूहिक विवाह आयोजन में जोडों की न्यू/नतम संख्याड 10 होनी अपेक्षित है और इस तरह एक सामूहिक विवाह में अधिकतम 166 जोडों को अनुदान दिया जा सकता है।
प्रति जोडा अनुदानित राशि में से 25 प्रतिशत राशि (वर्तमान में रूपये 1500/- संस्था को विवाह के आयोजन के रूप में देय होगी जबकि 78 प्रतिशत राशि (वर्तमान आधार पर रूपये 4500/-) नवविवाहित (वधु) के नाम से डाकघर या अधिसूचित राष्ट्री यकृत बैंक में न्यूहनतम तीन वर्ष की अवधि के लिए सावधि, जमा कराई जावेंगी।
इन नियमों में आयोजित किये जाने वाले सामूहिक विवाहों का पंजीकरण राजस्थागन विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्री करण अधिनियम, 2009 (2009 का राजस्थावन अधिनियम 16) के अन्तनर्गत अनिवार्य किया गया है
उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य दहेज प्रथा एवं बाल विवाह को रोकना है। समूहिक विवाह आयोजनों को प्रोत्साहित करने तथा विवाहो पर होने वाले अनावश्यक व्यय को कम करने के उद्देश्य से सामूहिक विवाह अनुदान नियम, 1996 बनाये गये है। बाल विवाह रोकना तथा कमजोर आय वर्ग के दम्पिायो को आर्थिक मदद/सम्बल प्रदान करने की दृष्टि से समय–समय पर नियमों में संशोधन किया गया है जिससे कि अधिक से अधिक संस्थायें तथा युवक/युवतियां प्रोत्साहित हों।
पात्रता–
यह अनुदान सामूहिक विवाह आयोजित करने वाले ऐसे संगठन, संस्थाओ को उपलब्ध है जो एक बार में एक साथ कम से कम 10 जोड़ो का सामूहिक विवाह आयोजित करते है। यह अनुदान केवल राजस्थान में आयोजित आयोजनों हेतु ही उपलब्ध है। विवाहित जोड़ो में लडकी की उम्र कम से कम 18 वर्ष एवं लडके की उम्र कम से कम 21 वर्ष होनी अनिवार्य है।
योजना की कार्य प्रणाली एवं देय अनुदान –
1. सामूहिक विवाह कराने वाली संस्था राजस्थान संस्था रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1998 (राजस्थान अधिनियम संख्या 28, 1958) के अन्तर्गत पंजीकृत होनी चाहिए।
2. सामूहिक विवाह में कम से कम 10 जोडे होने चाहिए।
3. सामूहिक विवाह आयोजन में सम्मिलित जोडो की संख्या के अनुसार प्रति जोड़ा 6000/– रूपये धनराशि देय है। प्रति जोड़ा अनुदान राशि में से 75 प्रतिशत राशि अर्थात रूपये 4500/– की राशि दुल्हन के नाम से पोस्ट आॅफिस या राष्ट्रीयकृत बैंक में 3 वर्ष के लिए सावधि जमा करायी जावेगी। शेष 25 प्रतिशत राशि अर्थात रूपये 1500/– आयोजनकर्ता संस्था को विवाह आयोजन अनुदान के रूप में देय हाेंगे।
4. इन नियमों के अन्तर्गत किसी संस्था को अनुदान की सीमा दस लाख रूपये है जिसमें अधिकतम 166 जोड़ें सम्मिलित किये जा सकते है।
5. अनुदान राशि की स्वीकृति जिला कलेक्टर द्वारा दी जाती है।
6. राशि का चैक जिला महिला विकास अभिकरण के माध्यम से देय है।
7. यह अनुदान राशि ड्राफट/चैक के माध्यम से आयेाजनकर्ता को आयोजन के उपरान्त देय होगी।
आवेदन –
1. पात्र संस्था सामूहिक विवाह नियम के प्रपत्र–‘अ’ में आवेदन तीन प्रतियों में जिला कलेक्टर को देगी। अनुदान चाहने वाली संस्था को आयोजन से कम से कम 15 दिवस पूर्व जिला कलेक्टर को आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ निम्न प्रपत्र/दस्तावेज संलग्न होना आवश्यक है।
2. प्रस्तावित जोड़ो की सूची सहित प्रस्ताव प्रस्तुत करना आवश्यक होता है।
3. संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव उपनिदेशक, महिला एवं बाल विकास को सत्यापन एवं अनुशंषा हेतु प्रेषित किये जाते है।
4. विवाह आयोजन के पश्चात् उपनिदेशक के द्वारा प्रस्तावों को सत्यापित कर अनुशंषा सहित जिला कलेक्टर को प्रस्तुत करना होगा।
5. विवाह हेतु प्रस्तावित जोड़ों में सम्मिलित लड़के/लड़की की उम्र की पुष्टि हेतु उनके जन्म प्रमाण पत्र के रूप में शैक्षणिक प्रमाण पत्र यथा बोर्ड प्रमाण पत्र/टी.सी. आदि जिसमे जन्म की तिथि का उल्लेख होना अपेक्षित है।

6. जिन लड़के/लड़कियों ने औपचारिक शिक्षा प्राप्त नही की हो तो उनके संबंध में रजिस्ट्रार, जन्म मृत्यु रजिस्ट्रीकरण से प्राप्त जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया जा सकता है।
7. उक्त कोई दस्तावेज उपलब्ध नही हो तो फोटो पहचान पत्र/राशन कार्ड उम्र के साक्ष्य के रूप में आवेदन पत्र के साथ संलग्न किये जा सकते है।
               नवरत्न मन्डुसिया
               सामाजिक जनसेवक
                सुरेरा सीकर
                 9929394143

गुरुवार, 4 मई 2017

सामाजिक जीवन मे रिश्ते के महत्व के दो पहलू :- नवरत्न मन्डुसिया

सामाजिक जीवन में सामान्यतः रिश्तों को दो भागों में विभाजित किया जाता है। एक रिश्ता वह जो खून से बंधा होता है, दूसरा रिश्ता जो हम स्वयं गढ़ते हैं। भारतीय परिवेश में खून के रिश्तों को सबसे ज्यादा अहमियत दी जाती है और माना जाता है कि खून का रिश्ता ही सही मायने में जीवन का जुड़ाव होता है, और इससे बढ़कर रिश्ता होता है वैवाहिक संबंधों का।
इससे इतर जो रिश्ते होते हैं वे न तो खून से बंधे होते हैं और न उनमें सामाजिक दायित्वों का ही कोई बंधन होता है। दरअसल सही रिश्ते वे ही होते हैं, जो सारे बंधनों से मुक्त होकर सिर्फ दिल से बंधे होते हैं। इस बात से कई लोगों को एतराज भी हो सकता है, पर सच यही है कि खून के रिश्ते तो इत्तफाक से बनते हैं।
एक परिवार के सदस्यों का आपस में रिश्ता सिर्फ इसलिए होता है कि उन्हें इत्तफाक ने मिलाया होता है। कुछ हद तक यही बात सामाजिक परिवेश में तय होने वाले वैवाहिक संबंधों पर भी लागू होती है। सिर्फ एक नजर में एक-दूसरे को देखकर वैवाहिक संबंधों की स्वीकृति दे देना और फिर जीवनभर उस रिश्ते को निभाना वास्तव में रिश्तों में बंधना नहीं बल्कि समझौता है।
असल रिश्ता तो वह है, जो हम अपनी पूरी समझ-बूझ और परख के साथ तथा अपनी पसंद से बनाते हैं। फिर चाहे वह रिश्ता दो दोस्तों के बीच का हो या फिर प्रेमियों का या फिर पड़ोसियों के बीच का पारिवारिक-सा रिश्ता ही क्यों न हो। सभी में यह बात 'कॉमन' है। कोई भी रिश्ता इत्तफाक या सामाजिक दबाव में नहीं बना।
अपने पूरे जीवन में हम कई लोगों से मिलते हैं। कुछ हमें अच्छे लगते हैं तो कुछ को हम पहली नजर में खारिज कर देते हैं। संपर्क में आने वाले कुछ लोगों से बार-बार मिलने और बात करने की इच्छा होती है और यही आकर्षण दोस्ती या प्रेम की मजबूत गाँठ बन जाता है। ठीक यही बात समीप रहने वाले दो परिवारों के बीच भी होती है। बहुत सारे लोगों के बीच रहकर भी ऐसे लोग उंगलियों पर गिनने लायक ही होते हैं, जिन्हें हम अपने बहुत नजदीक मानते हैं।
उन्हें अपने दिल की बात बताने का भी मन करता है और उनके दिल की बात सुनने की भी इच्छा होती है। अक्सर देखा जाता है कि स्कूल, कॉलेज या दफ्तरों में कई जोड़ी दोस्त होते हैं। सभी एक साथ रोज मिलते तो जरूर हैं पर सभी को जब भी बातचीत का अवसर मिलता है, वे गुटों में बंट जाते हैं। इसका सीधा-सा अर्थ यही है कि जो जिसके साथ निकटता महसूस करता है, वह उसी के साथ समय भी गुजारना चाहता है।
रिश्तों को जीवन की सफलता और असफलता के मामले में भी एक बड़ा मानक माना गया है। कब, कौन-सा रिश्ता या कौन-सी दोस्ती व्यक्ति को सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचा दे, कहा नहीं जा सकता लेकिन यदि परिस्थितियां अनुकूल न हों तो इसका उलट भी हो सकता है। ऐसे उदाहरणों की कमी नहीं है, जब किसी साथी की मदद से व्यक्ति शिखर पर पहुंच गया, पर सारा दारोमदार इस बात पर निर्भर है कि आप अपने रिश्ते के प्रति कितने गंभीर हैं।
नवरत्न मन्डुसिया की कलम से

शनिवार, 29 अप्रैल 2017

मेघवाल समाज की बेटी अनु मेघवाल समाज का एक युवा चेहरा

दोस्तो आप सब जानते है की एक तरफ़ भूर्ण हत्यायें हो रही है लोग बेटियाँ को कलंक मानते है और जन्म से पहले ही बेटियों  मौत के घाट उतार दिये जाते है और दूसरी तरफ़ जयपुर की सवाई मान सिंह मेडिकल कॉलेज की छात्रा अनु मेघवाल इस समय बहूत जोर शोर से समाज.सेवा के साथ साथ  राजनीति मे अपना अच्छा योगदान दे रही है अनु मेघवाल का कहना है की बेटी एक देवी का रुप होती है हमे बेटियों की पूजा करनी चाहिये और मुख्य रुप से यह भी इनका कहना है की.यदि समाज मे नारियों की इज्जत होगी तो समाज का उथ्थान होगा और समाज मे नारियों का मनोबल बढेगा क्यों आजाद हिंदुस्तान मे समानता का अधिकार है इस कारण हम बेटियों को डरना नही चाहिये बल्कि विपरीत परिस्मेथियों का सामना होगा ये सौच है एक दलित बेटी अनु मेघवाल की मे  नवरत्न मन्डुसिया बहिन अनु जी मेघवाल को तहदील से आभार प्रकट करता हूँ धन्यवाद देता हूँ की आप मेघवाल समाज मे जन्म लेकर यह साबित कर दिया है की समाज मे बेटी भी किसी से कम नही है और सबको यह बता दिया है की कोई भी दलित बेटी किसी से कम नही है यदि वह कूछ ठान ले तो वह बेटी अपनी मंजिल तक आसानी से पहुंच सकती है अनु मेघवाल वर्तमान मे जयपुर के सबसे बड़े महाविद्यालय सवाई मान सिंह मेडिकल कॉलेज की अध्यक्ष पद पर आसीन है और अभी नयी दिल्ली मे सरकारी चिकित्सक पद पर चयन हुवा है और यह भी सबसे बड़ी बात है की दिल्ली जेसे प्रदेश मे एक मेघवाल समाज की बेटी सेवायें देगी अनु मेघवाल अपने परिवार और मित्रों को आदर्श मानती है तथा राजनीति मे जाने के लिये तथा शिक्षा के बहूत प्रेरित करती है और गरीबो की सेवा करना मुख्य आधार मानती है अनु मेघवाल बीस साल की मेघवाल समाज की युवा चेहरा है और इन्होने सरकारी कॉलेज से एम.बी.बी.एस किया है अनु मेघवाल अपने टिव्टर फेसबुक इन्स्टोग्राम यू ट्य्युब आदि सोशियल अकाउंट पर सक्रिय रहती है
नवरत्न मन्डुसिया की कलम से
सामाजिक जनसेवक
अनु मेघवाल और साथ मे मानवीय भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र जी मोदी और अमित शाह जी 

शुक्रवार, 28 अप्रैल 2017

भीम प्रवाह' समाचार-पत्र का उद्देश्य बहुजन मीडिया को मजबूती प्रदान करना हैं - बरवड़

आज मीडिया की ताकत को हर व्यक्ति जानता है। जिसने मीडिया की ताकत को पहचान लिया और उपयोग कर लिया तो समझो उसने अपना मिशन जीत लिया। हमारे लोग मनुवादी मीडिया, मनुवादी मीडिया चिल्लाते रहते हैं। लेकिन ये तो सोचिए आप अपने मीडिया ( बहुजन सामाजिक मीडिया) के लिए कुछ कर रहे हैं या बस मनुवादी मीडिया पर ही अपनी भड़ास निकाल रहे हैं। मनुवादी मीडिया अपना काम कर रहा है और बहुजन समाज का तबीयत से बैंड बजा रहा है।
समझ में यह नहीं आ रहा है कि हम हमारे अपने बहुजन सामाजिक मीडिया ( प्रिंट,  इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) को सपोर्ट क्यों नहीं कर रहे हैं ? क्या कारण है कि हम अपना मीडिया तंत्र विकसित करने में आपना योगदान नहीं दे रहे हैं ? मनुवादी मीडिया को गाली देने से कुछ नहीं होगा। आप अपना मीडिया विकसित करें। कौन रोकता है ?
हमारे इतने झुझारू समाज बंधु सामाजिक समाचार पत्रों, पत्रिकाओं,चैनलों का प्रकाशन, प्रसारण कर रहे हैं लेकिन हम उन्हें अपना सपोर्ट नहीं दे रहे हैं। हम केवल हमारे अपने संपादक, प्रेस रिपोर्टर की बुराई करने में आगे रहते हैं लेकिन मनुवादी मीडिया के सामने हमारी घिग्घी बंध जाती है।
बहुजन मीडिया की कड़ी के रूप में राजस्थान के सीकर जिला मुख्यालय से प्रकाशित सामाजिक न्याय को समर्पित
 'भीम प्रवाह' पाक्षिक समाचार - पत्र शोषण अन्याय व अत्याचार के विरूध्द गरीब कमजोर वर्ग की आवाज बुलंद करने का मुख्य वाहक माना जाता है। भीम प्रवाह पाक्षिक समाचार-पत्र की स्थापना 1 सितंबर 2015 को हुई। समाचार- पत्र आर्थिक,सामाजिक व राजनैतिक सहित विभिन्न झंझावतों को झेलते हुए वर्ष 2017 सितंबर माह में अपने सफलतम तीन वर्ष का मुकाम तय करेगा।
इसके सम्पादक मेघवाल समाज में जन्मे बीरबल सिंह बरवड़ जो कि राजस्थान प्रांत के सीकर जिले की श्रीमाधोपुर तहसील के ग्राम लापुवां के निवासी है। आपकी किसी से कोई व्यक्तिगत लड़ाई नही है, लड़ाई है तो अत्याचार व जुल्म से है क्यों की यह गरीबो पर जुल्म अत्याचार होते हुए नही देख सकते। पीड़ित को न्याय दिलाने में मीडिया की मुख्य भूमिका रहती है। अत: इस सोच को मूर्तरूप देने के लिए उन्होंने एक समाचार - पत्र के प्रकाशन का मानस बनाया। जो कि आज हम भीम प्रवाह के रूप में देख रहे हैं। लेखन के क्षैत्र में सदा से ही आपकी रूचि रही है। विभिन्न सामाजिक पत्र - पत्रिकाओ के आपकी रचनाएं पिछले 15 वर्षों से लगातार प्रकाशित होती रहती हैं।
संपादक बरवड़ बताते है कि 'भीम प्रवाह' समाचार-पत्र का मुख्य उध्देश्य गरीबो को न्याय दिलाना कमजोर वर्गों को साथ देना और संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ.भीमराव अम्बेडकर के आदर्शों व उनकी विचारधारा को आमजन तक पहुंचाना और लागू करवाने में अपनी भूमिका अदा करना है ।

'भीम प्रवाह' समाचार-पत्र का माध्यम

समाचार-पत्र सूचनाओं व मानवीय संवेदनाओं के आदान-प्रदान का प्रमुख स्तंभ है । इसका इतिहास अपेक्षाकृत प्राचीन है । प्राचीन काल में यह क्षेत्र विशेष तक ही सीमित था परंतु छपाई की कला में नित नए अन्वेषणों व इसकी उपयोगिता को देखते हुए समाचार-पत्रों में समय के साथ व्यापकता आई हैं। आज के जमाने मे समाचार-पत्रों की व्यापकता इतनी अधिक हो गई है कि ये जन-मानस का प्रमुख अंग बन चुके हैं । तथा दिन-प्रतिदिन इनसे जुड़ाव बढ़ता ही जा रहा है । विश्वभर में अनेकों भाषाओं में समाचार-पत्र प्रकाशित होते हैं । हमारे देश में भी अधिकांश पत्र हिंदी भाषा में प्रकाशित होते हैं। आगे हमे अंग्रेजी भाषा में राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक समाचार-पत्रों के प्रकाशन की आवश्यकता हैं । इसके अतिरिक्त देश के विभिन्न भागों में क्षेत्रीय भाषाओं में भी समाचार-पत्र प्रकाशित करने की जरूरत है। इस क्षैत्र में 'भीम प्रवाह' का प्रयास सराहनीय हैं। आज हमारी भी जिम्मेदारी बनती है कि गाँव गाँव, ढाणी - ढाणी मे 'भीम प्रवाह' को पहुंचाने हेतु सफल और सकारात्मक पहल कर  बाबा साहब अंबेडकर व बहुजन महापुरूषों की विचारधारा को घर घर पहुंचाने में अपना अपेक्षित सहयोग प्रदान करें।
'भीम प्रवाह' समाचार-पत्र प्रजातांत्रिक शासन प्रणाली के प्रमुख स्तंभों में से एक हैं । इसके माध्यम से व्यक्ति अपने भावों,अनुभवों व संवेदनाओं को समाज व राष्ट्र के सम्मुख निष्पक्ष और निर्भय होकर व्यक्त कर सकता है। समाचार-पत्र के माध्यम से किसी विशेष विषय से संबंधित लोगों का मत या उनकी राय भी जानी जा सकती है। इस पत्र के माध्यम से देश-विदेश की राजनीतिक उथल-पुथल व नेताओं के वक्तव्य आदि की जानकारी हम घर बैठे ही प्राप्त कर लेते हैं । इसके अतिरिक्त किसी राजनीतिक पहलू पर लिए गए किसी विशेष निर्णय के संदर्भ में प्रबुध्दजनो व राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा प्रस्तुत समीक्षा का भी हम अवलोकन कर सकते हैं । साथ ही साथ उस विशेष निर्णय अथवा घटना के संदर्भ में वांछित अपनी राय व अपना मत हम देश के सम्मुख रख सकते हैं ।
'भीम प्रवाह' ने कम समय में ही पाठकों के दिलों में सम्मानजनक जगह बनाई हैं। समाचार पत्र डाक सेवा से राजस्थान के हर जिले में 15 दिन से दस्तक देता है। इसके साथ ही यूपी. ,हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब , हरियाणा आदि प्रदेशों में भी समाचार पत्र के बहुतायत रूप में पाठक हैं। भीम प्रवाह सोसल मीडिया में  बहुजन समाज के समाचार पत्रों में सर्वाधिक प्रचारित अखबार हैं।



विशेष आग्रह :-
मेरा आग्रह है अपना मीडिया तैयार करें। हमारे समाज बंधु जो सामाजिक समाचारों का प्रकाशन कर रहे हैं उनका तन मन धन से सपोर्ट करें। यह कार्य जरूर करें -
1 प्रत्येक परिवार में एक ना एक सामाजिक समाचार पत्र अवश्य आये।
2. फ्री में सामाजिक समाचार पत्र मंगाने, पढने की गंदी आदत छोड़ दें। जो व्यक्ति सामाजिक समाचार पत्रों को मंगाते हैं लेकिन मासिक/वार्षिक शुल्क नहीं देते हैं ऐसे लोगों के लिए कौनसा शब्द काम में लिया जाये यह मैं शब्दकोश में ढूंढ रहा हूँ।
3. सामाजिक समाचार पत्रों/पत्रिकाओं को प्रकाशित करने वाले हमारे संपादक बहुत मेहनत से काम करते हैं। इनका उत्साहवर्धन करें। समाचार पत्र प्रकाशित करना बहुत ही मेहनत का काम है।
4. हमें इनका तन मन धन से सहयोग करना चाहिए। यदि नहीं कर सकते तो मनुवादी मीडिया से अपनी बेइज्जती कराते रहें।
5. मैं बहुजन समाज के उन लोगों से निवेदन करना चाहूँगा जो उच्च शिक्षित हैं, उच्च पदों पर बैठे हैं, सामाजिक समाचार पत्रों को सपोर्ट करें। आर्थिक सहयोग दें। इनकी ताकत बनें। यदि कोई मुफ्त में सामाजिक समाचार पत्रों को पढने की आदत रखता है तो किसी मनोचिकित्सक से उसका उपचार करायें। क्यों कि ऐसे लोग मनुवादी अखबारों को मुफ्त में पढने की हिम्मत नहीं रखते हैं।
जागो!  जागो!!  जागो!!!
अपनी आवाज जन-जन तक पहुंचाने के लिए अपना मीडिया तैयार करो। ऐसा कोई अपना घर ना हो जहाँ हमारा अपना सामाजिक समाचार पत्र नहीं आता हो।
एक बात पूंछू :-
क्या आपके घर अपना सामाजिक अखबार आता है ? यदि नहीं तो अब क्या सोच रहे हो ? मंगवाना शुरू कर दो जी।
'भीम प्रवाह' समाचार पत्र की सदस्यता ( सहयोग राशि वार्षिक शुल्क 200/- त्रैवार्षिक 600/- आजीवन शुल्क 2100/-) हेतु संपादक के मो. व व्हाट्स अप नं. 07891189451 पर संपर्क किया जा सकता हैं। हम अकसर शिकायत करते हैं कि बहुजन समाज का मीडिया नहीं है। कई मौकों पर वंचित वर्ग के मीडिया की बहुत जरूरत महसूस की जाती हैं। इस हेतु भीम प्रवाह एक स्थायी व कारगर व्यवस्था साबित हो सकती हैं। 'भीम प्रवाह' का चौथे वर्ष में प्रवेश एक नई उम्मीद जगाती हैं। अत: आप सभी नौकरी पेशा कर्मचारी वर्ग, उध्द्मियो व समाज के भामाशाहों से अपील की जाती है कि आप समाचार पत्र के सफल संचालन हेतु यथा सहयोग करें।

"अपना मीडिया, अपनी आवाज।
कदम बढा ले, ऐ जांबाज।।"

*नवरत्न मन्डुसिया की कलम से*

गुरुवार, 27 अप्रैल 2017

नवरत्न मन्डुसिया का मेघवाल समाज का ब्लॉग देश विदेशो मे चमका*

(मन्डुसिया लेखन )मेघवाल समाज का एक ब्लॉग है जो की देश विदेश मे बहूत ज्यादा देखा जा रहा है इस ब्लॉग का नाम मन्डुसिया डॉट ब्लॉग्सपोट डॉट कॉम के नाम से संचालन किया जा रहा है इस मेघवाल समाज के ब्लॉग को राजस्थान प्रांत के सीकर जिले के सुरेरा नामक गाँव के नवरत्न* *मन्डुसिया नामक 23 वर्षीय युवा चला रहा है इस ब्लॉग का मुख्य उद्देश्य: - मेघवाल समुदाय समृद्ध सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, मानसिक और सांस्कृतिक. मृत्यु भोज, शराब दुरुपयोग, बाल विवाह, बहुविवाह, दहेज, विदेशी शोषण, अत्याचार और समाज और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर अपराधों को रोकने के लिए और समाज के कमजोर लोगों का समर्थन की तरह प्रगति में बाधा कार्यों से छुटकारा पाने की कोशिश करने का है तथा इस ब्लॉग मे बाबा रामदेव जी महाराज डाली बाई मेघवाल झरकारी बाई राजा राम मेघवाल*
*करनी माता के ग्वाले दशरथ मेघवाल*
*अखिल भारतीय सांगलिया धुनी के संत श्री लादू दास जी महाराज गरीबो के मसीहा संत श्री खीवा दास जी* *महाराज तथा शिक्षा रत्न संत श्री बंशी दास जी महाराज संत श्री भगत दास जी महाराज मेघवाल समाज के रत्न गरीब दास जी महाराज तथा मेघवाल समाज के भारत के लोकसभा* *विधानसभा उच्च पदों पर विराजमान अधिकारियों के नाम पद उनकी जीवनियां आदि के बारे मे जानकारियां दे रखी है तथा यह ब्लॉग बहूत तेजी से कर रखा है इस ब्लॉग का संचालन मेघवाल समाज  लाडला नवरत्न मन्डुसिया ने सन 2011 मे किया गया था बी.ए. और बी.एड़ और एम.ए इतिहास की पढ़ाई में मन लगा और तीनो डिग्रीया पूरी हुई। और इसके साथ साथ नवरत्न मन्डुसिया ने आई.टी.आई ईलेट्रीसीयन* *(विधुतकार )से करने के बाद मे मेघवाल समाज के बारे अनेक तथ्य लिखे तथा अनेक पुस्तकें लिखी तथा इस ब्लॉग का उदेश्य मेघवाल समाज की सेवा करना ही* *उदेश्य हैं आप मेघवाल समाज के इस ब्लॉग से जानकारी देख सकते हैं  तथा आप इस मेघवाल समाज के ब्लॉग मे मेघवाल समाज की रहन सहन वेश भूसा धार्मिक कार्य और आप इस ब्लॉग मे मेघवाल समाज के गोत्र मेघवाल समाज की.उत्पति आदि के बारे मे जानकारी देख सकते है*
*और इस ब्लॉग को भारत के अलावा*
*यू एस ए "फ्रांस " चीन " नेपाल " यू ए इ " लंदन सिंगापुर रूस अफ्रीका के देशों मे तथा बांग्लादेश* मॉरीशस इटली नाइजीरिया केर्नौफौर्निया 
*पाकिस्तान आदि देशों मे बहूत तेजी से देख रहे है तथा इस ब्लॉग को जो भी देखता है तो नवरत्न मन्डुसिया को बधाई देने से नही रोक पाता है नवरत्न मन्डुसिया को एक दिन मे हजारो कॉलों का सामना करना पड़ता है*तथा अब तक लाखो लोग नवरत्न मन्डुसिया के ब्लॉग्स को देख चुके है तथा नवरत्न मन्डुसिया के विदेशो मे रह रहे मित्र यह बताते है की आपका ब्लोग बहूत ही अच्छा है और और इस मेघवाल समाज के ब्लोग की खास बात यह है की दुनिया की कोई सी भी भाषा हो आप उस भाषा मे देख सकते हो और नवरत्न मन्डुसिया को समाज हित मे काम करने के कारण विदेशो मे लाखो रुपयो के ऑफर आ रहे है की आप हमारी कम्पनियों का हिस्सा बनकर आप हमारे से जुड़े और हमारे साथ काम करे 

नवरत्न मन्डुसिया

शादियों में फिजूलखर्ची रोककर शिक्षा पर धन खर्च करने का आह्वान, विवाह के नियम हुये आसान, सामूहिक विवाह के लिए उमड़े सैकड़ों लोग

 मेघवाल समाज का ऐतिहासिक फैसला, नानी का गोत्र छोड़ने की कुप्रथा बंद, अब शादियों के लिए मिलेंगे ज्यादा विकल्प कस्बे के टापरी रोड़ स्थित मेघवाल ...